The Dark Romnce ( Mafiya's Love) - Chapter 3
रणवीर ने कमरे में कदम रखा। उसके बूट्स की आवाज़ टूटे हुए शीशे के टुकड़ों पर गूंजी।
कच... कच...
उसने कमरे को एक बार देखा—टूटी हुई टेबल, बिखरी हुई किताबें, फ़र्श पर बहता हुआ पानी और खून, और कोने में कांपते हुए दो भाई-बहन।
उसकी नज़र आन्या पर जाकर टिक गई।
आन्या ने अपनी ज़िंदगी में कभी किसी इंसान से इतनी नफ़रत और इतना ख़ौफ़ एक साथ महसूस नहीं किया था। रणवीर की मौजूदगी इतनी भारी थी कि कमरे का तापमान जैसे दस डिग्री कम हो गया हो।
रणवीर ने आन्या के हाथ में पकड़े उस छोटे से सर्जिकल स्कैल्पेल को देखा। उसके सूखे, गुलाबी होंठों पर एक बहुत हल्की, व्यंग्यात्मक मुस्कान आई—ऐसी मुस्कान जो किसी शिकारी के चेहरे पर अपने असहाय शिकार को देखकर आती है।
"एक डॉक्टर का औज़ार..." रणवीर की आवाज़ गूंजी।
उसकी आवाज़ भारी, धीमी और बेहद गहरी थी। ऐसा लग रहा था मानो कोई सदियों पुराने तहखाने से बोल रहा हो।
"क्या तुम इससे मेरी गर्दन काटने का इरादा रखती हो, मिस शर्मा?" उसने एक कदम और आगे बढ़ाया।
आन्या का गला सूख चुका था, लेकिन उसने अपने हाथ को कांपने नहीं दिया। उसने चाकू को और कसकर पकड़ा। "दूर... दूर रहो मुझसे! मेरे घर से बाहर निकलो, वरना... वरना मैं..."
"वरना क्या?" रणवीर ने उसकी बात बीच में ही काट दी। वह अब आन्या से महज़ दो फ़ुट की दूरी पर खड़ा था।
उसकी महक आन्या के नथुनों से टकराई—महंगे सिगार, कस्तूरी (musक) और बारिश की गीली मिट्टी का एक अजीब सा, नशीला और ख़तरनाक मिला-जुला इत्र।
रणवीर ने नीचे झुककर सीधे आन्या की आँखों में झांका। आन्या को लगा जैसे वह किसी गहरे, काले समंदर में डूब रही हो।
"समय ख़त्म हो चुका है," रणवीर ने अपनी जेब से एक सोने की पॉकेट वॉच निकाली, उसका ढक्कन बंद किया और वापस जेब में रख लिया। "पचास करोड़। नकद। अभी।"
"ह-हमें थोड़ा वक़्त दीजिए..." आन्या ने अपनी कांपती आवाज़ को समेटने की कोशिश की। "मैं... मैं पैसे दे दूंगी! मैं काम करूंगी, मैं अस्पताल में ओवरटाइम करूंगी, मैं यह फ़्लैट बेच दूंगी! मुझे बस कुछ महीनों का समय..."
"महीनों?" रणवीर की हलकी सी हंसी कमरे में गूंजी, जो किसी ज़हरीले सांप की फुफकार जैसी लग रही थी।
रणवीर ने अपना हाथ बढ़ाया। उसके पीछे खड़े एक गार्ड ने तुरंत उसे एक काली, साइलेंसर लगी हुई पिस्टल थमा दी।
रणवीर ने बिना आन्या की तरफ़ देखे, पिस्टल का रुख सीधे उसके पीछे छुपे आरव के माथे की तरफ़ कर दिया।
"आरव!" आन्या चीख पड़ी और उसने अपना शरीर आरव के आगे अड़ा दिया। "नहीं! उसे मत मारो! गलती उसकी है, लेकिन वह बच्चा है! उसे नहीं पता था!"
"माफ़िया में गलती की एक ही कीमत होती है, डॉक्टर," रणवीर ने ट्रिगर पर अपनी उंगली रखी। "और बच्चे कसीनो में पचास करोड़ का जुआ नहीं खेलते।"
"मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ!" आन्या चिल्लाई। उसकी आँखों से आंसुओं की धारा बह निकली। उसने अपनी सारी गरिमा, अपना सारा आत्म-सम्मान उस एक पल में दांव पर लगा दिया। "प्लीज़... मेरे भाई को छोड़ दो! तुम जो कहोगे मैं करूंगी! मैं अपनी पूरी ज़िंदगी तुम्हारे कर्ज़ के नाम कर दूंगी! प्लीज़..."
कमरे में सन्नाटा छा गया। सिर्फ़ आन्या के सिसकने की आवाज़ आ रही थी।
रणवीर ने पिस्टल को थोड़ा नीचे किया, लेकिन उसे वापस नहीं जेब में रखा। उसने अपनी गहरी ग्रे आँखों से आन्या को दोबारा देखा—सर से लेकर पांव तक। उसने देखा कि यह लड़की ख़ौफ़ से थर-थर कांप रही है, लेकिन फिर भी अपने भाई को बचाने के लिए मौत के सामान के आगे सीना ताने खड़ी है।
उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक आई—एक नया, ख़तरनाक ख़याल।
रणवीर ने पिस्टल अपने गार्ड को वापस दी। उसने अपने दस्ताने उतारे और अपने नंगे हाथ की सख्त, ठंडी उंगलियों से आन्या की ठुड्डी को कसकर पकड़ लिया।
उसका स्पर्श इतना ठंडा था कि आन्या की रीढ़ की हड्डी में सिहरन दौड़ गई। उसने आन्या का चेहरा थोड़ा ऊपर उठाया, ताकि उसकी पूरी रोशनी आन्या के चेहरे पर पड़े।
"तुम कुछ भी करोगी?" रणवीर ने धीमी, फुसफुसाती हुई आवाज़ में पूछा।
"हाँ... कुछ भी," आन्या ने अपनी आँखें बंद करते हुए कहा।
रणवीर उसके और करीब झुका। उसकी गर्म सांसें आन्या के गाल को छू रही थीं।
"पचास करोड़ की कीमत तुम्हारे भाई की बेकार ज़िंदगी से बहुत ज़्यादा है, मिस शर्मा," रणवीर ने कहा। "लेकिन... मुझे अपने नए महल के लिए एक ख़ास चीज़ की ज़रूरत है।"
आन्या ने अपनी आँखें खोलीं। "क-क्या?"
रणवीर के होंठों पर एक क्रूर, ख़ौफ़नाक मुस्कान आई। उसने आन्या के बालों की एक लट को अपनी उंगली में लपेटा और बहुत धीरे से, हर एक शब्द पर ज़ोर देते हुए कहा:
"मुझे एक दुल्हन चाहिए।"
आन्या का सांस वही थम गया। "क्या?"
"तुम," रणवीर ने उसकी ठुड्डी को और कसकर दबाया, जिससे आन्या को हल्का सा दर्द हुआ। "तुम मेरे साथ चलोगी। मेरे घर। मेरी दुनिया में। तुम दुनिया के सामने मेरी पत्नी का नाटक करोगी... और बंद दरवाज़ों के पीछे, तुम मेरी गुलाम रहोगी। तीन साल तक। अगर तुम राजी हो, तो तुम्हारे भाई की सांसें चलती रहेंगी। अगर नहीं..."
रणवीर ने अपनी उंगली आरव की तरफ़ उठाई, "...तो उसकी लाash आज रात ही अरब सागर की मछलियों का खाना बनेगी।"
आन्या ने पीछे मुड़कर आरव को देखा, जो ज़मीन पर पड़ा गिड़गिड़ा रहा था, "दीदी... मुझे मत मरने दो... दीदी बचा लो..."
आन्या ने वापस उस शैतान को देखा, जो उसके सामने खड़ा उसकी रूह का सौदा कर रहा था। उसके पास कोई रास्ता नहीं था। कोई उम्मीद नहीं थी। कोई दरवाज़ा खुला नहीं था।
आन्या ने एक गहरी, दर्दभरी सांस ली। उसकी आँख से एक आंसू टपक कर रणवीर के हाथ पर गिरा।
"मुझे... मंजूर है," आन्या ने बेहद धीमी, टूटी हुई आवाज़ में कहा।
रणवीर ने अपना हाथ उसके चेहरे से हटा लिया। उसने अपने कोट की अंदरूनी जेब से एक फ़ाउंटेन पेन निकाला और अपने गार्ड की तरफ़ इशारा किया। गार्ड ने तुरंत एक कागज़ आगे कर दिया—एक पहले से तैयार किया गया मैरिज और लीगल बॉन्ड।
"दस्तख़त करो," रणवीर ने पेन आन्या की तरफ़ बढ़ाया।
आन्या के हाथ इतने कांप रहे थे कि वह पेन भी ठीक से नहीं पकड़ पा रही थी। उसने कागज़ पर नीचे अपना नाम लिखा—आन्या शर्मा। हर एक अक्षर के साथ उसे लगा जैसे वह अपनी वसीयत पर दस्तख़त कर रही हो, अपनी ही मौत के परवाने पर मोहर लगा रही हो।
जैसे ही उसने दस्तख़त किए, रणवीर ने कागज़ उसके हाथ से खींच लिया। उसने कागज़ को देखा और उसे अपने कोट में रख लिया।
"बहुत बढ़िया," रणवीर ने अपने गार्ड्स की तरफ़ देखा। "लड़के को छोड़ दो। लेकिन इस पर नज़र रखो। अगर इसने शहर छोड़ने की कोशिश की, तो इसे ज़िंदा जला देना।"
To be continue