His Forgotten Promise - Chapter 2
सुबह के नौ बजने को थे जब तेज लगातार शोर की आवाज से बिस्तर में दुबकी इनायत की नींद झटके से खुली ।पहली आवाज में उसने अपना कंभल कुढ़कर चेहरे पर डाल लिया और करवट बदल वापिस सो गई लेकिन जब काफी देर तक आवाजें आती रही तो इनायत की नींद पूरी तरह टूट गई उसके चिढ़कर कंभल फेंका और आवाज का पीछा करते हुए बाल्कनी का दरवाजा खोल नीचे की तरफ देखा।उसका कमरा दूसरी मंजिल पर बना हुआ था और उसकी बाल्कनी से पूरा बकीचा और सामने मौजूद पहाड़ और जंगल दिखता था ।इनायत को हमेशा से ही नेचर से जुड़ाव रहा था इसीलिए उसने अपने कमरे की ये दिशा रखी थी लेकिन उससे बिल्कुल उलट उसके कमरे का हाल बेहाल था।स्टडी टेबल पर किताबें अस्थ व्यस्त फैली हुई थी।दाई तरफ मौजूद काउच पर वीडियो गेम पड़ा हुआ था और पूरे कमरे का सामान बिखरा हुआ था जैसे कोई भूकंप आया हो।
इनायत ने बालकनी से नीचे की तरफ देखा तो उसकी नजर मेंशन के मेन गेट के सामने मौजूद जगह पर पड़ी जहां दो इंसान खड़े थे एक की पीठ उसकी तरफ थी लेकिन फिर भी वो जानती थी कि वे अनिकेत ठाकुर है और दूसरा सख्श जिसकी उम्र पच्चीस साल की रही होगी ।उसका शरीर आम लोगों के मुकाबले काफी गठीला और सख्त था।उसकी हाइट यहीं कहीं छह फुट दो एक इंच के आस पास की होगी । उसके बाल सलीके से पीछे किए हुए थे ।उसने काले रंग का थ्री पिस सूट पहना हुआ था और उसके गले से होते हुए एक स्पीकर उसके कान पर लगा हुआ था। इनायत को ये समझते देर नहीं लगी कि ये और कोई नहीं बल्कि उसके बाबा का चुना अगला बॉडीगार्ड है लेकिन जो बात इनायत को उसकी तरफ खींच रही थी वो थी उसकी गहरी नीले रंग की आखें ।इनायत की नजरे उसकी आंखों पर जैसे जम गई हो ।उन आंखों को देखकर इनायत के शरीर में जैसे सिरहन दौड़ पड़ी हो उसी वक्त उस सख्श की नज़र भी बाल्कनी से होती हुई इनायत पर पड़ी। इनायत का चेहरा देखकर साफ लग रहा था कि वो अभी अभी उठकर आई है जैसे ही उस सख्श ने इनायत की तरफ देखा इनायत ने तुरंत नजरे फेर ली और अंदर कमरे में चली गई।वो सख्श भी अनिकेत ठाकुर की तरफ मुड़ गया।
करीब आधे घंटे बाद जब इनायत सीढ़ियों से नीचे उतरती हुई आ रही थी उस हाथ में उसका फोन था जिसमें वो लगातार कुछ करते हुए नीचे उतर रही थी।उसकी नजरे सीढ़ियों पर कम फोन में ज्यादा थी।उसे देख सोफे पर बैठे अखबार पढ़ रहे अनिकेत ठाकुर ने बिना ऊपर की तरफ देखे कहा - कितनी बार बोला है सीढ़ियों से नीचे उतरती वक्त फोन मत देखा करो...
इनायत ने तुरंत फोन जेब में डाला और डाइनिंग टेबल की तरफ बढ़ गई उसने कहा - बाई जल्दी से मेरा खाना ले आइये..
समाथा उसके पास आकर उसका खाना परोसने लगी इनायत ने अभी एक निवाला खाया ही था कि उसके हाथ खाते खाते रुक गए उसने समाथा की तरफ देखा तो समाथा ने अनजाने भाव से उसकी तरफ देखा। इनायत उठी और अनिकेत ठाकुर की तरफ बढ़ते हुए उसने अपनी आवाज में दुनिया भर की मिठास घोलते हुए कहा - बाबा...मुझे यूनिवर्सिटी जाना है...
अनिकेत ठाकुर ने अपनी नजरे अखबर से हटाए बिना कहा - तो जाओ मना किसने किया है..
इनायत ने चेहरे पर उदासी के भाव लाते हुए कहा - बट आपने मेरी बाइक की चाबी मुझसे छीन ली है मैं जाऊँगी कैसे...रहीं बात ड्राइवर की तो उनकी खुद पिछले हफ्ते से हालत खराब है वो क्या मुझे छोड़ेंगे...
अनिकेत ठाकुर ने अपना अखबार बगल में रखा और चेहरे पर बड़ी सी मुस्कुराहट लाते हुए कहा - उसकी फिक्र तुम मत करो...तुम्हे वो छोड़ कर आएगा...
कहते हुए उन्होंने इनायत के पीछे की तरफ इशारा कर दिया तो इनायत की भी नजरे पीछे की तरफ चली गई जहां से वहीं लड़का उनकी तरफ आ रहा था ।उसके चेहरे पर सर्द भाव थे।उसने उनके करीब आकर अनिकेत ठाकुर की तरफ देख पलके झपका दी तो अनिकेत ठाकुर बोले - आज से तुम्हे यूनिवर्सिटी लेने का और तुम्हे छोड़कर आने का सारा जिम्मा इसका है... ही इज़ योर न्यू बॉडीगार्ड...एंड इफ यू डेयर टू ब्लैकमेल हिम ही विल हैंडल यू... ही इज़ कियान सिंह चौहान..
इनायत का मुंह हल्का सा खुल गया उसने टेडी नजरों से उस कियान की तरफ देखा तो कियान ने भी टेडी नजरे उसपर डाली।इनायत ने उसे एक पल घूरा और तुरंत नजरे फेर पैर पटकते हुए उपर अपने कमरे की तरफ चली गई।उसके जाने के बाद अनिकेत ठाकुर ने कियान की तरफ देखकर कहा - शी इज़ नाउ योर रिस्पांसबिलिटी... मैने तुम्हे यहां इसीलिए बुलाया क्योंकि तुम्हारे सिवा यहां कोई और नहीं है जिसपर मैं कभी भी भरोसा कर पाऊंगा...
कियान ने सहज भाव से कहा - आप फिक्र मत करो बाबा उसका ख्याल रखने के लिए आपको मुझे कहने की जरूरत नहीं है...
अनिकेत ठाकुर सिर हिला अपने स्टडी रुम की तरफ चले गए वहीं कियान के इनायत के कमरे के बंद दरवाजे की तरफ देखा और कहा - तुम बेशक मुझे भूल चुकी हो लेकिन मैं ना तुम्हे भूला हु और ना तुमसे किया वादा...
कुछ देर बाद इनायत कमरे से निकली तो उसने काले रंग की बंद गले की स्वेटर के साथ उसी रंग की पेंट पहनी हुई थी उसने अपने बालों को खुला छोड़ा हुआ था जिससे उसके कंधे से थोड़ा नीचे तक के बाल साफ हवा में लहरा रहे थे।उसके बालों ने उसके पूरे माथे को ढका हुआ था और उने उसके ऊपर एक लंबा सा काले रंग का कोट पहना हुआ था।उसने एक नजर कियान की तरफ देखा उसके चेहरे पर हालांकि कियान के लिए नाराजगी साफ दिख रही थी लेकिन जैसे ही उसकी नजर कियान की नीली नजरों से मिली उसे फिर से अपने शरीर में सिरहन सी महसूस हुई ।उसने तुरंत अपनी नजरे फेरी और कहा - लेट्स गो न्यू बॉडीगार्ड!!
कियान ने सिर झुका लिया और उसके होठों के कोने हल्के से उठ गए वो उसके पीछे पीछे चल दिया। लगभग बीस तीस मिनट के बाद उनकी गाड़ी एक बड़ी सी यूनिवर्सिटी के सामने आकर रुकी जिसके उपर बड़े बड़े अक्षरों में लिखा था " जेवियर यूनिवर्सिटी" इनायत बिना देरी किए गाड़ी से उतरी तो ड्राइविंग सीट से कियान भी उतरा। इनायत अंदर की तरफ बढ़ने लगी तभी वो रुकी और उसने मुड़कर कियान की तरफ देखकर कहा - आज के बाद तुम्हे मुझे लाने की या मुझे पिक अप करने की कोई जरूरत नहीं है...
कियान सहज भाव से बोला - इट्स माई...
वो कह ही रहा था कि तभी उसने इनायत की कलाई पकड़ी और एक हाथ उसकी कमर पर रख कार की दीवार से लगा दिया...
आगे क्या मोड लेगी ये कहानी...जानने के लिए पढ़ते रहिए....