The Vampire’s Dark Obsession Ch. 2

Chapter 2

Posted by iskibutterfly iskibutterfly • Jul 26, 2026 09:49 PM

Episode 2: "बर्फ में सोया हुआ राज़"

तारा की साँसें जैसे थम-सी गई थीं।

उसके सामने बर्फ का विशाल ताबूत था, जिसके अंदर एक रहस्यमयी युवक शांत होकर लेटा हुआ था। ऐसा लग रहा था मानो वह सो नहीं रहा, बल्कि किसी का इंतजार कर रहा हो।

गुफा की दीवारों पर बनी नीली आकृतियाँ हल्की-हल्की चमक रही थीं। चारों तरफ ऐसी खामोशी थी कि तारा अपनी धड़कनों की आवाज़ तक सुन पा रही थी।

"नहीं... यह सच नहीं हो सकता।"

उसने धीरे से खुद से कहा।

वह डर रही थी, लेकिन उसका दिमाग बार-बार यही कह रहा था कि शायद यह कोई प्राचीन मूर्ति हो।

"हाँ, बिल्कुल! कोई बर्फ की मूर्ति... जो बहुत ज़्यादा रियल लग रही है।"

तारा धीरे-धीरे ताबूत के पास गई।

उस युवक के लंबे काले बाल उसके कंधों तक बिखरे हुए थे। उसका चेहरा इतना शांत और आकर्षक था कि एक पल के लिए तारा भूल गई कि वह किसी रहस्यमयी गुफा में खड़ी है।

"इतने हैंडसम लोग असली दुनिया में होते भी हैं क्या?"

उसने अनजाने में बुदबुदाया।

जैसे ही वह थोड़ा और झुकी, उसके पैर के नीचे पड़ा एक नुकीला पत्थर खिसक गया।

"आह!"

पत्थर उसकी हथेली में लग गया। उसकी हथेली से खून की एक पतली-सी रेखा निकल आई।

"आज तो किस्मत ही खराब है!"

वह अपने हाथ को देखने लगी। लेकिन तभी...

खून की एक बूंद उसके हाथ से गिरकर सीधे उस बर्फीले ताबूत पर जा गिरी।

कुछ सेकंड तक कुछ नहीं हुआ।

फिर अचानक...

धड़ाम!

पूरी गुफा ज़ोर से काँप उठी।

"यह... यह क्या हो रहा है?!"

तारा घबराकर पीछे हट गई।

ताबूत पर बनी नीली आकृतियाँ तेज़ी से चमकने लगीं। ऐसा लग रहा था मानो सदियों से सोई हुई कोई शक्ति जाग उठी हो।

गुफा की दीवारों से अजीब-सी आवाज़ें आने लगीं। हवा अचानक बहुत ठंडी हो गई।

"मुझे यहाँ से जाना चाहिए!"

तारा मुड़कर भागने लगी, लेकिन तभी उसके पीछे से बर्फ टूटने की आवाज़ आई।

उसने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा।

ताबूत की सतह पर दरारें पड़ चुकी थीं।

एक...

दो...

और फिर—

क्रैश!

बर्फ का ताबूत कई टुकड़ों में टूट गया।

तारा की आँखें डर से फैल गईं।

ताबूत के अंदर लेटा हुआ युवक अब धीरे-धीरे अपनी उँगलियाँ हिला रहा था।

"हे भगवान..."

वह एक कदम पीछे हटी।

युवक ने बहुत धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलीं।

उसकी आँखें...

गहरी लाल थीं।

तारा का दिल मानो रुक गया।

युवक कुछ सेकंड तक छत को देखता रहा, जैसे उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह कहाँ है।

फिर उसकी नजर तारा पर पड़ी।

दोनों की आँखें एक-दूसरे से मिलीं।

समय जैसे एक पल के लिए थम गया।

तारा ने घबराकर पीछे हटना चाहा, लेकिन उसका पैर बर्फ पर फिसल गया।

"आह!"

वह नीचे गिरने ही वाली थी कि युवक ने अचानक उसका हाथ पकड़ लिया।

उसकी पकड़ ठंडी थी।

बहुत ज़्यादा ठंडी।

तारा ने काँपते हुए उसकी तरफ देखा।

"तुम... तुम कौन हो?"

लेकिन युवक ने कोई जवाब नहीं दिया।

वह खुद भी उलझन में था।

उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं। उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसका पूरा शरीर सदियों की नींद के बाद पहली बार जागा हो।

उसने अपने हाथों को देखा।

फिर धीरे से चारों तरफ नजर दौड़ाई।

"मैं..."

उसकी आवाज़ भारी और धीमी थी।

"मैं... कौन हूँ?"

तारा कुछ सेकंड तक उसे देखती रह गई।

"एक मिनट! तुम्हें अपना नाम भी याद नहीं है?"

उसने जवाब नहीं दिया।

उसकी नजर अचानक तारा की घायल हथेली पर पड़ी।

खून...

वह उस खून को देखता रह गया।

उसके अंदर कुछ अजीब-सा होने लगा।

उसका गला सूखने लगा।

उसने अपनी आँखें बंद कर लीं।

उसके मन में कुछ धुंधली तस्वीरें उभरने लगीं—एक बर्फीला महल, लाल आसमान और किसी की चीख—

"उन्हें बचाइए, राजकुमार!"

लेकिन अगले ही पल सब गायब हो गया।

उसने धीरे-धीरे आँखें खोलीं।

तारा ने घबराकर अपना हाथ पीछे कर लिया।

"तुम ठीक हो?"

युवक की नजर अब भी उसकी हथेली पर थी।

उसे समझ नहीं आ रहा था कि उस खून की खुशबू उसे इतनी परिचित क्यों लग रही थी।

और उससे भी अजीब बात यह थी कि वह उस खुशबू से डर नहीं रहा था।

बल्कि...

उसे सुकून महसूस हो रहा था।

उसने धीरे-धीरे तारा की तरफ देखा।

"यह... क्या है?"

"क्या?"

"तुम्हारे हाथ से जो निकल रहा है।"

तारा ने हैरानी से उसे देखा।

"तुम सीरियस हो?"

उसने सिर हिलाया।

"यह खून है।"

"खून..."

उसने धीरे से यह शब्द दोहराया, जैसे उसने इसे पहली बार सुना हो।

कुछ पल तक गुफा में सिर्फ खामोशी थी।

फिर उसने अचानक एक ऐसा सवाल पूछा, जिससे तारा की धड़कनें रुक गईं।

"क्या... मैं इसे पी सकता हूँ?"

"क्या?!"

तारा लगभग चीख पड़ी।

"तुम मेरा खून पीना चाहते हो?!"

"मुझे नहीं पता।"

उसने शांत स्वर में कहा।

"लेकिन इसकी खुशबू... मुझे अपनी तरफ बुला रही है।"

तारा तुरंत उससे तीन कदम दूर चली गई।

"ओके! अब मुझे पूरा यकीन हो गया है कि तुम इंसान नहीं हो!"

युवक ने कुछ समझ न आने वाले भाव से उसकी तरफ देखा।

"इंसान?"

"हाँ! मतलब... ह्यूमन!"

"और मैं?"

तारा कुछ सेकंड तक चुप रही।

फिर धीरे से बोली—

"तुम्हारी लाल आँखें हैं, तुम 500 साल पुरानी गुफा में बर्फ के ताबूत में सो रहे थे और तुमने मुझसे पूछा कि क्या तुम मेरा खून पी सकते हो!"

वह एक पल रुकी।

"अगर मुझे अंदाज़ा लगाना पड़े... तो शायद तुम एक वैंपायर हो।"

"वैंपायर..."

यह शब्द सुनते ही युवक के चेहरे का रंग बदल गया।

उसके दिमाग में फिर वही आवाज़ गूँजने लगी—

"वैंपायर साम्राज्य कभी अपने राजकुमार को नहीं भूलेगा..."

उसने अचानक अपना सिर पकड़ लिया।

"आह!"

तारा घबरा गई।

"अरे! क्या हुआ?"

लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।

उसकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं।

कुछ देर बाद वह धीरे-धीरे शांत हुआ।

और फिर पहली बार उसने तारा को ध्यान से देखा।

उसकी आँखों में डर था, लेकिन वह अब भी वहाँ से भागी नहीं थी।

"तुम... मुझसे डरती नहीं हो?"

तारा ने तुरंत जवाब दिया—

"डरती हूँ! बहुत डरती हूँ! लेकिन अगर तुम मुझे मारना चाहते, तो अब तक मार चुके होते।"

युवक कुछ पल तक उसे देखता रहा।

फिर उसने धीरे से कहा—

"मुझे लगता है... मैं तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचा सकता।"

तारा का दिल एक पल के लिए अजीब तरह से धड़क उठा।

उसे नहीं पता था कि वह कौन था।

Episode 2 End. Like and comment karna na bhule agar aapko episode achcha Lage to please comment Karen episode mein

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