बैरी पिया (हर एनिमी हसबैंड) Ch. 3

बैरी पिया (हर एनिमी हसबैंड) - Chapter 3

Posted by Ishqi Singhal • Sep 21, 2026 02:10 PM

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चौहान पैलेस से दो गाड़ियां एक साथ निकली थीं। एक गाड़ी में सिद्धि और संकल्प थे, जिसे एक ड्राइवर ड्राइव कर रहा था और उसके पीछे आर्यमन की गाड़ी थी, जिसे वह खुद ही ड्राइव कर रहा था।

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संकल्प ने गाड़ी में बैठते ही ड्राइवर को पार्टीशन ऑन करने के लिए बोल दिया था और ऐसा होते ही सिद्धि ने तुरंत अपना घूंघट हटाया और फिर गुस्से से संकल्प को देखते हुए अपनी कांपती हुई आवाज में बोली,

"तुम आखिर मुझे चाहते क्या हो? तुम्हें मेरी शादी इस तरीके से बर्बाद नहीं करनी चाहिए थी।"

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संकल्प ने एक झटके से उसकी कमर पकड़ी और फिर उसे अपनी गोद में बैठाते हुए उसका चेहरा अपने हाथ से पकड़ते हुए बोला,

"और तुम्हें किसी और की धर्मपत्नी बनने के बारे में नहीं सोचना चाहिए था।"

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यह बात संकल्प ने बहुत गुस्से में बोली थी, जिस वजह से पल भर के लिए सिद्धि के हाथ कांप उठे थे। लेकिन फिर संकल्प का हाथ अपने चेहरे से झटकते हुए इस तरह गुस्से में कहा,

"तुम होते कौन हो यह डिसाइड करने वाले कि मैं किसकी धर्मपत्नी बनूंगी और किसकी नहीं? यह मेरी जिंदगी है। मुझे अपने हिसाब से जीना है। तो मैं तुम्हारे हाथों की कोई कठपुतली नहीं हूं, जिसे तुम जब चाहो तब प्यार से रखो, जब चाहो तब पीटकर मारकर खुद से दूर कर दो।"

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संकल्प ने उसकी कलाई पकड़ी और फिर धीरे से अपना सर उसके सीने पर रखते हुए बोला,

"मतलब तुम्हें पता है कि मैं तुम्हें प्यार से रखता था? तुम्हें याद है?"

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गुस्से से सिद्धि की पूरी बॉडी कांप रही थी। उसने अपना हाथ संकल्प के हाथ से हटाना चाहा, पर संकल्प की ताकत इतनी ज्यादा थी कि सिद्धि उसे एक इंच भी हिला नहीं पा रही थी और उसने दांत पीसते हुए कहा,

"हां, कुछ यादें सहन से कभी नहीं मिटाई जा सकतीं और वह तुम जैसे इंसान कभी नहीं समझ सकते, जिसने सब कुछ सिर्फ अपने इंटरटेनमेंट के लिए किया हो। जैसे कोई मूवी या ड्रामा चल रहा हो। वह मेरी जिंदगी थी, जिसे तुमने अपने हाथों से बर्बाद कर दिया है।"

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बस इस बात पर संकल्प डेविल तरीके से मुस्कुराया और फिर उसके सीने से अपना चेहरा हटाते हुए उसकी गहरी काली आंखों में देखते हुए बोला,

"अभी तो तुम्हारी जिंदगी शुरू हुई है। अभी से यह कैसे बर्बाद हो सकती है? तुम सिर्फ 22 साल की हो और तुम्हें लगता है कि तुमने अपनी पूरी जिंदगी जी ली है? सीरियसली?"

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सिद्धि की आंखों के आंसू एक बार फिर उसके गालों पर आ गए थे। उसने वैसे ही संकल्प की आंखों में देखते हुए कहा,

"जिस तरीके से मेरी जिंदगी के कुछ साल बीते हैं, मुझे नहीं लगता है कि मुझे आगे की जिंदगी जीनी भी चाहिए। इतने सालों में ही मैं वह सब कुछ देख चुकी हूं, जो मैं शायद मरते दम तक नहीं देखना चाहती थी। इसलिए मेरी जिंदगी शुरू होने से पहले ही खत्म भी हो चुकी है। अब छोड़ो मुझे।"

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इतना बोलकर सिद्धि संकल्प की बाहों में छटपटाने लगी थी, पर संकल्प उसे छोड़ने का नाम नहीं ले रहा था। उसने उसका हाथ तो छोड़ दिया था, पर अपने दोनों बाजुओं के घेरे में लेकर उसका हाथ जबरदस्ती अपने सीने पर रख रहा था।

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और उसकी पकड़ इतनी ज्यादा मजबूत थी कि कुछ ही पलों में तो अपनी कोशिश में कामयाब भी हो चुका था और सिद्धि उसके सीने से लगी हुई थी। संकल्प न जाने कितने धीरे-धीरे उसके बालों को सहलाते हुए कहा,

"इतना गुस्सा ठीक नहीं है, जान। थोड़ा सब्र रखो। तुम्हें गुस्सा करने का भी पूरा मौका दिया जाएगा। उसके बाद तुम्हें मुझे जो भी बोलना है, आराम से बोलना। फिलहाल तुम रो-रो कर काफी थक चुकी हो, तो तुम्हें थोड़ा आराम करना चाहिए।"

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सिद्धि की आंखें अब तो रोने के कारण जलने भी लगी थीं। उसने अपनी पलकें बंद कीं, जिसके साथ ही उसके आंसू संकल्प की शर्ट पर गिर रहे थे।

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आधे घंटे की ड्राइविंग के बाद ही उनकी गाड़ी मित्तल मेंशन के सामने जाकर रुकी।

अब तक रात के करीब 10 बज चुके थे, लेकिन मित्तल मेंशन की लाइट्स जल रही थीं, क्योंकि वे सब लोग भी संकल्प का इंतजार कर रहे थे। उन्हें आर्यमन ने अभी-अभी बताया था कि संकल्प जेल से बाहर आ चुका है, पर साथ में उनके लिए कोई सरप्राइज लेकर आ रहा है। इसलिए घर के सब लोग काफी ज्यादा परेशान भी थे और साथ में खुश भी थे कि आखिरकार वह संकल्प को पूरे 1 साल बाद देख पाएंगे।

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संकल्प की गाड़ी जैसे ही रुकी, एक बॉडीगार्ड जल्दी से उनकी गाड़ी के पास आया और उसने संकल्प के लिए दरवाजा खोला। दरवाजा खुलते ही संकल्प इस तरीके से सिद्धि को अपनी बाहों में लिए गाड़ी से बाहर आया, क्योंकि उसे पता था, अगर वह सिद्धि को छोड़ देगा तो वह घर के अंदर भी नहीं जाएगी।

वहीं सिद्धि की हिम्मत भी अब जवाब दे चुकी थी, इसलिए उसने छटपटाना भी बंद कर दिया था। उसे बहुत अफसोस हो रहा था अपनी किस्मत पर। कुछ घंटे पहले उसे लग रहा था कि वह अपने अतीत को शायद पीछे छोड़ देगी, अब उसकी जिंदगी का नया चैप्टर शुरू हो जाएगा, लेकिन फिर से उसके अतीत की जंजीरें उसे अपने अंदर जकड़ चुकी थीं। उसे अपनी किस्मत पर हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था। इससे अच्छा होता, शायद वह मर ही जाती।

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वह यह सब कुछ सोच ही रही थी कि उसे अपने कानों में एक औरत की आवाज सुनाई दी, क्योंकि वह संकल्प की मां वसुंधरा मित्तल थी,

"संकल्प, तुम किसी को उठाकर ले आए हो?"

संकल्प मुस्कुराया और फिर वसुंधरा के बिल्कुल करीब जाते हुए बोला,

"आपकी बहू है, मां। मुंह दिखाई कर लो। देखो, कितनी ज्यादा सुंदर है।"

फिर उसने एक नजर सिद्धि के चेहरे को देखा। प्यारा-सा छोटा-सा चेहरा, काली आंखें और गुलाबी होंठ, जिनके नीचे छोटा-सा दिल था। उसने बालों की लेयर्स वाली बैंक कटिंग करवा रखी थी, इसलिए कुछ बाल उसके गालों पर आ रहे थे। वह हद से ज्यादा मासूम लग रही थी और रोने के कारण उसका पूरा चेहरा लाल पड़ चुका था।

संकल्प ने उसके चेहरे को देखकर हंसते हुए कहा,

"इसे तो मेकअप की भी जरूरत नहीं है। रो-रो कर ही अपने गालों पर ब्लश लगा लेती है। देखो, कितनी ज्यादा प्यारी है। जल्दी से अपनी आंखों से हल्का-सा काजल निकालकर इसके कान के पीछे लगा दो, वरना मेरी बीवी को नजर लग जाएगी।"

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संकल्प को इस वक्त कोई भी सुनता, वह यही कहता कि वह पागल है, उसे मेंटल हॉस्पिटल की जरूरत है। उसकी सनकी वाली बातें सुनकर सिद्धि को तो अब और भी ज्यादा डर लग रहा था। उसने डरते हुए वसुंधरा की तरफ देखा। वहीं वसुंधरा उसे देखते ही पहचान चुकी थी कि यह संकल्प की गर्लफ्रेंड सिद्धि है। उसे दुल्हन के जोड़े में देखकर उनकी आंखें डर के कारण फैल चुकी थीं। उन्होंने भी सुना था कि सिद्धि चौहान की शादी वीर बजाज के साथ होने वाली है, पर उन्हें नहीं पता था कि उनका बेटा उसे शादी से ही उठाकर ले आएगा।

अगले ही पल वसुंधरा ने गुस्से में एक जोरदार तमाचा संकल्प के गाल पर जड़ते हुए कहा,

"तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है! तुम अभी-अभी जेल से बाहर आए हो और फिर से एक और जुर्म कर दिया है तुमने।"

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