Drive Me Crazy Ch. 2

Drive Me Crazy - Chapter 3

Posted by The Dark Quill • Sep 18, 2026 02:39 PM

अध्याय 3: द रेडलाइन (The Redline)

रात के बारह बज चुके थे। दिल्ली-गुड़गांव बॉर्डर के एक सुनसान, अंडर-कंस्ट्रक्शन हाइवे पर वो दुनिया आबाद थी, जिसके बारे में आम लोगों ने सिर्फ हॉलीवुड फिल्मों में देखा था। हवा में जलते हुए रबर (burnt rubber), हाई-ऑक्टेन फ्यूल और महंगी सिगार की तेज़ गंध घुली हुई थी। भारी बेस वाला अंडरग्राउंड ईडीएम (EDM) म्यूज़िक ट्रकों में लगे विशाल स्पीकर्स से गूंज रहा था, जिसकी धमक ज़मीन से होते हुए सीधे सीने में महसूस हो रही थी।

यह कोई मामूली कॉलेज पार्टी नहीं थी; यह एक इललीगल स्ट्रीट रेस थी, जहाँ करोड़ों का सट्टा लगता था और दिल्ली के सबसे रईस और खतरनाक लोगों के बच्चे अपनी जान की बाज़ी लगाते थे।

तारा देसाई एक पीली टैक्सी से उतरी। उसने एक सिंपल ब्लैक डेनिम जींस, एक व्हाइट टैंक टॉप और उसके ऊपर एक ऑलिव ग्रीन कलर की ओवरसाइज़्ड जैकेट पहनी हुई थी। उसके बाल एक पोनीटेल में बंधे थे। जैसे ही उसने उस भीड़-भाड़ वाले, नियॉन रोशनी से नहाए हाइवे पर कदम रखा, उसे लगा जैसे वो किसी दूसरी दुनिया में आ गई हो। आस-पास खड़ी सुपरकार्स—लेम्बोर्गिनी, पोर्श, मैकलारेन—और उनके बोनट पर बैठीं शॉर्ट ड्रेसेस में लड़कियां, सब कुछ उसके लिए एलियन जैसा था।

जैसे ही तारा भीड़ के बीच से गुज़री, कई नज़रें उस पर आकर टिक गईं। वो वहाँ मौजूद किसी भी लड़की जैसी नहीं लग रही थी। न डिज़ाइनर कपड़े, न भारी मेकअप। लेकिन उसके चेहरे पर जो एक शांत और बेखौफ आत्मविश्वास था, वो लोगों को मुड़कर देखने पर मजबूर कर रहा था।

तभी उसकी नज़र 'द एपेक्स क्लब' पर पड़ी।

हाइवे के सबसे वीआईपी हिस्से में वो चारों लड़के खड़े थे। नील एक खूबसूरत लड़की के साथ फ्लर्ट कर रहा था, देव अपनी मस्टैंग के टायर चेक कर रहा था, और आर्यन अपने टैबलेट पर रेस ट्रैक का मैप देख रहा था।

नील की नज़र सबसे पहले तारा पर पड़ी। उसकी प्लेबॉय स्माइल और चौड़ी हो गई। उसने उस लड़की को किनारे किया और तारा की तरफ बढ़ा।

"ओह माय गॉड! मुझे लगा था कबीर बस मज़ाक कर रहा था," नील ने ज़ोर से सीटी बजाई, जिससे देव और आर्यन का ध्यान भी तारा की तरफ गया। "तुम सच में आ गई, ट्रैश? तुम्हें पता भी है ये कौन सी जगह है? यहाँ तुम्हारी वो कॉलेज वाली किताबें तुम्हें नहीं बचाएंगी।"

देव ने एक व्यंग्यात्मक हंसी हँसी। "ये लड़की पक्का आज रात रोने वाली है। मैं दांव लगा सकता हूँ कि कार स्टार्ट होते ही ये उल्टी कर देगी।"

आर्यन ने तारा को ऊपर से नीचे तक देखा, उसकी आँखें हमेशा की तरह कैलकुलेटिव थीं। "उसका हार्ट रेट नॉर्मल है। प्यूपिल्स (पुतलियां) डाइलेटेड नहीं हैं। वो डरी हुई नहीं है... वो बस एनालाइज़ कर रही है।"

तारा ने देव और नील को पूरी तरह इग्नोर किया और आर्यन की तरफ देखकर हल्की सी नोड (nod) की। "कहाँ है वो?" उसने सपाट आवाज़ में पूछा।

इससे पहले कि कोई जवाब देता, भीड़ में एक अजीब सी हलचल मच गई। म्यूज़िक की आवाज़ को चीरती हुई, एक खूंखार इंजन की दहाड़ सुनाई दी। लोग अपने आप पीछे हटने लगे और बीच में एक रास्ता बन गया।

ब्लड-रेड फेरारी SF90 हाइवे पर रेंगती हुई आई और एक बेहद शार्प, परफेक्ट ड्रिफ्ट मारते हुए स्टार्टिंग लाइन के पास आकर रुकी। टायरों से हल्का लाल धुआं उठा जो कार की डार्क वाइब को और बढ़ा रहा था।

ड्राइवर साइड का दरवाज़ा खुला और कबीर सिंघानिया बाहर निकला।

उसने एक टाइट ब्लैक टी-शर्ट और लेदर जैकेट पहनी हुई थी। उसके बिखरे हुए बाल हवा में उड़ रहे थे, और उसकी उन तूफानी, गहरी आँखों में एक अजीब सा पागलपन था जो सिर्फ रेस से ठीक पहले आता था। उसके चेहरे पर एक रफ, घमंडी मुस्कान थी, लेकिन जैसे ही उसकी नज़र तारा पर पड़ी, वो मुस्कान एक सेकंड के लिए गायब हो गई।

कबीर के कदम रुक गए। उसने तारा को घूरा। वो सच में वहाँ थी। उसे लगा था कि कल रात का टॉर्चर और इस रेस का डर उसे हमेशा के लिए भगा देगा, लेकिन वो लड़की अपनी उसी ज़िद्दी, विद्रोही आँखों के साथ उसके सामने खड़ी थी।

कबीर धीमी चाल से चलते हुए उसके पास आया। भीड़ खामोश हो गई थी। हर कोई सेंट जूड के बादशाह और इस अनजान लड़की के बीच का टेंशन महसूस कर सकता था।

"मुझे लगा था तुम अपने हॉस्टल के कमरे में बैठकर रो रही होगी," कबीर की आवाज़ भारी और सर्द थी, जो सीधे तारा के कानों में गूंजी।

"मैं इतनी आसानी से तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ने वाली, सिंघानिया," तारा ने बिना पलक झपकाए जवाब दिया। "तुमने कहा था मैं तुम्हारी ड्राइविंग देखूँ। तो चलो, मुझे दिखाओ कि तुम ट्रैक पर उतने ही बड़े लूज़र हो या नहीं, जितने तुम कॉलेज में हो।"

भीड़ में से कुछ लोगों के हाँफने की आवाज़ आई। किसी ने आज तक कबीर सिंघानिया से इस लहज़े में बात नहीं की थी। देव आगे बढ़ने ही वाला था कि कबीर ने अपना हाथ उठा दिया।

कबीर की आँखों में एक खतरनाक चमक आ गई। उसका जबड़ा सख्त हो गया। "तुम आग से खेल रही हो, स्ट्रैटेजिस्ट।"

"मुझे जलने से डर नहीं लगता," तारा ने भी उसी तीखेपन से जवाब दिया।

कबीर ने उसे एक पल के लिए घूरा, फिर अचानक मुड़ा और अपनी कार के पैसेंजर साइड का दरवाज़ा खोल दिया। "बैठो। और जब मौत सामने नज़र आए... तो चीखना मत। मुझे अपनी कार में शोर पसंद नहीं है।"

तारा ने एक गहरी सांस ली। उसका दिल सीने में हथौड़े की तरह धड़क रहा था, लेकिन उसने अपने चेहरे पर ज़रा सा भी खौफ नहीं आने दिया। वो जाकर उस बेहद नीची, कार्बन-फाइबर रेसिंग सीट पर बैठ गई। कबीर ने दरवाज़ा इतनी ज़ोर से बंद किया कि तारा हल्की सी चौंकी।

अगले ही पल, कबीर ड्राइविंग सीट पर आकर बैठ गया।

कार का केबिन बहुत छोटा था। अंदर का माहौल इंटिमेट और दमघोंटू था। कबीर की वो महंगी मिंट और लेदर की खुशबू पूरी कार में भरी हुई थी। तारा को अपनी स्किन पर कबीर के शरीर की गर्मी महसूस हो रही थी।

"सीटबेल्ट," कबीर ने बिना उसकी तरफ देखे, इंजन को रेव (rev) करते हुए कहा। कार एक खूंखार जानवर की तरह गुर्राई।

तारा ने सीटबेल्ट खींचने की कोशिश की, लेकिन रेसिंग हार्नेस (harness) आम सीटबेल्ट से बहुत अलग और कॉम्प्लेक्स था। वो पट्टियों के साथ संघर्ष कर ही रही थी कि अचानक कबीर ने अपना हाथ बढ़ाया।

"छोड़ो इसे," उसकी आवाज़ में एक अजीब सा भारीपन था।

कबीर उसकी तरफ झुका। वो इतना करीब आ गया कि तारा की सांसें अटक गईं। कबीर का चौड़ा सीना लगभग तारा के कंधे से रगड़ खा रहा था। उसने अपने रफ, बड़े हाथों से हार्नेस की पट्टियों को पकड़ा। इस प्रोसेस में उसकी उंगलियां गलती से तारा की कॉलरबोन (हंसली) और पेट को छू गईं। तारा के पूरे शरीर में एक इलेक्ट्रिक करंट सा दौड़ गया। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपनी सांसें रोक लीं।

कबीर ने पट्टियों को लॉक किया और एक झटके से उन्हें टाइट कर दिया, जिससे तारा पूरी तरह से सीट से चिपक गई।

"ये तुम्हें मरने से नहीं बचाएगा," कबीर ने तारा के कान के बिल्कुल पास फुसफुसाते हुए कहा। उसकी गर्म सांसें तारा की गर्दन पर पड़ रही थीं। "लेकिन कम से कम तुम्हारी लाश कार के बाहर नहीं गिरेगी।"

तारा ने अपनी आँखें खोलीं और अपना चेहरा घुमाया। कबीर का चेहरा इंचों की दूरी पर था। उनकी नाक लगभग टकरा रही थी। तारा ने उसकी उन डार्क आँखों में देखा और धीमी आवाज़ में कहा, "ड्राइव करो, कबीर। बातें बहुत हो गईं।"

कबीर की आँखों की पुतलियां फैल गईं। उसके होठों पर एक कातिलाना मुस्कान तैर गई। वो वापस अपनी सीट पर हुआ और उसने स्टीयरिंग व्हील को कसकर पकड़ लिया।

विंडशील्ड के बाहर, एक लड़की रेस का फ्लैग लेकर दोनों कारों के बीच खड़ी थी। कबीर के बगल में एक ब्लैक लैंबोर्गिनी (Lamborghini) हुराकैन खड़ी थी, जिसका ड्राइवर कबीर को देखकर मिडिल फिंगर दिखा रहा था। कबीर ने उसे नज़रअंदाज़ किया। उसका पूरा फोकस अब सिर्फ ट्रैक पर था।

"रेडी, स्ट्रैटेजिस्ट?" कबीर ने एक्सिलरेटर को हल्का सा दबाते हुए कहा।

लड़की ने हाथ नीचे किया।

GO!

तारा को लगा जैसे किसी ने उसे ज़ोर से पीछे की तरफ धक्का दिया हो। उसका सिर सीट के हेडरेस्ट से जा टकराया। 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार सिर्फ 2.5 सेकंड में! तारा की सांसें हलक में अटक गईं। जी-फोर्स (G-Force) इतना भयानक था कि उसे लगा जैसे उसका खून जम गया हो।

विंडशील्ड के बाहर की दुनिया एक ब्लर (blur) में बदल गई। स्ट्रीट लाइट्स सिर्फ पीली रेखाओं की तरह पीछे भाग रही थीं। कार का इंजन इतनी ज़ोर से चीख रहा था कि तारा को अपने खुद के विचारों की आवाज़ सुनाई नहीं दे रही थी।

स्पीडोमीटर 180... 220... 260 पार कर चुका था।

लैंबोर्गिनी कबीर की कार के ठीक बगल में थी, उन्हें साइड से टक्कर मारने की कोशिश कर रही थी। लेकिन कबीर के चेहरे पर कोई डर नहीं था। उसका चेहरा एक पत्थर की तरह सख्त था, आँखें सिर्फ सामने सड़क पर टिकी थीं। वो गियर ऐसे बदल रहा था जैसे वो मशीन का ही एक हिस्सा हो।

तारा डर से कांप रही थी। उसके हाथ सीट को इतनी ज़ोर से पकड़े हुए थे कि उसकी उंगलियां सफेद पड़ चुकी थीं। लेकिन उसने अपनी आँखें बंद नहीं कीं। उसने कबीर को देखा।

वो सिर्फ तेज़ नहीं चला रहा था, वो गुस्से में चला रहा था। वो सड़क से लड़ नहीं रहा था, वो जैसे खुद से लड़ रहा था। हर गियर शिफ्ट में वो एक्सिलरेटर को रेडलाइन तक धकेल रहा था, जहाँ इंजन के फटने का खतरा सबसे ज़्यादा होता है।

तभी तारा की नज़र आगे सड़क पर गई।

लगभग 500 मीटर दूर, हाइवे एक बेहद खतरनाक हेयरपिन बेंड (Hairpin Bend - U-टर्न जैसा कर्व) ले रहा था। लैंबोर्गिनी ने डर कर स्पीड कम करनी शुरू कर दी।

लेकिन कबीर ने स्पीड कम नहीं की।

स्पीडोमीटर 280 पर था।

"कबीर, ब्रेक!" तारा चिल्लाई। "तुम्हें स्पीड कम करनी होगी, सस्पेंशन ये टर्न नहीं झेल पाएगा!"

कबीर ने उसकी बात को पूरी तरह अनसुना कर दिया। उसने एक्सिलरेटर से पैर नहीं हटाया। कर्व तेज़ी से करीब आ रहा था। मौत सचमुच उनके सामने खड़ी थी। तारा का दिमाग तेज़ी से फॉर्मूले और कैलकुलेशन कर रहा था। उस स्पीड पर टायर्स का घर्षण (friction) शून्य हो जाएगा और कार सीधा बैरिकेड तोड़ते हुए खाई में गिर जाएगी।

"कबीर! डाउनशिफ्ट! नाउ!" तारा पूरी ताकत से चीखी, लेकिन कबीर की आँखें मानो किसी ट्रांस (trance) में थीं। वो जैसे कुछ साबित करना चाहता था।

अब वो बेंड महज़ 50 मीटर दूर था। तारा ने कबीर के हाथ को, जो गियर स्टिक पर था, ज़ोर से पकड़ लिया।

"कबीर, प्लीज!" तारा की आवाज़ में पहली बार वो खौफ था जिसे वो अब तक छुपा रही थी।

कबीर ने झटके से तारा की तरफ देखा। उसकी आँखों का वो पागलपन एक सेकंड के लिए टूटा। उसने तारा की उन बड़ी, खौफज़दा आँखों में देखा जो अब भी उससे आँखें मिला रही थीं।

अंतिम मिलीसेकंड में, कबीर का रेफ्लेक्स (reflex) जागा।

उसने एक साथ ब्रेक और क्लच दबाया, स्टीयरिंग को पूरी ताकत से घुमाया और गियर को दो स्टेप नीचे गिरा दिया (Downshift)।

कार के पिछले टायरों ने ज़मीन से अपनी पकड़ छोड़ी। टायरों के चीखने की कान फाड़ देने वाली आवाज़ हुई। पूरी कार 180 डिग्री के एंगल पर स्लिप हुई और बैरिकेड से महज़ कुछ इंच की दूरी से ड्रिफ्ट करते हुए, कर्व को एकदम परफेक्टली पार कर गई।

लैंबोर्गिनी, जो रेस में पहले ही पीछे हो चुकी थी, इस खतरनाक टर्न को देखकर बहुत पीछे रह गई।

फिनिश लाइन पार करते ही कबीर ने ब्रेक मार दिया।

कार एक सुनसान, अंधेरी सड़क पर जाकर झटके से रुकी। अंदर सिर्फ इंजन के ठंडे होने की 'टिक-टिक' आवाज़ आ रही थी।

तारा की सांसें इतनी तेज़ चल रही थीं कि उसका सीना तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहा था। उसे लगा जैसे वो अभी-अभी मौत के मुंह से वापस आई है। उसके हाथ अभी भी कांप रहे थे। उसने अपनी आँखें बंद कीं और अपनी धड़कनों को काबू में करने की कोशिश की।

अचानक, कबीर ने अपना सीटबेल्ट खोला और पूरी तरह से तारा की तरफ मुड़ गया।

तारा कुछ समझ पाती, उससे पहले ही कबीर के बड़े, रफ हाथों ने तारा के चेहरे को पकड़ लिया। उसकी उंगलियां तारा के गालों और जबड़े (jawline) पर कस गईं, लेकिन उनमें दर्द देने वाली सख्ती नहीं थी, बल्कि एक अजीब सा डेस्परेशन (desperation) था।

"तुमने अपनी आँखें बंद नहीं कीं," कबीर हांफते हुए फुसफुसाया। उसकी आँखें तारा के चेहरे पर ऐसे घूम रही थीं जैसे वो कोई अजूबा देख रहा हो।

तारा ने अपनी आँखें खोलीं। कबीर का चेहरा उसके चेहरे के इतने करीब था कि वो उसकी धड़कन महसूस कर सकती थी। कबीर का सीना तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहा था, और उसकी आँखों में अब गुस्सा नहीं, बल्कि एक गहरी, डार्क और भूखी चमक थी।

"तुम चीखी नहीं," कबीर ने अपना अंगूठा तारा के कांपते हुए निचले होंठ पर फेरते हुए कहा। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी खुरदरी नरमी आ गई थी। "जब हम बैरिकेड से टकराने वाले थे, तुमने मुझे रोकने के बजाय, मुझे स्ट्रैटेजी बताई? तुम कौन हो, तारा देसाई?"

तारा को अपने होंठों पर कबीर के अंगूठे का वो रफ स्पर्श आग की तरह महसूस हो रहा था। वो चाह कर भी खुद को पीछे नहीं खींच पा रही थी। कबीर के औरा ने उसे पूरी तरह से जकड़ लिया था।

"मैं वो हूँ जो तुम्हारी जान बचा रही है, बेवकूफ," तारा ने हांफते हुए जवाब दिया, उसकी आवाज़ कांप रही थी। "तुम रेस नहीं कर रहे थे... तुम खुद को मारने की कोशिश कर रहे थे। वो थर्ड गियर का स्ट्रेस..."

"भाड़ में गया गियर!" कबीर अचानक गुर्राया और उसने तारा के चेहरे को अपने और करीब खींच लिया। अब उनके होंठों के बीच सिर्फ एक सांस की दूरी थी।

"मुझे तुम्हारे उस बकवास डेटा से कोई मतलब नहीं है," कबीर की आँखें तारा के होंठों पर टिकी थीं। उसका पूरा शरीर टेंशन से सख्त हो चुका था। वो अपने आप से, अपने गुस्से से, और उस लड़की के लिए पैदा हो रहे इस खतरनाक अट्रैक्शन से लड़ रहा था। "लेकिन एक बात सुन लो, स्ट्रैटेजिस्ट... आज के बाद तुम मेरी कार में, मेरी पैसेंजर सीट पर, किसी और को नहीं बैठने दोगी। गॉट इट?"

यह कोई रिक्वेस्ट नहीं थी। यह एक हुक्म था। एक पज़ेसिव (possessive), जुनूनी आदमी का हुक्म।

तारा की सांसें अटक गईं। उसने कबीर की आँखों में देखा और उसे वहाँ जो दिखाई दिया, उसने तारा को अंदर तक कंपा दिया। वो महज़ एक अमीरज़ादा नहीं था, वो एक ऐसा तूफान था जो अगर फटा, तो तारा को हमेशा के लिए अपने साथ उड़ा ले जाएगा।

"और अगर मैंने इंकार कर दिया तो?" तारा ने चैलेंज करते हुए कहा, लेकिन उसकी आवाज़ एक फुसफुसाहट से ज़्यादा नहीं निकल पाई।

कबीर के होठों पर वो कातिलाना, एरोगेंट मुस्कान वापस लौट आई। उसने अपना सिर थोड़ा और झुकाया, उसके होंठ लगभग तारा के होंठों को छू गए।

"तो फिर, मैं तुम्हें मजबूर कर दूंगा," कबीर ने डार्क लहज़े में कहा, और फिर धीरे से, लगभग सताने वाले अंदाज़ में, पीछे हट गया।

कार में वापस वो घुटन भरी खामोशी छा गई, लेकिन अब इस खामोशी में नफरत से ज़्यादा एक खतरनाक, स्टीमी टेंशन था। खेल बदल चुका था। तारा को कबीर की कमज़ोरी समझ आ गई थी, और कबीर को तारा की ताकत का अंदाज़ा हो गया था।

और दोनों ही जानते थे कि जब वे दोबारा ट्रैक पर उतरेंगे, तो सिर्फ कारें क्रैश नहीं होंगी... बल्कि उनके दिल भी क्रैश होंगे।

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