Unwanted Marriage With Uncle अनवांटेड मैरिज विद अंकल author- Shani Ch. 1

Unwanted Marriage With Uncle अनवांटेड मैरिज विद अंकल author- Shani - Chapter 1

Posted by Shani Rajput • Aug 18, 2026 09:37 AM

Chapter 1: अनचाहा फैसला

सुबह के करीब सात बजे थे। खिड़की से आती हल्की धूप नैना के कमरे में फैल रही थी। मेज पर किताबें खुली हुई थीं और एक कॉपी में उसके भविष्य की योजनाएँ लिखी थीं। नैना पढ़ाई में बहुत अच्छी थी और उसका सपना था कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करके एक अच्छी नौकरी करे और अपने माता-पिता का सहारा बने।

उसने कॉपी के आखिरी पन्ने पर बड़े अक्षरों में लिखा था—

“मेरी जिंदगी का फैसला मैं खुद करूँगी।”

वह मुस्कुराई और कॉपी बंद कर दी।

उसे क्या पता था कि उसी दिन उसके परिवार में उसकी जिंदगी से जुड़ा ऐसा फैसला लिया जा चुका था, जो उसके सारे सपनों को हिला देने वाला था।

“नैना!”

बाहर से उसकी माँ की आवाज आई।

“जी माँ!”

“बेटा, जरा बाहर आओ।”

नैना ने किताब बंद की और कमरे से बाहर निकल आई।

बैठक में उसके पिता, माँ और दादी बैठे थे। तीनों के चेहरे गंभीर थे। घर में ऐसी खामोशी थी कि नैना को तुरंत कुछ गड़बड़ महसूस हुई।

उसने पिता की तरफ देखते हुए पूछा—

“क्या हुआ पापा? आप लोग इतने परेशान क्यों हैं?”

पिता ने उसकी तरफ देखा, लेकिन कुछ बोले नहीं।

नैना ने माँ के पास जाकर पूछा—

“माँ, कोई बात हुई है क्या?”

माँ ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“बैठ जाओ बेटा।”

नैना बैठ गई।

कुछ क्षण तक कोई कुछ नहीं बोला।

फिर पिता ने गहरी साँस लेते हुए कहा—

“नैना, हमने तुम्हारे लिए एक फैसला किया है।”

नैना के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।

“मेरे लिए? कैसा फैसला?”

पिता ने नजरें झुका लीं।

“तुम्हारी शादी तय कर दी है।”

नैना के चेहरे की मुस्कान गायब हो गई।

“शादी?”

“हाँ।”

“लेकिन इतनी जल्दी? मैंने तो अभी पढ़ाई पूरी भी नहीं की।”

माँ ने उसकी ओर देखते हुए कहा—

“हम जानते हैं बेटा।”

“तो फिर?”

नैना ने बेचैनी से पूछा।

पिता ने धीमे स्वर में कहा—

“शादी अगले महीने होगी।”

नैना के दिल की धड़कन तेज हो गई।

“किससे?”

कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया।

दादी ने नीचे देखते हुए कहा—

“विक्रम से।”

नैना कुछ सेकंड तक समझ ही नहीं पाई।

“कौन विक्रम?”

पिता ने धीरे से कहा—

“तुम्हारे चाचा विक्रम।”

नैना जैसे पत्थर की मूर्ति बन गई।

उसके हाथ में पकड़ा गिलास जमीन पर गिरा और टूट गया।

छन्न!

“क्या?”

उसकी आवाज कांप रही थी।

“आपने अभी क्या कहा?”

माँ की आँखों में आँसू आ गए।

“बेटा…”

“नहीं माँ!”

नैना तुरंत खड़ी हो गई।

“ये मजाक है ना?”

किसी ने जवाब नहीं दिया।

“पापा, आप बोल क्यों नहीं रहे?”

पिता ने आखिर कहा—

“यही फैसला हुआ है।”

नैना की आँखों में अविश्वास था।

“लेकिन चाचा… वह तो परिवार के बड़े हैं।”

“मैं जानती हूँ,” माँ ने कहा।

“फिर मेरी शादी उनसे कैसे हो सकती है?”

पिता ने सिर झुका लिया।

“कुछ परिस्थितियाँ ऐसी बन गई हैं कि हमें यह करना पड़ रहा है।”

नैना गुस्से में बोली—

“कौन-सी परिस्थितियाँ? मेरी जिंदगी कोई सौदा है क्या?”

दादी ने सख्त आवाज में कहा—

“अपनी आवाज नीचे करो।”

नैना की आँखों में आँसू आ गए।

“जब मेरी जिंदगी का फैसला मेरी मर्जी के बिना किया जा रहा है, तब मैं चुप कैसे रहूँ?”

उसने पिता की ओर देखा।

“पापा, आपने हमेशा कहा था कि मैं अपनी जिंदगी के फैसले खुद ले सकती हूँ।”

पिता की आँखें भर आईं।

“मैंने कभी नहीं चाहा कि ऐसा दिन आए।”

“तो फिर इस शादी को रोक दीजिए।”

पिता चुप रहे।

नैना समझ गई कि बात बहुत गंभीर है।

“आप मुझे मजबूर कर रहे हैं?”

“मैं तुम्हें मजबूर नहीं करना चाहता।”

“लेकिन कर तो रहे हैं!”

नैना रोते हुए अपने कमरे की तरफ जाने लगी।

तभी दादी ने कहा—

“अगर यह शादी नहीं हुई तो हमारा पूरा परिवार बर्बाद हो जाएगा।”

नैना वहीं रुक गई।

उसने पीछे मुड़कर देखा।

“क्या मतलब?”

दादी ने कुछ नहीं कहा।

“आप लोग मुझसे क्या छिपा रहे हैं?”

पिता ने तुरंत बात बदलते हुए कहा—

“अभी तुम अपने कमरे में जाओ।”

“नहीं!”

नैना की आवाज पहली बार इतनी तेज हुई।

“आज मुझे सब जानना है।”

उसी समय बाहर गाड़ी रुकने की आवाज आई।

सभी लोग चुप हो गए।

दरवाजा खुला।

कुछ सेकंड बाद विक्रम बैठक में आया।

नैना ने उसे देखते ही अपनी आँखें पोंछीं।

विक्रम की उम्र परिवार के बाकी लोगों से काफी अधिक थी। उसका चेहरा गंभीर था और वह हमेशा कम बोलता था। वह परिवार के कारोबार को संभालता था और घर के ज्यादातर बड़े फैसलों में उसकी भूमिका होती थी।

नैना ने उसे घूरकर देखा।

“आपको पता था?”

विक्रम ने कुछ पल चुप रहकर कहा—

“हाँ।”

नैना के भीतर का गुस्सा और बढ़ गया।

“कब से?”

“कुछ दिनों से।”

“और आपने मुझे बताना जरूरी नहीं समझा?”

विक्रम शांत रहा।

“तुम्हें बताने से पहले परिवार से बात करना जरूरी था।”

नैना कड़वाहट से हँसी।

“परिवार से बात? मेरी जिंदगी की बात थी। कम से कम मुझसे तो पूछ लेते।”

विक्रम ने उसकी तरफ देखा।

“मैं समझता हूँ कि तुम नाराज हो।”

“आप समझते हैं?”

नैना की आँखों से आँसू बहने लगे।

“आपको कुछ नहीं समझ आता। आपने कभी मेरी जगह खड़े होकर सोचा ही नहीं।”

विक्रम ने कुछ कहने के लिए मुँह खोला, लेकिन फिर रुक गया।

नैना ने पूछा—

“आपने यह शादी क्यों स्वीकार की?”

विक्रम ने कोई जवाब नहीं दिया।

“बोलिए!”

कमरे में सन्नाटा था।

आखिर विक्रम ने कहा—

“इसके पीछे वजह है।”

“कौन-सी वजह?”

“अभी मैं नहीं बता सकता।”

नैना को यह जवाब और भी बुरा लगा।

“तो फिर मैं क्यों मानूँ कि आपकी नीयत सही है?”

विक्रम ने उसकी तरफ गंभीरता से देखा।

“तुम्हें मुझ पर विश्वास करने की जरूरत नहीं है।”

नैना चौंक गई।

“क्या?”

“लेकिन एक बात याद रखना,” विक्रम ने कहा, “मैं तुम्हें किसी नुकसान में नहीं डालूँगा।”

नैना ने तुरंत जवाब दिया—

“मेरी मर्जी के खिलाफ शादी करवाना ही मेरे लिए नुकसान है!”

विक्रम चुप हो गया।

कुछ क्षण बाद उसने कहा—

“शायद तुम्हें अभी ऐसा ही लगता है।”

“मुझे ऐसा लगता नहीं है। मैं यही चाहती हूँ कि मेरी शादी मेरी मर्जी से हो।”

विक्रम ने सिर झुका लिया।

“ठीक है।”

नैना को उम्मीद नहीं थी कि वह इतनी आसानी से जवाब देगा।

“ठीक है मतलब?”

“मैं तुम्हें मजबूर नहीं करूँगा।”

नैना ने राहत की साँस ली।

लेकिन अगले ही पल उसके पिता ने कहा—

“विक्रम, तुम यह नहीं कर सकते।”

नैना ने पिता की ओर देखा।

“क्यों?”

पिता की आवाज टूट रही थी।

“क्योंकि अगर यह शादी नहीं हुई तो…”

वह आगे नहीं बोल पाए।

“तो क्या?”

कोई जवाब नहीं आया।

विक्रम ने पिता की तरफ देखा।

दोनों के बीच ऐसी नजरों का आदान-प्रदान हुआ, जिसे नैना समझ नहीं पाई।

उसने महसूस किया कि दोनों उससे कोई बहुत बड़ी बात छिपा रहे हैं।

“मुझे सच जानना है।”

विक्रम ने शांत स्वर में कहा—

“सच जानने के बाद शायद तुम मुझसे और नफरत करोगी।”

नैना ने कहा—

“मैं अभी भी आपसे नाराज हूँ। इससे ज्यादा क्या होगा?”

विक्रम कुछ क्षण चुप रहा।

फिर उसने कहा—

“तुम्हारे पिता पर बहुत बड़ा कर्ज है।”

नैना ने पिता की तरफ देखा।

“कितना?”

पिता ने कोई जवाब नहीं दिया।

विक्रम बोला—

“इतना कि अगर समय पर पैसा नहीं चुकाया गया तो घर, जमीन और कारोबार सब चला जाएगा।”

नैना के चेहरे पर चिंता दिखाई दी।

“लेकिन इसका मेरी शादी से क्या संबंध है?”

विक्रम चुप रहा।

नैना ने फिर पूछा—

“क्या किसी ने शादी की शर्त रखी है?”

इस बार कमरे में मौजूद सभी लोग चौंक गए।

नैना को समझ आने लगा था कि बात उससे कहीं ज्यादा गंभीर है।

दादी ने धीरे से कहा—

“हमें मजबूरी में यह फैसला लेना पड़ा।”

“किसकी मजबूरी?”

“पूरे परिवार की।”

नैना की आँखों में आँसू आ गए।

“तो परिवार को बचाने के लिए मेरी जिंदगी कुर्बान कर देंगे?”

पिता ने सिर झुका लिया।

“मुझे माफ कर देना बेटा।”

नैना टूट गई।

वह अपने कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया।

बिस्तर पर बैठते ही उसने अपनी डायरी निकाली।

उसने काँपते हाथों से लिखा—

“आज मेरे घर वालों ने मेरी जिंदगी का फैसला कर दिया। मैं किसी की बेटी हूँ, किसी की जिम्मेदारी हूँ, लेकिन क्या मैं खुद की जिंदगी की मालिक नहीं हूँ?”

उसने डायरी बंद की।

तभी उसे अपनी माँ और पिता की कुछ दिन पहले की बातचीत याद आई।

वे रात में किसी से फोन पर बात कर रहे थे।

उस समय उसने सिर्फ इतना सुना था—

“विक्रम के बिना हम यह कर्ज नहीं चुका पाएँगे।”

नैना को तब लगा था कि शायद कारोबार की कोई समस्या है।

लेकिन आज उसे एहसास हुआ कि मामला बहुत बड़ा था।

उसी रात नैना ने तय किया कि वह इस शादी को रोकने के लिए हर संभव कोशिश करेगी।

वह अपने कॉलेज की सबसे अच्छी दोस्त रिया को फोन करने वाली थी, तभी उसके फोन पर एक अनजान नंबर से संदेश आया।

“अगर तुम विक्रम से शादी नहीं करना चाहतीं, तो कल शाम पुराने मंदिर के पीछे मुझसे मिलो। तुम्हें अपने परिवार का असली सच जानना है।”

नैना का दिल जोर से धड़कने लगा।

उसने नंबर देखा।

कोई नाम नहीं था।

सिर्फ एक अनजान नंबर।

नैना ने तुरंत जवाब लिखा—

“तुम कौन हो?”

कुछ सेकंड बाद जवाब आया—

“जिसे तुम्हारे परिवार ने सालों पहले तुमसे दूर कर दिया था।”

नैना के हाथ काँपने लगे।

“सालों पहले?”

उसने फिर संदेश भेजा—

“तुम्हें मेरे बारे में कैसे पता?”

इस बार कोई जवाब नहीं आया।

नैना सारी रात सो नहीं पाई।

सुबह होते ही उसने फैसला कर लिया कि वह पुराने मंदिर जाएगी।

उसे नहीं पता था कि वहाँ उसे ऐसा सच मिलने वाला है, जो उसकी पूरी जिंदगी बदल देगा।

और सबसे बड़ा सवाल यह था—

आखिर वह अनजान व्यक्ति कौन था, जिसे उसके परिवार ने उससे सालों पहले दूर कर दिया था?

(अब क्या हुआ आगे इस कहानी में ये जानने के लिए आपको पढ़नी पड़ेगी मेरी ये कहानी जिसका नाम है, "Unwanted Marriage With Uncle ' )

To be continued.

Thanks for reading

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मेरी एक और स्टोर जोकि और भी ज्यादा अच्छी है और आई होप की वो आपको बहुत पसंद भी आएगी:-

Chapter 1 समाप्त।

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