Alpha's Replace Bride Ch. 2

Alpha's Replace Bride - Chapter 2

Posted by swarda sonwane • Sep 01, 2026 02:16 PM

मैं अभय सिंघानिया,....इस पैक का होने वाला अल्फा, आज एक लड़की की वजह से टूट चुका था। क्या गलती थी मेरी? मैंने उसे कितना विश्वास किया, उसे कितना प्यार किया, लेकिन उसने मेरा विश्वासघात किया। सब लोगों ने मुझे यह बात बताने की कोशिश की थी, लेकिन फिर भी मैंने किसी पर यकीन नहीं किया।

अभय बीच पर बैठा, शराब पीते हुए सारी बातें याद कर रहा था। उसे अपने आप पर बहुत गुस्सा आ रहा था। एक महीना पहले जब उसे श्रेया के धोखे का पता चला, तब वह अंदर से बहुत दुखी हो गया था। जब उसने पूरी बात पता की, तो यह हैरान कर देने वाली थी—श्रेया के साथ केवल दूसरा नहीं, बल्कि उसका सबसे अच्छा दोस्त विहान  था। विहान और अभय हमेशा से एक साथ रहते थे। अभय को कभी नहीं लगा था कि श्रेया विहान से प्यार करती है।

अब वह कुछ नहीं कर सकता था, क्योंकि श्रेया विहान के बच्चों की मां बनने वाली थी। लेकिन लास्ट मोमेंट पर अभय यह शादी कैंसिल नहीं कर सकता था, क्योंकि उनके पैक के कुछ नियम थे। नियमों के अनुसार, जब अभय इस पैक का अल्फा बनेगा, उससे पहले उसकी शादी होना बहुत जरूरी था। अब तक उसने अल्फा बनने के लिए सारे इम्तिहान पास कर लिए थे। बस यही आखिरी चीज़ बची थी, जो बड़े बुजुर्गों ने सोचकर रखा था—जो भी इस पैक का अल्फा बनेगा, वह जिम्मेदार होना चाहिए और उसकी शादी हो जानी चाहिए।

इसलिए अभय के लिए यह शादी करना जरूरी था। उसने अल्फा बनने के लिए बहुत इंतजार किया था और अब वह और इंतजार नहीं करना चाहता था। जब उसे श्रेया के धोखे के बारे में पता चला, उसने श्रेया से सीधे-सीधे बात की। तब श्रेया ने स्वीकार किया कि वह विहान से प्यार करती है।

अभय ने न चाहते हुए भी कहा, "ठीक है, मैं बस इस पैक का अल्फा बनना चाहता हूं। मैं तुमसे और कोई उम्मीद नहीं रखूंगा। तुम बस सबके सामने मेरे साथ शादी करने का दिखावा कर देना। छह महीने बाद मैं तुम्हें डिवोर्स दे दूंगा। मैं अल्फा बन जाऊंगा और तुम्हें भी मेरी तरफ से आजादी मिल जाएगी।"

श्रेया ने भी उसकी बात में हां भर दी और कहा, "मैं तुम्हारी मदद कर दूंगी।"

कल तक यह सब सही चल रहा था, लेकिन कल जब डिजाइनर उसके पास आई और बातें हुईं, उसके बाद से श्रेया गायब हो गई। उसने अभय को कुछ भी नहीं बताया। कल उनकी शादी थी और आज दुल्हन गायब थी। यह सोचकर अभय को बहुत गुस्सा आ रहा था। उसने हर तरफ श्रेया को ढूंढने की कोशिश की, लेकिन श्रेया ने खुद को इस तरह छिपा लिया था कि कोई उसे नहीं ढूंढ पा रहा था।

अभय खुद को शराब के नशे में डूबा रहा था, क्योंकि उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

इधर वेदा कमरे में आई और खिड़की से अभय को देखने की कोशिश की। वह अभी भी बीच पर बैठा था, परछाई की तरह। काले बादल छाए हुए थे। उसे अभय की चिंता हो रही थी। वेदा उससे बेहद प्यार करती थी और उसे इस तरह तकलीफ में नहीं देख सकती थी।

सब लोग पागलों की तरह श्रेया को ढूंढ रहे थे। अब तक यह बात बाहर किसी को पता नहीं चली थी, लेकिन घर में जिन्हें पता था, वे सब उसे ही खोज रहे थे। वेदा और श्रेया के पापा, बिटा भी, दूर-दूर तक जुड़े हुए थे। उन्होंने हर जगह श्रेया को खोजने की कोशिश की, क्योंकि अगर कल की शादी नहीं होती, तो उनके परिवार की बदनामी होती।

कल रात पूर्णमासी की रात पर उनका विवाह का शुभ मुहूर्त था। अब बारिश शुरू हो गई थी। वेदा फिर से खिड़की की तरफ झाँकने लगी और उसने देखा कि अभय अभी भी वहीं बैठा हुआ है।

इधर वेदा बारिश में ही अभय के पास जाने लगी। दूर से उसे अभय दिखाई दे रहा था, जो अभी भी शराब पी रहा था। वेदा भागते हुए उसके पास आ गई, और जब तक वह उसके पास पहुंची, वह पूरी तरह भीग चुकी थी। यह अभय का प्राइवेट बीच था।

वेदा उसके पास आकर बोली, "अभय, बारिश हो रही है, आप ऐसे बाहर रहेंगे?"

अभय नशे में था, थोड़ा सा टूट चुका था। अब गुस्से से उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था।

वेदा को वहां पर देखकर उसने कहा तुम इतनी रात को यहां पर क्या कर रही हो??

उसकी आवाज में गुस्सा था वेदा उसकी आवाज सुनकर ही डर गई...

वह बस उसे ही देखे जा रहा था उसके दिमाग में वेदा को देखकर बहुत सारे ख्याल आ रहे थे।

उसने वेदा को कमर से पकड़ा। उसकी नजर देखकर वेदा काफी डर गई थी, लेकिन अभय ने उसकी तरफ देखकर कहा, "बताओ तुम्हें मेरी इतनी चिंता क्यों हो रही है?"

वेदा ने इधर-उधर नजरें घुमाते हुए कहा, "जी वो, कल फंक्शन है।" वह पहली बार उससे बात कर रही थी। उसकी धड़कनें तेज हो रही थीं, सांस फूल रही थी। बारिश में पूरी तरह भीगी वेदा बहुत खूबसूरत लग रही थी।  क्या तुम्हारी बहन तो यहां से चली गई है तब कहां के फंक्शन होंगे।

उसके बाद सुनकर वेद बहुत हैरान हो गई क्योंकि अब तक उसे ऐसा लग रहा था कि अभय को उसके बारे में कुछ नहीं पता है लेकिन अभय सब कुछ जानता था।

उसकी आंखों में घुसा था उसने वेदा को पढकडते हुए कहा तुम्हारी बहन धोखेबाज है मैं जानता था कि वह यहां से जाने वाली है लेकिन उसने फिर भी मेरी बात नहीं मानी कल तक वह मेरी मदद कर सकती थी हमारी दोस्ती के खातिर ही मदद करती।

वेदा को उसकी बातें सुनकर हैरानी हो रही थी दोस्ती के खातिर यानी अभय और उसकी बहन के बीच कोई प्यार नहीं था अब

उसने वेदा का कुछ भी कसूर नहीं था।

अभय बस उसे देख रहा था। जैसे ही उसने वेदा को देखा, उसके दिमाग में एक ख्याल आया। उसकी आंखों में चमक और होठों पर तिरछी मुस्कुराहट आ गई। वेदा को वह पहले से ही जानता था, लेकिन कभी उसे इतनी नज़दीकसे  और ऐसी नजरों से नहीं देखा था। हमेशा वह सिर्फ और सिर्फ श्रेया के बारे में सोचता था।

लेकिन आज वेदा को देखकर उसके दिमाग में आया, "क्यों ना कल मैं वेदा से शादी कर लूं?" यह सोचते ही उसके चेहरे पर एक टेढ़ी मुस्कुराहट आ गई। यह तो एक तीर से दो निशाने की बात थी—मेरी अल्फा की कुर्सी भी बच जाएगी और मैं श्रेया से बदला भी ले सकता हूं।

यह सब सो कर अभय अब शांत हो चुका था उसने वेदा को अपने से दूर किया और कहा, "तुम बारिश में पूरी तरह भीग चुकी हो।"  वह सब नहीं करना चाहता था लेकिन श्रेया से मिली हुई बेइज्जती का बदला लेने का इससे अच्छा मौका उसके पास नहीं था वह जानता था कि इसमें वह जबरदस्ती वेदा को इंवॉल्व कर रहा है लेकिन अगर वह वेदा से शादी करता तो वह श्रेया से बदला ले सकता था।

अब उसकी नजरें वेदा  पर थी, और उसे बहुत शर्म आ रही थी।

वह जानती थी कि यह सब गलत है, इस तरह उसे इतनी रात को अभय के पास नहीं आना चाहिए था लेकिन फिर भी वह  उसे प्यार करती थी।  और वह उसे इस तरह अकेले नहीं छोड़ सकतीथी।

अभय पूरी तरह टूट चुका था, एक जख्मी शेर की तरह। शायद वेदा उसे संभालने और मरहम लगाने के लिए आई थी।

अभय आगे चल रहा था और वेदा उसके पीछे चल रही थी। उसकी धीमी चाल देखकर अभय ने बिना कुछ सोचे समझे उसे पकड़ कर अपनी गोद में उठा लिया। वेदा की आंखें बड़ी-बड़ी हो गईं, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

अभय ने उसकी आंखों में देखकर कहा, "अगर इतना धीरे चलोगे तो हमें पहुंचने में काफी देर हो जाएगी।"

इतना कहकर वह उसे अपने कमरे की तरफ ले जाने लगा।

वेदा ने जागते हुए कहा, "आप मुझे वहां क्यों लेकर जा रहे हैं?"

अभय ने उसकी तरफ देखकर कहा, "अब तुम्हारी ऐसी हालत नहीं है कि तुम अपने कमरे में जा सको। अगर किसी ने तुम्हें यहां देखा तो सब लोग गलत मतलब निकाल सकते हैं। इसलिए मैं तुम्हें अपने कमरे में ले जा रहा हूं।"अभय का इरादा कुछ और था लेकिन वेदा उस वक्त वह समझ नहीं पा रही थी

वह उसे बारिश से बचा रहा था और शराब उस पर हावी हो गई थी। वह उसे अपने कमरे में लेकर आया और वेदा से कहा, "तुम अपने कपड़े बदल लो, पूरे गीले हो गए हैं।" लेकिन वेदा को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था।

उसके कपड़े तो अपने कमरे में थे उसे क्यों खड़ा देखकर अभय ने कहा क्या हुआ?

वेदाने धीरे से कहा मेरे पास यहां पर कपड़े नहीं है.... तो अभय ने उसे अपना एक शर्ट दे दिया।

वेदा को यह सब बहुत अजीब लग रहा था। वह मासूम चेहरे से मेरी ओर देखने लगी। अभय की आँखों में शराब का नशा था, लेकिन फिर भी वह खुद को संभाल सकता था।

वेदा अंदर जाकर कपड़े बदलकर बाहर आई। उसने अभय की सफेद शर्ट पहनी थी, जो उसके घुटनों से ऊपर आ रही थी। उसके चमकते गोरे बदन को साफ़-साफ़ देखा जा सकता था। वह धीरे-धीरे मेरे सामने आकर खड़ी हो गई। उसकी पतली कमर और सीधे कमर तक लहराते बाल बहुत खूबसूरत लग रहे थे। अभय की नजर बार-बार उस पर जा रही थी। उसने अपना सर दूसरी तरफ कर लिया।

जैसे ही वह आगे बढ़ी, नीचे गीले होने की वजह से उसका पैर फिसला और वह अभय की बाहों में आ गई। अब वो दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब थे। अभय को उसे दूर करने का मन नहीं कर रहा था। सबकी नजरों में अभय और श्रेया एक-दूसरे से प्यार करते थे, लेकिन उनका रिश्ता काफी समय पहले ही खत्म हो चुका था। बहुत दिनों से अभय अकेला था। अब उसके दिल में कोई और नहीं था।

अब वेदा मेरी नजरों में बेहद खूबसूरत लग रही थी। शायद श्रेया से भी खूबसूरत। लेकिन वह हमेशा शांत और गुमसुम रहने वाली लड़की थी। वह कभी किसी की नजर में नहीं आई थी। उसका खूबसूरत गोरा बदन मेरी बाहों में था। उसकी खुशबू मुझे अपनी ओर खींच रही थी।

शायद यह शराब का नशा था, या गुस्सा, या बदल का एहसास। मुझे नहीं पता था, और मुझे फर्क भी नहीं पड़ रहा था। लेकिन इस वक्त उसकी खुशबू मुझे अपनी ओर खींच रही थी। हम लोगों को एक-दूसरे की खुशबू से ही पहचाना जाता है, और अगर उसकी खुशबू हमें आकर्षित करे तो हम उसके पास चले जाते हैं। वैसे ही मैं वेदा से आकर्षित हो गया और उसे अपने करीब खींच लिया और उसका चेहरा देखने लगा।

वेदा के होठ ठंड से कांप रहे थे। मेरी बाहों में वह असहज महसूस कर रही थी, लेकिन पता नहीं आज मुझे क्या हो गया था। हम दोनों एक-दूसरे में खो गए थे। अचानक जोर से बिजली कड़की और वेदा ने मुझे कसकर अपने गले लगाया।

बस वही एक पल था। मैं ने भी सब कुछ भूलाकर उसे कसकर गले लगा लिया। धीरे-धीरे मेरे होठ उसकी गर्दन पर चल रहे थे। जैसे ही उसका चेहरा सामने आया, मैंने उसके बालों में हाथ डालकर उसका चेहरा अपने पास किया और उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए। वह थोड़ी घबरा गई। उसने कभी सोचा नहीं था कि मैं उसके साथ ऐसा करूंगा। वह मुझे दूर करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मैं उसकी खुशबू में इतना खो गया था कि मैं जरा भी पीछे नहीं हटा।

मेरी ताकत के सामने वेदा भी बेबस थी। थोड़ी देर बाद उसने मुझे विरोध करना छोड़ दिया और  वह भी मेरा साथ देने लगी। हम दोनों एक-दूसरे के और करीब हो गए। उसकी सांस फूल रही थी। उसके हाथों ने मेरे बालों को कसकर पकड़ा और मैं उसे अंदर तक किस कर रहा था। जब उसे सांस लेने में तकलीफ हुई, तब उसने अपना चेहरा दूर किया और उसके मुंह से हल्की लेकिन प्यार भरी आवाज़ आई: "अभय…"

उस समय उसके मुंह से अपना नाम सुनकर मैं बहुत खुश हुआ। मैंने उसे गोद में उठाकर बेड पर ले आया। उस वक्त हमारे बीच की सारी दूरियां मिट गईं। मेरे हाथ उसके बदन पर चल रहे थे। उस एक पल में हमने एक-दूसरे की सारी दूरियां खत्म कर दीं। उसकी आंखों में मेरे लिए प्यार की चमक थी और शायद एक स्वीकार भी। शायद वह इस दुनिया में सिर्फ और सिर्फ मेरे लिए आई थी।

मैं जो शुरुआत में अपने दर्द, गुस्से और बदले के ज्वाला में जल रहा था, लेकिन उसके पास आकर मुझे एक अलग सुकून महसूस हुआ। हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में खो गए।

अभय को यह समझने में देर नहीं लगी कि वेदा को इससे पहले किसी ने छुआ नहीं था। आज अभय ने उसे पूरी तरह से अपना बना लिया था।

अगले दिन जब वह उठी, तो उसे अपने शरीर में हल्की जलन महसूस हुई। कल रात अभय के होंठ लगातार उसके शरीर पर थे। उसने हाथ लगाया और सब महसूस किया। यानी कल जो हुआ वह सपना नहीं था। वेदाने सपने में कई बार अभय को अपनी बाहों में पाया था, लेकिन आज यह सपना नहीं था, आज यह सच्चाई थी।

जैसे ही वह पूरी तरह होश में आई और अपनी गर्दन पर हाथ लगाया, मैं पूरी तरह चौंक गई। अभय ने मुझे अपना बना लिया था। हे भगवान! मेरी सांस फूल रही थी और हाथ अपने मुंह पर चला गया। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है। मैं पूरी तरह से घबरा गई थी।  क्योंकि मैं कल बहक गई थी। उसके पास आने के बाद एक अजीब सा नशा छा गया था इसलिए वेद अपने आप को कंट्रोल नहीं कर सकी लेकिन अब उसे अभय ने उसे मार्क कर दिया था। जो आप चाह कर भी वह मिटा नहीं सकती थी।

मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि कल मैं उसके साथ थी। मुझे बहुत बुरा लग रहा था, क्योंकि वह मेरी बहन का होने वाला पति था। उनकी इंगेजमेंट हो चुकी थी और आज उनकी शादी थी। लेकिन श्रेया भाग जाने के कारण यह शादी शायद कैंसिल हो जाती। फिर भी, उसके साथ एक ही बिस्तर पर मेरा होना… यह बहुत गलत था।

मैंने सालों साल उसके बारे में सपना देखा था, उसे प्यार किया था, लेकिन कभी अपने फीलिंग्स को किसी के सामने जाहिर नहीं किया था। वो हमेशा मेरे मन के किसी कोने में बंधे थे। मैंने इस बात का जिक्र कभी अपने आप से भी नहीं किया था।

मैं हमेशा डरती थी कि अगर कोई जान गया तो क्या होगा, क्योंकि श्रेया मेरी बहन थी और अपने ही बहन के होने वाले पति से प्यार करना बहुत गलत था। मैं अपनी बहन से बहुत प्यार करती थी और उसका बुरा नहीं चाहती थी।

और आज मैं दुनिया की सबसे बुरी बहन बन चुकी हूँ, यही सोचकर मेरी आँखों से आँसू आ रहे थे। अचानक अभय की नींद खुली और उसने मेरी तरफ देखा। उसकी नींद धीरे-धीरे खुली और उसने मेरी तरफ नजर डाली। मैं भी उसकी तरफ देख रही थी। मुझे कुछ बोलने का साहस नहीं हो रहा था, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

अभय ने मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा, "जाओ, जल्दी से नहा लो।" इसके आगे उसने कुछ नहीं बोला। ना माफी मांगी, ना किसी बात की सफाई दी। उसे बिलकुल हैरानी नहीं हुई थी कि कल रात हमारे बीच क्या हुआ था। जैसे एक अल्फा का हुक्म हो।

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