Unwanted Marriage With Uncle अनवांटेड मैरिज विद अंकल author- Shani - Chapter 2
Chapter 2: मंदिर के पीछे का रहस्य
रात भर नैना की आँखों में नींद नहीं आई।
बार-बार उसके दिमाग में वही संदेश घूम रहा था—
“जिसे तुम्हारे परिवार ने सालों पहले तुमसे दूर कर दिया था।”
आखिर वह कौन था?
ऐसा कौन था जिसे उसके परिवार ने उससे दूर किया था?
और सबसे बड़ा सवाल—उस व्यक्ति को उसकी शादी के बारे में कैसे पता था?
सुबह जब माँ ने उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया, तब तक नैना उठ चुकी थी।
“नैना, नाश्ता कर लो।”
“मेरा मन नहीं है, माँ।”
माँ कुछ पल चुप रहीं।
“कल की बात को लेकर अभी भी नाराज हो?”
नैना ने दरवाजे की तरफ देखते हुए कहा—
“नाराज नहीं हूँ माँ… बस परेशान हूँ।”
“हम तुम्हारे दुश्मन नहीं हैं।”
नैना ने दरवाजा खोल दिया।
“तो फिर मेरे साथ सच क्यों नहीं बोलते?”
माँ की आँखें झुक गईं।
“हर सच हर समय नहीं बताया जा सकता।”
नैना को यह जवाब अजीब लगा।
“लेकिन मेरी जिंदगी का फैसला करने से पहले तो बता सकते थे।”
माँ ने कुछ कहना चाहा, लेकिन तभी नीचे से पिता की आवाज आई—
“सविता!”
माँ तुरंत नीचे चली गईं।
नैना दरवाजे पर खड़ी रही।
उसके मन में शक और गहरा हो गया।
उसे यकीन था कि उसके परिवार से कोई बहुत बड़ी बात छिपाई जा रही थी।
कुछ देर बाद नैना कॉलेज जाने के बहाने घर से निकली।
लेकिन कॉलेज जाने के बजाय उसने अपनी दोस्त रिया को फोन किया।
“रिया, मुझे तुमसे मिलना है।”
“क्या हुआ?”
“बहुत जरूरी है।”
“तुम्हारी आवाज इतनी परेशान क्यों लग रही है?”
“मिलकर बताऊँगी।”
करीब आधे घंटे बाद दोनों शहर के एक शांत कैफे में बैठी थीं।
नैना ने अपना फोन रिया के सामने रख दिया।
रिया ने संदेश पढ़ा और उसका चेहरा गंभीर हो गया।
“ये नंबर किसका है?”
“पता नहीं।”
“तुमने जवाब क्यों दिया?”
“मुझे सच जानना है।”
रिया ने नैना का हाथ पकड़ लिया।
“लेकिन अगर ये कोई जाल हुआ तो?”
नैना कुछ देर चुप रही।
“अगर मैं घर पर बैठी रही तो भी मेरी शादी मेरी मर्जी के खिलाफ कर दी जाएगी।”
रिया के पास कोई जवाब नहीं था।
नैना ने कहा—
“मैं आज शाम पुराने मंदिर जाऊँगी।”
“मैं भी तुम्हारे साथ चलूँगी।”
“नहीं।”
“क्यों?”
“अगर किसी ने मुझे अकेले बुलाया है, तो शायद वह सिर्फ मुझसे बात करना चाहता है।”
रिया ने नाराज होकर कहा—
“और अगर उसने तुम्हें नुकसान पहुँचाने की कोशिश की तो?”
नैना ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
“तुम्हें मेरी चिंता हो रही है?”
“बहुत।”
दोनों कुछ देर चुप रहीं।
फिर रिया ने कहा—
“कम से कम अपना फोन चालू रखना।”
नैना ने सिर हिला दिया।
शाम होते ही नैना पुराने मंदिर की ओर निकल पड़ी।
वह मंदिर शहर से थोड़ा बाहर था। आसपास ज्यादा घर नहीं थे। मंदिर के पीछे एक पुराना बरगद का पेड़ था और उसके पास पत्थर की एक टूटी हुई दीवार।
नैना ने चारों तरफ देखा।
कोई दिखाई नहीं दे रहा था।
उसने फोन निकाला।
समय हो चुका था।
तभी पीछे से आवाज आई—
“तुम नैना हो?”
नैना पलटी।
उसके सामने लगभग पच्चीस-छब्बीस साल का एक युवक खड़ा था।
चेहरा शांत था, लेकिन आँखों में एक अजीब-सी गंभीरता थी।
नैना ने तुरंत पूछा—
“आप कौन हैं?”
युवक ने कहा—
“मेरा नाम अर्जुन है।”
नैना सावधान हो गई।
“आपने मुझे यहाँ क्यों बुलाया?”
अर्जुन ने चारों तरफ देखा।
“क्योंकि तुम्हें अपने परिवार के बारे में सच जानना चाहिए।”
“कैसा सच?”
अर्जुन ने अपनी जेब से एक पुराना लिफाफा निकाला।
“इसे देखो।”
नैना ने लिफाफा लिया।
उस पर उसका नाम लिखा था।
नैना शर्मा।
उसके हाथ काँप गए।
“ये क्या है?”
“तुम्हारे पिता ने इसे सालों पहले संभालकर रखा था।”
नैना ने लिफाफा खोला।
अंदर एक पुरानी तस्वीर थी।
तस्वीर देखते ही वह हैरान रह गई।
उसमें उसके पिता, उसकी माँ और एक छोटी बच्ची थी।
लेकिन तस्वीर में उसके माता-पिता के साथ एक और महिला खड़ी थी।
नैना ने उस महिला को कभी नहीं देखा था।
“ये कौन है?”
अर्जुन ने धीरे से कहा—
“तुम्हारी बड़ी बहन।”
नैना के पैरों तले जमीन खिसक गई।
“मेरी… बहन?”
“हाँ।”
“लेकिन मेरी तो कोई बहन नहीं है।”
“तुम्हें यही बताया गया।”
नैना ने तस्वीर को गौर से देखा।
उस छोटी बच्ची की उम्र शायद उससे तीन-चार साल ज्यादा थी।
“उसका नाम क्या था?”
अर्जुन कुछ देर चुप रहा।
“अनिका।”
नैना की आँखों में आँसू आ गए।
“वह कहाँ है?”
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।
“यही तो सवाल है।”
“मतलब?”
“तुम्हारे परिवार ने तुम्हें बताया कि अनिका बचपन में मर गई थी।”
नैना ने तुरंत सिर हिलाया।
“हाँ… मुझे बचपन से यही बताया गया।”
“लेकिन वह मरी नहीं थी।”
नैना का दिल जोर से धड़कने लगा।
“आप कहना क्या चाहते हैं?”
अर्जुन ने धीमे स्वर में कहा—
“अनिका जिंदा है।”
नैना कुछ पल तक उसे देखती रही।
उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
“आप झूठ बोल रहे हैं।”
“काश मैं झूठ बोल रहा होता।”
“तो फिर वह कहाँ है?”
अर्जुन ने जवाब नहीं दिया।
“बताइए!”
“मैं तुम्हें अभी उसका पता नहीं बता सकता।”
“क्यों?”
“क्योंकि पहले तुम्हें पूरी कहानी जाननी होगी।”
नैना ने तस्वीर को कसकर पकड़ लिया।
“मेरे परिवार ने मुझसे झूठ क्यों बोला?”
अर्जुन ने कहा—
“क्योंकि तुम्हारी बहन के गायब होने के पीछे एक हादसा नहीं था।”
“तो?”
“उस रात कोई उसे लेकर गया था।”
नैना की साँस रुक गई।
“कौन?”
अर्जुन ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—
“विक्रम।”
नैना के हाथ से तस्वीर लगभग गिर गई।
“नहीं…”
“तुम्हें विश्वास नहीं होगा। मुझे भी पहले नहीं हुआ था।”
“विक्रम ऐसा क्यों करेगा?”
“क्योंकि उस रात घर में बहुत बड़ा झगड़ा हुआ था।”
“किस बात पर?”
अर्जुन ने कहा—
“तुम्हारे पिता और विक्रम के बीच।”
नैना की आँखों के सामने पिछली रात का दृश्य घूम गया।
विक्रम का गंभीर चेहरा।
उसका कहना—
“तुम्हें मुझ पर विश्वास करने की जरूरत नहीं है।”
नैना ने पूछा—
“क्या विक्रम मेरी बहन को जानता है?”
“बहुत अच्छी तरह।”
“और मेरे परिवार ने यह बात मुझसे छिपाई?”
“हाँ।”
नैना का सिर घूमने लगा।
“लेकिन मेरी शादी उससे क्यों?”
अर्जुन ने कुछ देर चुप रहने के बाद कहा—
“यही सबसे बड़ा सवाल है।”
“क्या आपको इसका जवाब पता है?”
“शायद।”
“शायद नहीं। मुझे पूरा सच चाहिए।”
अर्जुन ने कहा—
“तुम्हारे पिता पर जो कर्ज है, वह सिर्फ कारोबार का कर्ज नहीं है।”
नैना चौंक गई।
“तो?”
“उस कर्ज की शुरुआत उस रात से हुई थी, जिस रात अनिका गायब हुई थी।”
नैना ने आँखें बंद कर लीं।
उसे लगा जैसे उसके परिवार की पूरी जिंदगी एक झूठ पर बनी हुई थी।
अर्जुन ने उसे एक और कागज दिया।
“इसे पढ़ो।”
नैना ने कागज खोला।
यह एक पुराना कानूनी दस्तावेज था।
उसमें विक्रम का नाम था।
और उसके नीचे उसके पिता के हस्ताक्षर।
लेकिन दस्तावेज के आखिरी हिस्से को किसी ने फाड़ दिया था।
“इसका बाकी हिस्सा कहाँ है?”
“मेरे पास नहीं है।”
“तो फिर मुझे यह क्यों दिया?”
“ताकि तुम समझ सको कि तुम्हारी शादी अचानक तय नहीं हुई।”
नैना ने धीरे से पूछा—
“इस शादी की वजह मेरी बहन है?”
अर्जुन ने सीधे जवाब नहीं दिया।
“तुम्हें अपने घर वापस जाकर अपने पिता से एक सवाल पूछना होगा।”
“कौन-सा?”
अर्जुन ने कहा—
“अनिका उस रात मरी थी या उसे गायब किया गया था?”
नैना कुछ बोल नहीं पाई।
वह तस्वीर को अपने सीने से लगाए खड़ी रही।
उसी समय उसके फोन पर कॉल आया।
स्क्रीन पर नाम देखकर उसका चेहरा बदल गया।
विक्रम।
नैना ने कॉल नहीं उठाया।
कुछ सेकंड बाद फिर फोन बजा।
इस बार उसने कॉल उठा लिया।
“हैलो?”
दूसरी तरफ कुछ क्षण खामोशी रही।
फिर विक्रम की आवाज आई—
“तुम कहाँ हो?”
नैना चुप रही।
“नैना, मैं आखिरी बार पूछ रहा हूँ… तुम कहाँ हो?”
“आपको क्यों जानना है?”
विक्रम की आवाज गंभीर हो गई।
“क्योंकि जिस व्यक्ति के साथ तुम इस वक्त हो, उस पर भरोसा मत करना।”
नैना ने अर्जुन की तरफ देखा।
“आप अर्जुन की बात कर रहे हैं?”
दूसरी तरफ अचानक खामोशी छा गई।
नैना ने कहा—
“आप उसे जानते हैं?”
विक्रम ने तुरंत पूछा—
“उसने तुम्हें क्या बताया?”
नैना के शरीर में सिहरन दौड़ गई।
विक्रम उसे जानता था।
“उसने मुझे अनिका के बारे में बताया।”
कुछ सेकंड तक कोई आवाज नहीं आई।
फिर विक्रम ने बहुत धीमे स्वर में कहा—
“नैना… घर वापस आ जाओ।”
“क्यों?”
“क्योंकि अब तुम्हें उस सच के बारे में पता चल गया है, जिसे तुम्हारे परिवार ने इतने सालों से छिपाया है।”
नैना की आँखों में आँसू आ गए।
“क्या अनिका जिंदा है?”
विक्रम ने कोई जवाब नहीं दिया।
नैना ने फिर पूछा—
“क्या मेरी बहन जिंदा है?”
फोन के दूसरी तरफ से सिर्फ एक वाक्य सुनाई दिया—
“हाँ।”
और कॉल कट गया।
नैना के हाथ से फोन नीचे गिर गया।
उसने अर्जुन की तरफ देखा।
अर्जुन के चेहरे पर भी चिंता थी।
“तुमने सुना?”
नैना ने काँपती आवाज में कहा—
“मेरी बहन जिंदा है।”
लेकिन उसे अभी यह नहीं पता था कि अनिका कहाँ थी, उसे इतने सालों तक किसने छिपाकर रखा और उसकी शादी विक्रम से कराने की कोशिश क्यों की जा रही थी।
और सबसे बड़ा रहस्य अभी बाकी था—
अर्जुन आखिर इस पूरे मामले में कौन था?
Chapter 2 समाप्त
(अब क्या हुआ आगे इस कहानी में ये जानने के लिए आपको पढ़नी पड़ेगी मेरी ये कहानी जिसका नाम है, "Unwanted Marriage With Uncle ' )
To be continued.
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मेरी एक और स्टोर जोकि और भी ज्यादा अच्छी है और आई होप की वो आपको बहुत पसंद भी आएगी:-