रिश्ते नाम के Ch. 2

रिश्ते नाम के - Chapter 2

Posted by Arohi Gupta (मुस्कान) • Jun 30, 2026 04:14 PM

"आधी रात उपर से आसमान में काले बादल छाए हुए थे...! काले बादलों की वजहा से हर जगहा अंधेरा छाया हुआ था...! आसमान में एक भी तारा नही दिख रहा था....! अब धीरे धीरे बुदा बांदी भी होने लगी थी....! हर जगहा सन्नाटा छाया हुआ था सन्नाटे में बस बादल में गर्जती बिजली की ही आवाज आ रही थी उसी से ही रोड़ पर भी थोडी रोशनी पड़ जाती...! जैसे बिजली की रोशनी पड़ती है तभी एक इंसान की परछाई रोड के बीचों बीच में चलती हुई दिखती है।"

"तभी फिर से बिजली कड़कती है और उसी की रोशनी में

एक लड़की रोड़ पर चली जा रही थी...! खाली रोड पर गुमसुम सी जाने कहां खोई सी थी वो ना कोई मंजिल  ना कहीं ठिकाना पर वो लड़की जाने कौन सी बातें याद करके ऐसे रो रही थी की बारिश में भी उसके आंसू कोई दूर से ही पहचान ले...! अंगारे सी लाल आंखें दिल में  दर्द इतना था कि उसके सामने  किसी की भी रूह काप जाए....!

यह लड़की जो बारिश में भीग रही थी इसको कोई दूर से देखे तो जान जाए और कह दे यह तो नई नवेली दुल्हन है हाथों में भरा हुआ चूड़ा मांग में सजा हुआ लाल सिंदूर जो बहके पानी के साथ ही मिला जा रहा था...!  बारिश की वजह से उसकी साड़ी भी उसके बदन से चिपक गई थी....!

जिसमें उसका फिगर और खिल के आ रहा था सुंदरता मैं तो उसने हीरोइन को भी फेल कर दिया था…!

ये सिया थी और वो क्यों ऐसी भारी बारिश में भीग रही थी और वह धीमे-धीमे बोल रही थी कि कैसे-कैसे में हो गई..., प्रेग्नेंट में भला प्रेग्नेंट कैसे हो सकती हूं...! उसकी आवाज इतनी धीमी थी कि सामने वाला भी ना सुन सके और वह पागलों जैसी यही बोल रही थी कैसे-कैसे मैं प्रेग्नेंट हो सकती हूं जब मेरे पति ने अभी तक मुझे छुआ ही नहीं कौन मुझ पर विश्वास करेगा कि मैं अभी भी पाक हूं...! और एक बच्चे की मां...! मां कैसे बन गई भला में कैसे बन गई एक बच्चे की मां जब मेरा पति पहली रात को ही चला गया था बाहर ।"

"कहां जाऊ मैं...! कौन मेरा बात पर यकीन करेगा...! सबने साथ छोड़ दिया...! मां..,बाप..., भाई..., दादी...! और वो पति जिसने मेरे साथ सात फेरे लिए थे कसमें खाई थी कि वो मेरा साथ नही छोड़ेगा उसने तो एक बार फ़ोन करके ये भी जाने की कोशिश नहीं की सच क्या है।" सिया रोते बिलखते हुए अपने मे ही बोल रही थी।

तभी सिया रोते हुए जमीन में बैठ जाती हैं और उपर आसमान में देखते हुए जोर से चिल्लाती है "आहहह....! कोई नहीं है इस दुनिया में मेरा...! अकेली हूं मैं...! कहां जाऊ मैं एक पल में मेरी जिंदगी बदल गई।"



"सिया वहीं बेठी उसके साथ जो कुछ...., कुछ देर पहले हुआ था...! वो सब याद करने लगती है।"

"कुछ देर पहले "

"गोयंका हाउस से निकाले जाने के बाद सिया अपने घर मेहता सदन आती है।"

"वो गेट के अन्दर आती है तो देखती है कि पूरा परिवार मेन गेट के पास खड़ा उसी का इंतजार कर रहा था।"

"उनको देखते ही सिया के आंखों में आसूं आ जाते हैं वो जल्दी से भागती हुई एक बुजुर्ग औरत से जाके गले लग जाती है जो कि वील चेयर पर बैठी थी।"

"वो बुजुर्ग औरत सिया के बालों को सहलाते हुए बड़े प्यार से उसको चुप कराने की कोशिश करती है।"

"वहीं पीछे जो खड़े थे वो सिया के पापा मिस्टर अरविंद मेहता..., उनके बगल में सिया की मां मिसेज अनिता मेहता...., उसके बगल में खड़ा सिया का बड़ा भाई जो उसे दो साल बड़ा था शिव मेहता...! और जो सिया को चुप करा रही थी मिस्टर मेहता की मां और सिया की दादी कोकिला मेहता थी।"

"सिया दादी के गले लग कर फूट फूट कर रो रही थी की तभी कोई उसे उपर की तरफ खींचता है और एक जोरदार थप्पड़ सिया के गाल पर मारता है ।"

"सिया दादी के गले लग कर फूट फूट कर रो रही थी की तभी कोई उसे उपर की तरफ खींचता है और एक जोरदार थप्पड़ सिया के गाल पर मारता है ।"

"अरविंद " दादी उसे गुस्से में घूरते हुए चिल्ला कर बोली।

"सिया ने अपने एक हाथ को उसी गाल पर रख लिया जिस पर अभी उसे थप्पड़ पड़ा था...! वो अपने आसूं से भरी हुई आंखों से अरविंद को हैरानी से देख रही थी।"

"अरविंद जी उसे गुस्से से घूरे जा रहे थे वही अनिता जी ने मुस्कराते हुए अपने दोनों हाथ बांध लिए।"

"अरविंद तू पागल हो गया है क्या अपनी जवान बेटी पर हाथ उठाते हुए तुझे शर्म नहीं आई।" दादी अरविंद को घूरते हुए बोली।

अरविंद दादी की तरफ अपनी गुस्से से भरी नजरों को देखते हुए बोला : "और इसे शर्म नहीं आई ये सब करने में।"

"पापा एक बार मेरी बात तो सुनिए।" सिया अपनी भारी आवाज में बोली।

"खबरदार जो मुझे अपनी इस गंदी जुबान से पापा कहां...! क्या सोच कर तू यहा आई है हां...! " अरविंद सिया के बालों को कस कर पकड़ लेते हैं और अपने दांत पीसते हुए बोले।

"अरविंद छोड़ मेरी पोती को।" दादी व्हीलचेयर पर बैठी ही सिया को छुड़ाने की कोशिश करती है।"

"आहा पापा मुझे दर्द हो रहा प्लीज़ मुझे छोड़ दो।" सिया अपने बालों को छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली।

तभी अनिता ने सिया को अरंविद के हाथों से खींच कर सिया को अपनी तरफ किया और गुस्से से उसके मुंह को दबोचते हुए बोली : " दर्द हो रहा है...! दर्द हो रहा है...! और ये सब करते हुए ये नहीं सोचा की हमे कितना दर्द होगा...! पूरे समाज मे हमारी नाक कटवा दी तूने...! अरे करमजली हमारे बारे नहीं सोचा कम से अपनी बहन के बारे में तो सोच लेती...! "

अनिता उसके मुंह को छोड़ देती है और खींचते हुए शिव के सामने करते हुए बोली : "अपने बड़े भाई को देख जबसे उसको तेरी इस करतूत के बारे में पता चला है तब से ये अपने मंगेतर के परिवार वालों से नजरें नहीं मिला पा रहा...! अरे कुलक्षणी गलती तूने की हैं और सजा हमारे पूरे परिवार को मिलेंगी।"

"नहीं मां।" सिया रोते बिलखते हुए ना में सर हिलाते हुए बोली।

"अरे क्या कमी रहे गई थी हमारी परवरिश में जो तूने ये सब किया...! अरे नासपिती तेरी शादी तो हम लोग करा ही रहे थे ना तो क्या कुछ दिन तक अपने शरीर की आग को नहीं रोक पाई जो जाके किसी के साथ मुंह काला कर दिया।" अनिता उस पर चिल्लाते हुए बोली

"मां...! मां..., मैंने कुछ नहीं किया है मां...! मुझे नहीं पता ये सब कैसे हो गया..., मुझे नहीं पता ये बच्चा किसका है और ये कैसे मेरे पेट में आ गया।" सिया जोर जोर से रोते हुए बोली।

"तुझे नहीं पता की तूने किसके साथ मुंह काला किया है...! तुझे नहीं पता तो किसे पता होगा...! और ख़बर दार जौ मुझे अपनी इस गन्दगी ज़ुबान से मां कहा तो मैं तेरी कुछ नहीं हूं और ना ही इस घर का कोई इंसान तेरा कुछ लगता है।"

"नहीं मां मुझे माफ कर दो...! पर मैं सच्च बोल रही हूं इन सबमें मेरी कोई गलती नहीं है...! भाई...! भाई आप ही मां पापा को बताओ ना की मैं ऐसी नहीं हूं आप तो जानते हैं कि आपकी बहन ऐसा कुछ नहीं कर सकती हैं जिससे आपको या पापा को कभी शर्मिंदा होना पढ़े।" सिया शिव के सामने जाते हुए उसके कन्धे को हिलाते हुए बोली।

शिव सिया की तरफ देखता है और धीरे से उससे बोला : " तू सच्च बोल रही है सिया...! अगर मैं तुझसे कुछ पूछूं तो उसका सही सही जवाब देगी।"

"सिया को लगा शिव तो उसकी बातों का यकीन करेगा...! वो उसका बड़ा भाई हैं और बड़ा भाई बाप समान होता है...! कोई उसकी बात पर यकीन करें या ना करे उसका भाई जरूर करेगा।"

"सिया एक आस में जल्दी से हां में सर हिला देती है ।"

शिव सिया का हाथ अपने सर पर रख लेता है और अपनी भरी हुई आंखों से उसको देखते हुए धीरे से बोला : "तुझे मेरी कसम है बता ये बच्चा किसका...! तुझे मेरी कसम है...! तुझे हमारी राखी की कसम है बता मुझे।"

"क्या जवाब देगी सिया शिव को...! क्या सिया को अपने बच्चे के बाप का पता चल पाएगा...! क्या सिया का भाई उसका साथ देगा...! जाने के लिए पढ़ते रहिए रिश्ते नाम के।"

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क्रमश

मुस्कान

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