Rebirth of Mafia's Revenge and Love Ch. 3

"आकांक्षा भाग गई और मुझे मारने का प्लान बनाया है और मुझे ये लंबी उम्र की दुआ दे रहीं हैं नॉट बैड............"

Posted by Shivani Kapoor • Aug 10, 2026 06:27 PM

अब आगे:-

उस लड़की ने पलट कर हैरान होते हुए देव को देखा लेकिन जैसे ही उसने देव के फेस को देखा तो उस लड़की के होठों पर मुस्कान आ गई। उस लड़की की एज 23 साल, दुबली पतली सी पर काफी ज्यादा खूबसूरत, छोटी-छोटी झील सी आखें, पतले पतले गुलिब की पंखुड़ियों जैसे होठ।

उने इस वक्त बेबी पिंक कलर का गाउन पहन रखा था और अपनी छोटी-छोटी आंखों पर गोल गोल चश्मे लगाए हुए थे। वो काफी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी।

वहीं उस लड़की को देखते ही देव जिसके चेहरे पर गुस्सा था। उसके चेहरे का गुस्सा पल भर के लिए गायब हो गया। वो बिना पलकें झपकाए उस लड़की को देख रहा था। उस लड़की को देखकर उसके होठों पर अजीब सी मुस्कान आ गई। ये कोई और नहीं बल्कि वही लड़की थी जो उसके मरने से पहले उसके सामने आई थी‌।

उसका दिल पल के लिए धड़का और मुस्कुराते हुए उस लड़की को देखकर वो बोला, "क्या बात है लगता है कि मेरी साली साहिबा को मुझे टकराने की कुछ ज्यादा आदत हो गई है? क्या बात है मेरे साथ फ्लर्टिंग तो नहीं कर रही हो?............."

ये कहते हुए उसने आगे बढ़ के उस लड़की के गालों को पिंच किया। उसके सामने कोई और नहीं आकांक्षा की सौतेली बहन संध्या खड़ी हुई थी। संध्या 23 साल की एक खूबसूरत लड़की जिसके लंबे घने बाल।

खूबसूरती के अलावा उसके शरीर में सिर्फ एक ही कमी थी और वो उसकी आंखों पर लगा चश्मा। जिसकी वजह से सभी लड़के उसे नापसंद करते थे। कोई लड़का एक नजर उठाकर उसे नहीं देखता था और ऐसा ही हाल कुछ देव का भी था।

संध्या ने मुस्कुराते हुए देव को ऊपर से लेकर नीचे तक देखा और अपनी नजरें नीचे करते हुए बोली, "सॉरी वो मुझे पता नहीं था कि आप इस तरह आ रहे हैं वरना मैं आपसे नहीं टकराती..........."

ये सुनकर देव ने मुस्कुराते हुए कहा, "वो तो बाद की बातें ही कि आप मुझे टकराएंगी या नहीं, पहले ये बताइए मैं कैसा लग रहा हूं?..........."

ये सुनकर संध्या ने कुछ नहीं कहा। देव ने मुस्कुराते हुए संध्या को देखकर कहा, "साली साहिबा ज़रा नजरें उठा कर मुझे देखिए तो फिर आपको पता चलेगा ना मैं कैसा लग रहा हूं..........."

ये सुनकर संध्या ने एक नजर उठाकर अपने चश्मे को ठीक करते हुए सामने देव के हैंडसम फेस को देखा। वो देव के हैंडसम फेस को ही देखते रह गई। ये देखकर देव ने मुस्कुराते हुए कहा, "मुझे मेरे चेहरे से नहीं मेरे कपड़े से जज कीजिए.............."

ये सुनकर संध्या एकदम से चौंकी उसने तुरंत अपनी नज़रें देव के कपड़े ऊपर जमाई और तुरंत नीचे करते हुए घबराती हुई आवाज में बोली, "आप आप बहुत अच्छे लग रहे हैं............."

ये कहते हुए भागते हुए वहां से चली गई। उसे इस तरह भाग कर जाता देख देश के होठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई।

उसने सीने पर हाथ रखते हुए धीरे से कहा, "थैंक गॉड की कोई तो है जिसे मैं अपना मान सकता हूं जो मुझे धोखा नहीं दे सकता। चश्मिश तुम मुझे धोखा कभी भी नहीं दे सकती क्योंकि तुम्हारे अंदर ऐसी कोई फितरत है ही नहीं.............."

ये कहते हुए वो जाती हुई संध्या को देखने लगा।

थोड़ी देर बाद,

देव नीचे आया और आगे बढ़ के बंदना के पैर छूते हुए उसका आशीर्वाद लिया‌ वंदना ने मुस्कुराते हुए देव को देखकर कहा, "देव मेरा बेटा तुम हमेशा सुखी रहो बेटा भगवान तुम्हें लंबी उम्र दे............."

वंदना की ये बात सुनकर देव के होठों की मुस्कान और ज्यादा लंबी हो गई। उसने मुस्कुराते हुए अपने आप से कहा, "अनबिलिवेबल कमाल है आज रात मुझे मारने का प्लान बनाया है और मुझे ये लंबी उम्र की दुआ दे रहीं हैं नॉट बैड............"

वहीं पास में देव का असिस्टेंट अभय खड़ा हुआ था अभय जिसकी एज 28 साल, क्लीन शेव। हैंडसम एंड स्मार्ट। वो देव का कॉलेज फ्रेंड था। देव ने अभय को देखते हुए शांत आवाज में पूछा, "अभय तैयारी हो गई है ना कोई कमी तो नहीं है............."

ये सुनकर अंकुर ने मुस्कुराते हुए कहा, "भाई आप उससे क्या पूछ रहे हैं? आप मुझसे पूछिए तैयारी काफी अच्छे से हो गई हैं मैंने सब कुछ मैनेज कर लिया है। अब मैं बड़ा हो गया हूं..........."

ये सुनकर देव ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए अजीब से एक्सप्रेशन बनाकर कहा, "आई नो तुम काफी बड़े हो गए हो मैं बस ऐसे ही, अभय तुम जाकर सारा सिक्योरिटी सिस्टम हैंडल करो, कोई भी बिना परमिशन के हवेली में आना ना पाए............."

ये सुनकर अभय ने हां में सिर हिलाया और वो वहां से निकल गया। उसके जाते ही वहां पर आकांक्षा के मां-बाप अशोक मित्तल और उसकी वाइफ बबीता आए‌ देव ने आगे बढ़ के उन दोनों का आशीर्वाद लिया। बबीता ने मुस्कुराते हुए कहा, "देव बेटा सच में तुम काफी ज्यादा हैंडसम लग रहे हो। मेरी बेटी ने तुम्हें चूज़ किया है इस बात कि मुझे बहुत खुशी है............."

ये कहते हुए बबीता ने वंदना को देखकर आई विंग की लेकिन उसकी ये हरकत देव ने नोटिस कर ली। देव ने तीखी मुस्कान के साथ अपने आप से कहा, "हम्म लगता है कि सब के सब मिले हुए हैं पर कोई बात नहीं आज इन लोगों के खेल की वाट ना लगा दी तो मेरा नाम देव कपूर नहीं.........."

ये कहते हुए उसने उन सभी को देखकर कहा, "एक्सक्यूज मी मुझे एक काम है मैं अभी आता हूं..........."

ये कहते हुए वो तुरंत वहां से निकल गया। साइड में आकर उसने तुरंत अपना फोन निकाला और अभय को कॉल मिलाया, कुछ सेकेंड बाद अभय ने कॉल अटेंड किया और पूछा, "क्या हुआ सर कोई प्रॉब्लम है?..........."

देव ने अपने होठों पर तीखी मुस्कान लिए कहा, "अभय मुझे तुम्हारी हेल्प चाहिए, तुम अभी कहां पर हो?..............."

ये सुनकर अभय जो कि इस वक्त सिक्योरिटी गार्ड के साथ बाहर खड़ा हुआ नयूं स्ट्रेटजी बना रहा था वो एकदम से चौंक गया। उसने हैरान होते हुए पूछा, "क्या हुआ सर सब कुछ ठीक है, आप रुकिए मैं आता हूं..........."

ये कहते हुए उसने कॉल कट किया। 5 मिनट बाद एक बंद कमरे के अंदर देव सोफे पर बैठा हुआ था, उसी के सामने अभय खड़ा हुआ था। देव ने अभय को देखकर बैठने का इशारा किया। अभय ने सोफे पर बैठते हुए देव को देखकर पूछा, "क्या हुआ सब ठीक है, वहां आपकी शादी है और आप यहां?..........."

देव ने उसकी बात को काटते हुए कहा, "अभय तुम एक काम करो तुम सारे सिक्योरिटी सिस्टम डीएक्टिवेट कर दो। उन सभी को अलग-अलग काम पर लगा दो, सिवाय सिक्योरिटी के..........."

ये सुनते ही अभय एकदम शॉक्ड हो गया उसने हैरान होकर देव को देखा। देव ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "हैरान होने की जरूरत नहीं है जितना कहा है उतना करो और हां ये बात तुम्हारे चाहिए, एक सीक्रेट की तरह ओके............"

ये सुनकर अभय असमंजस में फंसा हुआ वहां से चला गया। वही देव ने सामने टेबल पर से पानी के गिलास के सिप लेते हुए गहरी सांस लेकर कहा, "हम्म अब आएगा खेल में मजा, आपने मेरे साथ बहुत खेल खेला है अब मेरे खेल खेलने की बारी है, जस्ट वेट एंड वॉच इस खेल में चाल भी मेरी होगी प्यदे भी मेरे होंगे लेकिन आप लोगों की हार होगी। आप लोग संभाल नहीं पाएंगे इतनी जल्दी दूसरा वार आपके ऊपर हो जाएगा............."

ये कहते हुए वो सोफे से उठा और बाहर की तरफ निकल गया। थोड़ी देर बाद देव मंडप में बैठा हुआ था आरोही और बबीता आकांक्षा को लेने के लिए उसकी कमरे में गए थे। काफी देर हो गई थी वो आए नहीं थे। देव ने परेशान होकर अशोक को देखकर कहा, "अंकल आकांक्षा कहां है कहीं वह इस बार भी पिछली बार की तरह भाग तो नहीं गई............"

अशोक ने परेशान होते हुए कहा, "नहीं नहीं बेटा ऐसी कोई बात नहीं है पिछली बार की बात तो बात अलग थी लेकिन इस बार तो वो खुद इस शादी के लिए तैयार है.........."

वंदना ने भी देव को देखकर कहा, "हां बेटा वो शादी के लिए तैयार हो रही होगी बस आने ही वाली है, तुम थोड़ा इंतजार करो............"

(अब क्या हुआ आगे इस कहानी में ये जानने के लिए आपको पढ़नी पड़ेगी मेरी ये कहानी जिसका नाम है, "Rebirth Of Mafia's Revenge and Love'')

......... To be continued.......

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