The Billionaire I Couldn’t Hate Ch. 2

The Billionaire I Couldn’t Hate - Chapter 2

Posted by The Dark Quill • Sep 22, 2026 06:12 PM

Chapter 2

Welcome to Oberoi Mansion

अगली सुबह ठीक आठ बजे।

ओबेरॉय मेंशन के विशाल लोहे के गेट के सामने एक कैब आकर रुकी।

आरोही ने खिड़की से बाहर देखा।

उसकी आंखें कुछ पल के लिए उस आलीशान हवेली पर टिक गईं।

तीन मंजिला सफेद इमारत।

ऊंचे pillars।

बड़े-बड़े glass windows।

सामने perfectly trimmed garden और बीच में एक विशाल fountain।

इतना बड़ा घर कि आरोही का पूरा मोहल्ला शायद इसमें समा जाए।

उसने धीरे से सांस छोड़ी।

“वाह…”

फिर खुद को संभालते हुए बोली—

“बस घर बड़ा है। आदमी नहीं।”

उसे कल का रुद्र याद आ गया।

उसका cold चेहरा।

वह arrogant आवाज।

और सबसे ज्यादा उसकी वो नजर, जैसे दुनिया की हर चीज उसके इशारे पर चलती हो।

आरोही ने अपना bag उठाया और कैब से बाहर निकल गई।

जैसे ही उसने gate की तरफ कदम बढ़ाया, security guard तुरंत आगे आया।

“मैडम?”

“मैं आरोही शर्मा हूं।”

गार्ड ने शायद पहले ही उसका नाम सुन रखा था।

“जी मैडम। साहब ने बताया था।”

आरोही ने भौंह उठाई।

“इतनी जल्दी?”

गार्ड ने हल्की मुस्कान के साथ gate खोल दिया।

“साहब हर चीज पहले से arrange रखते हैं।”

आरोही बुदबुदाई—

“Control freak.”

उसे लगा कोई नहीं सुनेगा।

लेकिन दूसरी तरफ खड़ा एक house staff member मुस्कुरा दिया।

आरोही ने उसे देखा।

“क्या?”

“कुछ नहीं मैडम।”

“तो फिर मुस्कुराइए मत।”

वह अंदर चली गई।

---

मुख्य दरवाजा खुला।

एक महिला आगे आई।

करीब पचास साल की उम्र, चेहरे पर अपनापन।

“आप आरोही हैं?”

“जी।”

“मैं शारदा हूं। यहां house manager हूं।”

“Nice to meet you।”

शारदा ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा।

फिर मुस्कुराकर बोली—

“साहब ने कहा था आप आज से रूही मैडम की देखभाल करेंगी।”

आरोही ने तुरंत कहा—

“बस रूही। मुझे उसे मैडम कहने की जरूरत नहीं लगती।”

शारदा के चेहरे पर हल्की खुशी आई।

“आप पहली हैं जिसने ये बात कही।”

“क्यों?”

शारदा कुछ कहती, उससे पहले पीछे से एक ठंडी आवाज आई—

“क्योंकि बाकी लोगों को अपनी नौकरी प्यारी होती है।”

आरोही ने आवाज पहचान ली।

उसने धीरे से पलटकर देखा।

सीढ़ियों के ऊपर रुद्र खड़ा था।

Black shirt।

Dark trousers।

एक हाथ pocket में।

चेहरे पर वही ठंडा expression।

जैसे सुबह उठते ही उसने तय कर लिया हो कि आज भी किसी को irritate करना है।

आरोही ने उसे देखा।

“Good morning.”

रुद्र सीढ़ियों से नीचे उतरने लगा।

“मेरे घर में सुबह का mood अच्छा रहता है।”

आरोही ने आसपास देखा।

“मुझे तो अभी तक नहीं लगा।”

रुद्र एक पल के लिए रुक गया।

शारदा ने तुरंत नजरें झुका लीं।

आरोही को देखकर लगा कि शायद उसने कुछ ज्यादा कह दिया।

लेकिन अगले ही पल उसने खुद को याद दिलाया—

वह यहां नौकरी करने आई है, डरने नहीं।

रुद्र उसके सामने आकर रुका।

“Rules याद हैं?”

“जी।”

“पहला?”

“काम के दौरान unnecessary personal questions नहीं।”

“दूसरा?”

“रूही की routine मेरी मर्जी से नहीं बदलेगी।”

रुद्र ने भौंहें सिकोड़ लीं।

“मेरी बेटी की routine मैं तय करता हूं।”

आरोही ने शांत स्वर में कहा—

“आपने खुद कहा था कि मुझे उसकी देखभाल करनी है। तो मुझे उसकी जरूरतें समझने की freedom भी चाहिए।”

“Freedom?”

रुद्र हल्का-सा हंसा।

“तुम यहां नौकरी करने आई हो, revolution करने नहीं।”

आरोही ने मुस्कुराकर जवाब दिया—

“और आप मुझे salary दे रहे हैं, personality खरीद नहीं रहे।”

शारदा ने आंखें बंद कर लीं।

रुद्र कुछ सेकंड उसे देखता रहा।

फिर उसने अपनी कलाई की घड़ी देखी।

“तुम्हें punctuality पसंद है?”

“बहुत।”

“अच्छा।”

उसने घड़ी की तरफ इशारा किया।

“तुम आठ बजकर तीन मिनट पर आई हो।”

आरोही ने तुरंत जवाब दिया—

“क्योंकि आपके security gate पर तीन मिनट verification में लगे।”

रुद्र चुप।

आरोही ने हल्की मुस्कान दबाई।

“तो technically मैं late नहीं हूं।”

रुद्र की आंखों में एक पल के लिए irritation के साथ कुछ और भी आया।

शायद surprise।

यह लड़की हर बात का जवाब क्यों देती थी?

“मेरे घर में आखिरी word मेरा होता है।”

आरोही ने सिर हिलाया।

“ठीक है।”

रुद्र थोड़ा संतुष्ट हुआ।

लेकिन तभी उसने आगे जोड़ा—

“लेकिन हर argument में नहीं।”

उसकी संतुष्टि वापस irritation में बदल गई।

“तुम्हें बहुत बोलने की आदत है।”

“आपको बहुत रोकने की।”

दोनों कुछ सेकंड तक एक-दूसरे को देखते रहे।

फिर ऊपर से एक छोटी आवाज आई—

“पापा…”

दोनों ने एक साथ ऊपर देखा।

सीढ़ियों के पास एक छोटी बच्ची खड़ी थी।

चार साल की।

गुलाबी night suit।

बाल थोड़े बिखरे हुए।

और हाथ में एक छोटा teddy bear।

रुद्र का चेहरा तुरंत बदल गया।

“रूही।”

वह सीढ़ियों की तरफ बढ़ा।

रूही धीरे-धीरे नीचे आई।

लेकिन उसकी नजर लगातार आरोही पर थी।

आरोही ने मुस्कुराकर उसे देखा।

“Hi.”

रूही तुरंत रुद्र के पीछे छिप गई।

रुद्र ने बच्ची के कंधे पर हाथ रखा।

“डरो मत।”

आरोही नीचे बैठ गई ताकि उसकी height रूही के बराबर हो जाए।

“मैं आरोही हूं।”

रूही ने कुछ नहीं कहा।

“और तुम रूही हो, right?”

रूही ने धीरे से सिर हिलाया।

“आप मुझे लेने आई हो?”

आरोही मुस्कुराई।

“नहीं।”

रूही ने उसे गौर से देखा।

“तो?”

“मैं तुम्हारे साथ दोस्ती करने आई हूं।”

रूही ने कुछ सेकंड सोचा।

फिर पूछा—

“आप भी चली जाओगी?”

आरोही की मुस्कान धीरे-धीरे गायब हो गई।

उसने बच्ची की आंखों में देखा।

वह सवाल साधारण था।

लेकिन उसके पीछे छिपा डर साधारण नहीं था।

आरोही ने बहुत धीरे कहा—

“मैं बिना बताए नहीं जाऊंगी।”

रूही ने रुद्र की तरफ देखा।

रुद्र का चेहरा अचानक कठोर हो गया।

“रूही, breakfast.”

लेकिन बच्ची ने उसकी बात नहीं मानी।

वह आरोही को ही देखती रही।

“आप मुझे कहानी सुनाओगी?”

आरोही मुस्कुराई।

“अगर तुम मेरी बात मानोगी तो।”

रूही ने तुरंत पूछा—

“कौन-सी बात?”

“पहले breakfast।”

रूही ने कुछ सोचकर कहा—

“Okay.”

और वह पहली बार रुद्र का हाथ छोड़कर आरोही के पास चली गई।

रुद्र वहीं खड़ा रह गया।

उसने अपनी बेटी को देखा।

फिर आरोही को।

उसके माथे पर हल्की शिकन आ गई।

इतनी जल्दी?

रूही आमतौर पर किसी नए इंसान से बात तक नहीं करती थी।

---

Breakfast table पर माहौल अजीब था।

रूही आरोही के बगल में बैठी थी।

रुद्र सामने।

आरोही ने प्लेट में रखा खाना देखा।

“रूही, तुम क्या खाना पसंद करती हो?”

रूही ने कहा—

“Pancakes.”

रुद्र ने तुरंत कहा—

“नहीं।”

रूही का चेहरा उतर गया।

आरोही ने रुद्र की तरफ देखा।

“क्यों?”

“Sugar ज्यादा है।”

“एक दिन pancakes खाने से कुछ नहीं होगा।”

“मैंने कहा नहीं।”

रूही चुप हो गई।

आरोही ने उसकी तरफ देखा।

फिर रुद्र की तरफ।

“आप उसे हमेशा ऐसे ही रोकते हैं?”

“हाँ।”

“क्यों?”

“क्योंकि मैं उसका पिता हूं।”

आरोही ने धीरे से कहा—

“पिता होना और हर चीज पर control रखना अलग बातें हैं।”

रुद्र ने fork table पर रख दिया।

“तुम मेरे parenting style पर सवाल उठा रही हो?”

“अगर सवाल पूछने से parenting बेहतर हो सकती है तो हां।”

रुद्र की नजर तेज हो गई।

“तुम्हें यहां आए अभी एक घंटा भी नहीं हुआ।”

“और आपने अपनी बेटी को कितनी बार खुश होकर खाना खाते देखा है?”

सवाल सीधे लगा।

रुद्र कुछ नहीं बोला।

रूही ने धीरे से अपना spoon उठाया।

“पापा…”

“क्या?”

“आज pancakes?”

रुद्र ने उसकी तरफ देखा।

फिर आरोही की तरफ।

आरोही चुपचाप बैठी रही।

आखिर रुद्र ने कहा—

“आधा।”

रूही के चेहरे पर तुरंत मुस्कान आ गई।

“Yay!”

वह खुशी से ताली बजाने लगी।

आरोही के होंठों पर भी मुस्कान आ गई।

रुद्र ने उसे देख लिया।

“इतनी खुश होने की जरूरत नहीं है।”

आरोही ने मासूमियत से कहा—

“मैं तो कुछ बोली ही नहीं।”

“तुम्हारा चेहरा बोल रहा है।”

“तो आपके घर में चेहरों पर भी rules हैं?”

रुद्र ने उसे घूरा।

आरोही मुस्कुरा दी।

रूही दोनों को देख रही थी।

फिर अचानक हंस पड़ी।

और कई दिनों बाद उस dining table पर उसकी हंसी गूंजी।

रुद्र कुछ पल उसे देखता रहा।

उसकी आंखों में अनजाने में softness आ गई।

आरोही ने वह बदलाव देख लिया।

लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।

---

Breakfast के बाद आरोही रूही को उसके study room में लेकर गई।

रुद्र कुछ दूरी से उन्हें देख रहा था।

“तो आज हम क्या पढ़ेंगे?” आरोही ने पूछा।

रूही ने किताब खोली।

“कुछ नहीं।”

“क्यों?”

“मुझे पढ़ना पसंद नहीं।”

“ठीक है।”

रुद्र ने दूर से सुनकर भौंहें सिकोड़ लीं।

लेकिन आरोही ने किताब बंद कर दी।

“फिर आज हम नहीं पढ़ेंगे।”

रूही ने हैरानी से पूछा—

“सच?”

“हां।”

“पापा तो कहते हैं पढ़ना जरूरी है।”

आरोही ने कहा—

“जरूरी है। लेकिन पहले ये जानना जरूरी है कि तुम्हें क्या पसंद है।”

रूही ने पहली बार उत्सुक होकर पूछा—

“आपको क्या पसंद है?”

आरोही हंस पड़ी।

“मुझे?”

“हम्म।”

“मुझे आजादी पसंद है।”

रूही ने शायद शब्द पूरी तरह नहीं समझा।

“आजादी क्या होती है?”

आरोही ने उसकी तरफ देखा।

“जब तुम अपने दिल की बात बिना डरे कह सको।”

दरवाजे के बाहर खड़ा रुद्र यह सुन रहा था।

उसकी आंखें कुछ पल के लिए आरोही पर टिक गईं।

फिर उसने चेहरा फेर लिया।

उसे यह लड़की बिल्कुल पसंद नहीं थी।

बहुत सवाल करती थी।

बहुत बोलती थी।

और सबसे खराब—

वह उसकी बेटी को उससे ज्यादा समझने लगी थी।

रुद्र ने धीमे स्वर में कहा—

“आरोही।”

वह पलटी।

“जी?”

“मेरे घर में काम करने के कुछ नियम हैं।”

“मुझे याद हैं।”

“तो उन्हें मत भूलना।”

आरोही ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा—

“आप भी एक rule याद रखिए।”

रुद्र की भौंह उठी।

“क्या?”

“मैं रूही की caretaker हूं।”

उसने रूही की तरफ देखा।

फिर वापस रुद्र की तरफ।

“उसकी खुशी मेरी responsibility है।”

एक पल की खामोशी।

रुद्र ने ठंडी आवाज में कहा—

“और मेरी बेटी के लिए क्या अच्छा है, इसका फैसला मैं करता हूं।”

आरोही ने बिना पीछे हटे जवाब दिया—

“फिर शायद हमें इस बात पर अक्सर लड़ना पड़ेगा।”

रुद्र की आंखों में एक अजीब चमक आई।

“मुझे लड़ने से कोई परेशानी नहीं।”

आरोही मुस्कुराई।

“मुझे भी नहीं।”

रूही ने दोनों को देखा और मासूमियत से पूछा—

“आप दोनों हमेशा लड़ते हो?”

दोनों एक साथ बोले—

“नहीं।”

फिर एक-दूसरे को देखा।

रूही खिलखिला उठी।

और शायद उसे पहली बार लगा—

इस बड़े, खामोश घर में कुछ बदलने वाला है।

लेकिन रुद्र को अभी इसका अंदाजा नहीं था।

क्योंकि जिस लड़की को उसने सिर्फ अपनी बेटी की caretaker समझकर घर में जगह दी थी...

वही लड़की धीरे-धीरे उसकी सबसे मजबूत दीवारों को चुनौती देने वाली थी।

और रुद्र ओबेरॉय को सबसे ज्यादा डर दीवारों के टूटने से नहीं था...

उसे डर था कि कहीं उनके पीछे छिपा उसका दिल फिर से धड़कना शुरू न कर दे।

— Chapter 2 Ends —

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