Black Love - Chapter 1
ताम्रवती, एक ऐसा राज्य जहाँ हर तरफ खुशियां, सुकून और शांति ही बिखरा हुआ है, चारों तरफ राज्य हरे- भरे पेड पौधे और फूलों की खूबसूरती के साथ उनकी खुशबू से महकी हुई हवा, चिडियों की मीठी आवाजें और सुबह का उगता हुआ सूरज, बहुत ही खूबसूरत एहसास दे रहा था वो राज्य बहुत ही बडा था जिसके समृद्धि की चर्चे आस पास के सभी राज्यों में भी फैले हुए थे, तो वहीं राज्य के बीचों बीच एक बडा सा राजमहल बना था जिसकी भव्यता और उसकी कारीगरी अद्भुत थी और उसके चारों ओर बहुत ही बडा और खूबसूरत बगीचा था जिसमें रंग बिरंगे फूल और कई प्रकार के फलों के पेड भी लगे हुए थे वहीं, उस राजमहल के पूर्व दिशा में एक लडकी अपनी आंखे बंद कर सूर्य देव को जल अर्पण कर रही थी, तभी पीछे से उसे किसी ने आवाज देते हुए कहा" राजकुमारी स्वर्णप्रभा, आपको राजा साहब ने याद किया है" जी हां, ये कोई और नहीं बल्कि ताम्रवती की राजकुमारी स्वर्णप्रभा है, जो हर सुबह अपने आराध्य महादेव की आराधना कर सूर्य देव को जल अर्पण करने आती है हमेशा की तरह आज भी, राजकुमारी ने श्वेत रंग का लहंगा और बदन से लिपटा, सलीके से लिया हुआ दुपट्टा साथ में सफेद रंग की ही सिर पे चुन्नी भी ओढ रखी थी, उसके काली घटा की भांति काले, घने लंबे बाल जिनमें कमल के फूल लगे हुए, उसकी खूबसूरती को और भी निखार रहे थे. काली गहरी आंखे, गुलाबी पतले होठ और चेहरे की चमक ऐसी की हीरे की चमक भी फीकी पड जाए, उसका धूप सा गोरा रंग और खूबसूरती ऐसी की देवलोक की अप्सराएं भी उसे देख मोहित हो जाए अपने तेज से सबको आकर्षित करने वाली स्वर्णप्रभा का ध्यान आज अपने आराध्य की भक्ति में नहीं लग रहा था क्योंकि आज होने वाले फैसले से सिर्फ स्वर्णप्रभा का ही नहीं बल्कि इस पूरे राज्य का भविष्य तय होने वाला था. पीछे से आती आवाज सुन, स्वर्णप्रभाजब जब पीछे मुडती है तो उसकी नजर, सामने खडी उसकी सखी वर्तिका पे पडती है जो थोडी सी चिंतित लग रही थी. तो राजकुमारी स्वर्णप्रभा, अपनी आराधना पूरी कर के सूर्य देव को नमन करती है और वर्तिका के पास उससे पूछती है" क्या हुआ, तुम इतनी चिंतित क्यों लग रही हो सब कुशल तो है" तो वर्तिका अपना सिर ना में हिलाते हुए कहती है" नहीं राजकुमारी, कुछ भी कुशल नहीं है इसलिए तो राजा साहब ने आपको शीघ्र बुलाया है" वर्तिका की बात सुन कर स्वर्णप्रभा जल्दी से महल की ओर अपने कदम बढाते हुए कहती है" अगर ऐसी बात है, फिर तो हमें शीघ्र ही पिता श्री के पास होना चाहिए" कुछ क्षण पश्चात ही स्वर्णप्रभा, अपने पिता के पास खडी थी और उनकी माता भी बहुत ही चिंतित लग रही थी, कि तभी उन्हें देखते हुए स्वर्णप्रभा उनसे पूछती है" क्या हुआ पिता श्री, आपने हमें इतनी शीघ्रता से क्यों बुलाया" स्वर्णप्रभा को यहां देख, राजा साहब उसे अपने समीप बुलाते है और सामने दिखाते हुए कहते है" वो देखो प्रभा, हम जानते है कि काली शक्ति हमसे जीत नहीं सकती किंतु वो हमें इस प्रकार भी नहीं छोडे गी कि हम अपने राज्य के साथ एक सुखमय जीवन जी सके स्वर्णप्रभा जब उस ओर देखती है तो उसके भी चेहरे पे शिकन दिखने लगता है जो ये बताने के लिए काफी था कि ये काली शक्ति, स्वर्णप्रभा की तिलस्मी शक्तियों से भी बडी और ताकतवर है. क्योंकि उनके राज्य में लगा देववृक्ष के पत्ते अब धीरे धीरे काले पडने लगे थे, ये वो देववृक्ष है जिसपर स्वयं देवताओं का वास होता है और प्रजा जन इसकी पूजा करते है, अपनी इच्छा की पूर्ति हेतु यहां कई प्रकार के भव्य यज्ञ भी आयोजित किया जाता है. ये देववृक्ष ही इस राज्य के समृद्धि का कारण है, इसकी छत्र छाया में ही यहां के लोग अपना जीवन सुखमय और शांति से बीता रहे है, लेकिन अब इसपर काली शक्तियों की परछाईं पडने लगी है जो इस राज्य के साथ साथ, यहां के लोग और उनके भविष्य के लिए भी ठीक नहीं ये देख स्वर्णप्रभा, क्रोधित होते हुए कहती है" अभी तो राजकुमार यहां आए भी नहीं और उन्होंने अपनी शैतानी ताकतों को यहां भेज दिया, हम उनका ये दुस्साहस कभी क्षमा नहीं करेंगे" इतना कह स्वर्दप्रभा अपने कदम उस कक्ष से बाहर की ओर बढा देती है, उसे इस तरह क्रोध में जाते देख, स्वर्णप्रभा की मां रानी अवंतिका उसे रोकते हुए पूछतीं हैं" कहां जा रही हो प्रभा? अपनी मां के प्रश्नों के उत्तर देते हुए, स्वर्णप्रभा कहती है" देववृक्ष के पास, हम ऐसे ही काली शक्तियों को हावी नहीं होने दे सकते है, हमें इसी वक्त उन्हें रोकना होगा" अपनी बात कह स्वर्णप्रभा, शक्तियों का प्रयोग कर तेज कदमों से कुछ ही पल में महल के बाहर, देववृक्ष के समीप आ गई थी, इस समय वो बहुत ही ज्यादा क्रोध में थी जिससे उसने अपने हाथो कि मुठ्ठी बंध रखी थी और एक टक उस देववृक्ष के ऊपर मंडरा रहे काले बदलो को देख रही थी जो अपनी काली परछाई से देववृक्ष की तेज को धूमिल कर रहे थे. स्वर्णप्रभा अपनी तेज आवाज में उन काली शक्तियों को आगाह करते हुए कहती है" लौट जाओ तुम सब यहां से, मै तुम सबको एक अवसर देती हूं खुद को बचाने का अन्यथा मै राजकुमारी स्वर्णप्रभा तुम सभी को खत्म करने में विलंब नहीं करूंगी" स्वर्णप्रभा की बात सुन वो शैतानी ताकते एक पल के लिए रुक जाती है लेकिन फिर अपनी मनमानी करना शुरू कर देती है जैसे मानो उन्होंने स्वर्णप्रभा की बात सुनी ही न हो. तो स्वर्णप्रभा भी अपने जादू का प्रयोग कर बिना देर किए उस काली शक्ति की तरफ एक तिलस्मी अस्र चलाती है जो उस काले बादलों के बीच जा वहां तेज रोशनी कर उन्हें अनियंत्रित कर देता है जिससे वहां जोर की चीख गूंज पडती है और वो शैतानी ताकत जो अब तक बादल के रूप में वहां मंडरा रहे थे, वो नष्ट होते हुए बस एक ही बात बोलता है" आपको हमारे राजकुमार की बात माननी होंगी अन्यथा इस धरती पे सिर्फ रक्त ही बहेगा क्योंकि कोई भी हमारे राजकुमार की बराबरी नहीं कर सकता और न ही उन्हें पराजित कर सकता है" अपनी बात कहते हुए ही वो काली परछाई उस अस्त्र के साथ ही लुप्त हो जाती है, उसके जाने के बाद स्वर्णप्रभा अपने क्रोध को शांत कर, देववृक्ष के सामने हाथ जोड उन्हें प्रणाम करती है की तभी उसे पीछे से राजा देवव्रत की आवाज सुनाई देती है" राजकुमारी आप ठीक है न, वो शैतानी शक्ति कहां गई" अपने पिता की आवाज सुन राजकुमारी जब पीछे मुडती है तो देखती है कि उसके पिता, उसके तरफ ही घोडे से उतर कर आ रहे है तो राजकुमारी भी अपने कदम उनकी तरफ बढाते हुए कहती है" उसे तो हमने खत्म कर दिया क्योंकि वो तो सिर्फ एक मोहरा मात्र था, अभी तो हमें न जाने ऐसी कितनी ही शक्तियों को हराना होगा" इतना कह स्वर्णप्रभा, अपने पिता की ओर देखती है तो, उसके पिता स्वर्णप्रभा के सिर पे हाथ रखते हुए उससे कहते है" आप बहुत बहादुर है और हमें आप पर पूर्ण विश्वाश है आप हमारे राज्य को कुछ नहीं होने देंगी" अपने पिता की बात सुन स्वर्णप्रभा, अपना सिर हां में हिला, कर उनसे कहती है" हम पूरी कोशिश करेंगे पिता श्री की हमारी वजह से कभी भी इस राज्य पर कोई मुसीबत न आए राजकुमारी की बात पे राजा साहब कुछ कहते की तभी पीछे से एक सेवक अपना सिर झुकाए उनसे कहता है" राजा साहब को मेरा प्रणाम, राजा साहब आपको रानी साहब ने शीघ्र ही बुलाया है क्योंकि अतिथियों का आगमन शुरू हो गया है" उस सेवक की बात सुन, राजा साहब ओर राजकुमारी एक दूसरे को देखते है, उनके चेहरे पे शिकन दिखने लगा था फिर भी उन्होंने उस सेवक को जाने को बोल, खुद भी देववृक्ष को प्रणाम कर वहां से महल की ओर चल देते है" कौन थी ये काली शक्ति और किसने भेजी थी ऐसा क्या होने वाला है जो राजकुमारी और सभी राज्य के लिए ठीक नहीं और अतिथि के रूप में कौन आया है