Chapter 1
Episode 1: "The Girl Who Woke the Ice"
मुम्बई
"अगर इस बार भी किसी ने गोवा का नाम लिया, तो मैं ग्रुप छोड़ दूँगी!"
कॉलेज कैफेटेरिया में बैठी तारा ओबेरॉय ने अपना कोल्ड कॉफी का कप टेबल पर रखते हुए कहा।
"ओह, कम ऑन तारा! विंटर वेकेशन में लोग बीच पर जाते हैं, बर्फ में जमने नहीं!" उसके दोस्त आरव ने हँसते हुए कहा।
"यही तो प्रॉब्लम है। सब वही करते हैं जो हर कोई करता है। मुझे कुछ अलग चाहिए।"
तारा ओबेरॉय...
ओबेरॉय ग्लोबल एंटरप्राइजेज के मालिक विराट ओबेरॉय की इकलौती बेटी। 21 साल की, एमबीए फाइनल ईयर की स्टूडेंट। पूरे कॉलेज में उसकी पहचान सिर्फ उसकी दौलत की वजह से नहीं थी, बल्कि उसकी बेबाकी, एडवेंचर के लिए दीवानगी और "पहले करूँगी, बाद में सोचूँगी" वाले स्वभाव की वजह से भी थी।
उसकी सबसे बड़ी आदत?
मुसीबत को खुद ढूँढकर अपने पास ले आना।
"तो मैडम, इस बार क्या प्लान है?" उसकी बेस्ट फ्रेंड कियारा ने पूछा।
तारा की आँखें चमक उठीं।
"स्नो कैंपिंग!"
पूरा टेबल एकदम शांत हो गया।
"क्या?!"
"हाँ! मैंने कल रात एक वीडियो देखा था। हिमालय के पास एक फ्रोजन फॉरेस्ट है। वहाँ लोग कैंपिंग करने जाते हैं। सोचो... चारों तरफ बर्फ, बोनफायर, स्टार्स और नो इंटरनेट!"
"नो इंटरनेट?" आरव लगभग कुर्सी से गिर गया।
"यही तो मजा है!"
दो घंटे की बहस के बाद आखिरकार सब मान गए। ग्रुप में कुल छह लोग थे—तारा, कियारा, आरव, नील, सना और विवान।
उसी शाम तारा अपने घर पहुँची।
ओबेरॉय मैंशन किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं था। जैसे ही वह अंदर आई, उसके पिता विराट ओबेरॉय ने अखबार से नजर उठाई।
"इस बार क्या करने वाली हो?"
"आपको कैसे पता कि मैं कुछ करने वाली हूँ?"
"क्योंकि तुम मेरी बेटी हो।"
तारा मुस्कुराने लगी।
"बस छोटी-सी कैंपिंग ट्रिप है।"
"पिछली बार तुम्हारी 'छोटी-सी ट्रिप' में तुमने पैराशूट से कूदने की कोशिश की थी।"
"डैड!"
विराट ने गहरी साँस ली।
"कहाँ जा रही हो?"
"नॉर्थ के स्नो रीजन में।"
"नहीं।"
"डैड!"
"तारा, वो जगहें सुरक्षित नहीं होतीं।"
तारा ने तुरंत अपना इमोशनल कार्ड खेला।
"प्लीज़! मैं अब बच्ची नहीं हूँ। और वैसे भी, मेरे साथ पाँच लोग होंगे।"
करीब दस मिनट की ड्रामेबाजी के बाद आखिरकार विराट मान गए।
"फाइन! लेकिन तुम्हारे साथ सिक्योरिटी टीम जाएगी।"
"नो वे! अगर मेरे दोस्तों को पता चला कि मैं बॉडीगार्ड्स के साथ घूमती हूँ, तो मेरी सोशल लाइफ खत्म हो जाएगी।"
"तारा—"
"प्लीज़?"
विराट हार गए।
"ठीक है। लेकिन हर तीन घंटे में कॉल करोगी।"
"डन!"
अगले दिन सुबह छह बजे।
एक ब्लैक लक्ज़री वैन बर्फीले पहाड़ों की तरफ बढ़ रही थी। गाड़ी के अंदर म्यूजिक चल रहा था और बाकी सब लोग आधे सो रहे थे।
सिर्फ तारा ही थी जो खिड़की से बाहर देखकर एक्साइटेड हो रही थी।
"ओह माय गॉड! यह जगह तो सच में किसी मूवी जैसी है!"
सफेद बर्फ से ढके पहाड़, लंबे देवदार के पेड़ और दूर-दूर तक फैली खामोशी...
शाम तक वे लोग अपने डेस्टिनेशन पर पहुँच चुके थे।
"वेलकम टू द फ्रोजन फॉरेस्ट!" तारा ने हाथ फैलाकर कहा।
सबने मिलकर टेंट लगाए। बोनफायर जलाया गया। रात होते-होते बर्फ गिरनी शुरू हो गई।
"मैं ऑफिशियली अनाउंस करता हूँ कि अगर मैं यहाँ मर गया, तो मेरी सारी सेविंग्स मेरी माँ को दे देना।" आरव ने काँपते हुए कहा।
सब हँस पड़े।
रात करीब साढ़े नौ बजे...
तारा अकेली खड़ी आसमान में चमकते सितारों को देख रही थी।
तभी...
उसकी नजर दूर पहाड़ी के पीछे एक अजीब-सी नीली रोशनी पर पड़ी।
"यह क्या है?"
उसने आँखें सिकोड़कर देखा।
रोशनी कुछ सेकंड तक चमकी और फिर गायब हो गई।
"क्या तुम लोगों ने वो देखा?"
बाकी सबने पीछे मुड़कर देखा।
"क्या?"
"वहाँ... नीली लाइट!"
"तारा, प्लीज़! हमें डराने की कोशिश मत करो।"
लेकिन तारा जानती थी कि उसने कुछ देखा था।
करीब एक घंटे बाद, जब सब अपने टेंट में जा चुके थे, वह फिर से बाहर निकली।
और इस बार...
वही नीली रोशनी फिर दिखाई दी।
उसके चेहरे पर धीरे-धीरे मुस्कान आ गई।
"ओह, तो तुम सच में हो।"
उसने अपना जैकेट पहना, फोन की टॉर्च ऑन की और अकेले ही उस दिशा में चल पड़ी।
दस मिनट...
पंद्रह मिनट...
बीस मिनट...
आखिरकार उसे बर्फ के बीच एक संकरी दरार दिखाई दी, जिसके अंदर से हल्की नीली चमक आ रही थी।
"अब समझ आया लोग हॉरर मूवीज़ में क्यों मरते हैं। क्योंकि जिज्ञासा नाम की चीज़ होती है।"
वह हँसते हुए अंदर चली गई।
गुफा अंदर से बेहद विशाल थी। दीवारों पर अजीब निशान बने हुए थे, जैसे कोई प्राचीन भाषा हो।
"वाह... यह तो किसी हिडन किंगडम जैसा लग रहा है।"
वह आगे बढ़ ही रही थी कि अचानक...
क्रैक!
उसके पैरों के नीचे की बर्फ टूट गई।
"व्हाट—"
"आआआआह्ह्ह!"
तारा कई फीट नीचे अंधेरे में गिरती चली गई।
उसका फोन हाथ से छूट गया।
चारों तरफ सिर्फ अंधेरा था।
और फिर...
धड़ाम!
वह बर्फीली जमीन पर आ गिरी।
दर्द से कराहते हुए उसने सिर उठाया।
लेकिन अगले ही पल उसकी साँसें थम गईं।
उसके सामने एक विशाल बर्फ का ताबूत था...
और उसके अंदर कोई सो रहा था।
एक बेहद खूबसूरत, रहस्यमयी आदमी।
जिसकी आँखें अगले ही पल खुलने वाली थीं...
तारा कुछ सेकंड तक वहीं खड़ी रह गई। उसका दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था कि उसे खुद अपनी धड़कनें सुनाई दे रही थीं।
"ओके... तारा ओबेरॉय, घबराने की कोई बात नहीं है। हो सकता है यह कोई आइस स्कल्पचर हो। हाँ, बिल्कुल! कोई टूरिस्ट अट्रैक्शन..."
लेकिन वह खुद भी जानती थी कि वह खुद को झूठ बोल रही है।
उसने धीरे-धीरे अपना फोन उठाया। स्क्रीन टूटी हुई थी, लेकिन टॉर्च अभी भी काम कर रही थी।
जैसे ही उसने रोशनी उस बर्फीले ताबूत पर डाली, उसकी साँसें अटक गईं।
ताबूत पर अजीब-सी नक्काशी बनी हुई थी। कुछ चिन्ह ऐसे थे जो किसी प्राचीन भाषा जैसे लग रहे थे, और बीच में एक बड़ा-सा प्रतीक बना था—एक चाँद, जिसके चारों ओर बर्फ की लताएँ बनी हुई थीं।
"यह जगह आखिर है क्या?"
तारा ने धीरे से खुद से कहा।
वह डर रही थी, लेकिन उसकी जिज्ञासा उसके डर से कहीं ज्यादा बड़ी थी। यही उसकी सबसे बड़ी समस्या थी।
कॉलेज में भी सब कहते थे—
"अगर दुनिया में कहीं 'डू नॉट एंटर' लिखा होगा, तो सबसे पहले तारा ओबेरॉय ही अंदर जाएगी।"
उसे अचानक अपने दोस्तों की याद आई।
"ओह नो!"
उसने जल्दी से फोन निकालकर नेटवर्क चेक किया।
No Signal.
"ग्रेट! बिल्कुल परफेक्ट! मैं किसी रहस्यमयी गुफा में फँसी हूँ, नेटवर्क नहीं है और अगर मैं सुबह तक वापस नहीं गई, तो डैड पूरा पहाड़ खरीदकर खुदाई शुरू कर देंगे!"
वह खुद ही अपनी बात पर हल्का-सा हँस पड़ी।
तारा हमेशा से ऐसी थी। चाहे कितनी भी मुश्किल स्थिति हो, वह खुद को संभालने के लिए मजाक कर ही लेती थी।
उसने एक बार फिर उस ताबूत की तरफ देखा।
अजीब बात यह थी कि उस बर्फीले कमरे में इतनी ठंड होने के बावजूद, ताबूत के आसपास की हवा अलग महसूस हो रही थी। जैसे वहाँ समय रुक गया हो।
उसने धीरे-धीरे हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन बीच में ही रोक लिया।
"नहीं! हॉरर मूवी का पहला नियम—कभी भी रहस्यमयी चीजों को मत छुओ।"
वह तुरंत दो कदम पीछे हट गई।
अचानक गुफा में ठंडी हवा का एक तेज़ झोंका आया।
तारा ने अपनी जैकेट को और कसकर पकड़ लिया।
"ठीक है, अब मुझे यहाँ से निकलना चाहिए।"
उसने पीछे मुड़कर ऊपर देखने की कोशिश की, लेकिन जहाँ से वह गिरी थी, वह जगह इतनी ऊँची थी कि वहाँ तक पहुँचना लगभग नामुमकिन लग रहा था।
"शानदार! अब मैं ऑफिशियली फँस चुकी हूँ।"
उसने गहरी साँस ली और पास की एक चट्टान पर बैठ गई।
"अगर मैं यहाँ से जिंदा निकल गई, तो मैं कसम खाती हूँ... कि अगली बार वेकेशन के लिए सिर्फ गोवा जाऊँगी।"
लेकिन उसके दिल में एक अजीब-सा एहसास हो रहा था।
जैसे यह सब कोई हादसा नहीं था।
जैसे कोई उसे यहाँ बुलाकर लाया हो।
उसने धीरे से उस विशाल ताबूत की तरफ देखा। पता नहीं क्यों, लेकिन उसे महसूस हो रहा था कि इस गुफा और उसके बीच कोई अनजाना रिश्ता है।
और उसे बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि उसकी जिंदगी अभी हमेशा के लिए बदलने वाली है।
गुफा के बाहर बर्फ लगातार गिर रही थी।
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