The Dark Romnce ( Mafiya's Love) - Chapter 2
आन्या ने उस लाल लिफ़ाफ़े को देखा। उस पर उकेरे गए ईगल के निशान को देखकर ही उसके रोंगटे खड़े हो गए। ऐसा लग रहा था मानो वह निशान किसी इंसान का नहीं, बल्कि किसी अंधेरी हुकूमत का प्रतीक हो।
"यह क्या है आरव?"
"पचास... पचास करोड़ का कर्ज़ा, दीदी," आरव ने अपना सिर घुटनों में छिपा लिया।
आन्या को लगा जैसे उसके पैरों तले से ज़मीन ही खिसक गई हो। कमरे की पूरी हवा जैसे अचानक ख़त्म हो गई हो। उसे सांस लेने में सफ़ोकेशन महसूस होने लगा।
"प-पचास... क्या?" आन्या की आवाज़ हलक से मुश्किल से निकली। "आरव, तुम होश में तो हो? पचास करोड़? तुम्हारे पास इतने पैसे कहाँ से आए? और तुमने किससे कर्ज़ा लिया?"
"कसीनो से... 'द रॉयल क्रिम्सन' कसीनो से," आरव हकलाया। "मुझे लगा मैं जीत जाऊँगा दीदी... मैं अपनी पुरानी हार का सारा पैसा निकालना चाहता था। लेकिन... लेकिन मैं हार गया। सब कुछ हार गया। और जब मैंने पैसे देने से मना किया... तो वो मुझे उस कमरे में ले गए..."
आरव का शरीर दोबारा कांपने लगा, जैसे उसे कोई खौफनाक मंज़र याद आ गया हो।
"किस कमरे में आरव? साफ़-साफ़ बताओ!" आन्या ने उसके चेहरे को थपथपाया।
"वहाँ... वहाँ 'द डार्क ईगल' का बंदा था। उन्होंने मेरे सामने एक आदमी की उंगली काट दी दीदी! सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उसने दो दिन का वक़्त मांगा था! वो इंसान नहीं हैं... वो जानवर हैं! वो राक्षस हैं!" आरव लगभग चीख पड़ा।
आन्या का दिल डूबने लगा। उसने 'द डार्क ईगल' का नाम पहले भी अख़बारों में पढ़ा था, लेकिन हमेशा उसे एक अफ़वाह समझा था। शहर के अंडरवर्ल्ड का सबसे ख़तरनाक, सबसे बेरहम नाम—रणवीर थोर्न। एक ऐसा आदमी जिसके बारे में कहा जाता था कि पुलिस भी उसके इलाके में कदम रखने से पहले अपनी वर्दी उतार देती थी।
"तुमने... तुमने रणवीर थोर्न से कर्ज़ा लिया?" आन्या की आँखें फटी की फटी रह गईं।
"मुझे नहीं पता था दीदी! मुझे सच में नहीं पता था कि वो कसीनो उसका है!" आरव आन्या के पैर पकड़कर रोने लगा। "दीदी, उन्होंने कहा है कि अगर आज रात बारह बजे तक पैसे नहीं मिले या कोई गारंटी नहीं मिली... तो वो मुझे और तुम्हें... हम दोनों को ख़त्म कर देंगे!"
आन्या ने घड़ी की तरफ़ देखा।
रात के 11:45 बज चुके थे।
सिर्फ़ पंद्रह मिनट।
आन्या ने अपने कांपते हाथों से उस लाल लिफ़ाफ़े की वैक्स सील तोड़ी। अंदर एक काले रंग का भारी पेपर था, जिस पर सुनहरे अक्षरों में एक ही लाइन लिखी थी:
"Karz chukaya jata hai... ya khoon se, ya rooh se. 12:00 AM. Be ready."
— R.T.
उस लिखावट में एक अजीब सी ठंडक थी, एक ऐसा गुरूर था जो किसी की भी हिम्मत तोड़ दे।
"दीदी, हम भाग जाते हैं! हम शहर छोड़ देते हैं!" आरव ने बदहवास होकर कहा। "हम अभी पुलिस के पास चलते हैं!"
"पुलिस?" आन्या ने एक भारी, दुखी मुस्कान के साथ अपने भाई को देखा। "आरव, जो आदमी पचास करोड़ का कर्ज़ा चुटकियों में बांटता है और खुलेआम लोगों को मारता है, पुलिस उसकी जेब में होती है। हम कहाँ भागेंगे? हमारे पास रहने के लिए सिर्फ़ ये छोटा सा फ़्लैट है..."
आन्या ने अपने सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया। उसकी आँखों से आंसू टपक कर उस काले दस्तावेज़ पर गिरे। उसकी पूरी ज़िंदगी—उसकी मेहनत, उसकी डॉक्टर बनने की चाहत, उसकी सीधी-साधी शांत दुनिया—सब कुछ सिर्फ़ एक रात में, एक लिफ़ाफ़े के साथ जलकर राख हो गई थी।
बाहर, बारिश का शोर और तेज़ हो गया था।
अचानक, गली के मोड़ पर कई गाड़ियों के भारी टायरों की चीखने की आवाज़ आई।
क्रर्र्र्र्र!
एक साथ कई मर्सिडीज़ और एसयूवी आकर उनके अपार्टमेंट की इमारत के नीचे रुकीं। गाड़ियों की हेडलाइट्स की तेज़ सफ़ेद रोशनी आन्या के फ़्लैट की खिड़की के शीशों को चीरती हुई सीधे छत पर पड़ी।
आरव की चीख निकल गई। उसने तुरंत खिड़की के पर्दे खींच दिए और कोने में दुबक कर बैठ गया। "वो... वो आ गए दीदी! वो आ गए!"
आन्या का दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि उसे अपनी छाती में दर्द महसूस होने लगा। उसने आरव को अपने पीछे छुपाया। उसने टेबल पर रखा एक छोटा सा सर्जिकल स्कैल्पेल (धारदार ब्लेड वाला चाकू) अपने हाथ में कसकर पकड़ लिया। उसका हाथ कांप रहा था, लेकिन एक बड़ी बहन का फ़र्ज़ उसकी आँखों में खौफ़ के साथ-साथ एक अजीब सी हिम्मत भर रहा था।
धप... धप... धप...
इमारत की सीढ़ियों पर भारी बूटों की आवाज़ गूंजने लगी। वह आवाज़ अकेली नहीं थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई पूरी फ़ौज ऊपर आ रही हो। हर कदम के साथ सीढ़ियों की कंक्रीट मानो कांप रही थी।
आन्या ने सांस रोक ली।
आवाज़ें उनके फ़्लैट के दरवाज़े के ठीक बाहर आकर रुक गईं।
कमरे के अंदर इतना सन्नाटा छा गया कि आन्या को अपनी और आरव की तेज़ चलती सांसें साफ़ सुनाई दे रही थीं।
एक सेकंड... दो सेकंड... तीन सेकंड...
घड़ी ने ठीक बारह का घंटा बजाया।
टंग... टंग...
और ठीक उसी पल—
धड़ाम!
गुलमोहर अपार्टमेंट के उस छोटे से फ़्लैट का भारी शीशम का दरवाज़ा एक ही झटके में टूटकर अंदर आ गिरा! लकड़ी के टुकड़े हवा में उछले और धूल का एक गुबार सा छा गया।
आन्या ने अपनी आँखें भींच लीं और आरव को और कसकर पीछे धकेल दिया।
सफ़ेद धुएं और धूल के बीच, दरवाज़े के फ्रेम में कई लंबे, काले कोट पहने गार्ड्स खड़े थे। उन सभी के हाथों में ऑटोमैटिक राइफ़ल्स और पिस्टल थीं, जिनकी लेज़र लाइट्स आन्या के माथे और छाती पर घूमने लगीं।
लेकिन उन हथियारों से ज़्यादा ख़तरनाक, उन गार्ड्स से ज़्यादा खौफ़नाक वह इंसान था जो धीरे-धीरे उन सशस्त्र आदमियों के बीच में से रास्ता बनाता हुआ आगे आया।
कमरे की हल्की टॉर्च की रोशनी में उसका चेहरा साफ़ दिखाई देने लगा।
वह रणवीर थोर्न था।
लगभग 6 फीट 3 इंच का कद, चौड़े कंधे, और काले रंग का टेलर-मेड थ्री-पीस सूट। उसके कोट पर बारिश की बूंदें अभी भी चमक रही थीं। उसके बाल पीछे की तरफ़ सेट थे, लेकिन कुछ आवारा लटें उसके माथे पर गिरी हुई थीं। उसकी त्वचा पीली-सफ़ेद थी, जैसे उसने कभी धूप न देखी हो, और उसकी ठुड्डी (jawline) इतनी तीखी थी मानो पत्थर से तराशी गई हो।
लेकिन उसकी सबसे खौफ़नाक चीज़ थी उसकी आँखें—एकदम गहरी, बर्फ़ जैसी ठंडी ग्रे (Grey) आँखें, जिनमें न तो कोई दर्द था, न कोई रहम, और न ही कोई भावना। उसके बाएं गाल से लेकर गर्दन तक एक हल्का सा पुराना निशान (scar) था, जो उसकी ख़ौफ़नाक ख़ूबसूरती को और भी जानलेवा बना रहा था।
उसके दाएं हाथ में एक भारी, सोने की रिंग थी, जिसे वह अपनी अंगूठे से धीरे-धीरे घुमा रहा था।
रणवीर ने कमरे में कदम रखा। उसके बूट्स की आवाज़ टूटे हुए शीशे के टुकड़ों पर गूंजी।
कच... कच...