Chapter 3
Episode 3: "तुम मेरे साथ चलोगे"
गुफा में अब भी सन्नाटा पसरा हुआ था।
तारा ओबेरॉय सामने खड़े उस रहस्यमयी युवक को देख रही थी, और वह युवक तारा को। दोनों को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर इस अजीब-सी परिस्थिति से बाहर कैसे निकला जाए।
"तो... तुम सच में मेरा खून नहीं पियोगे ना?" तारा ने सावधानी से पूछा।
युवक ने उसकी तरफ देखा और कुछ पल सोचने के बाद बोला, "मुझे नहीं पता।"
"क्या मतलब, 'मुझे नहीं पता'?"
"मुझे सिर्फ इतना पता है कि मैं तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचाना चाहता। लेकिन जब मैं तुम्हारे हाथ को देखता हूँ... तो मुझे अजीब महसूस होता है।"
"ग्रेट! मतलब मैं एक ऐसे आदमी के साथ गुफा में फँसी हूँ, जिसे खुद नहीं पता कि वह मुझे खाएगा या नहीं!"
तारा ने अपने माथे पर हाथ मार लिया।
युवक पहली बार उसे देखकर थोड़ा हैरान हुआ।
"तुम अजीब हो।"
"थैंक यू! यह कॉम्प्लिमेंट है या इंसल्ट?"
"मुझे नहीं पता।"
"तुम्हें कुछ पता भी है?"
युवक कुछ सेकंड तक चुप रहा, फिर धीरे से बोला—
"मुझे सिर्फ इतना याद है कि मैं बहुत लंबे समय से सो रहा था।"
"कितने लंबे समय से?"
"पता नहीं।"
"नाम?"
"नहीं पता।"
"उम्र?"
"नहीं पता।"
"वाह! तुम्हारी लाइफ तो मेरे मैथ्स के मार्क्स से भी ज्यादा कन्फ्यूज़्ड है।"
तारा की बात सुनकर युवक ने पहली बार हल्का-सा सिर तिरछा किया, जैसे वह समझने की कोशिश कर रहा हो कि वह मजाक कर रही है या सच बोल रही है।
तभी अचानक गुफा के बाहर तेज़ हवा चलने लगी।
तारा का ध्यान अचानक अपने फोन की तरफ गया।
उसने जल्दी से फोन ऑन किया।
67 मिस्ड कॉल्स
।
उसका चेहरा तुरंत उतर गया।
"हे भगवान!"
"क्या हुआ?"
"क्या हुआ?! मेरे डैड मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे!"
"डैड?"
"पिता!"
"ओह।"
"और मेरे दोस्त? वे लोग तो अभी तक मुझे ढूँढ रहे होंगे!"
तारा ने घड़ी देखी।
रात के दो बज चुके थे।
"हमें अभी इसी वक्त यहाँ से निकलना होगा।"
"हमें?"
"हाँ, हमें!"
युवक ने भौंहें सिकोड़ लीं।
"मैं तुम्हारे साथ क्यों जाऊँ?"
तारा कुछ सेकंड के लिए चुप हो गई।
"क्योंकि तुम इस गुफा में अकेले नहीं रह सकते!"
"मैं सदियों से यहीं था।"
"हाँ, लेकिन तब तुम सो रहे थे! अब जाग गए हो। और अगर किसी ने तुम्हें देख लिया, तो या तो लोग तुम्हें साइंटिस्ट्स को बेच देंगे या फिर सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे।"
"सोशल मीडिया?"
"तुम्हें बहुत कुछ सीखना है।"
तारा ने गहरी साँस ली।
"देखो, तुम्हें अपना नाम तक याद नहीं है। तुम्हें यह भी नहीं पता कि तुम कौन हो। इसलिए जब तक तुम्हें सब याद नहीं आ जाता... तुम मेरे साथ चलोगे।"
युवक कुछ देर तक उसे देखता रहा।
"और अगर मैं मना कर दूँ?"
"तो मैं यहाँ बैठकर रोना शुरू कर दूँगी।"
"उससे क्या होगा?"
"मुझे नहीं पता, लेकिन लड़कियाँ अक्सर यही करती हैं।"
पहली बार युवक के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आई।
तारा की आँखें फैल गईं।
"ओह माय गॉड! तुम मुस्कुरा सकते हो!"
"क्या यह गलत है?"
"नहीं... बस... तुम मुस्कुराते हुए कम डरावने लगते हो।"
दोनों कुछ पल के लिए चुप हो गए।
तारा ने धीरे से अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया।
"चलो।"
युवक ने उसके हाथ को देखा।
"यह क्या है?"
"मैं तुम्हें बाहर ले जा रही हूँ।"
"तुम हर बात पर हाथ क्यों पकड़ती हो?"
"क्योंकि तुम हर बात पर सवाल पूछते हो!"
आखिरकार उसने धीरे-धीरे तारा का हाथ पकड़ लिया।
उसकी उँगलियाँ अब भी बर्फ की तरह ठंडी थीं।
लेकिन इस बार तारा ने अपना हाथ नहीं छोड़ा।
दोनों धीरे-धीरे गुफा से बाहर निकलने लगे।
जैसे ही युवक ने गुफा से बाहर कदम रखा, वह अचानक रुक गया।
उसकी आँखें आसमान पर टिक गईं।
बर्फ अब भी गिर रही थी।
चाँद की रोशनी पूरे जंगल को रोशन कर रही थी।
"सुंदर..."
उसने धीमे से कहा।
तारा मुस्कुराई।
"है ना?"
"मैं चाँद की बात नहीं कर रहा।"
तारा तुरंत उसकी तरफ मुड़ी।
"क्या?"
लेकिन युवक ने कुछ नहीं कहा।
उसे खुद नहीं समझ आ रहा था कि उसने ऐसा क्यों कहा।
उसे सिर्फ इतना महसूस हो रहा था कि इस लड़की के पास होने से उसके अंदर की बेचैनी कम हो जाती है।
तभी...
दूर से भेड़ियों के चिल्लाने की आवाज़ सुनाई दी।
युवक का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।
"हमें जल्दी चलना चाहिए।"
"क्यों?"
"क्योंकि हम अकेले नहीं हैं।"
तारा के चेहरे का रंग उड़ गया।
"प्लीज़ यह मत कहना कि यहाँ और भी वैंपायर हैं।"
"नहीं।"
"थैंक गॉड!"
"वे हमसे भी ज्यादा खतरनाक हैं।"
"क्या?!"
युवक ने जंगल के अंधेरे की तरफ देखा।
उसे महसूस हो रहा था कि कई आँखें उन्हें देख रही हैं।
और बहुत दूर...
बर्फीले पहाड़ की चोटी पर खड़ा एक विशाल काला भेड़िया अपनी चमकती नीली आँखों से उन्हें घूर रहा था।
उसने धीरे से गुर्राते हुए आसमान की तरफ सिर उठाया।
जैसे वह सदियों से अपने राजा के जागने का इंतजार कर रहा हो...
तारा ने युवक की आँखों में पहली बार डर की एक हल्की-सी झलक देखी।
वह लगातार जंगल के अंधेरे की तरफ देख रहा था, जैसे उसे किसी अनदेखे खतरे का एहसास हो रहा हो।
"क्या हुआ?" तारा ने धीरे से पूछा।
"कोई हमें देख रहा है।"
"देखो, अगर यह तुम्हारा मुझे डराने का तरीका है, तो यह काम कर रहा है।"
"मैं मजाक नहीं कर रहा।"
उसकी आवाज़ अचानक पहले से ज्यादा गंभीर हो गई।
तारा ने तुरंत पीछे मुड़कर देखने की कोशिश की, लेकिन उसे सिर्फ बर्फ से ढके पेड़ ही दिखाई दिए।
"मुझे तो कुछ नहीं दिख रहा।"
"क्योंकि वे छिपे हुए हैं।"
"वे?"
युवक ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसके कानों में जंगल की हर आवाज़ साफ सुनाई दे रही थी—हवा की सरसराहट, पेड़ों की शाखाओं का हिलना और कई धड़कनों की धीमी आवाज़ें।
लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह यह सब कैसे सुन पा रहा है।
"तुम्हें सच में क्या हो?"
"मुझे लगता है... मेरी इंद्रियाँ सामान्य इंसानों से अलग हैं।"
"तुम हर दो मिनट में यह साबित कर देते हो कि तुम इंसान नहीं हो।"
तारा ने गहरी साँस ली और अपने हाथों को रगड़ने लगी।
ठंड अब पहले से ज्यादा बढ़ गई थी।
"वैसे, जब तक तुम्हें अपना नाम याद नहीं आता, मैं तुम्हें क्या बुलाऊँ?"
युवक कुछ पल सोचता रहा।
"मुझे नहीं पता।"
"तुम्हारा यह जवाब अब मुझे परेशान करने लगा है।"
तारा ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा।
"हम्म... तुम काफी पुराने लगते हो।"
"पुराने?"
"मतलब... तुम्हारे कपड़े, तुम्हारी भाषा और यह बात कि तुम पाँच सौ साल बर्फ में सो रहे थे।"
"पाँच सौ साल?"
"मैंने बस अंदाज़ा लगाया है।"
युवक अचानक रुक गया।
"अगर सच में इतना समय बीत चुका है... तो क्या मेरी दुनिया खत्म हो चुकी होगी?"
उसकी आवाज़ में पहली बार उदासी थी।
तारा का दिल अचानक भारी हो गया।
वह उसे मुश्किल से एक घंटे से जानती थी, लेकिन उसके चेहरे पर दिख रही वह खालीपन उसे अजीब तरह से परेशान कर रहा था।
"शायद नहीं।"
"तुम्हें कैसे पता?"
"क्योंकि अच्छी चीजें इतनी आसानी से खत्म नहीं होतीं।"
युवक ने उसकी तरफ देखा।
"और अगर मैं अच्छी चीज़ नहीं हूँ तो?"
तारा कुछ सेकंड तक चुप रही।
"तब भी मैं तुम्हें खुद पता लगाने का मौका दूँगी।"
उसने हल्की मुस्कान के साथ कहा।
पहली बार, उसे लगा कि यह लड़की बाकी लोगों से अलग है।
तभी अचानक तारा को कुछ याद आया।
"ओह नो!"
"अब क्या हुआ?"
"मेरे डैड!"
"तुम अपने पिता का नाम हर दस मिनट में क्यों लेती हो?"
"क्योंकि अगर मैं सुबह तक घर नहीं पहुँची, तो वह हेलीकॉप्टर लेकर मुझे ढूँढने आ जाएँगे!"
"हेलीकॉप्टर?"
"हाँ! तुम बहुत जल्दी समझ जाओगे कि अमीर लोगों की परेशानियाँ भी अजीब होती हैं।"
कुछ देर बाद दोनों धीरे-धीरे जंगल में आगे बढ़ने लगे।
चलते-चलते युवक अचानक रुक गया।
"एक सवाल पूछूँ?"
तारा ने हैरानी से उसकी तरफ देखा।
"हाँ?"
"तुम मुझ पर भरोसा क्यों कर रही हो?"
तारा उसके सवाल पर कुछ पल के लिए चुप हो गई।
सच तो यह था कि उसे खुद भी इसका जवाब नहीं पता था।
एक अनजान आदमी...
जो शायद वैंपायर था...
जो उसका खून पी सकता था...
और फिर भी वह उसके साथ रात के दो बजे बर्फीले जंगल में चल रही थी।
"शायद क्योंकि मेरी किस्मत हमेशा अजीब रही है।"
"यह जवाब नहीं है।"
"और शायद इसलिए क्योंकि जब तुम मुझे देखते हो, तो मुझे ऐसा नहीं लगता कि तुम मुझे नुकसान पहुँचाना चाहते हो।"
युवक कुछ पल तक उसकी तरफ देखता रहा।
फिर उसने बहुत धीरे से कहा—
"मैं नहीं चाहता।"
उसकी आवाज़ इतनी धीमी थी कि अगर चारों तरफ इतनी खामोशी न होती, तो शायद तारा उसे सुन भी नहीं पाती।
उसका दिल एक पल के लिए तेज़ी से धड़कने लगा।
"वैसे, एक बात बताऊँ?"
"क्या?"
"अगर तुम वैंपायर हो, तो तुम अब तक मिले सबसे हैंडसम वैंपायर हो।"
"हैंडसम?"
"ओह गॉड! तुम्हें यह भी नहीं पता!"
तारा हँस पड़ी।
और पहली बार...
उसे लगा कि शायद यह रात उसकी जिंदगी की सबसे खतरनाक रात नहीं थी।
शायद...
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Episode 3 End