जीवनसाथी
अभिजीत बाबू कि जिंदगी बड़ी ही खुशियों भरी थी बह खुद बैंक में मैनेजर थे उसकी पत्नी लक्ष्मी जोकि साक्षात लक्ष्मी का रूप थी दो बच्चे एक बेटा और बेटी,,,,,,,
समय के साथ बेटे की भी सरकारी नौकरी लग गई बड़े ही लाड प्यार से उसका विवाह किया और,,,,, बेटी नंदिनी का विवाह भी अच्छे परिवार में कर दिया गया,,,,,,,
अभिजीत बाबू के दोनों बच्चे अपनी जिंदगी में खुश थी बेटा अपनी पत्नी के साथ शहर में था तो बेटी अपने पति के साथ शहर में जहां पर उसकी नौकरी थी वहां पर सुखी जीवन जी रही थी
अपने दोनों बच्चों का विवाह करके अभिजीत बाबू और उसकी पत्नी लक्ष्मी काफी खुश थे, दिन बड़े ही अच्छे से गुजर रहे थे,,,,,,,
लेकिन लक्ष्मी अक्सर बीमार रहती थी काफी इलाज करवाने पर भी उसे कोई आराम नहीं मिला और एक दिन बीमारी के चलते ही लक्ष्मी की मौत हो गई,,,,,,,
अपनी पत्नी की मौत के बाद अभिजीत बाबू काफी दुखी हो गए लेकिन जिंदगी किसी के रोके से नहीं रुकती है,,,,,,
बेटे की नौकरी शहर में थी लेकिन अभिजीत बाबू अपने गांव से ही पास के कस्बे में बैंक में जाते थे,,,,,,
ऐसे में गांव के लोगों ने बेटे को समझाया कि तुम्हारी नौकरी शहर में है पास में ही तुम्हारा मकान है ऐसे में तुम्हें आने जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी अपना खाना खुद बना सकते तुम जवान हो,,,,,,,
लेकिन तुम्हारे पिता अभी बुजुर्ग है सुबह गांव से बैंक में जाते हैं शाम को लौटते हैं उसे भी थकान होती है तुम्हारी मां भी उसे छोड़कर चली गई है,,,,,,
अगर तुम अपनी पत्नी और बच्चों को साथ ले जाओगे तो यह बेचारे अकेले रह जाएंगे कोई इसे सम्हालने वाला नहीं होगा,,,,,,
और तुम्हारा शहर भी ज्यादा दूर नहीं है हर 7 दिन में छुट्टी मिलने पर तुम गांव आ जाया करना जिससे तुम्हारे पिता को भी अच्छा लगेगा अगर तुम अपने बीवी बच्चों को ले जाओगे तो तुम्हारा आना भी नहीं होगा बेचारे अकेले यहां पर दुखी रहेंगे,,,,,,
सब की बात मानकर बेटे सोमेश ने अपनी पत्नी अंजलि को अपने गांव में ही छोड़ दिया,,,,,,
अंजलि अपने ससुराल में रुकने के लिए तैयार नहीं थी लेकिन मन मशहूर कर रहना पड़ा,,,,,,
वैसे तो अंजली का ससुराल गांव में था लेकिन घर में किसी तरह की कोई कमी नहीं थी पूरी सुख सुविधाएं मौजूद थीं,,,,,,,
शहर की तरह ही अंजलि घर में रहती बस थोड़ा बहुत काम के सिवा कोई काम भी नहीं था,,,,,,
अभिजीत बाबू अपने कपड़े खुद ही धोते अपना सारा काम खुद ही करते बह नहीं चाहते कि उसकी वजह से बहू को कोई परेशानी हो,,,,,,
बह सोचते कि बहू और पोते पोती यहा रहते हैं उन्हें किसी बात की कोई कमी ना हो इसलिए बिचारे जब बैंक जाते तो पास के कस्बे में से ढेर सारे फल फ्रूट मिठाईयां लाते,,,,,,,
बह हमेशा कोशिश करते कि उसकी बहू और पोती पोती खुश रहे बह अपनी बहू को बिल्कुल अपनी बेटी का सम्मान देते थे,,,,,,
लेकिन अंजलि हमेशा गुस्से में ही रहती थी अपने ससुर से तो बह कुछ कह नहीं सकती लेकिन कभी अपने बच्चों पर गुस्सा उतारती,,,,,,
अपने पति पर सारा गुस्सा उतार का नमक मिर्च लगाकर बात कहती कि तुम्हारे पिता तो मेरे हर काम में कमी निकालते हैं मेरे हाथ का खाना उसे अच्छा नहीं लगता,,,,,, उल्टी-सीधी बातें उसे बताती रहती,,,,,,
अंजलि हमेशा कोशिश करती कि वह जल्दी से जल्दी शहर चली जाए क्योंकि बह गांव में रहना नहीं चाहती थी, अपनी पिता समान ससुर भी उसे एक बोझ लगते थे,,,,,,
बह अपने ससुर को कभी समय पर खाना नहीं देती तो बेचारे अभिजीत बाबू एक दो बार पोते पोती से कहकर बहू से खाना मांगते,,,,,,
जब बह खाना नहीं देती तो बिचारे भूखे प्यासे रह जाते लेकिन किसी से कुछ नहीं कहते,,,,,
घर में बहू परंपरा के हिसाब से घूंघट में रहती है तो बह घर के अंदर जा नहीं सकते बाहर कमरे में रहते अपनी पत्नी थी तो बह इतने मजबूर नहीं थे,,,,,,,
रोज-रोज बहू द्वारा की गई शिकायतों को सुनकर अभिजीत का बेटा सोमेश भी अपनी पत्नी की बातों के पक्ष में था एक दिन उसने बायना बनाकर ही अपने पिता से अपनी पत्नी को साथ ले जाने के लिए कहा,,,,,
तब अभिजीत बाबू ने कहा बेटा ठीक है तुम बहू बह बच्चों को अपने साथ ले जाओ बच्चों की आगे पढ़ाई भी करवानी है मेरा क्या है मैं तो अकेला हूं जैसे तैसे कर अपना खाना खुद बना लूंगा,,,,,,
फिर बेटा बहू और बच्चों को लेकर चला गया अभिजीत बाबू ने किसी से कोई शिकायत नहीं की बह अपना दर्द किसी के सामने जताते नहीं थे बड़े ही सज्जन इंसान जो थे,,,,,,, लेकिन गांव में अड़ोस पड़ोस में सब लोग उसके दर्द को समझते थे,,,,,,
बह सुबह गांव से रोज मोटर साइकिल से बैंक जाते और फिर घर आकर खुद ही अपने हाथों से खाना बनाते घर की साफ सफाई करते पूरा काम खुद करते थे,,,,,
उसकी ऐसी स्थिति देखकर उसके ही चाचा ताऊ के बेटों ने उससे कहा कि वह अपनी ही उम्र की किसी औरत से नाता कर ले लेकिन ब उनके लिए तैयार नहीं थी,,,,,,
1 दिन किसी ने अगर अभिजीत बाबू को एक रिश्ता बताया कि 26 साल की लड़की है जिसके पति की मौत हो चुकी है,,,,,,
उसके घर वाले अभिजीत के साथ उसका रिश्ता तैयार करने के लिए राजी है वह लड़की भी इस रिश्ते के लिए राजी है,,,,,, अगर अभिजीत तैयार हो तो बात आगे बढ़े,,,,,
यह सुनकर अभिजीत ने साफ मना कर दिया कि मैं अपनी जिंदगी जैसे-तैसे गुजार लूंगा,,,,,,
अगर ऐसा कुछ करूंगा तो लोग मेरे पर उंगली उठाएंगे ताने सुनने को मिलेंगे यह सब कुछ अच्छा नहीं होगा,,,,,
तब उसकी जान पहचान वालों नाते रिश्तेदार सब ने उसे समझाया कि तुम्हारी उम्र अभी इतनी भी नहीं है कि तुम जैसे तैसे कर इसे गुजार दो,,,,,,
अभी तो काफी उम्र बची है अकेले कैसे गुजारोगे तुम्हें भी किसी साथी की जरूरत है कब तक ऐसे घुट-घुट कर जियोंगे और जिस बेटे बहू के बारे में तुम सोच रहे हो बह तो तुम्हारी भूल कर भी सुध नहीं लेते,,,,,,
काफी समझाने पर अभिजीत बाबू को सबकी बात सही लगी बह बोले लेकिन जिस लड़की के बारे में तुम बात कर रहे हो बह तो मेरी उम्र से भी आधी उम्र की है,,,,,,
तब नाते रिश्तेदारों ने कहा कि बह बड़ी अच्छी और संस्कारी है उसे तुम्हारी उम्र से कोई लेना देना नहीं है,,,,,,
बिचारी का पहला पति मर गया कोई संतान अभी तक नहीं हुई है क्योंकि शादी को इतना समय भी नहीं हुआ था,,,,,,,,
ऐसे में उसे भी कोई अच्छा रिश्ता तो मिल नहीं सकता अगर तुम उसका हाथ थाम लो तो दोनों का गुजारा आराम से हो जाएगा,,,,,,
सब के समझाने पर भी अभिजीत बाबू उस लड़की के मुंह से ही उसकी सहमति जानना चाहते थे नाते रिश्तेदारों के साथ अभिजीत बाबू लड़की के रिश्ते के लिए तैयार थे,,,,,,
आखिर में लड़की की सहमति पाकर परंपरा के हिसाब से वरमाला डलवाई गई और फिर जो नाता प्रथा थी उसे निभाकर उस लड़की को भी अभिजीत बाबू के साथ भेजा गया,,,,,
वह लड़की जिसका नाम निर्मला था बड़ी ही संस्कारी थी देखने में भी काफी खूबसूरत थी,,,,,,
जब अभिजीत बाबू के बेटे बहू ने यह बात सुनी तो वह गुस्से में आग बबूला हो गए उनके घर आने से पहले ही अभिजीत बाबू के बेटे बहू बेटी दामाद सब वहां पर आ धमके और अभिजीत बाबू से भला बुरा कहने लगे,,,,,,
उसे अपनी नई पत्नी निर्मला के साथ घर में घुसने नहीं दिया गया,,,,,
जब सब लोगों ने अभिजीत बाबू के बेटा बहू बेटी सब को समझाया तो उनके द्वारा कहा गया कि यह इस घर में तभी प्रवेश कर सकती है जब यह जाकर अपनी नसबंदी करवाएं,,,,,,
जिससे फिर बह कभी मां नहीं बन सके क्योंकि हम नहीं चाहते कि हमारी जमीन जायदाद दौलत किसी में भी इसका हिस्सा हो,,,,,,,
अभिजीत बाबू की बेटे बहू के साथ उसकी बेटी भी बराबर का साथ दे रही थी बह अपने भाई के पक्ष में थी अपने पिता का दर्द उसे दिखाई नहीं दे रहा था,,,,,,
यह सुनकर सब के पैरों तले जमीन खिसक गई निर्मला ने जब यह सुना तो बह काफी दुखी हुई क्योंकि एक औरत से मां बनने का हक छीनना सबसे बड़ा दुख था
आखिर गांव वालों ने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन वे लोग समझने के लिए तैयार नहीं थे,,,,,,
तब अपने सीने पर पत्थर रखकर निर्मला नसबंदी करवाने के लिए तैयार हो गई,,,,,अभिजीत बाबू को यह सुनकर हैरानी हुई,,,,,,
लेकिन निर्मला ने कहा कि उसे बस उसका साथ चाहिए, आखिर निर्मला के नसबंदी करवाने पर ही उसे घर में इसमें घर में प्रवेश करने दिया गया,,,,,,
फिर बेटा बहू बेटी दामाद सबने अभिजीत बाबू से रिश्ता तोड़ लिया,जिसकी वजह से अभिजीत बाबू काफी दुखी थे,,,,,,
लेकिन नाते रिश्तेदार गांव के वालों ने अभिजीत बाबू को समझाया कि बह सब कुछ भूल कर अपनी पत्नी के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत करें,,,,,,
अब अभिजीत बाबू का ट्रांसफर भी दूसरे शहर में हो गया तो वह अपनी पत्नी निर्मला को लेकर वहां पर चले गए,,,,,,
धीरे-धीरे समय गुजरने लगा संयोगिता के आने से अभिजीत बाबू की जिंदगी में फिर से बाहर आ गई थी,,,,,,
निर्मला अपनी उम्र में बड़े अभिजीत बाबू को पाकर दुखी नहीं थी बह तो खुश थी क्योंकि अभिजीत बाबू काफी अच्छे इंसान थे,,,,,,
अभिजीत बाबू की अच्छाइयों के बारे में उसकी सरकारी नौकरी के बारे में सुनकर ही तो निर्मला और उसके घर वाले उससे रिश्ता करने के लिए तैयार हुए थे,,,,,
निर्मला अपना हर पत्नी धर्म बखूबी से निभाती यहां तक की अभिजीत बाबू के बेटे बहू और बेटी दामाद को छोड़कर बाकी के नाते रिश्तेदार निर्मला को काफी पसंद भी करने लगे थे क्योंकि निर्मला सब का मान सम्मान करती थी,,,,,
अभिजीत बाबू बेटी नंदिनी को उसकी बहू अंजली बिल्कुल पसंद नहीं करती थी उसने तो केवल निर्मला के आने पर स्वार्थ के कारण नंदिनी से रिश्ता जोड़ा था उसके बाद उसे नंदिनी से कोई मतलब नहीं था,,,,,
धीरे-धीरे अभिजीत बाबू के बेटी को एहसास हुआ कि उन्होंने सोमेश और अंजलि का साथ दे कर अभिजीत और निर्मला के साथ कितना गलत किया है उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था,,,,,,
आखिर उसने अपने पिता की खुशी को क्यों नहीं समझा क्यों उस भाई का साथ लिया जिस भाई भाभी ने कभी उसे सीधे मुंह बात तक नहीं की,,,,,
अपनी गलती का पछतावा होने पर नंदिनी फिर अपने पिता और अपनी नई मां से मिलने आई जो की उम्र में उससे भी छोटी थी,,,,,
संतान चाहे कितनी भी बड़ी गलती करदे मां बाप आखिर उन्हें माफ भी कर देते हैं,,,,,,
वैसे ही इतनी बड़ी गलती करने पर भी अभिजीत बाबू ने अपनी बेटी को माफ कर दिया, निर्मला का दिल भी बड़ा था उसने भी अपनी सौतेली बेटी को माफ करके गले लगा लिया और उसका बड़ा आदर सम्मान किया,,,,,,
अब अभिजीत बाबू के बेटी दामाद नाते रिश्तेदार सब अभिजीत बाबू और नंदिनी के साथ है,,,,,
लेकिन अभिजीत बाबू का बेटा और बहू आज भी अभिजीत बाबू से इसलिए नफरत करते हैं, क्योंकि अभिजीत बाबू ने अपनी जिंदगी के बारे में सोच कर निर्मला को अपना जीवन साथी बनाया था,,,,,,
उन्हें इस बात का जरा भी दुख नहीं है कि अगर उन्होंने अभिजीत बाबू को अपनापन और सम्मान दिया होता उसकी भावनाओं को समझा होता उसे कभी अकेलापन महसूस ना कि करने दिया होता तो अभिजीत बाबू कभी ऐसा नहीं करते,,,,,,
बे अब भी हर बात पर सिर्फ अभिजीत बाबू को ही दोष देते हैं लेकिन अभिजीत अपनी दुनिया में खुश है,,,,,
यह रचना सच्ची घटना पर आधारित है, गोपनीयता बनाए रखने की दृष्टि से नाम पता बदल दिए गए,,,,,
आपको क्या लगता है अभिजीत बाबू ने निर्मला को जीवनसाथी बनाकर गलत किया है या सही कमेंट करके जरूर बताएं,,,,,,यह एक सच्ची घटना पर आधारित है,,,,,🙏🙏🙏