Drive Me Crazy - Chapter 4
अध्याय 4: द अनस्पोकन डील (The Unspoken Deal)
सुबह की हल्की धूप तारा के हॉस्टल के छोटे से कमरे की खिड़की से अंदर आ रही थी, लेकिन तारा के दिमाग में अभी भी बीती रात का वह खौफनाक अंधेरा और इंजनों की चीख गूंज रही थी।
उसने अपनी आँखें खोलीं और छत की तरफ घूरती रही। उसका शरीर ऐसे दर्द कर रहा था जैसे किसी ने उसे पत्थरों पर पटका हो। बीती रात उस फेरारी में महसूस किया गया जी-फोर्स (G-Force) कोई मज़ाक नहीं था। लेकिन शारीरिक दर्द से ज़्यादा, जो चीज़ उसे परेशान कर रही थी, वह थी कबीर की वो डार्क, पज़ेसिव नज़रें। उसकी उंगलियों का वो रफ स्पर्श तारा के गालों पर अभी भी एक जलते हुए निशान की तरह महसूस हो रहा था।
"आज के बाद तुम मेरी कार में... किसी और को नहीं बैठने दोगी।"
कबीर के वो शब्द उसके कानों में बार-बार किसी खतरनाक धुन की तरह बज रहे थे। तारा ने झटके से अपना सिर हिलाया और बिस्तर से उठ गई। उसे अपने दिमाग को शांत करना था। वह यहाँ सेंट जूड में किसी बिगड़ैल, खूबसूरत रईसज़ादे के डार्क रोमांस का हिस्सा बनने नहीं आई थी। उसका लक्ष्य वह 'प्रीमियर ग्रांट' और लंदन की स्कॉलरशिप थी।
तारा ने ठंडे पानी से शॉवर लिया, जिससे उसकी नसों में दौड़ता हुआ कल रात का एड्रेनालाईन थोड़ा शांत हुआ। उसने एक सादे नीले रंग की जींस और एक ढीली सफेद शर्ट पहनी। अपने बालों को एक सख्त पोनीटेल में बांधा और छोटी सी किचन की तरफ गई। गैरेज में आज का दिन बहुत लंबा होने वाला था, और उसे पता था कि कबीर या उसके दोस्त उसे वहाँ पानी तक नहीं पूछने वाले।
अपनी सेहत और एनर्जी को बनाए रखने के लिए, तारा ने अपने टिफिन में एक हेल्दी पालक-पनीर सैंडविच और थोड़ा सा फ्रेश स्प्राउट्स और सब्जियों का सैलेड पैक किया। वह अपना बैकपैक और लैपटॉप लेकर हॉस्टल से बाहर निकल गई।
सेंट जूड यूनिवर्सिटी - मेन कोर्टयार्ड
जैसे ही तारा ने यूनिवर्सिटी के मेन कैंपस में कदम रखा, उसे तुरंत महसूस हो गया कि हवा का रुख बदल चुका है।
कल तक जहाँ लोग उसे एक 'अदृश्य' स्कॉलरशिप स्टूडेंट समझकर इग्नोर करते थे, आज हर नज़र उसी पर गड़ी थी। लड़कियां ग्रुप्स में खड़ी होकर कानाफूसी कर रही थीं। कुछ अमीर लड़के उसे देखकर अजीब सी स्माइल दे रहे थे।
"वही है न ये?" एक लड़की की तीखी आवाज़ तारा के कानों में पड़ी।
"हाँ, कल रात हाइवे पर कबीर सिंघानिया ने इसे अपनी पैसेंजर सीट पर बिठाया था। कैन यू बिलीव इट? कबीर अपनी कार में किसी को नहीं घुसने देता, और इस ट्रैश को..."
तारा ने अपनी नज़रें सामने रखीं और अपनी चाल तेज़ कर दी। वह लाइब्रेरी की तरफ मुड़ने ही वाली थी कि अचानक तीन लड़कियों ने उसका रास्ता रोक लिया। बीच में खड़ी लड़की, नताशा, कैंपस की जानी-मानी 'क्वीन बी' (Queen Bee) और किसी बड़े राजनेता की बेटी थी। नताशा हमेशा से कबीर पर डोरे डालती आई थी, लेकिन कबीर ने कभी उसे भाव नहीं दिया था।
नताशा ने अपने डिज़ाइनर प्राडा बैग को कंधे पर सेट किया और तारा को नफरत भरी नज़रों से ऊपर से नीचे तक देखा।
"तो, तुम हो वो नई चैरिटी केस?" नताशा ने एक नकली, ज़हरीली मुस्कान के साथ कहा। "मुझे समझ नहीं आ रहा कि कबीर ने तुम जैसी बेवकूफ और सस्ती लड़की को अपनी कार में बिठाया ही क्यों? क्या तुमने घुटनों पर बैठकर उससे भीख मांगी थी?"
नताशा की सहेलियां ज़ोर से हंसने लगीं। तारा ने एक गहरी सांस ली। वह इन फालतू के ड्रामों में अपनी एनर्जी वेस्ट नहीं करना चाहती थी।
"मुझे रास्ता दो, नताशा। मेरे पास तुम्हारे इस चीप सोप-ओपेरा के लिए वक्त नहीं है," तारा ने शांति से कहा और आगे बढ़ने की कोशिश की।
लेकिन नताशा ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया। उसके लंबे, नकली नाखून तारा की स्किन में चुभने लगे। "तू जानती नहीं है तू किससे बात कर रही है, यू लिटिल बिच! कबीर सिर्फ तुम्हारे साथ माइंड गेम्स खेल रहा है। जिस दिन वो तुमसे बोर हो जाएगा, वो तुम्हें उठाकर कचरे में फेंक देगा, जहाँ से तुम आई हो।"
तारा अपनी पूरी ताकत से नताशा का हाथ झटकने ही वाली थी कि अचानक पीछे से एक जानी-पहचानी, भारी और ठंडी आवाज़ गूंजी।
"मुझे नहीं याद कि मैंने तुम्हें द एपेक्स क्लब का स्पोक्सपर्सन (प्रवक्ता) नियुक्त किया है, नताशा।"
पूरे कॉरिडोर में जैसे सांप सूंघ गया। नताशा के चेहरे का रंग उड़ गया।
तारा ने मुड़कर देखा। आर्यन खन्ना और नील आहूजा वहाँ खड़े थे। आर्यन हमेशा की तरह अपनी ब्लैक हुडी में था, उसका चेहरा भावहीन था, लेकिन उसकी आँखों में एक खतरनाक ठंडक थी। नील के चेहरे पर वो प्लेबॉय स्माइल थी, लेकिन आज उसमें एक वॉर्निंग छिपी थी।
नील धीरे-धीरे चलकर आगे आया और उसने नताशा को अपनी जगह से पीछे हटने का इशारा किया।
"मुझे लगता है तुम्हें ठीक से सुनाई नहीं दिया, नैट," नील ने अपनी जेब में हाथ डालते हुए कहा। "तारा अब हमारी लीड स्ट्रैटेजिस्ट है। वो द एपेक्स क्लब का हिस्सा है। और हमारे क्लब के लोगों से बदतमीज़ी करने का हक... सिर्फ हमें है, तुम्हें नहीं।"
नताशा ने घबराहट में थूक निगला। "नील, मैं तो बस..."
"गेट लॉस्ट, नताशा," आर्यन ने बिना उसकी तरफ देखे, अपनी रोबोटिक लेकिन खौफनाक आवाज़ में कहा।
नताशा और उसकी सहेलियां बिना एक शब्द कहे वहाँ से दुम दबाकर भाग गईं।
तारा हैरान थी। उसने नील और आर्यन की तरफ देखा। "तुम लोगों ने मेरी मदद क्यों की?"
नील ने आँख मारी। "मदद? गलतफहमी में मत रहना, स्वीटहार्ट। हमने सिर्फ अपनी प्रॉपर्टी प्रोटेक्ट की है। कबीर ने कहा है कि जब तक तुम हमारी स्ट्रैटेजी फिक्स नहीं कर देती, तब तक तुम पर सिर्फ हमारा राइट (अधिकार) है। बाय द वे, कल रात कार में तुम रोई नहीं... इम्प्रेसिव!"
आर्यन ने तारा के लैपटॉप बैग की तरफ देखा। "तुम्हारा हार्ट रेट नॉर्मल है। तुम नर्वस नहीं हो। इसका मतलब तुमने टेलीमेट्री का डेटा क्रैक कर लिया है। गैरेज में चलो, मुझे वो नंबर्स देखने हैं।"
तारा ने अपनी मुट्ठियां भींचीं। ये लड़के सच में पागल थे, लेकिन कम से कम अब वो उसे एक इंसान समझने लगे थे।
द एपेक्स गैरेज - सुबह 11 बजे
गैरेज के अंदर का माहौल आज एकदम सीरियस था। बेस-हैवी म्यूज़िक आज बंद था। तारा ने बीचों-बीच रखे बड़े ग्लास टेबल पर अपना लैपटॉप सेटअप किया और उसे तीन बड़ी मॉनिटर स्क्रीन्स से कनेक्ट कर दिया।
आर्यन उसके ठीक बगल में खड़ा था, उसकी आँखें स्क्रीन पर दौड़ रहे नंबर्स और ग्राफ़्स को ऐसे पी रही थीं जैसे वो कोई अमृत हो। देव बेंच प्रेस पर बैठा था, लेकिन उसकी नज़रें भी स्क्रीन पर ही थीं।
"यह इम्पॉसिबल है," आर्यन ने अचानक कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी उत्तेजना थी। "तुमने पिछले तीन रेस के सस्पेंशन डेटा को एयरोडायनेमिक्स (aerodynamics) के साथ मर्ज कैसे किया? हमारा सॉफ्टवेयर यह अलाउ नहीं करता।"
"तुम्हारे सॉफ्टवेयर में बग (bug) था," तारा ने कीबोर्ड पर अपनी उंगलियां तेज़ी से चलाते हुए कहा। "मैंने रात में उसे री-कोड कर दिया। अब देखो।"
तारा ने एक ग्राफ ओपन किया। "प्रॉब्लम कार में नहीं है, प्रॉब्लम ड्राइवर में है। कबीर कॉर्नर्स पर लेट-ब्रेकिंग (late-braking) करता है। वो टर्न के एकदम मुहाने तक एक्सिलरेटर दबाए रखता है और फिर अचानक ब्रेक मारता है। इससे टायर्स का 40% ग्रिप खत्म हो जाता है और सस्पेंशन पर इतना स्ट्रेस पड़ता है कि इंजन ओवरहीट होने लगता है।"
"तो इसका सॉल्यूशन क्या है, जीनियस?" देव ने तंज कसते हुए पूछा।
"ट्रेल-ब्रेकिंग (Trail-braking)," तारा ने आर्यन की तरफ देखकर कहा। "उसे कॉर्नर में घुसने से पहले ही ब्रेक पर हल्का प्रेशर बनाना होगा और जैसे ही एपेक्स (टर्न का सेंटर पॉइंट) आए, उसे ब्रेक छोड़कर धीरे से एक्सिलरेटर दबाना होगा। इससे कार स्मूदली टर्न लेगी और सस्पेंशन भी बचेगा।"
"तुम उसे ट्रेल-ब्रेकिंग सिखाओगी?"
यह आवाज़ गैरेज के दरवाज़े से आई।
तारा की उंगलियां कीबोर्ड पर जम गईं। उसने सिर उठाकर देखा। कबीर सिंघानिया अंदर आ रहा था।
उसने एक ग्रे स्वेटशर्ट और ब्लैक जॉगर्स पहने हुए थे। उसके बाल आज भी बिखरे हुए थे, लेकिन उसके चेहरे पर एक अजीब सी गंभीरता थी। कबीर सीधा चलते हुए टेबल के पास आया और तारा के सामने आकर खड़ा हो गया।
"तुम्हें लगता है मुझे ट्रेल-ब्रेकिंग नहीं आती?" कबीर ने अपनी आँखें सिकोड़ते हुए पूछा।
"तुम्हें सब कुछ आता है, कबीर," तारा ने भी उसकी आँखों में सीधा देखते हुए जवाब दिया। "लेकिन तुम्हारे अंदर का वो बेवकूफाना गुस्सा तुम्हें सही काम करने से रोकता है। तुम रेस जीतने के लिए ड्राइव नहीं करते, तुम अपने आप को सज़ा देने के लिए ड्राइव करते हो।"
गैरेज में अचानक मौत जैसा सन्नाटा छा गया। आर्यन, नील और देव ने एक-दूसरे को देखा। कबीर की साइकोलॉजी के बारे में इतनी गहरी और कड़वी बात आज तक किसी ने उसके मुंह पर नहीं कही थी।
कबीर का जबड़ा सख्त हो गया। उसकी आँखों में एक खतरनाक तूफान उठने लगा। उसने अपने दोनों हाथ टेबल पर टिकाए और तारा की तरफ थोड़ा झुका।
"तुम मेरी साइकेट्रिस्ट (मनोचिकित्सक) नहीं हो, तारा। तुम सिर्फ एक डेटा एनालिस्ट हो। अपनी हद में रहो," कबीर गुर्राया।
"मैं अपनी हद में ही हूँ," तारा पीछे नहीं हटी। उसने अपना लैपटॉप कबीर की तरफ घुमाया। "ये नंबर्स देखो। अगर तुमने मेरी स्ट्रैटेजी फॉलो नहीं की, तो अगले हफ्ते होने वाली फॉर्मूला भारत के क्वालिफायर राउंड में तुम्हारी कार तीसरे लैप में ही जलकर खाक हो जाएगी। और तुम्हारी उस बेशकीमती ईगो (ego) के साथ-साथ इस क्लब का नाम भी मिट्टी में मिल जाएगा।"
कबीर ने उन ग्राफ़्स को देखा। वह जानता था कि तारा सही कह रही है। कल रात उसने तारा की स्ट्रैटेजी को आखिरी सेकंड में मानकर अपनी और उसकी जान बचाई थी। यह लड़की सिर्फ खूबसूरत नहीं थी, यह डरावनी हद तक ब्रिलियंट थी।
कबीर धीरे से सीधा खड़ा हुआ। उसने अपनी जेब में हाथ डाले और तारा को एक ऐसी नज़र से देखा, जिसने तारा के रोंगटे खड़े कर दिए।
"फाइन," कबीर की आवाज़ एकदम शांत, लेकिन भारी थी। "कल शाम को नेशनल सर्किट पर हमारा पहला प्रैक्टिस सेशन है। मैं तुम्हारी इस 'ट्रेल-ब्रेकिंग' थ्योरी को ट्राई करूँगा।"
तारा ने चैन की सांस ली। उसे लगा कि उसने कबीर को समझा लिया है। "गुड। मैं आर्यन के साथ मिलकर तुम्हारे लिए नया गियर-शिफ्टिंग पैटर्न तैयार कर लूँगी।"
"एक शर्त है," कबीर ने अचानक कहा। उसके होठों पर वो कातिलाना, एरोगेंट स्माइल वापस आ गई थी।
तारा ने अपनी भौहें सिकोड़ीं। "कैसी शर्त?"
कबीर टेबल का चक्कर लगाकर तारा के बिल्कुल पास आ गया। वह इतनी करीब आ गया कि तारा को पीछे हटना पड़ा, लेकिन उसकी पीठ आर्यन की कुर्सी से टकरा गई। कबीर ने अपना एक हाथ तारा के ठीक बगल में कुर्सी के बैकरेस्ट पर टिका दिया, उसे पूरी तरह से अपने घेरे में ले लिया।
"मैं ट्रैक पर तुम्हारे सारे ऑर्डर्स फॉलो करूँगा, स्ट्रैटेजिस्ट," कबीर ने अपना चेहरा तारा के कान के पास झुकाया। उसकी आवाज़ एक गहरी, वाइब्रेटिंग फुसफुसाहट थी, जो सिर्फ तारा को सुनाई दे रही थी। "लेकिन अगर तुम्हारी स्ट्रैटेजी से मेरा टाइम ज़रा सा भी कम हुआ... या मैं प्रैक्टिस में हार गया... तो तुम खुद डीन के पास जाओगी और यह टीम छोड़ दोगी।"
तारा की सांसें तेज़ हो गईं। कबीर का वो मिंट और लेदर वाला परफ्यूम उसके होश उड़ा रहा था। लेकिन उसने अपने दिमाग को काबू में रखा।
"और अगर मैं सही साबित हुई, तो?" तारा ने अपना चेहरा कबीर की तरफ घुमाया। अब उनके चेहरे इंचों की दूरी पर थे।
कबीर की डार्क आँखों में एक ऐसी आग जली, जिसे देखकर कोई भी पिघल जाए। उसकी नज़रें तारा के होंठों पर गईं और फिर वापस उसकी आँखों में।
"अगर तुम सही साबित हुई..." कबीर ने रफ आवाज़ में कहा, उसकी उंगलियां हल्के से तारा के डेस्क पर रखे हाथ को छू गईं, "...तो इस पूरे सीज़न में, तुम जो कहोगी, मैं वो करूँगा। ट्रैक पर भी... और ट्रैक के बाहर भी।"
यह एक खुली, बेशर्म चुनौती थी। इसमें रेसिंग से ज़्यादा कुछ और छिपा था। यह एक प्रॉमिस था, एक खतरनाक खेल की शुरुआत थी।
तारा के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई, लेकिन उसने अपना हाथ पीछे नहीं खींचा। उसने अपनी ठुड्डी उठाई और कबीर की उन तूफानी आँखों में देखते हुए कहा,
"डील (Deal)। कल सर्किट पर मिलते हैं, सिंघानिया। और हाँ, हारने की आदत डाल लो।"
कबीर के होठों पर एक क्रूर, लेकिन इंप्रेस्ड (impressed) मुस्कान तैर गई। वह धीरे से पीछे हटा।
"हम देखेंगे, तारा देसाई। हम देखेंगे।"
कबीर मुड़ा और बिना कुछ और कहे गैरेज से बाहर निकल गया। उसके जाने के बाद भी तारा के दिल की धड़कनें शांत होने का नाम नहीं ले रही थीं। उसे समझ आ गया था कि कबीर सिंघानिया एक ऐसा नशा था, जिसे अगर उसने एक बार चख लिया, तो वह खुद को कभी बचा नहीं पाएगी।
दोपहर के लंच ब्रेक में, जब तारा अकेले गैरेज के एक कोने में बैठी अपना हेल्दी सैंडविच और सैलेड खा रही थी, तो उसका दिमाग बस कल होने वाले प्रैक्टिस सेशन के इर्द-गिर्द घूम रहा था। यह सिर्फ एक रेस नहीं थी, यह उसके और कबीर के बीच की पहली असली जंग थी। और इस जंग में जीतने वाला, हारने वाले का सब कुछ छीन लेने वाला था।