The Sheikh unwanted wife' Ch. 2

शेख की अनचाही बेगम - Chapter 2

Posted by iskibutterfly iskibutterfly • Sep 16, 2026 10:32 PM

एपिसोड 2 — ,,,she is a virgin,,,

नूर कुछ पल तक दरवाजे को देखती रही।

उसे अब तक समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उसे इस कमरे में क्यों रखा गया है।

सुबह से कोई उसे ठीक से कुछ बता नहीं रहा था।

हर सवाल का जवाब बस एक ही था—

“आपको जो कहा जाए, वही कीजिए।”

नूर ने बेचैनी से कमरे में नजर दौड़ाई।

“आखिर ये लोग मुझसे चाहते क्या हैं?”

वह खिड़की के पास गई।

बाहर शाम उतरने लगी थी।

आसमान का रंग धीरे-धीरे बदल रहा था और हवेली का पूरा माहौल किसी अनकहे राज की तरह शांत होता जा रहा था।

तभी—

ठक… ठक…

दरवाजे पर दस्तक हुई।

नूर तुरंत पलटी।

दरवाजा खुला।

मैड अंदर आई।

उसके हाथ में एक छोटा-सा पेपर बैग था।

नूर ने उसे देखते ही पूछा—

“अब क्या है?”

मेड ने बिना कुछ कहे बैग उसकी तरफ बढ़ा दिया।

“ये आपके लिए है।”

नूर ने बैग को देखा, लेकिन लिया नहीं।

“किसने भेजा है?”

मेड ने सिर्फ इतना कहा—

“सर ने।”

नूर के चेहरे पर उलझन और बढ़ गई।

“वही सर… जिनसे मुझे अभी तक यहां बंद करके रखा है मिलने

मेड चुप रही।

नूर ने आखिरकार बैग ले लिया।

“इसमें क्या है?”

“आज शाम आपको यही पहनना है।”

नूर ने तुरंत बैग की तरफ देखा।

“लेकिन क्यों?”

मेड नजरें झुका लीं।

“मुझे नहीं पता।”

नूर ने कुछ पल उसे देखा।

उसे महसूस हो रहा था कि मेड भी पूरी सच्चाई नहीं जानती।

“और अगर मैं नहीं पहनूँ तो?”

मेड ने कोई जवाब नहीं दिया।

बस दरवाजे की तरफ बढ़ गई।

नूर ने पीछे से पूछा—

“कम से कम इतना तो बता दो कि वो मुझसे मिलना क्यों चाहते हैं?”

मेड रुक गई।

कुछ सेकंड बाद उसने सिर्फ इतना कहा—

“शायद आज आपको खुद पता चल जाएगा।”

और वह कमरे से बाहर चली गई।

दरवाजा फिर बंद हो गया।

नूर ने बैग को मेज पर रखा।

उसके भीतर आखिर क्या था?

और सबसे बड़ा सवाल—

नूर ने धीरे से बैग की तरफ हाथ बढ़ाया।

लेकिन उसे खोलने से पहले ही बाहर गलियारे में किसी के कदमों की आवाज सुनाई दी।

वह तुरंत रुक गई।

कदमों की आवाज दरवाजे के ठीक बाहर आकर थम गई।

कुछ सेकंड की खामोशी।

फिर—

एक भारी आवाज सुनाई दी—

“उसे तैयार रहने दो।”

नूर की धड़कन तेज हो गई।

आवाज आगे बढ़ गई।

नूर वहीं खड़ी रह गई।

वो रात जो नूर भूल नहीं पाई

नूर ने धीरे-धीरे अपनी आँखें बंद कर लीं।

उसके हाथ अब भी उस पेपर बैग पर टिके थे।

लेकिन उसका दिमाग…

कई दिनों पीछे चला गया।

वो समय, जब उसकी जिंदगी बिल्कुल अलग थी।

नूर अपने शहर से दूर एक बड़े मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की पढ़ाई करने आई थी।

उसकी जिंदगी में बस एक ही सपना था—

एक दिन एक बेहतरीन डॉक्टर बनना।

सुबह lectures…

दोपहर practicals…

शाम को library…

और रात देर तक पढ़ाई।

नूर को अपनी जिंदगी पर पूरा भरोसा था।

उसे क्या पता था कि एक रात…

उसकी पूरी दुनिया बदलने वाली है।

उस रात वह library से अपने कमरे की तरफ लौट रही थी।

कॉरिडोर लगभग खाली था।

नूर ने अपना बैग कंधे पर ठीक किया और फोन देखने लगी।

तभी पीछे से किसी के कदमों की आवाज आई।

उसने पलटकर देखा।

कोई नहीं था।

वह आगे बढ़ी।

अचानक किसी ने उसके सामने आकर रास्ता रोक दिया।

नूर कुछ समझ पाती, उससे पहले ही चारों तरफ से कुछ लोग आ गए।

सबने काले कपड़े पहन रखे थे।

नूर घबरा गई।

“आप लोग कौन हैं?”

कोई जवाब नहीं मिला।

उसने पीछे हटने की कोशिश की।

“मुझे जाने दीजिए!”

लेकिन अगले ही पल उसे सब कुछ धुंधला दिखाई देने लगा।

उसकी आवाज कमजोर पड़ती चली गई।

और फिर…

अंधेरा।

जब नूर को होश आया, तो वह एक अनजान कमरे में थी।

उसकी आँखों के सामने सब धुंधला था।

वह उठने की कोशिश करने लगी।

लेकिन शरीर में कमजोरी थी।

आसपास कुछ लोग खड़े थे।

काले कपड़ों में।

चेहरों पर गंभीरता।

नूर ने डरकर पूछा—

“मैं कहाँ हूँ?”

कोई जवाब नहीं।

कुछ लोग उसके medical checkup की तैयारी कर रहे थे। जिसमें सिर्फ फीमेल्स थी उन्होंने एक कॉल किया और बोली “She is a virgin

नूर की आँखों में डर था।

“आप लोग मेरे साथ क्या करने वाले हैं?”

तभी कमरे के बाहर से एक आवाज आई।

बहुत शांत…

लेकिन ऐसी कि कमरे में मौजूद हर आदमी तुरंत सीधा खड़ा हो गया।

“सर…”

नूर ने सिर्फ यही शब्द सुना।

सर।

उसकी धड़कन तेज हो गई।

दरवाजा खुला।

और वह आदमी अंदर आया।

नूर की नजर धुंधली होने के बावजूद उस पर टिक गई।

काले कपड़े।

लंबा कद।

बेहद composed personality।

उसके चेहरे पर ना गुस्सा था, ना कोई जल्दबाजी।

बस एक ऐसी खामोशी…

जिससे कमरे में मौजूद हर इंसान उसकी बात का इंतजार कर रहा था।

नूर उसे पहचानती तक नहीं थी।

लेकिन उस आदमी के आते ही सभी guards पीछे हट गए।

वह कुछ कदम आगे आया।

नूर ने डरते हुए पूछा—

“आप कौन हैं?”

वह आदमी कुछ पल उसे देखता रहा।

फिर बिना कोई जवाब दिए अपने साथ आए लोगों से कुछ कहा।

नूर को सिर्फ उसकी आवाज का आखिरी हिस्सा सुनाई दिया—

“उसे यहाँ से ले जाओ।”

नूर घबरा गई।

“नहीं! मुझे कहीं नहीं जाना!”

लेकिन उसकी आवाज कमजोर थी।

वह आदमी खुद आगे बढ़ा।

अगले ही पल नूर को लगा जैसे जमीन उसके पैरों के नीचे से गायब हो गई।

उसकी आँखों के सामने सब कुछ घूमने लगा।

उसने आखिरी बार उस आदमी का चेहरा देखने की कोशिश की।

लेकिन उसकी पलकों पर फिर भारीपन छा गया।

जब नूर ने दोबारा आँखें खोलीं…

वह इसी कमरे में थी।

वही अजनबी कमरा।

वही बंद दरवाजा।

वही अनजान जगह।

उसने कई बार भागने की कोशिश की थी।

लेकिन हर बार बाहर guards मौजूद मिलते।

कोई उसे चोट नहीं पहुँचा रहा था।

कोई उससे खुलकर कुछ कह भी नहीं रहा था।

बस एक बात साफ थी—

कोई बहुत ताकतवर इंसान उसे यहाँ लाया था।

लेकिन क्यों?

उसका उससे क्या संबंध था?

और सबसे बड़ा सवाल—

एक मेडिकल स्टूडेंट नूर को आखिर किस वजह से उठाया गया था?

उसने आँखें खोलीं।

वर्तमान वापस सामने था।

मेज पर रखा वही पेपर बैग उसे घूरता हुआ सा लग रहा था।

नूर ने धीरे से उसे अपनी तरफ खींचा।

उसके अंदर जो भी था…

नूर ने खुद से कहा—

“आज मैं पता लगाकर रहूँगी…”

उसकी आवाज में डर था।

लेकिन उसके साथ एक नया determination भी था।

“तुम आखिर हो कौन?”

बाहर गलियारे में फिर वही भारी कदमों की आवाज सुनाई दी।

इस बार…

कदम उसके कमरे के सामने आकर रुक गए।

नूर की नजर दरवाजे पर टिक गई।

क्या

उसने पहली बार महसूस किया—

आज की शाम शायद उसकी जिंदगी में कुछ ऐसा बदलने वाला था, जिसका जवाब उसे लंबे समय से चाहिए था।

लेकिन क्या?

यह जानने के लिए…

उसे उस दरवाजे के खुलने का इंतजार करना था।

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