बैरी पिया (हर एनिमी हसबैंड) Ch. 2

बैरी पिया (हर एनिमी हसबैंड) - Chapter 2

Posted by Ishqi Singhal • Sep 20, 2026 10:25 PM

संकल्प ने गर्दन घुमा कर पंडित जी की तरफ देखा, जो डरते हुए अब धर्मेंद्र और उसके दोस्तों की तरफ देख रहे थे, क्योंकि यहां पर वही लोग थे जो कुछ कर सकते थे। बेचारे पंडित जी के पास तो वैसे भी कोई हथियार ही नहीं था।

धर्मेंद्र ने गुस्से में कहा,

"ये सारे सिक्योरिटी गार्ड कहां मर गए हैं?"

संकल्प ने अपनी गन से अपना सिर खुजाते हुए कहा,

"ससुर जी, अब अगर वह मर ही गए हैं तो क्या फर्क पड़ता है कि वह कहां मरे हैं। वैसे, वह वहीं पर मरे हैं जहां पर आपने उन्हें खड़ा किया था। एक इंच भी मैंने उनको इधर-उधर हिलने ही नहीं दिया।"

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उसकी सनकी जैसी बातें सुनकर कोई भी डर सकता था।

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कोई और कुछ बोल पाता, उससे पहले ही दरवाजे से एक और लड़का लगभग भागते हुए अंदर आया। उसकी सांसें पूरी तरह उखड़ रही थीं।

उसकी उम्र भी यही कोई 25-26 साल लग रही थी।

उसने सबसे पहले तो गुस्से में घूरकर संकल्प की तरफ देखा, जो अब मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देख रहा था।

"श्री सीनियर, काफी देर कर दी तुमने यहां आने में। मैं तो तुमसे आधे घंटे पहले यहां पहुंच गया। तुम तो बोल रहे थे, तुम मुझसे पहले पहुंचोगे।"

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उसके सामने और कोई नहीं, बल्कि उसका पड़ोसी और उसका सबसे अच्छा दोस्त, आर्यमन दीक्षित खड़ा था।

आर्यमन ने उसे देखकर अपने मन में कहा, "तुझे तो मैं बाद में देखूंगा बेटा।"

और फिर वह तेज कदमों से धर्मेंद्र के पास गया और अगले ही पल मुस्कुराते हुए अपना फोन ऑन करके धर्मेंद्र को दिखाते हुए बोला,

"क्या कहते हैं मिस्टर चौहान, कब तक मेरा दोस्त आपका जमाई बन सकता है?"

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धर्मेंद्र ने जैसे ही वह वीडियो देखा था, उसका पूरा चेहरा डर के मारे सफेद पड़ चुका था। उसने फिर संकल्प की तरफ देखा। उसके ऐसा करते ही संकल्प ने उसकी तरफ आंख मारते हुए कहा,

"ससुर जी, जल्दी बोलिए। आप कहें तो अभी आपके इस दामाद को मंडप से उठाकर बाहर फेंक दूं?"

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धर्मेंद्र ने अपनी जेब से रुमाल निकाला और अपने माथे पर आए पसीने को पोंछते हुए बोला,

"वीर बेटा, आप उठ जाइए। सिद्धि की शादी संकल्प से ही होगी।"

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धर्मेंद्र की बात सुनकर वहां खड़ा हर शख्स हैरान रह चुका था। थोड़ी देर पहले तो धर्मेंद्र संकल्प पर गुस्सा कर रहे थे और अब खुद ही अपनी इकलौती बेटी का हाथ उसके हाथ में देना चाहते थे, जबकि जानते हुए भी कि वह सीधा जेल से छूटकर अभी-अभी वापस आया है। भला कौन अपनी बेटी की शादी एक क्रिमिनल से करना चाहेगा?

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अब तो सबको जानना था कि आखिर आर्यमन ने ऐसा भी क्या दिखाया था उसे वीडियो में, जिसे देखकर धर्मेंद्र इतना ज्यादा घबरा चुका था।

दामिनी भी हैरानी से धर्मेंद्र की तरफ देख रही थीं, पर धर्मेंद्र ने आंखों ही आंखों में उसे शांत रहने का इशारा किया। वहीं वीर तो पहले से ही संकल्प को देखकर डर चुका था और उसने जैसे ही सुना था कि संकल्प उसे उठकर बाहर फेंकने वाला है, वह जल्दी से मंडप से उठ चुका था। उसके उठते ही संकल्प ने उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा,

"वेल डन, काफी समझदार हो तुम।"

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संकल्प जब सिद्धि के बगल में बैठा था, सिद्धि की धड़कनें तेज हो चुकी थीं। उसकी सांसें पहले से भी ज्यादा तेजी से चलने लगी थीं। उसे ऐसा लग रहा था जैसे संकल्प और उसके घर वालों ने उसे एक खिलौना बना लिया है, जो बस उसके लिए लड़ रहे हैं। कभी उसकी शादी किसी और से तो कभी किसी और से, और उससे कोई नहीं पूछ रहा है कि उसकी मर्जी क्या है। मन ही मन उसे सब लोगों पर गुस्सा आ रहा था।

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संकल्प ने जल्दी से सिद्धि का हाथ पकड़ा और फिर अपने हाथ आगे रखते हुए पंडित जी की तरफ देखते हुए बोला,

"आप क्या बोल रहे थे?"

पंडित ने अपना श्लोक निकाला और फिर उन दोनों के हाथ पर पूजा की सामग्री रखते हुए बोला,

"आप दोनों को हवन कुंड में आहुति देनी है।"

संकल्प मुस्कुराया और फिर सिद्धि का हाथ जबरदस्ती आगे करते हुए उसे वह विधि करवाई।

सिद्धि के सिसकने की आवाज संकल्प बहुत अच्छे से सुन सकता था। इसलिए उसने आंखें बंद करके धीरे से कहा,

"अरे, तुम तो अभी से रोने लगी। रोने के लिए तो बहुत वक्त है तुम्हारे पास।"

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संकल्प की यह बात सुनते ही सिद्धि ने अपनी आंखों को कसकर बंद कर लिया। उसका मन कर रहा था, वह यहां से उठकर भाग जाए, पर अफसोस, वैसा कुछ भी नहीं कर सकती थी।

थोड़ी देर बाद पंडित जी ने उन्हें फेरे लेने के लिए खड़े होने के लिए कहा। सिद्धि जैसे अपनी जगह जम चुकी थी। उसका दिमाग काम करना बंद कर चुका था। उसके आसपास क्या हो रहा था, उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। इसलिए पंडित जी के बोलने के बावजूद अपनी जगह से हिल भी नहीं रही थी।

यह देखकर संकल्प ने जल्दी से उसे अपनी बाहों में उठा लिया और फिर मुस्कुराते हुए पंडित जी की तरफ देखते हुए बोला,

"मुझे लगता है, ऐसे फेरे लेंगे तो यह शादी सात सालों से भी ज्यादा चल जाएगी।"

पंडित ने बस डरते हुए हां में सिर हिलाया। बेचारा वह क्या ही बोल सकता था? अब संकल्प से अगर चौहान परिवार के लोग भी डर चुके हैं, तो वह बहुत ही ज्यादा मामूली इंसान था।

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कहीं सिद्धि ने गिरने के डर से अपने हाथों को संकल्प के कंधों पर रख दिया था। उसकी करीबी को महसूस करके उसकी सांसें अटक चुकी थीं।

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वहीं संकल्प ने झुकते हुए धीरे से उसके कान में कहा,

"तुम्हारा बहुत ज्यादा वेट लॉस हो गया है, धर्मपत्नी जी।"

संकल्प की एक बात सिद्धि के दिल को चुभ रही थी। उसे अपने वे खास और खूबसूरत पल याद आ रहे थे, जिसमें वह कितनी खुशी से संकल्प की बाहों में झूलती थी। संकल्प ने पता नहीं कितनी बार उसे इस तरीके से अपनी बाहों में उठाया था और हर बार उसके होठों पर स्माइल ही रहती थी। आज शायद पहली बार था, जब सिद्धि उसके इस तरह बाहों में उठाने पर इस तरीके से रो रही थी।

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देखते ही देखते उन दोनों की शादी संपन्न हो चुकी थी, जिसके बाद पंडित जी ने उन दोनों को घर वालों का आशीर्वाद लेने के लिए कहा। संकल्प नीचे उतरकर सिद्धि का हाथ पकड़ा और फिर उसे दामिनी और धर्मेंद्र के पास लेकर गया। उसने झुकते हुए थोड़ी तेज आवाज में कहा,

"अच्छा-सा आशीर्वाद देना, अपनी बेटी और दामाद को।"

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यह सब करते वक्त दामिनी की आंखों में भी आंसू आ चुके थे। वह अपनी बेटी से बहुत प्यार करती थीं और उसकी शादी वह एक ऐसे इंसान से कभी नहीं करना चाहती थीं, जो इतना ज्यादा बेरहम हो और जिसकी वजह से कभी उसकी बेटी को इतनी तकलीफ उठानी पड़ी हो। पर ना चाहते हुए भी उसने संकल्प और सिद्धि, दोनों के सिर पर अपना हाथ रखा था।

धर्मेंद्र ने भी ठीक वैसा ही किया, जिसके बाद आर्यमन ने भी एक सुकून भरी सांस ली। आखिरकार उसके सनकी दोस्त की शादी हो ही चुकी थी, जिसके लिए वह कब से प्लानिंग कर रहा था। यह सब कुछ उसका ही किया-धरा था, वरना संकल्प को तो पता भी नहीं था कि उसकी गर्लफ्रेंड की शादी होने वाली है। वह तो मस्त जेल में अपनी जिंदगी काट रहा था।

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