billionaire unwanted wife Ch. 3

भूमि का रिश्ता

Posted by unicorngirl ✔️ • Jul 01, 2026 04:27 AM

शाम को भूमि सबके लिए खाना बना रही होती है। वही उसकी मामा की बेटी और उसकी बहन परी सोफे पर आराम से पैर पर पैर चढ़ा दी अपनी नेल साफ कर रही होती है।

और भूमि की मोटी मामी बगल में बैठ कर आराम से संतरे छीलकर खा रही होती है।

मामा जी न्यूज़ पेपर लेकर पढ़ रहे होते हैं। इतने में मोहल्ले की मंत्रा उनके घर आती है और एकदम से आने के साथ ही कहने लगती है।

अरे शांति क्या बताऊं तुझे इतनी बड़ी खुशखबरी लेकर आई हूं तू सुनेगी तो अभी के अभी पूरी जायदाद मेरे नाम कर देगी.

शांति संतरे खाते हुए। हां हां कलावती हम तो करोड़पति है ना तुझे लाखों की जायदाद नजर आ रही है ले देकर यह मकान ही है। यह तो मैं तुझे देने से रही । तो चुपचाप यह बता आई किस लिए है और चलती बन कुछ नहीं मिलेगा।

कलावती.. अरे मैं तेरी बेटी के लिए रिश्ता लेकर आई हूं।

रिश्ते की खबर सुनकर सबकी नजरें एक साथ कलावती की तरफ चली जाती है।

तो वही परी अपने हाथ झटक ते हुए, चिल्लाते हुए कहती है।

परी.. ऑंटीजी रिश्ता करवाओ वह अपनी बेटी का। खबरदार जो यहां मेरे लिए रिश्ते की बात भी की तो। मुझे अभी शादी नहीं करती मुझे पहले हीरोइन बनना है।

कलावती पर कहती है। अरे मैं तेरी बात नहीं कर रही हूं।

शांति.. तो फिर तू किसकी बात कर रही है।

कलावती... वो तेरी भांजी है ना भूमि मैं उसकी बात कर रही हूं।

भूमि के लिए रिश्ता आया है यह सुनकर सब लोग एक दूसरे के चेहरे देखने लगते हैं।

कलावती आगे कहती है। भूमि सुबह-सुबह मंदिर में जाकर कहीं भजन गा रही होती है ना. तो बस वही मेरी एक पहचान वाली ने देख लिया उससे।  इतनी पसंद आई इसी महीने शादी की बात कह रहे हैं।

शांति चौक ते हुए.. क्या इसी महीने शादी।

कलावती..  हां और नहीं तो क्या पर सच बताओ परी की मां मैंने तो साफ साफ कह दिया कि लड़की बहुत गरीब घर से है. कुछ दे नहीं पाएंगे वह लोग।

अरे वह लोग तो बिना दान दहेज के शादी की बात कर रहे हैं। अब तुम्हें सब सही लगे तो मैं बात आगे बढ़ाओ।

मामा जी.. पर बहनजी लड़का कौन है कहां का रहने वाला है क्या करता है कुछ तो बताओ।

कलावती.. अरे हां यह सब तो मैं बताना ही भूल गई। तो सुनो। लड़का इकलौता है। उसे बाप अपना इंपोर्ट एक्सपोर्ट का बिजनेस है। और बेटा भी वही करता है। और देखो मैं तो उसकी तस्वीर भी लाई हूं।



कलावती टेबल पर एक तस्वीर रखती है। सिंपल सी पैंट टी शर्ट में एक सिंपल सा लड़का विवेक । देखने ही में जी ठीक-ठाक घर का लड़का लगता था।

परी की नजर तो लड़के से ज्यादा उसके पीछे उसके

गाड़ी पर थी। यह सब देखें उसकी आंखों में अचानक से चमक आ गई।

मामा जी को तस्वीर उठाते हैं और कलावती से कहते हैं.. ठीक है  मैं तस्वीर रख लेता हूं। इसे एक बार भूमि को दिखा दूंगा उसके बाद अगर उसे ठीक लगेगा तो वह हम बात आगे बढ़ाएंगे

कलावती वहां से चली जाती है वही रसोई में भूमि सारी बातें सुन रही होती है और उसका मन बहुत घबरा रहा होता है। वह आभी शादी नहीं करना चाहती थी वह पहले खुद कुछ करना चाहती थी कुछ बनना चाहती थी। सारी जिंदगी मामी के तने सुनते सुनते उसकी अपनी कोई पहचान नहीं रह गई थी। हमेशा परी के पुराने कपड़े पहनने को मिलते थे। पढ़ाई भी उसने सरकारी स्कूल से की थी। वैसे प्राइवेट में पढ़कर तो परी ने भी कोई तीर नहीं मारा था। उस मैडम ने तो बस नाम की पढ़ाई की है।  वही भूमि को स्कूल में कई सारे अवॉर्ड स्कॉलरशिप मिले थे।

रात का वक्त खाना खाकर अपने अपने कमरे में चले गए थे। मामा जी धीरे से भूमि के कमरे में आते हैं और उनसे पूछते हैं.

मामा जी... क्या बात है  बेटा तुम सोए नहीं अभी तक।

भूमि... आप तो नहीं सोए ना मामा जी.

मामा जी... मैं तो इसलिए नहीं सोया क्योंकि आज मुझे एहसास हुआ कि मेरी बेटी बड़ी हो गई है. इतनी बड़ी हो गई कि उसके लिए रिश्ते आने लगे हैं.

भूमि अपने मामा जी के घुटनों के पास बैठ जाती है. और मामा जिसके सर पर हाथ फेरते हुए कहते हैं.  बात तो सुन ली सुन ली होगी तुमने

भूमि के आंसू छलक जाते हैं और वह मामा जी से कहती है... मामा जी इतनी भी क्या जल्दी है। जानती हूं आप लोगों पर बोझ हूं पर कुछ साल रुक नहीं सकते...

बाहर से शांति उनकी सारी बातें सुन रही थी एक तो उसे इस बात की खुशी थी कि भूमि की शादी में उन्हें एक दहेज का नहीं देना पड़ेगा। और दूसरी यह कि यहां से जितनी जल्दी हो सके चली जाएगी. और उनके सर से एक बोझ चला जाएगा.

पर अंदर की बातें सुनकर उन्हें लगा शायद भूमि की बातों में आकर मामा जी कहीं  मना ना करदे । इसलिए जल्दी से अंदर आई और अपनी बातों में चाशनी खोलकर भूमि से कहने लगी।

मामी.. अरे यह क्या कह रही हो। तुमसे अच्छी घर की हालत और कौन समझ सकता है। इनकी दवाइयों कितनी महंगी हो गई है। परि भी कह रही है उसे अपनी मॉडलिंग स्टार्ट करनी है। और मेरा तो तुम देख ही रही हो तुम लोगों का सोच सोच कर तो मैं सूखकर कांटा हो रही हूं।

वह तो शुक्र है सामने वाले ने दहेज की मांग नहीं की वरना हम तो बिक जाते तो भी इतना दहेज नहीं दे पाते। लड़का भी ठीक-ठाक है क्यों अपने मामा जी का बीपी बढ़ा रही हो शादी के लिए हां कह दो।

मामा जी थोड़े गुस्से में शांति से कहते हैं... अगर वह शादी नहीं करना चाहती तो यह शादी नहीं होगी कोई मेरी बेटी के साथ जबरदस्ती नहीं करेगा।

भूमि एक नजर उठाकर अपनी मामी को देखती है जो गुस्से में उन्हें गुर रही होती है।

भूमि अपने मन में सोचती है... एक तरह से देखा जाए तो यह सही भी है। मैं मामा मामी के ऊपर एक बोझ ही तो हूं। क्या फर्क पड़ता है अभी शादी करो या कुछ साल बाद। मामा जी वैसे मेरे लिए इतना परेशान रहते हैं। ऊपर से अगर कहीं ऐसा रिश्ता मिला जिसने दहेज मांगा तो मामा जी की तबीयत मेरी वजह से और खराब हो जाएगी।

नहीं नहीं मैं अपने स्वार्थ के लिए मामा जी को कुछ नहीं होने दूंगी।

भूमि जल्दी से मामा जी का हाथ पकड़ती है और उनसे कहती है.. मैं तैयार हूं।

यह सुनकर शांति की तो जैसी आंखों में चमक आ जाती है तो वही मामाजी भूमि के हाथ के ऊपर अपना हाथ रखते हुए उसे प्यार से कहते हैं..  अरे नहीं बेटा अगर तुम नहीं करना चाहती है शादी तो बता दो हम तुम्हारे साथ कोई जबर्दस्ती नहीं करेंगे

शांति को लगा कहीं उसका मन ना बदल जाए इसीलिए वह झट से बीच में खुद पड़ती है. अरे परी के पापा यह आप क्या कह रहे हैं. उसने खुद ही शादी के लिए हां कही है.  सब आपके सामने ही तो है कौन सा किसी ने इसे जोर जबरदस्ती करवाया है

भूमि..  जी मामा जी मुझसे किसी ने जोर जबरदस्ती से नहीं करवाया है मैं अपनी मर्जी से हां कह रही हूं।

भूमि की बात सुनकर मामाजी के चेहरे पर एक मुस्कान आती है और वह उसके सर पर हाथ फेर कर कमरे से बाहर आ जाते हैं।

इधर अनुराग के ऑफिस में। रोज की तरह अनुराग आज भी नाइट शिफ्ट पर ही था। कितने दिनों तक यह रेहगा यें तो वही जाने। अनुराग अपने  स्केच बुक में वॉच की एक डिजाइन डॉ कर रहा था।



अनुराग कम ही  डिजाइन करता था। लेकिन उसकी डिजाइन की हुई वाच बहुत ही ज्यादा रेयर होती थी और बहुत ही ज्यादा महंगी होती थी। क्योंकि अनुराग अपनी डिजाइन केवल कुछ लोगों के लिए ही बनाता था।

अनुराग अपने काम में ही लगा हुआ था कितने में कबीर आता है और कहता है।

कबीर.. क्या कर रहा है...

अनुराग डिजाइन बनाते हुए... कुछ नहीं.. वो हीरो है ना आरनव मुखर्जी वो अपनी फॉरेन गर्लफ्रेंड से शादी कर रहा है और उसे...उसे  शादी का गिफ्ट देना है। बस उसी की काम में लगा हूं।

कबीर एक स्केच उठाते हुए... दूसरों के लिए शादी का तोहफा डिजाइन करते-करते समय मिले तो अपने लिए भी कुछ डिजाइन कर लिया कर।

अनुराग पेपर रखते हुए.. मतलब कहना क्या चाहता है।

कबीर...  यही कि तूने मेरी सुबह वाली बात का जवाब नहीं दिया

अनुराग.. कौन सी बात.

कबीर..  शादी की बात

अनुराग.. कबीर हम इस बारे में बात कर चुके हैं। तू जानता है मुझे रिश्तो से डर लगता है। अभी मैं इसीलिए बेफिक्र रहता  हूं क्योंकि मेरे पास कुछ है नहीं खोने के लिए। और प्लीज यार अब इस बारे में दोबारा कोई बात नहीं होगी।

कबीर.. अनुराग तु सब से झूठ बोल सकता है पर मुझसे नहीं। तेरे पास कुछ भी खोने के लिए नहीं है इसी बात का तुझे सबसे बड़ा गम है। इतनी शोहरत हासिल कर ली है तूने इतना पैसा है तेरे पास. क्या करेगा इन सब का . सोच कर देख  तू नहीं चाहता क्या  जब तू घर जाए तो कोई तेरा इंतजार करें। तुझे से यह पूछे कि आज दिन कैसा रहा।

अनुराग... तू पूछता तो है

कबीर का फ़रस्टेट होकर खड़ा होता है और कहता.. तुझसे  तो बात करना ही बेकार है. भाड़ में जा अब नहीं कहूंगा तुझे कुछ.

कबीर गुस्से में कैबिनेट से बाहर चला जाता है और अनुराग पीछे से कहता रहता है.. अरे बात तो सुन ले।

कबीर के जाने के बाद अनुराग अपनी आंखें बंद करके अपने सर को दबाते हुए कहता है.. कैसे समझाऊं उसे। तभी एकाएक उसकी आंखों के सामने भूमि का चेहरा आ जाता है।

अनुराग झट से अपनी आंखें खोलता है. और कहता है.. बार-बार उस लड़की का चेहरा मेरी आंखों के सामने क्यों आ रहा है। वह इतनी सुंदर थोड़ी ना थी देखने में। अनुराग अपने माथे कुछ छटकता है और दोबारा से अपने काम पर लग जाता है।

वहीं दूसरी तरफ... शांति परी के कमरे में जाती है। अपनी मां को कमरे में आया देख परी गुस्से  से मैं कहती हूं।

परी... मना आए उस मनहूस को शादी के लिए। जिसे देखो उसे  बस भूमि की पड़ी है मेरी तो किसी को कुछ नहीं पड़ी। उसके लिए इतना अच्छा रिश्ता आया है और सब उसी के पीछे पीछे भाग रहे हैं। यहां खुद की बेटी कुंवारी बैठी है उसकी तो कुछ नहीं पड़ी.

शांति.. अरे मेरी रानी बेटी यह तु क्या कह रही है।तूने तो खुद ही कहा था तुझे अभी शादी नहीं करनी मॉडलिंग करनी हीरोइन बनना है।

परी.. यह सब तो मैं शादी के बाद भी कर सकती हूं ना। आपने देखा नहीं उस लड़के के पास कितना बड़ा घर है कितनी बड़ी गाड़ी है

शांति.. अरे पर रिश्ता तो भूमि के लिए आया है।

परी गुस्से में.. मुझे लगा था कोई मेरे साथ हो ना हो आप मेरे साथ जरूर रहेगी.। पर आज मुझे पता चला आप भी उस भूमि की तरफ हूं मेरा कोई अपना नहीं

शांति परी के सर पर हाथ रखते हुए.. बिटिया ऐसी क्यों कह रही है।  मैं हूं ना तेरी अपनी और तुझे वह लड़का पसंद था तो तुझे मुझे बता देना चाहिए था मैं तो वही तेरी बात पक्की कर देती।

परी चाहकते हुए.. अरे मां लड़का तो ठीक-ठाक है देखने में और उसकी गाड़ी कितनी बड़ी है।

दोनों मां-बेटे ख्याली पुलाव पकाने में लग जाते हैं जो कि कल लड़के वाले आने वाले थे।

अगले दिन..

भूमि ने हल्की गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी। नाम के लिए थोड़ा सा मेकअप। बालों का हाफ क्चर लगाकर खुले छोड़ रखे थे। नीचे लड़के वाले आ गए थे और भूमि का मन बहुत घबरा रहा था।

वहीं दूसरी तरफ परी ने भी एक हॉट ड्रेस पहनी थी। मुझे लगा था कि लड़का इस ड्रेस में उसे देखेगा तो भूमि जैसी बहन जी को पसंद ना करते हुए उसे ही पसंद करेगा।

पर लड़के की मां को तो भूमि ही पसंद थी।

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