मूमल, एक कहानी संग्रह Ch. 2

अटूट बंधन

Posted by Mamta Meena • Sep 05, 2026 02:15 PM

मेरी इस कहानी का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है मैंने बस वही लिखा जो मैंने सुना है जो भी सच्ची घटना पर आधारित बताया है इसलिए कृपया कुछ भी गलत ना समझे,,,,,,

मेरा ननिहाल जिस गांव में है उसी के बगल में एक और गांव है उसका और मेरे ननिहाल के गांव में एक अटूट सा बंधन जुड़ा हुआ है,,,,,,

एक बार मेरी मम्मी ने बताया था कि यह अटूट बंधन बरसों बरसों से जुड़ा हुआ है एक ऐसा अटूट बंधन जैसे भाई बहन का रिश्ते का होता है, आज भी दोनों गांवों के बीच विवाह संबंध नहीं होते हैं,,,,,,,

इसके पीछे भी एक कहानी है जो कि मेरी मम्मी को उनके दादाजी ने सुनाई थी और दादा जी को उनके पिता उनके दादा ने सुनाई थी,,,,,,

यह जो कहानी सुनाई थी वह इस प्रकार है बरसों पहले की बात है जब राजस्थान के अधिकतर हिस्सों में राजाओं का राज था,,,,,,

उस समय मेरा ननिहाल जिस गांव में है उस गांव के पास ही स्थित एक पहाड़ पर शासकों का दुर्ग बना हुआ था,,,,,,

पहले बहा के राजा जनता पर निष्पक्ष रूप से शासन करते उनके दुख में ही उनका दुख था और उनके सुख में ही उनका सुख था,,,,,

लेकिन धीरे-धीरे शासकों में एक अहंकार की भावना आ गई अब शराब पीना दूसरों को नीचा दिखाना अपनी शान समझते थे,,,,,,

अब दुर्ग में रहने वाला शासक उसके सारे काका चाचा ताऊ सब शराब और शबाब की शौकीन हो गए, अपना फर्ज वे लोग भूल गए और पूरी तरह सुंदरी और मदिरा में डूब गए,,,,,,

अब गांव की किसी युवती पर गलत नजर डालते समय बे एक बार भी नहीं सोचते थे यहां तक कि गांव में जो नई दुल्हन आती थी बह अपनी शुरुआती रात मजबूरन उन दुर्ग में रहने वालों के पास बीता कर आती थी,,,,,,

और जब उस दुर्ग में रहने वालों मर्दों का मन उस नई नवेली दुल्हन से भर जाता तो वे लोग उसे वापस अपने ससुराल भेज देते और अगर किसी खूबसूरत दुल्हन पर उनका मन आ जाता तो वे उसे उसी दुर्ग में अपनी रखैल दासी बना कर रख लेते,,,,,,,

यह सब अपने साथ होता देख कर भी गांव वाले उन शासकों के डर की वजह से उनकी बात मानने के लिए तैयार थे,,,,,,लेकिन सब में उन शासकों के प्रति रोष था,,,,,,,

एक दिन गांव की सब लोगों ने आपस में पंचायत इकट्ठा कि उन्होंने विचार विमर्श किया कि वह कब तक आखिर में दुर्ग में रहने वालों की मनमानी चलने देंगे,,,,,,

कब तक अपनी बहन बेटियों बहू बेटियों की इज्जत डर कर उन के सामने बिछाते रहेंगे उन्हें कुछ ना कुछ जरूर करना होगा क्योंकि इन सब की वजह से ना जाने कितनी बहू बेटियों ने अपनी जान दे दी थी,,,,,,,

फिर सब लोगों ने आपस में सलाह मशवरा किया और एक फैसला लिया,,,,,,

एक बार दुर्ग में जब कोई समारोह था सभी मर्द शराब के नशे में डूबे हुए थे चारों तरफ शराब और शबाब था,,,,,,

उस समय गांव के लोगों ने अपनी योजना के अनुसार दुर्गे के चारों तरफ घेरा दे कर आग लगा दी,,,,,,,

इससे पहले कि दुर्ग में रहने वाला कोई कुछ समझ पाता आग ने चारों तरफ से उन्हें घेर लिया और देखते ही देखते सारा दुर्ग एक श्मशान में तब्दील हो गया कोई भी दुर्ग में रहने वाला जिंदा नहीं बचा,,,,,,

दुर्ग में रहने वाले हर इंसान का नामोनिशान मिटा कर गांव वाले खुश थे कि अब उनकी बहू बेटियों को अपनी इज्जत का सौदा नहीं करना पड़ेगा,,,,,,,

अब उन्हें घुट घुट कर नहीं जीना पड़ेगा हर रोज उन्हें दुर्ग में रहने वाले लोगों के अत्याचारों का सामना नहीं करना पड़ेगा,,,,,,

उसी समय दुर्ग में रहने वाली एक गर्भवती औरत अपने मायके गई हुई थी, उसने अपने मायके में ही एक बेटे को जन्म दिया,,,,,

अपने ससुराल में सब की मौत की खबर सुनकर सब के मना करने पर भी वह औरत अपने उस नवजात बेटे को लेकर अपनी ससुराल आई,,,,,,

और फिर बह अपने बेटे को गोद में लेकर आई और जहां पर गांव के सभी बूढ़े बुजुर्ग इकट्ठा थे,,,,,,

वहां पर लाकर अपने बेटे को उनके सामने रख दिया और कहा कि जो कुछ आप लोगों ने किया था उनमें आप लोगों की भी गलती नहीं थी,,,,,,

क्योंकि दुर्ग में रहने वाला हर मर्द अच्छे बुरे की समझ भूल गया था,,,,,

तुम्हारी बहन बेटियों की इज्जत की रक्षा करना तुम्हारे लिए सबसे बड़ा धर्म था, कोई भी अपनी आंखों के सामने अपनी बहू बेटी की इज्जत लूटते हुए नहीं देख सकता,,,,,

उन सब से रुष्ट होकर तुम लोगों ने यह सोचकर तुम्हें और तुम्हारी बहन बेटियों को अपनी इज्जत का और सौदा ना करना पड़े तुम्हें इस तरह और ज़ुल्म ना सहन करने पड़े,,,,,

कहीं अगर दुर्ग में से कोई बच गया और तुमसे फिर कोई बदला ले या फिर कोई बच्चा बड़ा होकर अपने पूर्वजों का बदला ले कहीं बड़ा होकर बह भी अपने पूर्वजों की तरह ना बन जाए जो कि 1 मायनों में सही था,,,,,,,,अब दुर्ग में कोई भी नहीं बचा है,,,,,,

ऐसे में मैंने इस बेटे को जन्म दिया है लेकिन मैं नहीं चाहती कि कल यह बड़ा हो और तुम गांव वालों से अपने पूर्वजों की हत्या का बदला ले,,,,,,

तुम्हारी बहू बेटियों पर गलत नजर डाले इसलिए मैं इसे तुम्हारे सामने रखती हूं तुम इसे जो चाहे सजा दे दो,,,,,यह कहकर बह औरत चुप हो गई,,,,,,,,

जब गांव वालों ने उस औरत के मुंह से यह सुना तो उसकी हिम्मत देखकर सभी हैरान रह गए कोई सोच भी नहीं सकता कि एक मां भला ऐसा भी कर सकती है,,,,,,

तब गांव के बड़े बुजुर्ग उठे उन्होंने उस नवजात बेटे को गोद में उठाया और कहा कि जो कुछ हमने किया 1 मायने मे गलत था,,,,,,,

लेकिन आखिर हम कब तक अपनी बहू बेटियों की इज्जत इस तरह खोते रहते, कब तक हम दुर्ग में रहने वालों की अत्याचार सहन करते रहते,,,,,,

इसलिए गुस्से में हमने जो हमें सही लगा उस समय हमने किया सभी को मौत के घाट उतार दिया, हमने उस समय जो किया उनके पीछे भी हमारा स्वार्थ था,,,,,,

लेकिन आज तुम्हारी हिम्मत देखकर और अपने स्वार्थ के कारण हम और हत्या नहीं कर सकते हम इस मासूम बच्चे को और सजा नहीं दे सकते,,,,,,,

आज से तुम हमारी बहन हो और यह हमारा भांजा आज से हम तुम्हारी इज्जत तुम्हारी जान सब की रक्षा करेंगे तुम हम पूरे गांव की बालों की बहन हो,,,,,,

या सुनकर उस औरत की आंखों में आंसू आ गए फिर वह औरत अपने बेटे को लेकर वहां से गांव वालों की मदद से गांव से कुछ ही दूरी पर जाकर बस गई और वहीं पर रहने लगी,,,,,,,

कहते हैं उस औरत के उसी बेटे का वंशज आज एक गांव के रूप में स्थित है जिसकी वजह से आज भी दोनों गांवों के बीच बहन भाई जैसा रिश्ता है,,,,,,

आज भी एक गांव दूसरे गांव के लोगों को अपने भांजे की संतान के रूप में देखता है, जिसकी वजह से आज भी इन दोनों गांवों के बीच विवाह संबंध नहीं होते,,,,,,,

मैं नहीं जानती इस घटना में कितनी सच्चाई है और कितनी नहीं लेकिन जो कुछ मैंने सुना उसे कुछ काल्पनिक वाक्यों के साथ आपके सामने प्रस्तुत कर दिया,,,,,,,

आपको यह रचना कैसी लगी मुझे कमेंट करके जरूर बताएं,,,,, 🙏🙏🙏🙏

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