Alpha's Replace Bride Ch. 3

Alpha's Replace Bride - Chapter 3

Posted by swarda sonwane • Sep 03, 2026 12:22 AM

वेदा के नजर से.....

उसकी बात सुनकर मैं चुपचाप बिस्तर से उठी और बाथरूम की ओर चली गई। अब भी मेरे शरीर पर कल रात के निशान थे। मैंने शॉवर ऑन किया। जैसे ही ठंडा पानी मेरे बदन पर गिरा, मुझे थोड़ा सुकून महसूस हुआ। सच में, इसकी मुझे बहुत जरूरत थी।

लेकिन सिर्फ पानी से खुद को धो लेना काफी नहीं था। कल रात जो हुआ… वह सिर्फ एक गलती नहीं थी। मैंने अपनी ही दीदी के होने वाले पति के साथ हद पार कर दी थी। मैं खुद को मन ही मन कोस रही थी।

मुझे अभय हमेशा से पसंद था। यह बात मैंने कभी किसी से नहीं कही, खुद से भी नहीं। लेकिन मैंने कभी यह नहीं सोचा था कि उसकी और श्रेया दीदी की शादी टूट जाएगी और वह मेरा हो जाएगा। मेरा प्यार हमेशा एकतरफा था, और यह मैं जानती थी।

मेरी आंखों से आंसू बहने लगे। अनजाने में ही मैं उससे बंध गई थी। लेकिन यह बंधन मुझे तोड़ना होगा — मेरे पास कोई और रास्ता नहीं था। अगर अभय चाहे तो हम अभी भी इस परेशानी से बाहर आ सकते थे।  उसके और मेरे बीच जो बंधन हो गया था उसने मुझे जो चिन्हित किया था वह बंधन वह तोड़ सकता था।

मैंने जल्दी से टॉवल लपेटा और बाहर आई। बाहर आकर मैं वहीं रुक गई। अभय पहले से तैयार था। सफेद शर्ट में वह बेहद आकर्षक लग रहा था। वह अपना आखिरी बटन लगा रहा था।

मैंने धीमे से कहा, "आप रेडी भी हो गए?"

उसने एक पल मेरी तरफ देखा। मैंने नजरें झुका लीं और कहा, "मुझे आपसे बात करनी है।"

उसने बिना ज्यादा भाव दिए कहा, "अभी नहीं। मुझे शादी की तैयारी करनी है।"

उसका यह सहज लहजा सुनकर मुझे यकीन ही नहीं हुआ। शादी… हां, आज उसकी और मेरी दीदी की शादी थी।

मैंने खुद को संभालते हुए कहा, "लेकिन मुझे आपसे जरूरी बात करनी है।"

वह कुछ पल रुका, फिर बोला, "जाने से पहले बात करते हैं।"

"ठीक है," मैंने कहा। वह चला गया और मैं वहीं खड़ी रह गई। मुझे लगा था कि कल रात के बाद वह खुद मुझसे कुछ कहेगा, लेकिन शायद मैं गलत थी।

अगर अभी बात साफ नहीं हुई तो आगे चलकर सबके लिए मुश्किल हो सकती थी।

मैंने जल्दी से कपड़े बदले और बाहर आई। बाहर माहौल अजीब था। सब लोग श्रेया दीदी को ढूंढ रहे थे।

तभी मुझे याद आया — कल रात एक मैसेज आया था कि श्रेया मिसिंग है।

मैं जल्दी से बाहर भागी। वहां एक कागज रखा था, ऐसे जैसे सबको दिखाने के लिए। मुझे लगा कोई पहले ही उसे पढ़ चुका है। फिर भी मैंने उसे उठाया।

मेरे हाथ कांप रहे थे।

कागज पर सिर्फ दो लाइनें लिखी थीं —

"मैं अपने सच्चे प्यार के साथ जा रही हूं।

– श्रेया"

वह कागज पढ़कर मैं अपने कमरे में आकर बैठ गई। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। श्रेया दीदी का कोई पता नहीं चल रहा था।

उधर अभय अपने ही ख्यालों में खोया हुआ था।

मैं क्या कर रहा हूं? मैं कितनी कोशिश कर रहा हूं, लेकिन कल रात की सारी बातें बार-बार मेरे दिमाग में क्यों आ रही हैं? वे मेरा पीछा क्यों नहीं छोड़ रही हैं? वेदा मेरे दिमाग पर इतनी हावी क्यों हो रही है?

मैंने तो उसे कभी उस नजर से देखा ही नहीं था। सच कहूं तो मैंने उसे कभी देखा ही नहीं। मेरे लिए सिर्फ श्रेया ही काफी थी। अगर कभी नजरें टकरा भी जातीं, तो मेरे दिमाग में बस यही रहता था कि वह श्रेया की बहन है। मैं उसे सिर्फ नाम से जानता था, उससे ज्यादा कुछ नहीं।

लेकिन कल… पता नहीं मुझे क्या हो गया था। मैं उसमें ऐसे खो गया जैसे बरसों से उसे चाहता हूं। यह बहुत अजीब था। मुझे ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए था।

अभी भी मुझे उसकी खुशबू महसूस हो रही थी। वह जैसे मुझमें बस गई थी। किसी जादू की तरह मुझ पर छा गई थी, और उस जादू को मैं तोड़ नहीं पा रहा था।

मैं खुद पर काबू क्यों नहीं रख पाया? मैंने उसे अपना क्यों बना लिया? लेकिन उस पल मुझे एक अजीब सा सुकून मिला था।

पहले मुझे लगा था कि शायद मैं श्रेया से बदला लेने के लिए ऐसा कर रहा हूं। उसे सबक सिखाने के लिए। क्योंकि वेदा को अपनाना यानी उसकी बहन के किए का बदला लेना।

लेकिन यह सब सोचते हुए भी मुझे अंदर से थोड़ा अपराधबोध हो रहा था। इसमें वेदा की कोई गलती नहीं थी। मुझे उसे इस सब में नहीं लाना चाहिए था।

ऊपर से मैं खुद को यही समझा रहा था कि यह बदला है… लेकिन अंदर से मुझे पता था कि यह सिर्फ बदला नहीं है। यह कुछ और है। और मैं उसकी तरफ खिंचता जा रहा हूं।

मुझे कल भी पता था कि मैं खुद को रोक सकता हूं। मैं उसे जाने दे सकता था। लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया।

आज सुबह भी मैंने उसे जल्दी से बाथरूम में भेज दिया, क्योंकि अगर वह थोड़ी देर और मेरे सामने रहती तो शायद मैं खुद पर दोबारा काबू खो देता।

मैंने मैसेज देखा था कि श्रेया का कहीं कोई पता नहीं है। मैंने फोन बिस्तर पर फेंक दिया। उसने मुझे धोखा दिया था। सबके सामने मेरा अपमान किया था।

कितने साल लगे थे मुझे अपना मान-सम्मान कमाने में यहां तक आनेमें । मैं आगे होने वाला अल्फा था… और अब यह लड़की मेरा सब कुछ छीनने को तैयार थी।

शायद किस्मत फिर से मेरी परीक्षा ले रही थी।

मैं यही सब सोच रहा था कि तभी वेदा बाथरूम से बाहर आई। उसके बाल गीले थे, और वह सिर्फ टॉवल में थी।

मेरी सांसें थम सी गईं। एक पल को लगा कि फिर से उसे अपनी बाहों में भर लूं।

मैं तुरंत वहां से हटने लगा। वह मुझसे कुछ कह रही थी, लेकिन मैंने उसे नजरअंदाज करते हुए कहा, "मुझे अभी काम है… हम बाद में बात करेंगे।"

मुझे पता था कि मैं रुक सकता था। बात कर सकता था। लेकिन मैं नहीं रुका।

एक बार जो गलती हो चुकी थी, उसे दोबारा नहीं दोहराना चाहता था।

हालांकि मेरा शरीर मेरे काबू में नहीं था। वह चाहता था कि मैं उसके पास जाऊं, उसे फिर से महसूस करूं, उसे अपनी बाहों में भर लूं।

लेकिन फिर भी… मैं पीछे मुड़कर नहीं देखा।

वेदा जिस वक्त इस कमरे से बाहर निकली थी और मेरी आँखों से ओझल हुई थी, उसी पल से मैं उसे देखने के लिए तरस रहा था। लेकिन अब मेरे सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि श्रेया गायब थी… और मैंने मन ही मन ठान लिया था कि अब शादी मैं वेदा से ही करूँगा। आज का दिन श्रेया का नहीं, वेदा का था।

मैं जल्दी से ऑफिस आ गया। आज मेरी शादी थी, फिर भी खुद पर काबू रखना बेहद ज़रूरी था। श्रेया के बारे में सोचकर मुझे गुस्सा आ रहा था। मैंने वेदा को ऑफिस बुलाया। जैसे ही वह अंदर आई, मेरा पूरा ध्यान उसी पर था। लेकिन आते ही उसने पूछा, “श्रेया के बारे में कुछ पता चला?”

उसने सबसे पहले वही सवाल किया… और मैं एकदम शांत हो गया। मैं चाहता था कि हमारे बीच श्रेया की कोई बात न हो। वह चाहती तो पिछली रात हमारे बीच जो हुआ, उसके बारे में बात कर सकती थी… लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं कहा। मैं बस उसे देखता रह गया। उसके मुँह से श्रेया का नाम सुनने की मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी।

वह उसी लड़की के बारे में बात कर रही थी, जो शादी से पहले ही भाग गई थी। फिर मैंने खुद को समझाया—वेदा को हमारे बीच की सच्चाई नहीं पता। उसे नहीं मालूम कि श्रेया ने मेरे साथ क्या किया। ऐसे में उसका सवाल करना बिल्कुल जायज़ था।

मैंने शांत स्वर में कहा, “हमारे बीच सब कुछ बहुत पहले ही खत्म हो चुका था। मेरा और उसका कोई भविष्य नहीं था।”

मेरी बात सुनकर वह हैरान रह गई। शायद उसने कुछ और सुना था, या वह हमारे रिश्ते की सच्चाई जानना चाहती थी। वह सोच में डूबी हुई थी… और मैं उसे देख रहा था।

आज पहली बार वेदा मुझे बेहद खूबसूरत लग रही थी… और यही बात मुझे बेचैन कर रही थी। बार-बार मेरी नजर उसी पर टिक रही थी। उसकी आँखें, उसका चेहरा… सब मुझे ऐसे एहसास दे रहे थे, जो मुझे नहीं चाहिए थे।

दिल कह रहा था कि मुझे वही चाहिए। लेकिन दिमाग याद दिला रहा था कि आज मेरी शादी उसकी बहन से होने वाली थी। और ऐसे में किसी और के बारे में सोचना गलत है।

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि एक ही रात में सब कुछ इतना कैसे बदल गया। क्यों मैं बार-बार वेदा के बारे में सोच रहा था? सच तो यह था कि जब से वह मेरे करीब आई थी, उसके बाद से श्रेया का ख्याल भी मेरे मन में नहीं आया था।

पहले वह मेरे लिए बस एक साधारण सी लड़की थी… लेकिन अब ऐसा लग रहा था जैसे वह मेरी साँसों में, मेरे खून में, हर एहसास में बस गई हो। और यह एहसास मुझे अंदर से अजीब सी खुशी भी दे रहा था।यह सोचकर कि उसे छूने वाला मैं पहला था… मेरे भीतर एक अजीब सा अधिकार भाव जाग रहा था। जैसे वह सिर्फ और सिर्फ मेरी है… और अब उसे कोई और छू भी नहीं सकता।

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