The Billionaire's Promise Ch. 3

Episode 3 – नई शुरुआत

Posted by Arohi Gupta (मुस्कान) • Jul 23, 2026 12:45 AM

सुबह के ठीक नौ बजे...

मेहर के फ्लैट की बालकनी में खड़ी अन्विका राजवंशी दूर आसमान को निहार रही थी।

कल तक वही आसमान उसे उम्मीद देता था...

लेकिन आज...

उसे अपनी ज़िंदगी बिल्कुल खाली लग रही थी।

हाथ में कॉफी का मग था, लेकिन वह कब से ठंडी हो चुकी थी।

पीछे से मेहर आई और उसके कंधे पर हाथ रखा।

"इतना मत सोच, अन्वी।"

अन्विका हल्का-सा मुस्कुराई।

"सोच नहीं रही... बस ये समझने की कोशिश कर रही हूँ कि चार साल किसी के लिए सब कुछ देने के बाद भी आखिर मैं इतनी आसान कैसे हो गई कि सबने मुझे छोड़ दिया।"

मेहर ने उसका हाथ पकड़ लिया।

"गलती तेरी नहीं थी। गलत लोग तेरी ज़िंदगी में थे।"

कुछ पल दोनों खामोश रहीं।

फिर मेहर ने माहौल बदलने के लिए कहा,

"अब आगे क्या?"

अन्विका ने गहरी साँस ली।

"आज से नई शुरुआत।"

"मतलब?"

"मैं अपनी कंपनी शुरू करूँगी।"

मेहर की आँखें फैल गईं।

"इतनी जल्दी?"

"हाँ... अगर आज नहीं उठी तो शायद कभी खड़ी नहीं हो पाऊँगी।"

मेहर मुस्कुरा दी।

"यही वाली अन्विका मुझे पसंद है।"

---

उसी समय...

राठौर ग्लोबल होल्डिंग्स

पूरी बिल्डिंग में कर्मचारियों की भागदौड़ लगी हुई थी।

सभी लोग अपने-अपने लैपटॉप और फाइलें लेकर मीटिंग हॉल की तरफ़ जा रहे थे।

कॉन्फ्रेंस रूम का दरवाज़ा खुला।

ब्लैक सूट पहने आरिज़ राठौर अंदर आया।

उसे देखते ही पूरा हॉल खड़ा हो गया।

"गुड मॉर्निंग, सर।"

आरिज़ ने बिना मुस्कुराए सिर्फ़ सिर हिलाया।

उसकी मौजूदगी ही इतनी प्रभावशाली थी कि किसी की हिम्मत नहीं होती थी बेवजह बात करने की।

मीटिंग शुरू हुई।

एक-एक करके सभी डायरेक्टर अपनी रिपोर्ट देने लगे।

लेकिन अचानक...

एक प्रोजेक्ट की प्रेजेंटेशन स्क्रीन पर आई।

उसमें होटल इंटीरियर का डिज़ाइन दिखाया गया।

आरिज़ ने स्क्रीन को कुछ सेकंड देखा।

फिर अचानक बोला,

"ये डिज़ाइन किसने बनाया है?"

पूरा कमरा खामोश हो गया।

एक मैनेजर बोला,

"सर... ये राजवंशी ग्रुप की एक्स क्रिएटिव डायरेक्टर अन्विका राजवंशी का डिज़ाइन है।"

आरिज़ की भौंहें हल्की-सी उठीं।

"एक्स?"

"जी सर... उन्होंने कल इस्तीफा दे दिया।"

आरिज़ कुछ पल तक स्क्रीन देखता रहा।

फिर बोला,

"मीटिंग खत्म होने के बाद मेरे केबिन में आना।"

सब लोग हैरान थे।

इतनी छोटी-सी बात में आरिज़ की दिलचस्पी क्यों थी?

---

दूसरी तरफ...

राजवंशी ग्रुप

महेंद्र राजवंशी गुस्से में अपने केबिन में बैठे थे।

"अन्विका का फोन अभी तक बंद क्यों है?"

उन्होंने तेज़ आवाज़ में पूछा।

एचआर हेड डरते हुए बोला,

"सर... मैम ने अपना इस्तीफा मेल कर दिया है।"

महेंद्र ने फाइल मेज़ पर पटक दी।

"इस्तीफा मंज़ूर मत करना।"

"लेकिन सर..."

"मैंने कहा ना... नहीं!"

दरवाज़े के बाहर खड़ी शनाया सब सुन रही थी।

उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।

"डैड..."

वह अंदर आई।

"अगर वो जाना चाहती है तो जाने दीजिए।"

महेंद्र ने उसे देखा।

"वो हमारी बेटी है।"

शनाया के चेहरे का रंग एक पल को बदला...

लेकिन अगले ही पल उसने मुस्कुराकर कहा,

"और मैं भी आपकी बेटी हूँ।"

महेंद्र चुप हो गए।

"मैं कंपनी संभाल लूँगी।"

"क्या तुम कर पाओगी?"

शनाया ने आत्मविश्वास से जवाब दिया,

"अन्विका से बेहतर।"

उसे नहीं पता था...

कि कंपनी के आधे बड़े प्रोजेक्ट सिर्फ़ अन्विका की वजह से चल रहे थे।

---

उधर...

मेहर अपने लैपटॉप पर कुछ देख रही थी।

अचानक वह चौंक गई।

"अन्वी!"

"क्या हुआ?"

"देख ये।"

उसने स्क्रीन उसकी तरफ घुमाई।

एक न्यूज़ पोर्टल खुला हुआ था।

हेडलाइन पढ़ते ही अन्विका की आँखें ठंडी पड़ गईं।

"राजवंशी ग्रुप की छोटी बेटी ने मानसिक तनाव के कारण कंपनी छोड़ी। परिवार ने इलाज कराने का लिया फैसला।"

अन्विका की मुट्ठियाँ कस गईं।

"उन्होंने..."

उसकी आवाज़ काँप रही थी।

"...मुझे पागल साबित कर दिया?"

मेहर गुस्से से बोली,

"ये लोग किसी भी हद तक गिर सकते हैं।"

अन्विका कुछ सेकंड तक स्क्रीन देखती रही।

फिर उसने लैपटॉप बंद कर दिया।

"अब नहीं..."

"अब मैं जवाब दूँगी।"

"कैसे?"

अन्विका की आँखों में पहली बार आग दिखाई दी।

"अपने काम से..."

"इतनी ऊँचाई पर पहुँचूँगी कि इन्हें मेरा नाम लेने से पहले सोचना पड़ेगा।"

---

उसी समय...

आरिज़ अपने केबिन में बैठा था।

कबीर अंदर आया।

"सर... आपने जो जानकारी मंगवाई थी..."

उसने एक फाइल मेज़ पर रख दी।

आरिज़ ने फाइल खोली।

पहले पन्ने पर अन्विका की तस्वीर थी।

उसने धीरे-धीरे पूरी रिपोर्ट पढ़नी शुरू की।

फिर उसकी नज़र आख़िरी लाइन पर रुकी।

"पिछले 24 घंटे में अन्विका राजवंशी ने अपना घर, परिवार और नौकरी... तीनों छोड़ दिए।"

आरिज़ ने फाइल बंद कर दी।

कुछ पल तक कमरे में सन्नाटा छाया रहा।

फिर उसने धीरे से कहा—

"कबीर..."

"जी सर?"

"राजवंशी ग्रुप का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट कौन-सा है?"

"Royal Crown Hotel."

"उसकी अगली टेंडर मीटिंग कब है?"

"परसों।"

आरिज़ अपनी कुर्सी से उठ खड़ा हुआ।

उसकी आँखों में वही ठंडापन लौट आया।

"हम भी उस टेंडर में हिस्सा लेंगे।"

कबीर हैरान रह गया।

"लेकिन सर... हमने कभी होटल इंटीरियर का प्रोजेक्ट नहीं लिया।"

आरिज़ खिड़की से बाहर देखते हुए बोला—

"हर पहली शुरुआत... किसी वजह से होती है।"

कबीर समझ गया...

सर सिर्फ़ एक बिज़नेस डील नहीं...

बल्कि किसी और वजह से ये फैसला ले रहे थे।

उधर...

अन्विका ने अपना बैग उठाया।

"कहाँ जा रही है?"

मेहर ने पूछा।

अन्विका के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आई।

"अपनी नई ज़िंदगी का पहला कदम उठाने..."

लेकिन उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था...

कि उसी रास्ते पर...

किस्मत एक बार फिर उसकी मुलाक़ात आरिज़ राठौर से कराने वाली थी।

अन्विका ने अपने आँसू हमेशा के लिए पीछे छोड़ने का फैसला कर लिया था।

उसने मेहर से उधार लिए हुए फॉर्मल कपड़े पहने। सफेद शर्ट, काला ब्लेज़र और हल्का-सा मेकअप...

आईने में खुद को देखकर उसने एक गहरी साँस ली।

"अब कोई कमज़ोर अन्विका नहीं..."

"अब सिर्फ़ अन्विका राजवंशी... जो अपनी पहचान खुद बनाएगी।"

मेहर मुस्कुराई।

"बस यही आत्मविश्वास चाहिए।"

"मैं इंटरव्यू के लिए जा रही हूँ।"

"कहाँ?"

"एक कंपनी है... Skyline Designs। उन्होंने कल रात ही मेरा पोर्टफोलियो देखा था और आज मिलने के लिए बुलाया है।"

मेहर ने उसे गले लगा लिया।

"ऑल द बेस्ट।"

"थैंक यू।"

---

उसी समय...

दिल्ली के सबसे आलीशान बिज़नेस ज़ोन में...

राठौर ग्लोबल होल्डिंग्स के बोर्डरूम में मीटिंग खत्म हो चुकी थी।

सभी डायरेक्टर बाहर निकल चुके थे।

सिर्फ़ आरिज़ और कबीर अंदर थे।

कबीर ने टैबलेट आगे बढ़ाते हुए कहा,

"सर... Skyline Designs के मालिक आज अपनी कंपनी बेचने के लिए तैयार हैं।"

आरिज़ ने बिना सिर उठाए पूछा,

"क्यों?"

"कंपनी घाटे में चल रही है।"

आरिज़ कुछ पल सोचता रहा।

फिर बोला,

"डील फाइनल कर दो।"

कबीर चौंक गया।

"सर... हमने पहले ही दो नई कंपनियाँ खरीदी हैं।"

"एक और सही।"

"लेकिन वजह?"

आरिज़ हल्का-सा मुस्कुराया।

"हर फैसले के पीछे वजह बताना ज़रूरी नहीं होता।"

---

करीब एक घंटे बाद...

अन्विका Skyline Designs पहुँची।

छोटी-सी लेकिन खूबसूरत कंपनी...

रिसेप्शन पर बैठी लड़की मुस्कुराकर बोली,

"मैम, सर आपका इंतज़ार कर रहे हैं।"

अन्विका कॉन्फ्रेंस रूम में पहुँची।

मालिक रजत खन्ना ने उसका पोर्टफोलियो देखा और प्रभावित होकर बोले,

"मिस राजवंशी... आपके डिज़ाइन कमाल के हैं।"

"थैंक यू, सर।"

"अगर आप चाहें तो आज से ही जॉइन कर सकती हैं।"

अन्विका के चेहरे पर कई दिनों बाद सच्ची मुस्कान आई।

"मैं तैयार हूँ।"

लेकिन तभी...

दरवाज़ा खुला।

एक आदमी तेज़ी से अंदर आया।

"सर..."

"क्या हुआ?"

"अभी-अभी खबर मिली है..."

"कौन-सी खबर?"

"राठौर ग्लोबल ने हमारी कंपनी खरीद ली है।"

कमरे में सन्नाटा छा गया।

रजत खन्ना कुर्सी से खड़े हो गए।

"क्या...?"

"जी सर... सारे शेयर ट्रांसफर हो चुके हैं।"

अन्विका हैरान रह गई।

इतनी बड़ी डील...

कुछ ही मिनटों में?

---

दस मिनट बाद...

पूरी कंपनी के कर्मचारी लॉबी में खड़े थे।

काँच का ऑटोमैटिक दरवाज़ा खुला।

सबकी नज़र उधर चली गई।

ब्लैक सूट पहने...

आत्मविश्वास से भरे कदम...

और चेहरे पर वही ठंडा सुकून...

आरिज़ राठौर।

उसे देखते ही पूरा स्टाफ सीधा खड़ा हो गया।

"गुड आफ्टरनून, सर।"

आरिज़ ने हल्का-सा सिर हिलाया।

जैसे ही उसकी नज़र सामने खड़ी अन्विका पर पड़ी...

दोनों कुछ पल के लिए एक-दूसरे को देखते रह गए।

अन्विका ने तुरंत उसे पहचान लिया।

"आप...?"

आरिज़ भी उसे देखकर एक पल के लिए रुक गया।

"फिर मिल गए हम।"

अन्विका को समझ नहीं आया कि क्या कहे।

रजत खन्ना मुस्कुराए।

"आप दोनों एक-दूसरे को जानते हैं?"

आरिज़ ने शांत स्वर में कहा,

"बस... एक छोटी-सी मुलाक़ात हुई थी।"

अन्विका को याद आया...

बारिश वाली रात...

वही आदमी...

जिसने उसकी जान बचाई थी।

---

कुछ देर बाद...

आरिज़ ने पूरे स्टाफ को संबोधित किया।

"आज से Skyline Designs, Rathore Global Holdings का हिस्सा है।"

सब लोग तालियाँ बजाने लगे।

"लेकिन..."

आरिज़ ने आगे कहा,

"इस कंपनी का कोई भी कर्मचारी अपनी नौकरी नहीं खोएगा।"

सबने राहत की साँस ली।

अन्विका भी।

फिर आरिज़ की नज़र उस पर गई।

"मिस अन्विका..."

वह चौंक गई।

"जी?"

"आपसे पाँच मिनट बात करनी है।"

पूरे ऑफिस की नज़रें दोनों पर टिक गईं।

---

आरिज़ अपने केबिन में पहुँचा।

अन्विका दरवाज़े पर खड़ी थी।

"मे आई कम इन?"

"यस।"

वह अंदर आई।

कुछ सेकंड तक दोनों के बीच खामोशी रही।

फिर आरिज़ बोला,

"उम्मीद है आज आप बारिश में नहीं भीगी होंगी।"

अन्विका के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।

"नहीं..."

"अच्छा है।"

फिर उसने सीधे मुद्दे पर आते हुए कहा,

"मैंने आपका पोर्टफोलियो देखा है।"

अन्विका हैरान हो गई।

"मेरा?"

"हाँ।"

"लेकिन कैसे?"

"अब ये कंपनी मेरी है।"

अन्विका चुप हो गई।

आरिज़ ने फाइल उसकी तरफ़ बढ़ाई।

"मैं चाहता हूँ कि आप इस कंपनी की चीफ़ डिज़ाइन कंसल्टेंट बनें।"

अन्विका ने फाइल खोली...

और अगले ही पल उसकी आँखें फैल गईं।

सैलरी...

उसकी पिछली नौकरी से लगभग तीन गुना ज़्यादा थी।

"ये..."

उसकी आवाज़ अटक गई।

"मुझे इतनी बड़ी पोस्ट क्यों?"

आरिज़ ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,

"क्योंकि मुझे टैलेंट की पहचान है।"

"या..."

अन्विका ने पहली बार उसे गौर से देखा।

"आपको मुझ पर तरस आ गया है?"

आरिज़ के चेहरे का भाव तुरंत बदल गया।

"मैं किसी पर तरस नहीं खाता, मिस राजवंशी।"

उसकी आवाज़ पहले से कहीं ज़्यादा ठंडी थी।

"मेरी कंपनी में लोगों को उनकी काबिलियत पर जगह मिलती है... उनकी मजबूरी पर नहीं।"

अन्विका को अपनी गलती का एहसास हुआ।

"आई एम सॉरी..."

आरिज़ ने धीरे से कहा,

"सोचकर जवाब दीजिए।"

"अगर हाँ कहेंगी..."

"तो कल से आपकी नई ज़िंदगी शुरू होगी।"

अन्विका फाइल हाथ में लेकर केबिन से बाहर निकल गई।

उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था...

कि किस्मत उसी अजनबी को बार-बार उसकी राह में क्यों ला रही है।

लेकिन...

उसे नहीं पता था कि दूसरी तरफ़...

शनाया के हाथ भी एक ऐसी खबर लग चुकी थी, जिसने उसके चेहरे की मुस्कान गायब कर दी।

"क्या...?"

वह गुस्से से चीखी।

"अन्विका अब राठौर ग्लोबल के साथ काम करेगी?"

उसने टेबल पर रखा ग्लास ज़ोर से फेंक दिया।

"नहीं..."

"मैं उसे इतनी आसानी से आगे नहीं बढ़ने दूँगी।"

उसकी आँखों में नफ़रत साफ़ दिखाई दे रही थी।

"अगर अन्विका मेरी राह में आई..."

"तो इस बार मैं सिर्फ़ उसका करियर नहीं..."

"उसकी पूरी ज़िंदगी बर्बाद कर दूँगी।"

To Be Continued...

100%