कौन करेगा मुझ जेसे अनाथ से शादी
कबीर के यह कहने पर कि उसे घर वापस आना चाहिए।
अनुराग कहता है कि वहां किसके लिए आएगा कौन है यहां जो उसका इंतजार कर रहा है।
कबीर.. कब तक ऐसे भागेगा अनु। कहीं तो रुक .
अनुराग.. रोकने की कोई वजह भी तो होनी चाहिए।
कबीर को उस लड़की की कही बात याद आती है और वह अनुराग से उम्मीद के साथ कहता है.
कबीर.. रुकने की वजह तू खुद ला सकता है। शादी कर ले
कबीर के मुंह से शादी की बात सुनकर अनुराग हंसने लगता है और हंसते हुए कहता है।
"शादी.. कौन करेगा मुझे से अनाथ से शादी जिसका कोई खानदानी नहीं है। और मेरी छोड़ तू ने भी तो किया ना शादी तू अपनी बता। शादी करके तू कौन सा खुश है.
कबीर करते हुए.. सही कहा यार.. शादी करके मैं कौन सा खुश हूं। पर यकीन मान मुझे शादी से कोई उम्मीद भी नहींहै ¡
मां के कहने पर मैंने विनी से शादी कर ली । पर देख शादी के बाद मैं कहां हूं। यहां तेरे साथ.. और मेरी बीवी मेरे पैसों पर किसी पार्टी में ऐस कर रही होगी.
अनुराग हंसते हुए.. तू से ही सीख ले कर तो में शादी नहीं कर रहा। पता चले मेरी जिंदगी में भी ऐसी लड़की आ जाए जो मुझसे नहीं मेरे पैसों से प्यार करें।
(फिर थोड़ा उदास होकर) वैसे भी यहां अपना कहने वाला कोई नहीं है.
इसलिए बेहतर है किसी से उम्मीद भी ना लगाऊ।
और वैसे भी मेर रिश्ते से डरता हूं … जैसे मां बाप ने मुझे पैदा करके छोड़ दिया अनाथ आश्रम में … वैसे ही मेरे पैसों लिए मेरे साथ रहेगी और जैसे मेरे पास कुछ नहीं रहेगा मुझे छोड़ कर चली जाएगी … इसलिए मैं शादी नहीं करूंगा जैसा है वैसा ही रहूंगा … क्योंकि मुझे समझने वाली इस दुनिया में कोई है ही नहीं
कबीर.. यह तो गलत कह रहा है। इस दुनिया में हर किसी के लिए कोई ना कोई जरुर बना। भले ही विनी मेरे लिए गलत लड़की है लेकिन वह मेरे जीवन साथी है। भले ही वह मुझसे प्यार नहीं करती लेकिन मेरे मां-बाप पूरी इज़्ज़त देती है जो बहू को देनी चाहिए।
मेरे मम्मी-पापा के लिए वो का आदर्श बहू है और मेरे लिए यही काफी है। इसलिए कह रहा हूं.। ऐसा तुझे लग रहा है कि इस दुनिया में तुझे समझने वाली कोई होंगी जरूर ।
देखना एक दिन तुझे समझने वाली तेरे सामने होगी तेरे पास होगी। उस दिन तेरी जिंदगी से तेरा अकेलापन हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
कबीर की बात सुनकर अनुराग मुस्कुरा देता है।
"वहीं दूसरी तरफ।"
राधा कृष्ण मंदिर में एक प्यारी सी आवाज आरती कर रही थी।
प्रातकाल में धेनु चराए
माखन चोरी करके जो खाए
कृष्णा कृष्णा, वह हैं कृष्णा कृष्णा
वृंदावन में रास रचाए
मुरली की धुन पे सब को नचाये
कृष्णा कृष्णा, वह हैं कृष्णा कृष्णा
गोवर्धन गिरधारी कृष्णा कृष्णा
मोर मुकुट सिर धारी कृष्णा कृष्णा
कृष्णा कृष्णा, वह हैं कृष्णा कृष्णा
कृष्णा कृष्णा, वह हैं कृष्णा कृष्णा
कृष्णा कृष्णा, वह हैं कृष्णा कृष्णा
( उसकी आरती सुनने मंदिर के पुजारी और बाकी सब भक्तगण भक्ति में लीन हो जाते हैं। उस लड़की की आवाज थी इतनी प्यारी और मधुर।)
कृष्णा मनमोहना
मोरे कान्हा मोरे कृष्णा
कृष्णा मनमोहना
मोरे कान्हा मोरे कृष्णा
गोवर्धन गिरधारी कृष्णा कृष्णा
मोर मुकुट सिर धारी कृष्णा कृष्णा
कृष्णा कृष्णा, वह हैं कृष्णा कृष्णा
कृष्णा कृष्णा, वह हैं कृष्णा कृष्णा
आरती खत्म कर वह लड़की जैसे ही पलट ती है पुजारी उसके पास आता है और उसके माथे पर हाथ रखते हुए कहता है।
भूमि बिटिया कितने साल हो गए. सर्दी गर्मी बरसात कितनी मौसम आएगा पर तुम्हारा रोज का नियम है राधा कृष्ण की आरती के बिना दिन शुरू नहीं होता।
भूमि मुस्कुराते हुए.. अरे पंडित जी। एक दिन अगर में अपने कहनाह से ना मिलो ना। तो ऐसा लगता है जैसे कि दिन अधूरा रह गया है।
पंडित जी. अच्छा बिटिया। घर में सब कैसे हैं
भूमि.. घर में भी सब....
घर की बात याद आती ही भूमि की आंखें हैरानी से फैल जाती और घबराते हुए कहती है।
अरे पंडित जी मैं तो भूल ही गई थी मामी ने मुझसे प्रेस के कपड़े लाने के लिए कहा था। अगर लेट हो गई ना तुम तो बहुत मार पड़ेगी। इसलिए मैं चलती. आपसे कल मिलूंगी।
यह की भूमि पंडित जी का आशीर्वाद लेती है और मंदिर से दौड़ लगाती है।
मंदिर के बाहर वह जैसे ही सड़क के पास पहुंचती है बहुत सारे बच्चे कर उसे घेर लेते हैं। क्योंकि भूमि के हाथ में प्रसाद की थाली कि वह सारे बच्चे उसे प्रसाद की मांग करने लगते हैं।
वही सड़क पर एक छोटा सा ट्रैफिक जाम हो गया था जिसकी वजह से अनुराग की गाड़ी वही फस गई थी। अनुराग परेशान होकर बाहर देखने लगता है। तभी उसे सामने भूमि दिखाई देती है जो कि बच्चों को लड्डू बांट रही थी।
हल्के गुलाबी सलवार कमीज में। लंबी कमर तक लहराते बाल। बिना मेकअप का एक खूबसूरत सा चेहरा। आंखों में हल्का सा काजल और माथे पर गोल्डन बिंदी। और कहर डालने के लिए उसकी नाक की वह नोज रिंग। गले में काला धागा। जिसमें शायद ॐ नाम का पेंडल लगा था।
भूमि खिलखिला के हंस के बच्चों को प्रसाद बांट रही थी। और अनुराग की तो जैसे अपनी पलके झपकना बंद हो गई थी। अनुराग को पता ही नहीं चला कि कब उसने अपनी गाड़ी का शीशा नीचे कर दिया और एकटक भूमि को निहार रहा था।
बच्चों को मिठाई देने के बाद भूमि जैसे ही एक फूल वाली के पास आती है और कहती है
"कैसी हो आंटी."
फूल वाली.. क्या बताओ बिटिया बहू बेटे ने तो जीना हराम कर के रखा हुआ है मुझे दो वक्त की रोटी भी ठीक से खाने को नहीं देते।
इस पर भूमि उन्हें प्रसाद देते हुए कहती है.. अरे तो आप चावल खा लिया करो।
क्योंकि दुकान गाड़ी से ज्यादा दूर नहीं थी तो भूमि की यह बात अनुराग ने भी सुन ली और वह इस पर हंस पड़ा।
अनुराग जब दोबारा गाड़ी के बाहर देखता है तो उसे वहां भूमि नजर नहीं आती. यहां वहां नजरें दौड़ आता है पर उसे कहीं भी नजर नहीं आती. वह अपना माथा सेहलाता है और ड्राइवर से कहता है कितना टाइम लगेगा.
ड्राइवर कहता है मालिक बस 2 मिनट यह सामने वाली गाड़ी चली जाए फिर हम निकलती है।
वहीं दूसरी तरफ भूमि प्रेस के कपड़े ले कर जब घर पहुंचती है। घर के आंगन में उसे उसकी मामी मिला जाती है
मोटी भैंस मुस्टनडी सी। दुनिया जहान का राशन खा खा के खुद को भैंस बना लिया था। भूमि के आते ही वह उस पर दाल चावल लेकर चड जाती है.
मामी.. आ गई महारानी मटरगश्ती करते हुए। तुझे कहा था ना सुबह.. इस्त्री के कपड़े लाने के लिए कहां मर गई थी।
भूमि.. वह मामी जी हम मंदिर चले गए थे।
मामी.. मंदिर गई थी अपने किसी यार से मिलने गई थी।
भूमि.. मामी अब जानती है मैं इस तरह की लड़की नहीं हूं फिर क्यों आप मुझे बार-बार यही कहती हैं। मैं कहीं किसी से मिलने नहीं गई थी!
बस मंदिर चली जाती हूं। क्योंकि वह मुझे अच्छा लगता है।
मम्मी गुस्से में.. देखो तो 2 मिनट बाहर क्या गुम कर आई पर निकल आए जवान लड़ाती है मुझसे। रुक तुझे अभी बताती हूं
। यह कहकर उसकी मामी ने इधर-उधर नजर दौड़ाई तो उसे एक छड़ी नजर आई वह छड़ी को लेकर भूमि के पास आई और बिना सोचे समझे भूमि की पीठ पर छड़ी बरसाने लगी।
पर भूमि ना तो चिल्ला रही थी ना रो रही थी,,यह तो उसकी रोज की आदत थी।
उसकी मम्मी ने तो इससे भी बुरी तरीके से उसे पीटा था। अब तो उसकी आंखों से आंसू भी सूख गए थे।
मामी की इतनी मार खाने के बाद तो उसका शरीर को भी इसकी आदत हो गई थी। भूमि चुपचाप खड़े होकर मामी की मार खा रही थी।
तभी पीछे से व्हीलचेयर पर एक आदमी आता है और ममी पर चलाते हुए कहता है।
रुक जाओ शांति क्यों मेरी बच्ची को ऐसे जानवरों की तरह पीट रही हो।
इस आवाज पर मामी के हाथ रुक जाते हैं और वह पलट कर देखती है तो उनके सामने उनके पति व्हीलचेयर पर बैठे उसे ही गुस्से से घूर रहे होते हैं।
भूमि जब अपने मामा जी को देखती है तो वह मुस्कुरा कर उन्हें ना मे सर हिलाती है। जैसे कह रही हो कि उसे चोट नहीं लगी।
भूमि के मामा जी..। तुम्हारा नाम शांति जरूर है. पर तुम शांत बिल्कुल नहीं हो। अरे क्यों बिन मां-बाप की बच्ची के पीछे पड़ी हुई हो। जीने दो इसे।
शांति अपनी छड़ी फेंकते हुए अपने पति को डांटते हुए कहती है.
"हां हां आपको तो मैं ही गलत नजर आऊंगी। आपकी लाडली तो आपको कभी गलत नजर नहीं आएगी।
मामा जी.. क्यू पीट रही हो मेरे बच्ची को क्या गलती की है इसने ।
मामी .. सुबह-सुबह आपकी बेटी पूरे मोहल्ले चक्कर लगा कर आई है। अरे जवान लड़की है कल को कोई ऊंच-नीच हो गई तो मोह्हले वाले तो हमें ही सुनेंगे ना।
आप तो अपनी इस कुर्सी पर बैठे बैठे रो दोगे। लोकिन दुनिया तो मुझे कहेंगे कि देखो मामी ने ही अच्छे संस्कार नहीं दिया ।
मामा जी.. संस्कार तो मेरी भूमि में तुमसे ज्यादा है। क्योंकि उसने मेरी दीदी और जीजाजी का खून है। और रही बात संस्कार देने की तो तुम भूमि की टेंशन मत लो संस्कार देना ही है तो अपनी लाडली परी को दो। जो रात को 2:00 बजे पता नहीं कहां से आई है। और जाकर देखो उसके कमरे में होश में भी है या अभी भी नशे में मरी पड़ी है।
मामी जी ने जब यह सुना कि उनकी बेटी रात को नशे में 2:00 बजे घर आई है तो और उसकी हालत खराब हो गई वह भाग्य अपनी परी की कमरे में गई और चिल्लाने लगी... हाय मेरी बेटी. कहीं ज्यादा तबीयत तो नहीं खराब हो गई है उसकी।
फिर पीछे मुड़कर भूमि से कहती है..खड़ी खड़ी क्या देख रही है जा जल्दी जा की नींबू पानी बना कर ला। जरा देखु तो मेरी बच्ची को। ठीक तो है ना वह।
मामी के जाने के बाद भूमि धीरे से चलकर मामा जी के पास आती है और उनके हाथों के ऊपर हाथ रख कर कहती है। मामा जी आप क्यों मामी से लड़ते हैं। मुझे ममी से कोई शिकायत नहीं है।
मामा जी. शिकायत तो दीदी जीजाजी को मुझसे होगी। जब ऊपर जाऊंगा तो क्या मुंह दिखाऊंगा उन्हें। कि मैं उनकी बच्ची का ठीक से ध्यान नहीं रख सका। दीदी जब आखिरी सांसे ले रही थी तब मैंने वादा किया था कि तुम्हें अपनी बेटी की तरह प्यार करूंगा.
भूमि.. हां तो मामा जी आप मुझे बेटी की तरह ही प्यार करते हैं। आपने मुझ में और परि में कोई अंतर नहीं समझा । यहां तक कि आप तो मुझे परी से ज्यादा प्यार करते हैं।
भूमि मामा जी से बात ही कर रही थी कि इतने मैं शांति ने अंदर से आवाज लगाइए... आरे भूमि कहां मर गई. तुझे नींबू पानी लाने के लिए कहा था।
उसकी आवाज सुन मामाजी और भूमि दोनों हंसने लगते हैं।
वहीं दूसरी तरफ अनुराग अपने ऑफिस पहुंचता हूं। आज उसके वॉचेस के नए डिजाइन फाइल ना होने थे। उसने दोपहर का खाना भी नहीं खाया था। अनुराग जब अपने काम में होता है तो वो इतना मगन हो जाता है कि उसे यह भी होश नहीं रहता कि उसने खाना भी नहीं खाया। हमेशा ही दो-तीन दिन तक ऑफिस में यूं ही पड़ा रहता है।
ऑफिस में भी उसका एक छोटा सा रूम होता है जहां पर उसकी सुविधा का सारा सामान अवेलेबल होता है क्योंकि वह ज्यादातर ऑफिस में ही रहता है। शाम को जब अनुराग अपनी मीटिंग से फ्री होता है और वापस अपनी चेयर पर बैठ कर आंखें बंद करके थोड़ा रिलैक्स होने की कोशिश करता है अचानक उसके सामने भूमि का वह हंसता खेलता मुस्कुराता चेहरा आ जाता है।
उनके चेहरे को देखकर एकाएक उसके चेहरे पर एक प्यारी सी स्माइल आती है। ऐसा नहीं है अनुराग ने उस से पहले खूबसूरत लड़की नहीं देखी थी। यहां तक कि अनुराग जिन लड़कियों को अपने पास बुलाता था वह हाईप्रोफाइल होती थी।
उनकी एक रात की फीस भी लाखों में होती थी। पर आज तक अनुराग में किसी लड़की को एक नजर भर कर देखा तक नहीं था।