शैडो किंग की दुल्हन - Chapter 2
धड़ाम...!
पूरा भूमिगत तहखाना विस्फोट से काँप उठा।
पत्थरों के बड़े-बड़े टुकड़े छत से गिरने लगे। लाल इमरजेंसी लाइट लगातार चमक रही थी और सायरन की आवाज़ पूरे परिसर में गूँज रही थी।
रुद्र ने बिना एक पल गंवाए आर्या का हाथ पकड़ा।
"मेरी तरफ देखो!"
डरी हुई आर्या ने उसकी आँखों में देखा।
"जो भी हो... मेरा हाथ मत छोड़ना।"
अगले ही पल एक और धमाका हुआ।
धड़ाम!
दोनों के बीच ज़मीन फट गई, लेकिन रुद्र ने पूरी ताकत से आर्या को अपनी ओर खींच लिया।
धूल का घना बादल चारों ओर फैल गया।
साँस लेना मुश्किल हो गया।
तभी रुद्र ने अपने ईयरपीस में कहा—
"कबीर, इमरजेंसी एग्ज़िट खोलो!"
कुछ सेकंड बाद जवाब आया—
"सर, मुख्य रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है।"
"दूसरा रास्ता?"
"पुरानी सुरंग... लेकिन वहाँ तक पहुँचने के लिए आपको पश्चिमी गलियारे से जाना होगा।"
रुद्र ने तुरंत दिशा बदली।
---
वे दोनों अँधेरी सुरंग में दौड़ रहे थे।
आर्या की साँसें तेज़ थीं।
"तुम्हें पहले से कैसे पता था कि यहाँ दूसरा रास्ता है?"
रुद्र कुछ पल चुप रहा।
फिर बोला—
"क्योंकि... यह जगह मैंने ही बनवाई थी।"
आर्या रुक गई।
"क्या?"
"चलो!"
"नहीं! पहले सच बताओ!"
रुद्र ने उसकी ओर देखा।
"अगर अभी रुके... तो सच सुनने के लिए हम ज़िंदा नहीं बचेंगे।"
आर्या मजबूर होकर उसके साथ दौड़ पड़ी।
---
उधर...
चर्च के बाहर पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ पहुँच चुकी थीं।
लेकिन किसी को समझ नहीं आ रहा था कि नीचे क्या हो रहा है।
कबीर ने अपने लोगों को आदेश दिया—
"कोई पुलिस नीचे नहीं जाएगी।"
एक अधिकारी गुस्से में बोला—
"आप होते कौन हैं रोकने वाले?"
कबीर ने सिर्फ़ अपना पहचान-पत्र दिखाया।
अधिकारी का चेहरा तुरंत बदल गया।
उसने बिना कुछ कहे अपने जवानों को पीछे हटने का आदेश दे दिया।
आर्या ने दूर से यह सब देखा।
उसके मन में एक ही सवाल उठा—
रुद्र की असली पहचान आखिर है क्या?
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सुरंग के आखिर में एक विशाल लोहे का दरवाज़ा दिखाई दिया।
रुद्र ने दीवार पर हथेली रखी।
बीप...
एक छिपा हुआ स्कैनर सक्रिय हुआ।
कुछ ही सेकंड बाद भारी दरवाज़ा धीरे-धीरे खुल गया।
अंदर एक अत्याधुनिक नियंत्रण कक्ष था।
विशाल स्क्रीन, कंप्यूटर, डिजिटल नक्शे और हथियारों से लैस दर्जनों लोग।
जैसे ही रुद्र अंदर आया...
सभी एक साथ खड़े हो गए।
"Welcome back, Shadow King."
आर्या स्तब्ध रह गई।
अब उसे पहली बार एहसास हुआ—
यह कोई साधारण बिज़नेसमैन नहीं...
एक पूरी गुप्त दुनिया का शासक था।
उसी समय सबसे बड़ी स्क्रीन अपने-आप चालू हुई।
स्क्रीन पर एक महिला दिखाई दी।
उसने काला नकाब पहन रखा था।
उसकी सिर्फ़ नीली आँखें दिखाई दे रही थीं।
वह मुस्कुराई।
"हेलो, रुद्र..."
"बीस साल बाद मिलकर कैसा लगा?"
कमरे का माहौल अचानक ठंडा पड़ गया।
रुद्र की आवाज़ पहले से भी कठोर हो गई।
"ब्लैक क्वीन..."
"तुम वापस क्यों आई हो?"
महिला हल्के से हँसी।
"अपना अधूरा खेल पूरा करने।"
फिर उसने कैमरे की तरफ झुककर कहा—
"और इस बार..."
"...मैं सिर्फ़ तुम्हें नहीं..."
"...तुम्हारी दुल्हन को भी छीन लूँगी।"
स्क्रीन अचानक काली हो गई।
पूरा कंट्रोल रूम खामोश था।
रुद्र ने अपनी मुट्ठी इतनी ज़ोर से भींची कि उसके घायल हाथ से फिर से खून बहने लगा।
आर्या ने पहली बार महसूस किया—
यह लड़ाई सिर्फ़ वर्तमान की नहीं...
बीस साल पुराने ऐसे रहस्य की है, जिसके कारण अब हर किसी की जान खतरे में है।
कंट्रोल रूम में सन्नाटा छाया हुआ था।
सैकड़ों डिजिटल स्क्रीन लगातार दुनिया के अलग-अलग शहरों की लाइव फ़ीड दिखा रही थीं। हर स्क्रीन पर एक अलग मिशन, एक अलग टीम और एक अलग कोड चल रहा था।
आर्या ने चारों ओर नज़र दौड़ाई।
दीवार पर चाँदी के अक्षरों में एक प्रतीक बना था—
⚜ SHADOW ORDER ⚜
उसके नीचे एक पंक्ति लिखी थी—
"अंधेरे में न्याय, रोशनी में मौन।"
"शैडो ऑर्डर...?" आर्या ने धीरे से पढ़ा।
रुद्र उसकी ओर मुड़ा।
"हाँ।"
"यह कोई कंपनी नहीं... और न ही कोई गैंग है।"
"तो फिर?"
"यह एक गुप्त संगठन है... जो उन अपराधियों का पीछा करता है, जिन तक कानून नहीं पहुँच पाता।"
आर्या अविश्वास से उसे देखती रह गई।
"और... तुम इसके लीडर हो?"
रुद्र ने कोई जवाब नहीं दिया।
लेकिन कमरे में मौजूद सभी लोगों ने एक साथ सिर झुका दिया।
यही जवाब था।
---
उसी समय...
एक युवा महिला तेज़ी से अंदर आई।
उसने काला कॉम्बैट सूट पहन रखा था।
"सर!"
"रिपोर्ट।"
"ब्लैक क्वीन का सिग्नल फिर से ट्रेस हुआ है।"
उसने स्क्रीन पर शहर का नक्शा खोल दिया।
लाल बिंदु एक जगह पर चमक रहा था—
शेखावत मैनर।
कबीर चौंक गया।
"सर... वह आपकी हवेली में कैसे...?"
रुद्र की आँखें सिकुड़ गईं।
"वह हमें वहाँ बुला रही है।"
---
आर्या ने पहली बार उस महिला की ओर देखा।
"ये कौन हैं?"
महिला मुस्कुराई।
"मैं मीरा हूँ।"
"शैडो ऑर्डर की ऑपरेशन कमांडर।"
"और अगर कोई रुद्र सर को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करे..."
"...तो पहले उसे मुझसे लड़ना होगा।"
आर्या को पहली बार एहसास हुआ कि रुद्र अकेला नहीं था।
उसके पीछे एक पूरी सेना थी।
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कुछ देर बाद...
रुद्र अपने निजी मेडिकल रूम में बैठा था।
डॉक्टर उसके कंधे की गोली निकाल रहे थे।
लेकिन उसके चेहरे पर दर्द का एक भी भाव नहीं था।
आर्या बाहर खड़ी यह सब देख रही थी।
मीरा उसके पास आई।
"डर गई हो?"
आर्या ने धीमे से सिर हिलाया।
"मुझे समझ नहीं आ रहा... मैं आखिर इस सब में क्यों फँस गई हूँ?"
मीरा कुछ पल चुप रही।
फिर बोली—
"तुम फँसी नहीं हो..."
"...तुम इस कहानी की वजह हो।"
"क्या मतलब?"
"काश मैं बता पाती..."
"लेकिन वह सच सिर्फ़ रुद्र सर ही बता सकते हैं।"
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इसी बीच...
कंट्रोल रूम में अचानक अलार्म बज उठा।
Warning! Warning! Security Breach!
एक स्क्रीन अपने-आप चालू हुई।
हवेली के मुख्य गेट पर दस काली एसयूवी आकर रुकी थीं।
उनसे हथियारबंद लोग उतर रहे थे।
उनकी जैकेट पर एक लाल साँप का निशान बना था।
कबीर की आवाज़ गूँज उठी—
"सर!"
"ब्लैक सर्पेंट सिं****ेट!"
रुद्र ने तुरंत अपनी जैकेट उठाई।
"सभी टीमें तैयार करो।"
"लेकिन सर... आप घायल हैं।"
"घाव बाद में भर जाएगा..."
"...अगर आज दुश्मन बच गया तो कल बहुत लोग मरेंगे।"
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रुद्र ने अपनी कमर से एक काली पिस्तौल निकाली।
उसने दूसरी पिस्तौल आर्या की ओर बढ़ाई।
आर्या पीछे हट गई।
"मैं... मैं हथियार नहीं चला सकती।"
रुद्र ने पिस्तौल वापस रख दी।
"और मैं चाहता भी नहीं कि तुम चलाओ।"
उसने अपनी जेब से एक चाँदी का लॉकेट निकाला।
"इसे पहन लो।"
"ये क्या है?"
"जब तक यह तुम्हारे पास है..."
"...शैडो ऑर्डर का हर सदस्य अपनी जान देकर भी तुम्हारी रक्षा करेगा।"
आर्या ने काँपते हाथों से लॉकेट पहन लिया।
उसे नहीं पता था कि यह कोई साधारण लॉकेट नहीं...
बल्कि शैडो ऑर्डर की महारानी का प्रतीक था।
जिसे आज तक...
रुद्र के अलावा किसी ने कभी नहीं छुआ था।
उसी समय हवेली के बाहर पहली गोली चली।
धाँय!
और शैडो ऑर्डर तथा ब्लैक सर्पेंट सिं****ेट के बीच वर्षों पुरानी जंग फिर से शुरू हो गई...
धाँय...! धाँय...!
हवेली के मुख्य द्वार पर गोलियों की आवाज़ लगातार गूँज रही थी।
ब्लैक सर्पेंट सिं****ेट के दर्जनों हथियारबंद लोग बख़्तरबंद गाड़ियों की आड़ लेकर आगे बढ़ रहे थे।
दूसरी ओर, शैडो ऑर्डर के सदस्य अनुशासित ढंग से अपनी-अपनी पोज़िशन ले चुके थे।
कंट्रोल रूम में विशाल स्क्रीन पर पूरी हवेली का लाइव दृश्य दिखाई दे रहा था।
कबीर ने तेज़ आवाज़ में आदेश दिया—
"टीम अल्फ़ा, पश्चिमी गेट की सुरक्षा करो।"
"टीम ब्रावो, छत पर स्नाइपर तैनात करो।"
"टीम चार्ली, मैडम आर्या को सुरक्षित क्षेत्र में ले जाओ।"
आर्या ने तुरंत कहा, "मैं कहीं नहीं जाऊँगी।"
कबीर ने उसकी ओर देखा।
"मैडम, यह सिर्फ़ हमला नहीं है। दुश्मन का पहला लक्ष्य आप हैं।"
आर्या कुछ कह पाती, उससे पहले रुद्र वहाँ आ गया।
उसने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन ली थी। कंधे पर पट्टी बँधी थी, लेकिन उसके चेहरे पर वही अटूट आत्मविश्वास था।
उसने शांत स्वर में कहा—
"आर्या, मेरे साथ चलो।"
"नहीं।"
"अगर मैं हमेशा भागती रहूँगी, तो सच कभी नहीं जान पाऊँगी।"
रुद्र कुछ क्षण उसे देखता रहा।
फिर पहली बार उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।
"ठीक है..."
"लेकिन आज से तुम मेरे हर आदेश का पालन करोगी।"
आर्या ने सिर हिला दिया।
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इसी बीच...
हवेली के बाहर खड़ा ब्लैक सर्पेंट का कमांडर दूरबीन से अंदर देख रहा था।
उसके चेहरे पर लंबा निशान था।
उसने वायरलेस पर कहा—
"याद रखो... शैडो किंग को मारना ज़रूरी नहीं।"
"हमें सिर्फ़ लड़की चाहिए।"
"ज़िंदा।"
उसके शब्द सुनकर उसके सभी लोग एक साथ आगे बढ़ गए।
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अचानक...
हवेली की बिजली चली गई।
पूरा परिसर अँधेरे में डूब गया।
कुछ ही सेकंड बाद लाल इमरजेंसी लाइटें जल उठीं।
आर्या घबरा गई।
"क्या हुआ?"
मीरा ने तुरंत जवाब दिया—
"उन्होंने पावर ग्रिड उड़ा दिया है।"
तभी कंट्रोल रूम की सबसे बड़ी स्क्रीन पर एक संदेश उभरा—
WELCOME, SHADOW KING
उसके नीचे एक उलटी गिनती शुरू हो गई—
15:00
कबीर चौंक गया।
"सर... यह टाइमर किस चीज़ का है?"
रुद्र की आँखें सिकुड़ गईं।
"वे हमें भटकाना चाहते हैं..."
"लेकिन असली हमला अभी बाकी है।"
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उसी समय...
हवेली की सबसे ऊपरी मंज़िल पर एक खिड़की धीरे से खुली।
काले कपड़ों में एक नकाबपोश अंदर घुसा।
उसने अपने बैग से एक छोटा धातु का बॉक्स निकाला और उसे दीवार के अंदर छिपा दिया।
फिर वह बिना कोई निशान छोड़े वापस अँधेरे में गायब हो गया।
किसी ने उसे देखा नहीं...
सिवाय हवेली के पुराने सुरक्षा कैमरे के।
लेकिन उस कैमरे की रिकॉर्डिंग अचानक अपने-आप डिलीट हो गई।
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रुद्र के निजी कार्यालय में...
रुद्र अपनी मेज़ के पास पहुँचा।
उसने मेज़ के नीचे छिपा एक छोटा-सा बटन दबाया।
दीवार धीरे-धीरे खुली।
अंदर एक गुप्त कमरा था।
कमरे के बीचों-बीच एक काँच का केस रखा था।
उसमें एक पुरानी डायरी और एक चाँदी की अंगूठी रखी थी।
आर्या ने उत्सुकता से पूछा—
"ये क्या है?"
रुद्र ने बहुत धीरे कहा—
"यही वह चीज़ है..."
"...जिसके लिए पिछले बीस साल से लोग मर रहे हैं।"
आर्या कुछ और पूछ पाती, उससे पहले पूरी हवेली ज़ोर से हिल गई।
धड़ाम!!
छत का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिरा।
मीरा दौड़ती हुई अंदर आई।
"सर!"
"दुश्मन हवेली के अंदर पहुँच चुका है!"
रुद्र ने तुरंत काँच का केस बंद किया।
उसने डायरी अपनी जैकेट में रखी और अंगूठी अपनी मुट्ठी में कस ली।
फिर उसने आर्या की ओर देखकर कहा—
"अब खेल शुरू हुआ है।"
और अगले ही पल...
कमरे के बाहर से किसी ने दरवाज़े पर ज़ोरदार धमाका किया।
धड़ाम!
दरवाज़े पर तीन गोलियों के निशान उभर आए...
धड़ाम!
ऑफिस का भारी स्टील का दरवाज़ा ज़ोर से काँपा।
बाहर से लगातार गोलियाँ चल रही थीं।
मीरा ने तुरंत अपनी पिस्तौल लोड की।
कबीर ने कंट्रोल पैनल पर इमरजेंसी लॉक सक्रिय कर दिया।
रुद्र शांत खड़ा रहा।
उसकी नज़र सिर्फ़ दरवाज़े पर थी।
"सर..." कबीर बोला, "वे अंदर घुसने वाले हैं।"
रुद्र ने धीमे स्वर में कहा—
"नहीं..."
"उन्हें अंदर आने दिया गया है।"
कमरे में मौजूद सभी लोग एक साथ उसकी ओर देखने लगे।
"क्या मतलब?"
रुद्र की आवाज़ बर्फ़ जैसी ठंडी हो गई।
"इस हवेली का रास्ता सिर्फ़ तीन लोगों को पता था..."
"मैं..."
"कबीर..."
"...और मीरा।"
एक पल के लिए कमरे में सन्नाटा छा गया।
मीरा ने तुरंत कहा—
"सर, क्या आपको हम पर शक है?"
रुद्र ने सिर हिलाया।
"नहीं।"
"लेकिन किसी ने हमारे सिस्टम की जानकारी बाहर पहुँचाई है।"
---
उसी समय...
कंट्रोल रूम की स्क्रीन अपने-आप चालू हुई।
एक नकाबपोश महिला दिखाई दी।
वही नीली आँखें।
ब्लैक क्वीन।
वह मुस्कुराई।
"रुद्र..."
"तुम्हारी सबसे बड़ी ताकत..."
"...तुम्हारा भरोसा है।"
"और तुम्हारी सबसे बड़ी कमजोरी भी।"
स्क्रीन अचानक बदल गई।
अब एक लाइव वीडियो चल रहा था।
वीडियो देखकर आर्या की साँस रुक गई।
उसकी माँ...
कुर्सी से बँधी हुई थीं।
उनके पीछे दो हथियारबंद लोग खड़े थे।
आर्या चीख पड़ी—
"माँ!"
ब्लैक क्वीन हँसने लगी।
"अगर उन्हें ज़िंदा देखना चाहते हो..."
"...तो आधी रात से पहले डायरी मेरे हवाले कर दो।"
रुद्र की मुट्ठियाँ भींच गईं।
"उन्हें छोड़ दो।"
"तुम्हें पता है मेरे नियम..."
"पहले सौदा..."
"...फिर रिहाई।"
स्क्रीन बंद हो गई।
---
आर्या की आँखों से आँसू बहने लगे।
"रुद्र... मेरी माँ को बचा लो..."
रुद्र उसकी ओर बढ़ा।
"मैं वादा करता हूँ..."
"उन्हें कुछ नहीं होगा।"
"लेकिन..."
आर्या ने पूछा।
"अगर मैंने डायरी दे दी..."
"...तो लाखों लोगों की जान खतरे में पड़ जाएगी।"
आर्या पहली बार समझ गई कि यह सिर्फ़ उसका निजी संघर्ष नहीं था।
यह एक ऐसा रहस्य था जो पूरी दुनिया बदल सकता था।
---
तभी कंट्रोल रूम के सिस्टम में अचानक एक चेतावनी चमकी—
UNAUTHORIZED ACCESS DETECTED
कबीर चिल्लाया—
"कोई हमारे सर्वर में घुस गया है!"
मीरा तेजी से कंप्यूटर पर बैठ गई।
कुछ सेकंड बाद उसका चेहरा सफेद पड़ गया।
"सर..."
"हैकर अंदर नहीं घुसा..."
"...वह पहले से हमारे सिस्टम में मौजूद था।"
रुद्र की आँखों में गुस्सा उतर आया।
"मतलब..."
"...गद्दार अभी भी यहीं है।"
उसी क्षण...
कमरे के एक कोने से धाँय!
गोली चली।
गोली सीधे रुद्र की ओर बढ़ी...
लेकिन आर्या ने बिना सोचे उसके सामने छलांग लगा दी।
गोली उसके कंधे को छूती हुई निकल गई।
"आर्या!" रुद्र चीख उठा।
कमरे में अफरा-तफरी मच गई।
हमलावर धुएँ का बम फेंककर भाग निकला।
धुआँ छँटने पर...
फर्श पर खून था।
रुद्र ने घायल आर्या को अपनी बाँहों में उठा लिया।
उसकी आँखों में पहली बार डर साफ़ दिखाई दे रहा था।
और उसी समय उसके फोन पर एक नया संदेश आया—
> "यह तो सिर्फ़ शुरुआत है, Shadow King. अगली बार निशाना नहीं चूकेगा।"
रुद्र ने घायल आर्या को अपनी बाँहों में उठाया और सीधे हवेली के मेडिकल विंग की ओर दौड़ पड़ा।
"डॉक्टर!"
दरवाज़ा खुलते ही डॉक्टर और मेडिकल टीम अंदर आ गई।
डॉक्टर ने तुरंत आर्या के कंधे की जाँच की।
कुछ मिनट बाद उसने राहत की साँस ली।
"सर, गोली आर-पार नहीं गई। सिर्फ़ कंधे को छूकर निकली है। जान का खतरा नहीं है।"
रुद्र ने पहली बार चैन की साँस ली।
उसने धीरे से आर्या के माथे पर हाथ रखा।
"तुम पागल हो..."
"तुमने मेरे सामने क्यों छलांग लगाई?"
कमज़ोर आवाज़ में आर्या बोली—
"क्योंकि... मैं किसी और को अपनी वजह से मरते हुए नहीं देख सकती।"
रुद्र कुछ क्षण उसे देखता रहा।
उसकी आँखों में कठोरता की जगह अपनापन था।
"अब से..."
"...तुम अकेली नहीं हो।"
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कंट्रोल रूम
कबीर ने पूरी सुरक्षा प्रणाली फिर से सक्रिय कर दी थी।
सभी स्क्रीन पर एक ही खबर चल रही थी—
> "शेखावत मैनर पर रहस्यमयी हमला, पुलिस को अंदर जाने की अनुमति नहीं।"
मीरा ने रिपोर्ट देते हुए कहा—
"सर, हमने हमलावरों के दस लोगों को पकड़ लिया है, लेकिन जिसने गोली चलाई... वह बच निकला।"
रुद्र ने शांत स्वर में पूछा—
"कोई सुराग?"
मीरा ने एक छोटा-सा धातु का बैज मेज़ पर रखा।
उस पर काले साँप का निशान बना था।
लेकिन पीछे एक और निशान था—
एक टूटा हुआ मुकुट।
कबीर का चेहरा बदल गया।
"सर..."
"यह तो..."
रुद्र ने बात पूरी की—
"क्राउन सिं****ेट।"
"मतलब ब्लैक क्वीन अकेली नहीं है।"
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उसी रात
हवेली की सबसे ऊँची बालकनी पर रुद्र अकेला खड़ा था।
बारिश फिर शुरू हो चुकी थी।
उसने अपनी जैकेट से वही पुरानी डायरी निकाली।
डायरी के पहले पन्ने पर सिर्फ़ एक वाक्य लिखा था—
> "जिस दिन आर्या को सब याद आ जाएगा, उसी दिन शैडो किंग का अंत शुरू होगा।"
रुद्र की मुट्ठी कस गई।
"मैं ऐसा कभी नहीं होने दूँगा..."
पीछे से कबीर की आवाज़ आई—
"सर..."
"एक और खबर है।"
"बोलो।"
"ब्लैक क्वीन ने पूरी अंडरवर्ल्ड में आपकी मौत पर इनाम घोषित कर दिया है।"
"कितना?"
"पचास करोड़।"
रुद्र हल्का-सा मुस्कुराया।
"सिर्फ़ पचास?"
"लगता है मेरी कीमत कम आँकी गई है।"
कबीर भी मुस्कुरा दिया, लेकिन उसकी आँखों में चिंता साफ़ थी।
---
दूसरी ओर...
एक अज्ञात स्थान।
विशाल अंधेरा हॉल।
बीच में सिंहासन पर बैठी थी—
ब्लैक क्वीन।
उसके सामने घुटनों के बल बैठे दर्जनों अपराधी थे।
उसने धीरे से कहा—
"रुद्र बच गया..."
"लेकिन अब खेल बदलेगा।"
उसने अपनी उँगली के इशारे पर एक स्क्रीन चालू करवाई।
स्क्रीन पर आर्या की मेडिकल रिपोर्ट दिखाई दी।
फिर वह मुस्कुराई।
"उसे अभी तक अपनी असली पहचान याद नहीं आई..."
"लेकिन ज़्यादा समय नहीं बचा।"
उसने अपने सबसे भरोसेमंद आदमी से कहा—
"ऑपरेशन 'रेड मून' शुरू करो।"
"इस बार..."
"...या तो आर्या हमारे साथ होगी..."
"...या फिर कोई भी उसे ज़िंदा नहीं पाएगा।"
पूरा हॉल एक साथ गूँज उठा—
"Yes, Queen!"
---
Part 2 का अंत
उधर, उसी रात...
आर्या को नींद में एक अजीब सपना आया।
वह खुद को एक जलती हुई हवेली में देख रही थी।
एक छोटा लड़का उसका हाथ पकड़कर चिल्ला रहा था—
"आर्या... भागो!"
तभी किसी ने उस लड़के पर गोली चला दी...
और आर्या चीखते हुए नींद से जाग गई।
उसकी हथेली में एक पुराना चाँदी का आधा लॉकेट था...
जो सोने से पहले उसके पास नहीं था।
वह लॉकेट वहाँ कैसे आया?
और क्या यही लॉकेट बीस साल पुराने रहस्य की पहली चाबी था?
— Part 2 समाप्त —
Part 3 में:
आर्या की खोई हुई यादों का पहला हिस्सा लौटेगा।
"रेड मून" मिशन शुरू होगा।
शैडो ऑर्डर का एक गद्दार बेनकाब होगा।
और रुद्र का सबसे खतरनाक दुश्मन पहली बार सामने आएगा।
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