The Sheikh unwanted wife' Ch. 3

शेख की अनचाही बेगम - Chapter 3

Posted by iskibutterfly iskibutterfly • Sep 18, 2026 09:29 AM

एपिसोड 3 — वो शाम जिसका नूर को इंतज़ार नहीं था

नूर कुछ देर तक उस पेपर बैग को देखती रही।

उसके चेहरे पर नाराज़गी साफ दिखाई दे रही थी।

“मुझे ये सब करने की जरूरत नहीं है…”

उसने धीमे से कहा।

तभी हिमा उसके सामने आकर खड़ी हो गई।

“नूर, प्लीज़… इतना गुस्सा मत करो।”

नूर ने उसकी तरफ देखा।

“तुम्हें पता भी है मैं यहाँ अपनी मर्जी से नहीं हूँ।”

हिमा कुछ नहीं बोली।

नूर ने बैग की तरफ देखा।

“और ये ड्रेस?”

हिमा ने धीरे से कहा—

“सर ने भेजी है।”

“मुझे फर्क नहीं पड़ता।”

नूर ने बैग को एक तरफ कर दिया।

“मैं किसी के कहने पर तैयार नहीं होने वाली।”

हिमा ने परेशान होकर कहा—

“लेकिन नूर…”

“नहीं।”

नूर की आवाज इस बार बिल्कुल साफ थी।

“मेरी जिंदगी का फैसला पहले ही मेरी मर्जी के बिना किया जा चुका है। कम से कम ये तो मैं तय करूँगी कि मुझे क्या पहनना है।”

हिमा चुप हो गई।

उसे समझ आ गया कि नूर सिर्फ ड्रेस से नाराज़ नहीं थी।

उसे उस पूरी situation से गुस्सा था।

Contract marriage की बात उसके सामने रखी गई थी…

लेकिन नूर ने साफ मना कर दिया था।

वह किसी ऐसे रिश्ते को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थी जिसे उसकी जिंदगी का फैसला करने वाले लोग पहले ही तय कर चुके थे।

नूर ने अपनी आँखें बंद कर लीं।

उसे अब भी उस रहस्यमयी आदमी का चेहरा याद था।

रियाज़ अल्फारिश।

जिसका नाम उसने पहली बार सुना था, लेकिन जिसकी मौजूदगी ने उसकी पूरी जिंदगी उलट दी थी।

कुछ देर बाद कमरे का दरवाजा खुला।

दो महिला स्टाइलिस्ट अंदर आईं।

एक ने मुस्कुराकर कहा—

“मैम, हमें आपको तैयार करने के लिए भेजा गया है।”

नूर ने तुरंत कहा—

“मैंने किसी को नहीं बुलाया।”

दूसरी स्टाइलिस्ट ने धीरे से जवाब दिया—

“हमें सिर्फ अपना काम करने के लिए भेजा गया है।”

नूर कुछ बोलती, उससे पहले हिमा भी अंदर आ गई।

“नूर, जल्दी तैयार हो जाओ।”

नूर ने उसकी तरफ देखा।

“और अगर मैं नहीं हुई?”

हिमा कुछ सेकंड चुप रही।

फिर बोली—

“तो शायद sirखुद आ जाएँगे।”

कमरे में खामोशी छा गई।

नूर ने उसकी तरफ देखा।

“उन्हें आने दो।”

हिमा के चेहरे पर हल्की परेशानी दिखाई दी।

Mam

लेकिन नूर ने बैग उठा लिया।

“ठीक है। मैं खुद तय करूँगी कि क्या पहनना है।”

उसने बैग खोला।

अंदर एक खूबसूरत black evening dress था।

सादा लेकिन बेहद elegant।

नूर कुछ पल उसे देखती रही।

फिर बोली—

“कम से कम taste तो अच्छा है।”

हिमा के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।

“तो आप पहनेंगी?”

नूर ने तुरंत जवाब दिया—

“सिर्फ इसलिए क्योंकि मैं किसी को ये satisfaction नहीं देना चाहती कि उसने मुझे मजबूर कर दिया।”

कुछ समय बाद नूर तैयार होकर कमरे से बाहर आई।

उसके बाल neatly styled थे और makeup भी बहुत subtle था।

हिमा ने उसे देखा तो कुछ पल के लिए रुक गई।

“आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं।”

नूर ने आईने में खुद को देखा।

फिर बोली—

“खूबसूरत दिखना और खुश होना… दोनों अलग बातें हैं।”

हिमा के पास उस बात का कोई जवाब नहीं था।

तभी दरवाजा खुला।

कुछ servants dinner लेकर अंदर आए।

हिमा ने तुरंत उन्हें table पर सामान रखने का इशारा किया।

फिर नूर की तरफ देखकर बोली—

“मैम, dinner कर लीजिए।”

नूर ने पूछा—

“क्यों?”

“सर थोड़ी देर में आने वाले हैं।”

नूर का चेहरा तुरंत गंभीर हो गया।

“रियाज़?”

हिमा ने सिर हिलाया।

“जी।”

नूर की उंगलियाँ अनजाने में कस गईं।

“वो यहाँ क्यों आ रहे हैं?”

हिमा ने धीरे से कहा—

“शायद आपसे बात करने।”

“किस बारे में?”

हिमा ने नजरें झुका लीं।

“मुझे नहीं पता।”

नूर ने एक लंबी साँस ली।

वह जानती थी…

आज पहली बार उसे रियाज़ अल्फारिश के सामने बैठकर अपने सवालों के जवाब लेने होंगे।

वह contract marriage क्यों चाहता था?

उसे ही क्यों चुना गया?

और सबसे जरूरी—

उस रात उसे उठाकर यहाँ लाने का असली कारण क्या था?

नूर ने सामने रखे dinner को देखा।

लेकिन उसे खाने की कोई इच्छा नहीं थी।

उसकी नजर दरवाजे पर टिक गई।

और तभी…

बाहर से भारी कदमों की आवाज सुनाई दी।

एक कदम…

फिर दूसरा…

आवाज धीरे-धीरे उसके कमरे के करीब आती गई।

हिमा तुरंत सीधी खड़ी हो गई।

नूर की धड़कन तेज हो गई।

दरवाजे के बाहर कदम रुक गए।

कुछ सेकंड की खामोशी के बाद…

दरवाजे का handle धीरे-धीरे घूमने लगा।

नूर की नजर दरवाजे पर जम गई।

दरवाजे का handle घूमते ही नूर की नजर वहीं टिक गई।

दरवाजा धीरे-धीरे खुला।

सबसे पहले दो guards अंदर आए।

उनके पीछे…

रियाज़ अल्फारिश।

नूर ने उसे पहली बार साफ देखा।

लंबा कद, बेहद composed personality और चेहरे पर ऐसी गंभीरता कि उसके सामने खड़ा इंसान खुद-ब-खुद शांत हो जाए।

रियाज़ ने कमरे में कदम रखा।

उसकी नजर सीधी नूर पर गई।

कुछ सेकंड तक दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।

नूर ने सबसे पहले नजर नहीं झुकाई।

उसके अंदर डर जरूर था…

लेकिन उससे कहीं ज्यादा गुस्सा था।

रियाज़ ने धीरे से कहा—

“डिनर किया?”

नूर ने ठंडी आवाज में जवाब दिया—

“आपको सच में लगता है कि इस वक्त मुझे खाने की चिंता है?”

रियाज़ ने हिमा की तरफ देखा।

“तुम बाहर जाओ।”

हिमा ने तुरंत सिर हिलाया।

“जी।”

हिमा और बाकी लोग कमरे से बाहर चले गए।

दरवाजा बंद होते ही नूर ने कहा—

“अब बताइए।”

रियाज़ शांत खड़ा रहा।

“क्या?”

“मुझे यहाँ क्यों लाया गया?”

रियाज़ ने उसकी तरफ देखा।

“मैंने तुम्हें बताया था।”

नूर की आँखों में गुस्सा आ गया।

“Contract marriage?”

रियाज़ चुप रहा।

“मैंने उस वक्त भी मना किया था।”

“मुझे याद है।”

“तो फिर?”

रियाज़ कुछ कदम आगे आया।

“तुम्हारा मना करना मैंने सुना था।”

नूर ने तुरंत पूछा—

“फिर मेरी जिंदगी का फैसला क्यों?”

रियाज़ की आँखें कुछ पल के लिए उसके चेहरे पर ठहर गईं।

“क्योंकि कुछ फैसले सिर्फ पसंद से नहीं होते।”

नूर हँस पड़ी।

“ये बहुत convenient जवाब है।”

रियाज़ का चेहरा बिल्कुल नहीं बदला।

“तुम्हें जो समझना है, समझो।”

“नहीं।”

नूर ने एक कदम आगे बढ़कर कहा—

“अब आप मुझे सुनेंगे।”

रियाज़ की नजर उसकी आँखों में टिक गई।

नूर ने कहा—

“मैं किसी contract पर शादी नहीं करूँगी। चाहे सामने रियाज़ अल्फारिश हों या दुनिया का कोई भी आदमी।”

कमरे में कुछ पल खामोशी रही।

रियाज़ ने धीमे स्वर में कहा—

“तुम्हें लगता है तुम्हारे पास कोई दूसरा रास्ता है?”

नूर का चेहरा सख्त हो गया।

“रास्ता मैं खुद बनाऊँगी।”

शायद उसे नूर से इस तरह के जवाब की उम्मीद नहीं थी।

उसने धीरे से कहा—

“तुम्हें अपनी जिंदगी के बारे में बहुत भरोसा है।”

“हाँ।”

“

“मैं इस contract marriage के लिए तैयार नहीं हूँ।”

रियाज़ ने पीछे मुड़कर उसकी तरफ देखा।

उसकी आवाज बेहद शांत थी—

“अभी नहीं।”

नूर की भौंहें सिकुड़ गईं।

“क्या मतलब?”

रियाज़ ने दरवाजा खोला।

“तुम्हें अभी बहुत कुछ जानना बाकी है।”

और वह बाहर चला गया।

नूर वहीं खड़ी रह गई।

उसके मन में अब एक ही सवाल घूम रहा था—

रियाज़ आखिर उससे ऐसा क्या छिपा रहा था, जिसकी वजह से उसकी पूरी जिंदगी उसके हाथों में आ गई थी?

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