His Forgotten Promise - Chapter 1
मुंबई शहर,
भारत
मुंबई जितना सुनने में आम लगता है उतना आम ये शहर है नहीं यहां हर वक्त चका चौंध रहती है ।मुंबई शहर के अंदर कभी रात नहीं होती क्योंकि ये शहर हमेशा उजाले से भरा हुआ होता है।उसी शहर की चौखट पर बनी एक हवेली जो शहर की चकाचौंध से काफी दूर थी उस हवेली के चारों तरफ बढ़ा सा बकीचा था जिसे देखने में ही लग रहा था कि उसका ख्याल बड़े ध्यान और प्यार से किया जाता था।हवेली काफी बड़ी थी और उसकी दीवारों का रंग सफेद था उस हवेली के बाहर एक बड़े से सुनहरे बोर्ड पर लिखा था ठाकुर मेंशन। उस हवेली के बाहर कई बॉडीगार्ड्स तैनात थे । मेन गेट के सामने तैनात बॉडीगार्ड ने धीरे से एक दूसरे की तरफ देखा और फिर एक लंबी उबासी ले ली उनके चेहरे पर नींद साफ दिख रही थी उसी वक्त एक बाइक की आवाज उस इलाके में गूंजी और उस आवाज के गूंजते ही सारे बॉडीगार्ड्स को जैसे झटका सा लगा हो।वो सारे कमर सीधी कर सीधे खड़े हो गए तभी मेंशन के अंदर एक बाइक आकर रुकी और उसपर सवार सख्श ने नीचे से लेकर उपर तक काले कपड़े पहने हुए थे लेकिन उसके शरीर के आकार से साफ पता चल रहा था कि वो एक लड़की है। उस लड़की ने अपने सिर से हेलमेट उतारा और फिर उसे वहीं बाइक पर छोड़ अंदर की तरफ तेजी से भागी।दरवाजे की चौखट पर आकर उसने कमर को टेढ़ा कर पीछे की तरफ झुकते हुए उन दोनों बॉडीगार्ड्स को देखा और धीरे से दबी हुई आवाज में पूछा - बाबा घर पर है??
दोनों बॉडीगार्ड्स ने ना में सिर हिला दिया तो वो लड़की जैसे किसी संकट से आजाद हुई हो।उसने गहरी सांस ली और अब मुस्कुराते हुए अंदर बढ़ गई। हॉल में आकर उसने अपने जीते दाई तरफ रखी शु शेल्फ में रखे और सीधा बाई तरफ बनी रसोई की तरफ मुड़ गई उसने तेज आवाज में कहा - बाई...आज खाने में क्या बना है...
उसकी आवाज सुन रसोई में काम कर रही लगभग तेतीस चोतीस साल की औरत मुस्कुराते हुए उसकी तरफ मुड़ी और बोली - इनायत मेम...आप आ गई...आज आपकी मनपसंद खीर बनी है...
ये है समाथा जो जब से इनायत की माँ गुजरी थी तब से लेकर आज तक इनायत का ख्याल रखती आई है। इनायत रसोई के स्लैब पर बैठ गई और बनती खीर को दूर से सूंघते हुए बोली - वाह वाह वाह बाई...आपका जवाब नहीं आपको कैसे पता चल जाता है कि आज मैं एक अच्छा काम करके आई हु और मुझे तोफ़ा मिलना चाहिए...
उसकी बात सुन समाथा के काम करते हाथ रुक गए उसने इनायत की तरफ गर्दन घुमाई और कहा - आज क्या नया कांड करके आई है आप...
इनायत ने लापरवाही से हाथ उठाते हुए कहा - जस्ट नथिंग बस मैंने ...
तभी एक तेज मर्दाना आवाज हॉल से आई जिसे सुन इनायत के कंधे हल्के से झुक गए और उसने धीरे से कहा - इतनी जल्दी भी नहीं मांगा था तौफा...वो समाथा की तरफ मुड़ी और धीरे से बोली - प्लीज सिर्फ आज आखिरी बार...
कुछ देर बाद इनायत का नाम चिल्लाते हुए लगभग पैंतालीस साल के सख्श रसोई में घुसे उन्होंने समाथा की तरफ देखकर पूछा - इनायत कहां है...
समाथा एक पल के लिए घबराई और फिर उसने कहा - साहब वो तो अपने कमरे में हैं...
उस आदमी से उन्हें छोटी आंखों से घूरते हुए कहा - अगर मुझे पता चला कि इस बार तुमने उसे बचाने की कोशिश करी तो उसके साथ साथ इस बार तुम्हे भी सजा मिलेगी..
वो कुछ और कहते तभी पीछे से एक पतली सी आवाज आई वो आदमी पीछे मुड़ा तो सामने इनायत खड़ी थी लेकिन इस वक्त उसका भेष बिलकुल बदल चुका था अब उसने ढीली डाली काले रंग की बाजू तक की टी शर्ट पहनी हुई थी और नीचे उसी रंग का ढीला सा पजामा उसके बालों का मैसी जुड़ा बना हुआ था जिससे निकलती लटों ने इनायत का पूरा माथा ढक लिया था वैसे तो उसका रंग हमेशा से साफ गेहुआ था लेकिन उन कपड़ों में वो काफी प्यारी लग रही थी। इनायत ने अपनी जेब में हाथ डालते हुए कहा - क्या बाबा...क्या हुआ जो अब आपके अंदर का स्पीकर आउट ऑफ कंट्रोल हो गया...
उस आदमी यानी अनिकेत ठाकुर ने उसकी तरफ कदम बढ़ाए और उसे घूरते हुए कहा - कहां थी तुम...
इनायत लापरवाही से बोली - कमरे में... इवेन आपकी आवाज सुनकर मैं नीचे आई ही मां कसम कितना चिल्लाते है आप...
अनिकेत ठाकुर ने उसे घूरा और आगे बढ़कर उसका कान पकड़ लिया उन्होंने कहा - झूठ मत बोलो मैंने खुद तुम्हारी बाइक रेसिंग की वीडियो देखी है....इनायत करहाते हुए अपना कान छुड़वाने लगी तो अनिकेत ठाकुर ने उसका कान छोड़ा और आगे कहा - तुम्हे कितनी बार समझाया है कि बाइक रेसिंग जैसी खतरनाक चीजें मत करा करो...तुम्हारी जिद्द की वजह से मैंने तुम्हे बाइक दिलाई थी ना कि ये सब करने के लिए...
इनायत ने सिर झुका लिया और धीरे से बोली - लास्ट टाइम माफ़ कर दीजिए...
अनिकेत ठाकुर ने उसे घूरा और कहा - और तुम्हारे बॉडीगार्ड का क्या...उसका क्या नया बहाना सोचकर बैठी हो तुम...
इनायत ने एकदम से कहा - बाबा ही डिजर्व है..उससे खुद की तो प्रोटेक्शन होती नहीं मेरी क्या खाक करेगा एंड आई डोंट लाइक हिम इवेन अ लिटिल बीट...
आखिरी लाइन उसने सिर झुका धीरे से कही तो अनिकेत ठाकुर ने लाचारी से सिर हिला दिया और बाहर की तरफ जाते हुए कहा - अब एक हफ्ते तक तुम्हारी बाइक बंद...
इनायत अचानक से बोली - बाबा....
अनिकेत ठाकुर ने आगे कहा - ठीक है एक महीने के लिए...
इनायत ने उनके पीछे जाते हुए कहा - फाइन एक हफ्ता ही ठीक है...उसने समाथा की तरफ देखा और कहा - बाई अब मेरे लिए खीर ला दीजिए ....
अनिकेत ठाकुर ने सीढ़ियों से अपने कमरे की तरफ जाते हुए कहा - तुम्हे आज खीर भी नहीं मिलेगी...
इनायत का पूरा मुंह बिगड़ गया उसने लाचारी से समाथा की तरफ देखा तो समाथा ने दोनों हाथों को उठा दिया
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सुबह के नौ बजने को थे जब इनायत की नींद किसी शोर से खुली उसने पहले तो कंभल मुंह पर रख लिया लेकिन जब आवाज आनी बंद नहीं हुई तो कुढ़कर वो उठी और बालकनी की तरफ बढ़ी।उसने जैसे ही बालकनी का दरवाजा खोला उसकी नजरे दो गहरी नीली नजरों से जा टकराई और इनायत के शरीर में जिसे सिरहन सी दौड़ उठी...
आगे क्या मोड लेगी ये कहानी....जानने के लिए पढ़ते रहिए....