Bound by his lies Ch. 3

सगाई की रात और शैतान का खौफनाक साया - Chapter 3

Posted by The Dark Quill • Aug 31, 2026 11:35 AM

चैप्टर ३: सगाई की रात और शैतान का खौफनाक साया

दृश्य १: आंसुओं से सजा पिंजरा

राघवेंद्र मैंशन का सबसे ऊपरी कमरा, जिसे आज एक शाही ब्राइडल सुइट में बदल दिया गया था, किसी सजे-धजे मकबरे जैसा लग रहा था। कमरे की हवा में महंगे परफ्यूम और ताज़े विदेशी फूलों की भारी खुशबू तैर रही थी, लेकिन उस खुशबू में एक अजीब सी घुटन थी। बड़ी सी विंटेज ड्रेसिंग टेबल के सामने इनायत बुत बनकर बैठी थी।

उसे एक बेहद भारी, वाइन-रेड (Wine-Red) रंग के डिज़ाइनर लहंगे में सजाया गया था। लहंगे पर जड़े असली स्वारोवस्की क्रिस्टल्स कमरे की पीली रोशनी में चमक रहे थे, लेकिन इनायत की आँखों की चमक हमेशा के लिए बुझ चुकी थी। दो नामी मेकअप आर्टिस्ट उसके चेहरे पर बेस की परतें पोत रही थीं, ताकि उसके आंसुओं से सूजी हुई आँखों और पीले पड़ चुके चेहरे को छुपाया जा सके।

इनायत की नज़रें आईने में अपने ही अक्स पर टिकी थीं। यह वह नहीं थी। यह इनायत नहीं थी जो आज़ाद आसमान में उड़ने वाले परिंदों की पेंटिंग बनाती थी। यह तो एक बेजान, खूबसूरत लाश थी जिसे आज रात नीलाम किया जा रहा था। उसके होंठ कांप रहे थे, और पलकें झपकते ही आंसुओं की एक और गर्म बूंद उसके गाल पर फिसल गई, जिसने ताज़े मेकअप पर एक लकीर छोड़ दी।

"अरे यार! तुम फिर से रोने लगीं?" मेकअप आर्टिस्ट ने चिढ़ते हुए कहा और टिशू पेपर से उसका आंसू पोंछने लगी। "मैम, प्लीज कोआपरेट कीजिए। बाहर मेहमान आ चुके हैं, और आपका मेकअप सेट नहीं हो रहा है।"

तभी कमरे का दरवाज़ा एक तेज़ झटके के साथ खुला। हाई हील्स की खट-खट आवाज़ पूरे कमरे में गूंज उठी। लावण्या अंदर दाखिल हुई। उसने एक बेहद बोल्ड, ब्लैक शिमरी गाउन पहना हुआ था, जिसमें वह किसी शातिर नागिन की तरह लग रही थी। उसके होंठों पर एक क्रूर, साइकोपैथ वाली मुस्कान थी।

"तुम दोनों बाहर जाओ," लावण्या ने मेकअप आर्टिस्ट्स को घूरते हुए हुक्म दिया।

उनके बाहर जाते ही लावण्या ने दरवाज़ा लॉक कर दिया। वह धीरे-धीरे इनायत के पीछे आकर खड़ी हो गई और आईने में उसकी तरफ देखने लगी। उसने इनायत के कंधों को अपने नुकीले नाखूनों से कसकर दबाया, जिससे इनायत दर्द से हल्की सी कराह उठी।

"कितनी खूबसूरत लग रही हो तुम, मेरी प्यारी बहन," लावण्या की आवाज़ शहद में लिपटे ज़हर जैसी थी। "जानती हो, बाहर शहर के सबसे अमीर लोग तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं। रंजीत जी तो खुशी से पागल हो रहे हैं। उन्होंने डैड से कहा है कि उन्हें आज रात ही तुम्हारी... 'कंपनी' चाहिए।"

इनायत का पूरा शरीर एक सूखे पत्ते की तरह कांपने लगा। उसने झटके से लावण्या की तरफ देखा, उसकी कत्थई आँखों में बेइंतहा खौफ और मिन्नतें थीं।

"दीदी... प्लीज," इनायत की आवाज़ रुंध गई थी, वह सिसकियां लेते हुए बोली, "पापा से कहिए ना, वो ये शादी रोक दें। मैं आपके पैरों पड़ती हूँ, दीदी। मैं इस घर से हमेशा के लिए चली जाऊंगी, कभी आपको अपनी शक्ल नहीं दिखाऊंगी। लेकिन मुझे उस आदमी के साथ मत भेजिए... वो... वो बहुत गंदे इंसान हैं। मैंने उनकी आँखों में देखा है दीदी, वो मुझे मार डालेंगे।"

लावण्या ज़ोर से हंस पड़ी। उसकी हंसी में कोई हमदर्दी नहीं, सिर्फ एक शैतानी सुकून था। उसने इनायत के बालों को बेरहमी से मुट्ठी में जकड़ा और उसका चेहरा अपनी तरफ खींचा।

"मार डालेंगे? ओह इनू, तुम कितनी भोली हो," लावण्या ने फुसफुसाते हुए कहा। "तुम्हें क्या लगता है, डैड ने तुम्हें इतने सालों तक इस घर में पाल-पोस कर बड़ा क्यों किया? ताकि तुम मुफ्त की रोटियां तोड़ सको? नहीं! तुम्हारी ये मासूमियत, तुम्हारी ये खूबसूरत चमड़ी... यही तो हमारी सबसे बड़ी इन्वेस्टमेंट थी। और रंजीत सिंघानिया उस इन्वेस्टमेंट का रिटर्न दे रहा है।"

लावण्या ने इनायत को झटके से छोड़ दिया, जिससे इनायत लड़खड़ा कर कुर्सी पर गिर पड़ी।

"तुम्हारी औकात इस घर के एक फर्नीचर से ज्यादा नहीं है, इनायत। चुपचाप नीचे चलो, और रंजीत जी को खुश रखो। अगर तुमने वहां कोई भी तमाशा करने की कोशिश की, तो मैं कसम खाती हूँ, मैं तुम्हें वो दर्द दूंगी कि तुम खुद अपनी मौत की भीख मांगोगी।"

लावण्या एक विजयी मुस्कान के साथ दरवाज़ा खोलकर बाहर निकल गई। कमरे में एक बार फिर मौत जैसा सन्नाटा छा गया। इनायत ने अपने चेहरे को अपने कांपते हाथों में छुपा लिया और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी। उसका भगवान पर से भरोसा उठ चुका था। उसे लग रहा था कि इस दुनिया में उसे बचाने वाला कोई नहीं है। कोई मसीहा नहीं आएगा। उसकी किस्मत में सिर्फ एक काली, खौफनाक रात लिखी थी।

लेकिन, उसे नहीं पता था कि उसे बचाने कोई मसीहा नहीं, बल्कि एक ऐसा खूंखार शैतान आ रहा था, जिसके खौफ के आगे दुनिया के सारे जानवर पानी भरते थे।

दृश्य २: **** का व्यापारी और झूठा रुतबा

राघवेंद्र मैंशन का ग्राउंड फ्लोर एक फाइव-स्टार होटल के बॉलरूम जैसा सजा हुआ था। फ्रेंच शैंडलियर्स (झूमर) से गिरती क्रिस्टल की पीली रोशनी में शहर के बड़े-बड़े पॉलिटिशियंस, बिज़नेसमैन और सोशलाइट्स वाइन के ग्लास टकरा रहे थे। हर तरफ झूठी हंसी, पैसे का घमंड और खोखले रुतबे का दिखावा था।

हॉल के बीचों-बीच राघवेंद्र और पल्लवी खड़े थे। दोनों के चेहरों पर एक अजीब सी शातिर चमक थी।

तभी मुख्य दरवाज़े पर हलचल हुई और हॉल में अचानक फुसफुसाहटें तेज़ हो गईं। रंजीत सिंघानिया ने अंदर कदम रखा।

उम्र अड़तालीस साल, सिर के बाल आधे उड़ चुके थे, भारी भरकम पेट जिसे वह अपने महंगे लेकिन भद्दे डिज़ाइनर सूट में छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहा था। उसके चेहरे पर पसीने की एक चिपचिपी परत थी और उसकी छोटी, गहरी धंसी हुई आँखों में एक ऐसी घिनौनी **** थी जिसे देखकर किसी को भी उल्टी आ जाए। उसके साथ उसके चार बॉडीगार्ड्स भी थे। शहर में हर कोई जानता था कि रंजीत सिंघानिया की पहली दो पत्नियों का क्या हश्र हुआ था, लेकिन राघवेंद्र के लिए वो खून से सने हाथ नहीं, बल्कि पचास करोड़ के इन्वेस्टमेंट का चेक थे।

"आइए, आइए रंजीत जी!" राघवेंद्र ने दोनों हाथ फैलाकर उसका स्वागत किया और उसे गले लगाया।

"राघवेंद्र मेरे दोस्त!" रंजीत की आवाज़ में एक फटी हुई सी बेस थी। उसने पूरे हॉल में अपनी गंदी नज़रें घुमाईं और अपनी जीभ को अपने सूखे होंठों पर फेरते हुए कहा, "कहाँ है मेरी परी? इंतज़ार का वक्त अब खत्म हो रहा है। मैंने अपनी गाड़ी बाहर ही खड़ी रखी है। सगाई की अंगूठी पहनाते ही, मैं अपनी होने वाली बीवी को अपने साथ ले जाना चाहता हूँ। आखिर... हमें एक-दूसरे को 'करीब' से जानना भी तो है।"

पल्लवी ने एक बनावटी मुस्कान के साथ कहा, "बिल्कुल रंजीत जी, इनायत तो बस आपका ही इंतज़ार कर रही है। लावण्या उसे नीचे ला ही रही होगी।"

रंजीत ने अपनी जेब से एक लाल रंग के मखमल का बॉक्स निकाला। उसमें एक बहुत बड़ी, भद्दी सी हीरे की अंगूठी थी। उसने उस अंगूठी को देखा और एक गंदी, दरिंदगी भरी हंसी हंसा। आज रात वह उस मासूम कली को पूरी तरह से कुचलने वाला था।

दृश्य ३: खामोश तूफान की दस्तक

मैंशन के बाहर का मौसम बिल्कुल बदल चुका था। आसमान से जैसे पानी नहीं, बल्कि किसी की नफरत की आग बरस रही थी। तेज़ तूफानी हवाओं के कारण मैंशन के बाहर लगे बड़े-बड़े पेड़ बुरी तरह हिल रहे थे।

मैंशन से सिर्फ आधा किलोमीटर दूर, घने अंधेरे में एक काले रंग की बुलेटप्रूफ मेबैक (Maybach) खामोशी से खड़ी थी। गाड़ी के इंजन की कोई आवाज़ नहीं थी, सिर्फ वाइपर्स के चलने की धीमी 'स्वूश-स्वूश' आवाज़ आ रही थी।

गाड़ी की पिछली सीट पर आधिराज रघुवंशी बैठा था।

कमरे के अंदर का तापमान जमा देने वाला था, लेकिन आधिराज के अंदर एक ज्वालामुखी उबल रहा था। उसने एक फुल-ब्लैक टक्सीडो (Tuxedo) पहना हुआ था, जिसमें वह किसी डार्क अंडरवर्ल्ड किंग की तरह लग रहा था। उसकी बायीं कलाई पर बंधी रोलेक्स घड़ी टिक-टिक कर रही थी। उसकी गहरी, खतरनाक आँखें मैंशन की रोशनियों पर टिकी थीं।

"भाई," आगे की सीट से वेदांत ने पीछे मुड़कर देखा। वेदांत के चेहरे पर भी अब कोई प्लेबॉय वाली हंसी नहीं थी, बल्कि एक खूंखार गंभीरता थी। "राघवेंद्र ने सिक्योरिटी बढ़ा दी है। रंजीत सिंघानिया भी अंदर पहुंच चुका है। रुद्रा ने मैंशन को चारों तरफ से घेर लिया है। उसके स्नाइपर्स पोज़िशन ले चुके हैं। बस आपके एक इशारे की देर है।"

आधिराज ने अपनी उंगलियों में फंसा सिगार अपने होंठों से लगाया और एक गहरा कश लिया। धुएं के साथ-साथ उसकी आँखों से एक ऐसा ज़हरीला गुस्सा निकला जिसने वेदांत को भी सिहरा दिया।

"वो मेरी है," आधिराज की आवाज़ इतनी भारी और सर्द थी कि जैसे वो पाताल से आ रही हो।

यह कोई प्यार का इज़हार नहीं था। यह एक शैतान का अपनी प्रॉपर्टी, अपने शिकार पर दावा था। आधिराज को खुद समझ नहीं आ रहा था कि उसे इतना गुस्सा क्यों आ रहा है। वह इनायत को दुनिया की सबसे बड़ी धोखेबाज़, अपने माता-पिता की कातिल मानता था। उसने कसम खाई थी कि वह इनायत को तिल-तिल कर मारेगा। लेकिन... जब रुद्रा ने उसे बताया कि कोई और आदमी, एक दो कौड़ी का रंजीत सिंघानिया, इनायत को छूने वाला है, तो आधिराज का दिमाग सुन्न हो गया था।

उसके ज़हन में इनायत की वह मासूम, डरी हुई तस्वीर बार-बार कौंध रही थी। उसके वो होंठ, उसकी वो कत्थई आँखें। "उसे बर्बाद करने का हक सिर्फ और सिर्फ मेरा है," आधिराज ने सिगार को एशट्रे में कुचलते हुए कहा। "अगर रंजीत सिंघानिया की परछाईं ने भी इनायत को छुआ... तो मैं उसकी खाल उधेड़ कर इस पूरे शहर के सामने लटका दूंगा।"

"रुद्रा को क्या कमांड दूँ?" वेदांत ने अपने कान में लगे वायरलेस कम्युनिकेटर को दबाते हुए पूछा।

आधिराज के होंठों पर एक बेहद खौफनाक, बर्फीली मुस्कान फैल गई। "पावर ग्रिड कट कर दो। मुझे वो लड़की चाहिए। आज रात, मैं दुनिया के सामने से उस मासूमियत की देवी को उठाऊंगा। और रंजीत सिंघानिया को एक ऐसा तोहफा दो, जिसे वो अपनी आखिरी सांस तक न भूल पाए।"

वेदांत ने कम्युनिकेटर में सिर्फ एक शब्द कहा— "एग्जीक्यूट (Execute)।"

दृश्य ४: रस्म की शुरुआत और मौत का अंधेरा

हॉल में अचानक तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।

इनायत को सीढ़ियों से नीचे लाया जा रहा था। लावण्या ने उसका हाथ बहुत ज़ोर से पकड़ रखा था, ताकि वह लड़खड़ा कर गिर न जाए। इनायत की आँखें ज़मीन पर गड़ी थीं। वह कांप रही थी। उसके भारी लहंगे की सरसराहट सन्नाटे में गूंज रही थी।

उसे देखते ही रंजीत सिंघानिया की आँखों में एक भूखे भेड़िए जैसी चमक आ गई। उसने अपनी जीभ होंठों पर फेरी और दो कदम आगे बढ़ गया। "आह... मेरी रानी। बिल्कुल एक ताज़ा खिले हुए गुलाब की तरह," उसने फुसफुसाते हुए कहा।

जैसे ही इनायत रंजीत के सामने पहुंची, रंजीत ने अपना पसीने से भीगा, खुरदरा हाथ आगे बढ़ाया और इनायत की नाज़ुक कलाई को पकड़ लिया।

इनायत को ऐसा लगा जैसे किसी ज़हरीले सांप ने उसे डस लिया हो। वह बुरी तरह सिहर उठी और उसने अपना हाथ पीछे खींचने की कोशिश की, लेकिन लावण्या ने उसकी कमर में पीछे से इतनी ज़ोर से चुटकी काटी कि इनायत दर्द से कराह उठी।

"चुपचाप खड़ी रह," लावण्या ने इनायत के कान में फुसफुसाते हुए ज़हर उगला।

राघवेंद्र ने रंजीत को इशारा किया। रंजीत ने अपनी जेब से वह मखमल का डिब्बा निकाला और अंगूठी निकाल कर इनायत की कांपती हुई उंगलियों की तरफ बढ़ने लगा। इनायत ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं। उसके गालों पर आंसुओं की एक और गर्म धारा बह निकली। वह अपनी ज़िंदगी के खत्म होने का इंतज़ार कर रही थी।

अंगूठी इनायत की उंगली से बस एक इंच दूर थी...

तभी... खटाक!

एक ज़ोरदार आवाज़ के साथ पूरे मैंशन की बत्तियां गुल हो गईं।

फ्रेंच शैंडलियर्स बुझ गए। म्यूजिक सिस्टम एक भयानक चीख के साथ बंद हो गया। हर तरफ सिर्फ और सिर्फ एक गाढ़ा, घुप्प, और दमघोंटू अंधेरा छा गया। बाहर कड़कती बिजली की गड़गड़ाहट और तेज़ हो गई।

"ये क्या बकवास है! लाइट कैसे गई?" राघवेंद्र की गुस्से से भरी आवाज़ अंधेरे में गूंजी।

"जनरेटर ऑन करो, बेवकूफों!" लावण्या चिल्लाई।

लेकिन जनरेटर ऑन नहीं हुआ। हॉल में अचानक एक अजीब सी दहशत फैलने लगी। लोग आपस में टकराने लगे। रंजीत सिंघानिया ने गुस्से में कहा, "राघवेंद्र, ये कैसा मज़ाक..."

रंजीत की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि अंधेरे में एक बहुत ही खामोश, लेकिन खौफनाक आवाज़ गूंजी— स्वूप... स्वूप...

यह रुद्रा के हाथों में मौजूद साइलेंसर लगी गन्स की आवाज़ थी। अगले ही पल, हॉल में खड़े रंजीत के चारों भारी-भरकम बॉडीगार्ड्स बिना कोई आवाज़ किए, ताश के पत्तों की तरह ज़मीन पर गिर पड़े। किसी की गर्दन की हड्डी टूटने की 'कड़क' आवाज़ आई, तो कोई ज़मीन पर खून की उल्टियां करता हुआ तड़पने लगा।

अंधेरे में चीख-पुकार मच गई। औरतें डर के मारे चिल्लाने लगीं।

इनायत बुरी तरह डर गई थी। वह पीछे हटने की कोशिश कर रही थी, उसका दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि उसे अपनी पसलियां टूटती हुई महसूस हो रही थीं।

तभी... अंधेरे के बीच से किसी ने इनायत को खींचा।

दृश्य ५: शैतान का स्पर्श और खौफनाक कसम

यह स्पर्श रंजीत के उस गंदे और चिपचिपे स्पर्श जैसा बिल्कुल नहीं था।

यह स्पर्श बेहद मजबूत, सर्द और इतना ताकतवर था कि इनायत किसी कागज़ की तरह खिंचती हुई एक बेहद चौड़े और सख्त सीने से जा टकराई।

वह सीना किसी लोहे की चट्टान जैसा था। इनायत की सांसें हलक में अटक गईं। उसे उस अजनबी के कपड़ों से मूसलाधार बारिश, महंगे इटैलियन लेदर और एक बहुत ही कड़क, नशीले रशियन सिगार (Cigar) की खुशबू आ रही थी। यह खुशबू इतनी मर्दाना, इतनी हावी कर देने वाली (Overpowering) और खतरनाक थी कि इनायत के दिमाग ने काम करना बंद कर दिया।

उस अजनबी के एक हाथ ने इनायत की पतली कमर को इतने खौफनाक तरीके से जकड़ लिया था कि इनायत को लगा जैसे किसी अजगर ने उसे लपेट लिया हो। उसका दूसरा सख्त और खुरदरा हाथ इनायत के लहंगे के खुले हुए नंगे पीठ पर आकर टिक गया।

उसकी उंगलियों के सर्द स्पर्श से इनायत के पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। वह डर के मारे कांपने लगी और उसने खुद को छुड़ाने के लिए अपने हाथ-पैर मारने शुरू किए।

"छोड़िए... प्लीज... मुझे छोड़िए..." इनायत ने रोते हुए फुसफुसाने की कोशिश की, लेकिन उसकी आवाज़ उसके गले में ही घुट कर रह गई।

तभी उस अजनबी का चेहरा इनायत के बिल्कुल करीब आ गया। इतनी करीब कि उसकी गर्म, पुदीने (Mint) और सिगार की महक वाली सांसें इनायत के चेहरे पर टकराने लगीं। बाहर आसमान में अचानक बिजली चमकी, और उस एक सेकंड की रोशनी में इनायत ने वो आँखें देखीं।

वो आँखें किसी खूंखार, भूखे भेड़िए की तरह थीं। उनमें एक ऐसी गहरी, अथाह नफरत, खौफ और एक अजीब सा जुनूनी पागलपन था, जिसे देखकर इनायत की रूह तक कांप उठी। वह आधिराज रघुवंशी था।

आधिराज ने इनायत की कमर पर अपनी पकड़ को और सख्त किया, जिससे इनायत पूरी तरह उसके सीने से चिपक गई। आधिराज के होंठ इनायत के कान के पास आए, और उसकी भारी, खुरदरी आवाज़ इनायत की नसों में ज़हर की तरह उतरने लगी—

"तुम्हारी ये सिसकियां... तुम्हारे ये आंसू... और तुम्हारी ये ज़िंदगी, इनायत... अब सब मेरी जागीर है।" आधिराज की आवाज़ में एक ऐसा सर्द खौफ था जो मौत से भी भयानक था। "तूने मौत का खेल खेला था ना? अब मैं तुझे ज़िंदगी की वो खौफनाक सज़ा दूंगा, कि तू हर रोज़ मरने की भीख मांगेगी। तू मेरी कैद में है, मेरी गुलाम... और मेरा सबसे भयानक जुनून।"

इनायत की आँखों से आंसू बहकर आधिराज के सूट पर गिर रहे थे। इससे पहले कि वह कुछ समझ पाती, आधिराज ने एक रुमाल, जिस पर क्लोरोफॉर्म (Chloroform) लगा था, इनायत के चेहरे पर रख दिया।

इनायत ने तड़पने की कोशिश की, उसने अपनी नाज़ुक उंगलियों से आधिराज के सूट को कसकर पकड़ा, लेकिन आधिराज की ताकत के सामने वह कुछ नहीं कर सकी। चंद सेकंडों में ही उसकी दुनिया गोल घूमने लगी, उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा, और उसका कमज़ोर शरीर पूरी तरह से आधिराज की मज़बूत बांहों में झूल गया।

आधिराज ने बेहोश इनायत को अपनी बांहों में किसी बच्चे की तरह उठा लिया। उसने एक पल के लिए इनायत के मासूम, आंसुओं से भीगे चेहरे को देखा। उसके दिल के किसी कोने में एक अजीब सी हलचल हुई, लेकिन उसने उस एहसास को तुरंत कुचल दिया। उसने पलटकर रंजीत सिंघानिया की तरफ देखा, जो अंधेरे में ज़मीन पर रेंग रहा था।

"रुद्रा," आधिराज ने खामोशी से हुक्म दिया। "अपना तोहफा छोड़ दो।"

दृश्य ६: तबाही का निशान और मौत का पैगाम

लगभग पांच मिनट के खौफनाक सन्नाटे के बाद, मैंशन का बैकअप जनरेटर अचानक चालू हो गया।

सारी लाइटें एक साथ जल उठीं। लेकिन लाइटें जलते ही हॉल में जो नज़ारा दिखा, उसने वहां मौजूद हर इंसान का खून जमा दिया।

हॉल के बीचों-बीच रंजीत सिंघानिया ज़मीन पर पड़ा हुआ था। वह मरा नहीं था, लेकिन ज़िंदा भी नहीं लग रहा था। उसके दोनों हाथों की उंगलियां बहुत ही बेरहमी से पीछे की तरफ तोड़ दी गई थीं। वह दर्द से बिलख रहा था, और उसके गले पर किसी तेज़ धारदार चाकू से बहुत ही गहरा कट लगा था, जिससे लगातार खून बहकर राघवेंद्र मैंशन के महंगे इटैलियन मार्बल को लाल कर रहा था। उसके चारों बॉडीगार्ड्स लाश बन चुके थे।

लेकिन जिस चीज़ ने राघवेंद्र, पल्लवी और लावण्या की सांसें रोक दीं, वो कुछ और था।

इनायत वहां नहीं थी। वह गायब हो चुकी थी।

लेकिन इनायत जिस जगह पर खड़ी थी, बिल्कुल उसी जगह ज़मीन पर एक बेहद खूबसूरत, लेकिन खौफनाक चीज़ पड़ी थी।

एक ताज़ा, गहरे काले रंग का गुलाब (Black Rose)।

और उस काले गुलाब के बिल्कुल बीचों-बीच एक भारी सोने का सिक्का रखा हुआ था। उस सिक्के पर दो तलवारें और एक शेर का निशान बना हुआ था— रघुवंशी सिं****ेट का शाही प्रतीक।

ग्लोबल अंडरवर्ल्ड का सबसे खौफनाक निशान। मौत का पैगाम।

"ये... ये क्या है डैड?" लावण्या का पूरा शरीर कांपने लगा। उसकी आँखों में पहली बार अपनी चालाकियों पर घमंड नहीं, बल्कि खौफ था। "इनायत कहाँ है?"

राघवेंद्र के पैरों तले ज़मीन खिसक चुकी थी। उसका चेहरा पसीने से भीग गया और वह धड़ाम से ज़मीन पर गिर पड़ा। सोने के उस सिक्के को देखते ही उसकी आँखों के सामने साक्षात मौत नाचने लगी।

"हम... हम खत्म हो गए लावण्या," राघवेंद्र की आवाज़ बुरी तरह लड़खड़ा रही थी। "ये... ये रघुवंशी खानदान का निशान है। द डेविल... आधिराज रघुवंशी। इनायत को किसी मामूली किडनैपर ने नहीं... दुनिया के सबसे खूंखार शैतान ने उठाया है। और अब... वो हम में से किसी को ज़िंदा नहीं छोड़ेगा।"

पल्लवी के गले से एक चीख निकल गई। मैंशन में खौफ का वो मंज़र था जो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता था। लावण्या ने जो जाल इनायत को फंसाने के लिए बुना था, अब उसी जाल में एक ऐसा खूंखार शेर फंस चुका था, जो लावण्या और उसके पूरे परिवार को कच्चा चबा जाने वाला था।

दूसरी तरफ, मैंशन से मीलों दूर, बारिश के उस गहरे अंधेरे में आधिराज की मेबैक शहर के सबसे सुनसान और रहस्यमयी इलाके की तरफ अपनी पूरी रफ़्तार से भाग रही थी। पिछली सीट पर आधिराज बैठा था, और इनायत का सिर उसकी गोदी में था। आधिराज की नज़रें इनायत के उस शांत चेहरे पर जमी थीं।

उसकी उंगलियां अनजाने में ही इनायत के माथे पर बिखरे बालों को सहला रही थीं। आधिराज रघुवंशी ने अपनी ज़िंदगी का सबसे खतरनाक खेल शुरू कर दिया था। उसने एक ऐसी आग को अपने सीने से लगा लिया था, जो या तो उसे हमेशा के लिए पिघला देगी, या फिर उन दोनों को जलाकर राख कर देगी।

कहानी का असली, खौफनाक और जुनूनी डार्क रोमांस अब शुरू हो चुका था।

(चैप्टर ४ की प्रतीक्षा करें... जहाँ इनायत को होश आएगा शैतान की उस रहस्यमयी हवेली में, और शुरू होगा प्यार, नफरत और धोखे का सबसे खतरनाक खेल।)

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