The Billionaire I Couldn’t Hate Ch. 3

The Billionaire I Couldn’t Hate - Chapter 3

Posted by The Dark Quill • Sep 22, 2026 06:27 PM

Chapter 3

The Billionaire

अगली सुबह आरोही की आंख खुलते ही उसे एक पल के लिए समझ नहीं आया कि वह कहां है।

फिर उसकी नजर सामने रखे अपने नए कमरे पर पड़ी।

Oberoi Mansion.

उसे कल का दिन याद आया।

रूही की मासूम बातें।

Breakfast table पर रुद्र से हुई बहस।

और सबसे आखिर में...

वह आदमी।

आरोही ने तकिए पर सिर पटकते हुए कहा—

“ये आदमी सुबह से रात तक इतना serious कैसे रह सकता है?”

दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई।

“मैडम?”

शारदा की आवाज थी।

“जी?”

“रूही उठ गई हैं।”

आरोही तुरंत उठ बैठी।

“मैं आती हूं।”

वह जल्दी से तैयार हुई और कमरे से बाहर निकल गई।

लेकिन जैसे ही corridor में पहुंची, उसकी नजर दीवार पर लगी एक बड़ी photograph पर पड़ी।

रुद्र।

एक black suit में।

उसके साथ कई बड़े industrialists और politicians खड़े थे।

नीचे छोटा-सा caption था—

RUDRA OBEROI — CEO, OBEROI GROUP

आरोही कुछ सेकंड तस्वीर को देखती रही।

“ओह…”

अब उसे समझ आया कि कल घर के staff उससे इतना संभलकर क्यों बात कर रहे थे।

तभी पीछे से एक आवाज आई—

“पहली बार देख रही हो?”

आरोही पलटी।

कबीर खड़ा था।

“हां।”

“Internet पर भी नाम देख सकती हैं।”

आरोही ने भौंह उठाई।

“मैंने search नहीं किया।”

कबीर मुस्कुराया।

“कर लेना चाहिए।”

“क्यों?”

“ताकि पता चले कि आप किस आदमी के साथ रोज लड़ने वाली हैं।”

आरोही ने उसे घूरा।

“मैं लड़ती नहीं हूं।”

कबीर ने कुछ पल उसे देखा।

“जी।”

“क्या?”

“कुछ नहीं।”

वह मुस्कुराकर आगे बढ़ गया।

आरोही ने आंखें घुमाईं।

“इस घर में सबको sarcasm की बीमारी है क्या?”

---

कुछ मिनट बाद वह रूही के कमरे में पहुंची।

रूही अभी भी blanket में छिपी हुई थी।

“Good morning, sleepyhead.”

रूही ने आंखें खोलीं।

“आप आ गईं!”

वह तुरंत उठ बैठी।

आरोही मुस्कुरा दी।

“हां।”

“आज story सुनाओगी?”

“पहले brush।”

“Story पहले।”

“Brush पहले।”

रूही ने मुंह बनाया।

“आप भी पापा जैसी हो।”

आरोही हंस पड़ी।

“ये compliment है या insult?”

रूही ने गंभीरता से सोचा।

“पता नहीं।”

दोनों हंस पड़ीं।

दरवाजे के बाहर खड़ा रुद्र उन्हें देख रहा था।

उसने कुछ नहीं कहा।

बस कुछ सेकंड वहां रुका।

फिर चला गया।

---

दूसरी तरफ रुद्र अपने office में बैठा था।

सामने laptop खुला था।

लेकिन उसका ध्यान screen पर नहीं था।

“Sir?”

कबीर सामने खड़ा था।

“हां।”

“आपने बुलाया था।”

रुद्र ने laptop बंद किया।

“आरोही शर्मा।”

कबीर समझ गया।

“जी।”

“उसके बारे में पूरी information चाहिए।”

“कितनी?”

रुद्र ने उसकी तरफ देखा।

“सब।”

कबीर ने सिर हिलाया।

“Education, family, previous employment, financial background…”

“सब।”

कबीर कुछ पल चुप रहा।

फिर बोला—

“Sir, कोई particular reason?”

रुद्र ने शांत आवाज में कहा—

“मेरी बेटी के आसपास रहने वाली हर person को जानना मेरा काम है।”

कबीर ने कुछ नहीं कहा।

लेकिन वह रुद्र को काफी समय से जानता था।

उसे पता था कि यह सिर्फ security check नहीं था।

रुद्र suspicious था।

बहुत ज्यादा।

---

करीब दो घंटे बाद कबीर वापस आया।

उसने एक file रुद्र के सामने रखी।

“आरोही शर्मा।”

रुद्र ने file खोली।

पहला page।

Age — 24

Education — Psychology

Previous experience — Child education and tutoring

रुद्र ने अगला page पलटा।

फिर अगला।

“Parents?”

“पिता की death कुछ साल पहले हुई। Mother की health ठीक नहीं रहती। Family financially stable नहीं है।”

रुद्र की नजर file पर ही थी।

“Loans?”

“कुछ छोटे personal loans हैं।”

“Income?”

“Limited।”

रुद्र की उंगलियां file पर रुक गईं।

“मतलब उसे पैसों की जरूरत है।”

कबीर ने जवाब देने से पहले सोचा।

“जी।”

रुद्र कुर्सी पर पीछे टिक गया।

उसकी आंखों के सामने अचानक संजना का चेहरा घूम गया।

वही मुस्कान।

वही मीठी बातें।

वही झूठ।

उसे याद आया—

“रुद्र, मुझे तुम्हारे पैसों की जरूरत नहीं। मुझे सिर्फ तुम्हारा प्यार चाहिए।”

और कुछ महीनों बाद उसे पता चला था कि वही औरत उसके पैसे किसी दूसरे आदमी पर खर्च कर रही थी।

रुद्र ने file बंद कर दी।

“काफी है।”

कबीर ने पूछा—

“Sir?”

“क्या?”

“आपको लगता है कि आरोही भी…”

रुद्र ने उसकी बात पूरी होने से पहले रोक दिया।

“मुझे लगता नहीं।”

उसकी आवाज बेहद ठंडी थी।

“मैं assume नहीं करता। मैं verify करता हूं।”

कबीर चुप हो गया।

रुद्र ने file अपनी तरफ खींच ली।

“उसके financial transactions पर नजर रखो।”

कबीर ने तुरंत कहा—

“Sir, मुझे नहीं लगता कि—”

“मैंने तुम्हारी राय नहीं मांगी।”

कबीर रुक गया।

“जी, sir.”

वह बाहर चला गया।

रुद्र अकेला रह गया।

उसने file फिर खोली।

आरोही की photograph सामने थी।

Simple face.

No expensive lifestyle.

No suspicious history.

फिर भी...

रुद्र को भरोसा नहीं था।

क्योंकि उसके लिए innocence अब कोई proof नहीं था।

---

दोपहर में आरोही रूही को garden में लेकर आई।

रूही हाथ में crayons लेकर बैठी थी।

“मैं क्या बनाऊं?”

आरोही ने grass पर बैठते हुए कहा—

“जो तुम्हारा मन करे।”

रूही ने कुछ देर सोचा।

फिर drawing शुरू कर दी।

आरोही उसे देखती रही।

“ये कौन है?”

“पापा।”

“और ये?”

“मैं।”

फिर रूही ने तीसरा छोटा-सा figure बनाया।

आरोही ने पूछा—

“और ये?”

रूही ने उसकी तरफ देखा।

“आप।”

आरोही कुछ पल चुप रही।

“लेकिन मैं तो अभी आई हूं।”

रूही ने सहजता से कहा—

“तो?”

आरोही मुस्कुरा दी।

“कुछ नहीं।”

दूर खड़ा रुद्र यह सब देख रहा था।

उसकी नजर drawing पर गई।

तीन लोग।

एक साथ।

उसके चेहरे पर हल्की सख्ती लौट आई।

वह आगे बढ़ा।

“रूही।”

रूही ने सिर उठाया।

“पापा!”

“चलो अंदर।”

“लेकिन मैं drawing बना रही हूं।”

“बाद में बनाना।”

रूही ने नाराज होकर कहा—

“अभी!”

आरोही ने रुद्र की तरफ देखा।

“उसे पूरा करने दीजिए।”

रुद्र ने उसकी तरफ देखा।

“मैंने कहा अंदर।”

आरोही ने शांत स्वर में कहा—

“और उसने कहा अभी नहीं।”

रुद्र की भौंहें तन गईं।

“तुम फिर शुरू मत हो जाओ।”

“मैं शुरू नहीं हुई।”

“तुम हर बात पर argue करती हो।”

“क्योंकि आप हर बात आदेश की तरह बोलते हैं।”

रुद्र उसके करीब आया।

“तुम्हें लगता है तुम मुझे समझती हो?”

आरोही ने बिना डरे कहा—

“नहीं।”

वह एक पल रुकी।

“लेकिन मैं आपकी बेटी को समझने की कोशिश कर रही हूं।”

रुद्र चुप हो गया।

उसके पास इस बात का तुरंत जवाब नहीं था।

आरोही ने रूही की drawing की तरफ देखा।

“वह आपको नाराज नहीं करना चाहती।”

रुद्र की आंखें रूही पर चली गईं।

बच्ची चुपचाप drawing बना रही थी।

कुछ सेकंड बाद रुद्र ने धीमे स्वर में कहा—

“पांच मिनट।”

रूही के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

“Okay!”

रुद्र मुड़कर चला गया।

आरोही उसे जाते हुए देखती रही।

उसके मन में पहली बार एक सवाल उठा—

इतना सख्त आदमी अपनी बेटी से इतना प्यार करता है... फिर इतना टूटा हुआ क्यों है?

---

शाम को आरोही अपने कमरे में थी।

उसने फोन निकाला।

अनजाने में उसने search bar में लिखा—

Rudra Oberoi

कुछ सेकंड बाद स्क्रीन पर हजारों results आने लगे।

Business magazines.

News articles.

Interviews.

Photographs.

“Youngest Billionaire to Expand Oberoi Group Globally.”

“Rudra Oberoi: The Man Behind India's Fastest Growing Business Empire.”

“The Most Private Billionaire in India.”

आरोही एक article पढ़ने लगी।

उसमें उसकी business success की बातें थीं।

लेकिन एक headline देखकर उसकी उंगली रुक गई।

“Rudra Oberoi's Marriage Ends In Controversy.”

आरोही ने article खोलने के लिए उंगली बढ़ाई।

फिर रुक गई।

“नहीं।”

उसने phone lock कर दिया।

“दूसरों के अतीत में झांकना मेरी आदत नहीं।”

वह bed पर बैठ गई।

लेकिन कुछ ही सेकंड बाद उसके मन में वही सवाल फिर आया—

संजना कौन थी?

और क्यों रुद्र के चेहरे पर उसका नाम आते ही इतनी नफरत उतर आती थी?

---

उसी समय रुद्र के office में।

कबीर एक और document लेकर आया।

“Sir.”

“अब क्या?”

“एक और चीज मिली है।”

रुद्र ने document लिया।

“आरोही के पुराने employer ने उसके बारे में बहुत अच्छी recommendation दी है।”

रुद्र ने पढ़ा।

Honest. Responsible. Excellent with children.

उसने document table पर रख दिया।

कबीर ने पूछा—

“तो?”

रुद्र ने कुछ सेकंड चुप रहकर कहा—

“एक अच्छे reference से कोई saint नहीं बन जाता।”

कबीर ने गहरी सांस ली।

“Sir, शायद हर औरत को संजना की नजर से देखना…”

रुद्र की नजर तुरंत उस पर उठी।

“संजना का नाम मेरे सामने मत लेना।”

कबीर चुप हो गया।

रुद्र कुर्सी से उठा और window के पास जाकर खड़ा हो गया।

नीचे garden में रूही और आरोही दिखाई दे रही थीं।

रूही कुछ कह रही थी।

आरोही हंस रही थी।

रुद्र उन्हें देखता रहा।

उसकी नजर अनजाने में आरोही के चेहरे पर टिक गई।

वह बिल्कुल अलग थी।

संजना जैसी नहीं।

लेकिन रुद्र ने तुरंत खुद को रोक लिया।

“हर शुरुआत अच्छी लगती है।”

उसने मन ही मन कहा।

“अंत में असली चेहरा सामने आता है।”

---

रात को आरोही रूही को सुलाने गई।

रूही ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“आप कल भी आओगी?”

आरोही मुस्कुराई।

“मैं यहीं हूं।”

“हमेशा?”

आरोही का दिल हल्का-सा कस गया।

उसने रूही के बाल सहलाए।

“जब तक तुम्हें मेरी जरूरत है।”

दरवाजे के बाहर रुद्र खड़ा था।

उसने यह बात सुन ली।

उसकी आंखें कुछ पल के लिए बंद हुईं।

फिर उसने खुद से एक सवाल किया—

क्या वह आरोही पर भरोसा कर सकता है?

जवाब तुरंत आया।

नहीं।

लेकिन उसके भीतर कहीं एक दूसरा सवाल भी जन्म ले चुका था—

अगर वह भरोसे के लायक निकली तो?

रुद्र ने उस विचार को वहीं दबा दिया।

उसे अभी नहीं पता था कि आने वाले दिनों में...

उसे अपनी सबसे पुरानी मान्यता पर ही सवाल उठाना पड़ेगा।

और वह मान्यता थी—

“किसी औरत पर भरोसा मत करो।”

— Chapter 3 Ends —

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