My Strict Professor - Chapter 2
chapter 2 – पहली टक्कर
कॉरिडोर में हलचल बढ़ चुकी थी। नए छात्र अपने-अपने विभाग ढूँढ़ रहे थे। कोई टाइम-टेबल देख रहा था, तो कोई क्लासरूम नंबर।
"जल्दी चल, आयरा!" मीरा ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा।
"ओरिएंटेशन शुरू होने वाला है।"
"बस... दो मिनट।" आयरा ने अपनी फाइल ठीक करते हुए जवाब दिया।
उसी समय उसके हाथ से एक कागज़ नीचे गिर गया।
वह झुककर उसे उठाने लगी, लेकिन सामने से तेज़ क़दमों से कोई आ रहा था।
धप्प!
दोनों की हल्की-सी टक्कर हो गई।
आयरा की पूरी फाइल ज़मीन पर बिखर गई।
कुछ कागज़ हवा में उड़कर दूर तक चले गए।
"ओह नो..." आयरा घबराकर उन्हें समेटने लगी।
सामने खड़ा आदमी लंबा, गंभीर और पूरी तरह शांत था। उसने काला सूट पहन रखा था। उसकी कलाई पर महँगी घड़ी थी और चेहरे पर ऐसा भाव, मानो दुनिया की कोई चीज़ उसे प्रभावित नहीं कर सकती।
आयरा ने बिना ऊपर देखे कहा,
"देखकर नहीं चल सकते क्या?"
कुछ पल तक कोई जवाब नहीं आया।
जब उसने सिर उठाया, तो सामने खड़े व्यक्ति की ठंडी नज़रें सीधे उसी पर टिकी थीं।
"रास्ता तुम्हारे सामने भी था।"
उसकी आवाज़ धीमी थी, लेकिन इतनी सख़्त कि आसपास खड़े दो-तीन छात्र भी पलटकर देखने लगे।
आयरा पहले ही देर होने की वजह से परेशान थी।
वह झुँझलाकर बोली,
"वाह! गलती आपकी और इल्ज़ाम मुझ पर?"
सामने वाला व्यक्ति बिल्कुल नहीं बदला।
"पहले सच देखो... फिर फैसला करो।"
आयरा ने गहरी साँस ली।
"हाँ, समझ गई... महँगे कपड़े पहन लेने से लोग खुद को हमेशा सही समझने लगते हैं।"
पास खड़े एक सिक्योरिटी गार्ड के चेहरे का रंग उड़ गया।
उसे लगा अब ज़रूर कोई बड़ा झगड़ा होगा।
लेकिन उस व्यक्ति ने सिर्फ़ एक पल आयरा को देखा।
उसकी आँखों में पहली बार हल्की-सी हैरानी थी।
शायद इसलिए...
क्योंकि आज तक किसी ने उससे इस लहजे में बात करने की हिम्मत नहीं की थी।
आयरा ने जल्दी-जल्दी अपने कागज़ उठाए।
जाते-जाते वह बड़बड़ाई,
"कितने घमंडी इंसान हैं..."
वह तेज़ी से आगे बढ़ गई।
कुछ सेकंड तक वह व्यक्ति वहीं खड़ा रहा।
फिर उसने पीछे खड़े स्टाफ़ सदस्य से पूछा,
"ये नई स्टूडेंट है?"
"जी... सर। आज ही एडमिशन हुआ है।"
उसने एक बार फिर उस दिशा में देखा, जहाँ आयरा जा चुकी थी।
मन ही मन उसने सोचा,
"इतना आत्मविश्वास... या फिर ज़रूरत से ज़्यादा ज़िद?"
उधर वह व्यक्ति भी उसी दिशा में बढ़ रहा था।
उसके चेहरे पर हमेशा की तरह सख़्ती थी, लेकिन इस बार उसके मन में सिर्फ़ एक ही सवाल घूम रहा था।
"ये लड़की आखिर है कौन...? पहली मुलाकात में ही इतनी बेबाकी से बात कर गई।"
वह हल्का-सा रुका।
"या तो इसे किसी बात का बिल्कुल डर नहीं... या फिर ये खुद को ज़रूरत से ज़्यादा समझती है।"
उसने अपनी घड़ी की ओर देखा और बिना कुछ कहे आगे बढ़ गया।
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कुछ ही देर बाद...
कॉमर्स विभाग की पहली क्लास शुरू होने वाली थी। 📚
आयरा और मीरा जल्दी-जल्दी क्लासरूम में पहुँचीं और बीच वाली सीट पर बैठ गईं।
पूरा क्लासरूम नए छात्रों की आवाज़ों से गूंज रहा था।
"सुना है इस कॉलेज के प्रोफेसर्स बहुत स्ट्रिक्ट हैं।"
"हाँ, खासकर कॉमर्स डिपार्टमेंट वाले।"
"कहते हैं उनकी क्लास में पूरा अनुशासन रहता है।"
मीरा धीरे से आयरा के कान में बोली,
"बस भगवान करे... आज पहला दिन आराम से निकल जाए।"
आयरा मुस्कुराकर बोली,
"इतना भी क्या डरना?"
तभी...
क्लासरूम का दरवाज़ा खुला।
पूरा कमरा एकदम शांत हो गया।
एक लंबा, गंभीर व्यक्तित्व ब्लैक सूट में अंदर आया।
उसके हाथ में कुछ फाइलें थीं और चेहरे पर वही सख़्त भाव।
आयरा की नज़र जैसे ही उस पर पड़ी...
उसका चेहरा एकदम फीका पड़ गया।
"ये...!"
उसके मन में सुबह का पूरा दृश्य बिजली की तरह घूम गया।
"यही... वही इंसान है!"
मीरा ने धीरे से पूछा,
"क्या हुआ?"
आयरा ने बिना उसकी तरफ़ देखे बहुत धीमी आवाज़ में कहा,
"कुछ नहीं..."
लेकिन उसके हाथ अनजाने में फाइल को और कसकर पकड़ चुके थे।
उधर रुद्र की नज़र भी पूरी क्लास पर घूमते-घूमते एक पल के लिए आयरा पर ठहर गई।
दोनों की नज़रें मिलीं।
बस एक पल के लिए...
फिर रुद्र ने बिना कोई भाव बदले अपनी नज़र हटा ली।
लेकिन आयरा समझ चुकी थी...
सुबह जिससे उसकी बहस हुई थी...
वही आज उसकी पहली क्लास लेने वाला प्रोफेसर था।
और उसके मन में सिर्फ़ एक ही ख़याल चल रहा था—
"हे भगवान... पहले ही दिन मैं किस मुसीबत में फँस गई..."
आायरा न 蜥र से गहरी सॉঁर ली ओर अपनी न्ज़रें नीचे झुब
पूरे क्लासर्ूमर में एक् आजीब-सी ा카 可 Tहथसामने खडा बह ब्य# किसी आम प्ोफेरसर जैसा बिलहुलनहीं लग रहा था।
लगभग 6'7inch '.. और फिट शरीर...
रुद्र ने पूरे क्लासरूम पर एक नज़र डाली। उसकी गंभीर आँखें हर छात्र पर कुछ पल ठहरीं, मानो वह पहले ही दिन सबको परख रहा हो।
उसने शांत लेकिन दृढ़ आवाज़ में कहा,
"Good Morning, Everyone."
पूरी क्लास एक साथ बोली,
"Good Morning, Sir."
"मैं रुद्र राज सिंह हूँ। आज से मैं आप सभी को Commerce पढ़ाऊँगा।"
वह कुछ पल रुका, फिर बोला,
"मेरी क्लास के कुछ नियम हैं... और मुझे उम्मीद है कि आप सभी उनका सम्मान करेंगे।"
"पहला नियम—समय की पाबंदी।"
"मेरी क्लास शुरू होने के बाद अगर कोई छात्र अंदर आने की कोशिश करेगा, तो उसे सीधे बाहर जाना होगा।"
"दूसरा नियम—अनुशासन।"
"क्लास में फालतू बातें, बिना वजह हँसी-मज़ाक, मोबाइल फोन या किसी भी तरह का व्यवधान मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है।"
"तीसरा नियम—ईमानदारी।"
"अगर कोई बात नहीं आती, तो बेझिझक पूछिए। लेकिन बहाने बनाकर अपनी ज़िम्मेदारी से बचने की कोशिश मत कीजिए।"
उसकी आवाज़ पूरी क्लास में साफ़ गूँज रही थी।
"मेरी क्लास में नियमित उपस्थिति अनिवार्य है। बिना उचित कारण के छुट्टी लेना या लेक्चर छोड़ना स्वीकार नहीं किया जाएगा।"
"असाइनमेंट समय पर पूरे होंगे। प्रोजेक्ट समय पर जमा होंगे। और सबसे ज़रूरी बात..."
उसने पूरी क्लास की तरफ़ देखा।
"यहाँ हर छात्र अपनी मेहनत से पहचाना जाएगा, किसी की सिफ़ारिश या बहानों से नहीं।"
कुछ पल के लिए पूरा कमरा बिल्कुल शांत हो गया।
रुद्र ने अपनी फाइल खोली और हल्के से कहा,
"अगर ये नियम आपको कठिन लगते हैं, तो अभी से खुद को तैयार कर लीजिए... क्योंकि पूरे सेमेस्टर में ये बदलने वाले नहीं हैं।"
इतना कहकर उसने बिना समय गंवाए अपना पहला लेक्चर शुरू कर दिया।
पूरी क्लास ध्यान से उसकी बातें सुन रही थी। किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि बिना वजह एक शब्द भी बोले।
क्रमशः...