The unwritten deal Ch. 1

The unwritten deal - Chapter 1

Posted by Riya Sharma • Sep 25, 2026 10:52 AM

स्थान: धवन विला, जुहू, मुंबई

समय: सुबह के 7:00 बजे

दक्षिण मुंबई के सबसे पॉश इलाके जुहू में स्थित 'धवन विला' आज आम दिनों जैसा शांत नहीं था। हवेली के मुख्य दरवाज़े से लेकर अंदर के बड़े से बागीचे तक, हर तरफ गेंदे और सफ़ेद मोगरे के फूलों की महक फैली हुई थी। छत से लटकते हुए रेशमी परदे और हल्की-हल्की रोशनी में जगमगाती झाड़-फानूस (Chandeliers) इस बात की गवाही दे रहे थे कि आज इस घर में कोई बहुत बड़ा जश्न होने वाला है।

हर तरफ काम करने वालों की भगदड़ मची हुई थी। कोई कटरिंग वालों को हिदायत दे रहा था, तो कोई मेहमानों के स्वागत के लिए कालीन बिछा रहा था।

हवेली के पहले माले की बालकनी में खड़े होकर, हाथ में चाय का कप लिए मिस्टर अरविन्द धवन नीचे बागीचे की तरफ देख रहे थे। उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी, लेकिन उस मुस्कान के पीछे अपनी इकलौती बेटी को विदा करने का एक गहरा दर्द भी छुपा हुआ था।

"अरे अरविन्द जी! आप यहाँ चाय पी रहे हैं और वहाँ नीचे डेकोरेशन वाले ने पूरे हॉल में गलत रंग के परदे लगा दिए हैं! मैंने आपसे कहा था ना कि अनाया को लाल और पेस्टल पिंक कॉम्बिनेशन पसंद है, और उसने वहाँ गहरे नीले रंग के शेड्स टांग दिए हैं!"

सुनीता जी, हाथों में भारी बनारसी साड़ी का पल्लू संभालते हुए, हाँफते हुए बालकनी में आईं। उनके चेहरे पर शादी के घर वाली स्वाभाविक घबराहट साफ़ दिख रही थी।

अरविन्द जी ने मुस्कुराते हुए चाय का कप टेबल पर रखा और अपनी पत्नी के कंधे पर हाथ रखा, "सुनीता, ज़रा शांत हो जाओ। आज हमारी बेटी की शादी है। अगर थोड़ी सी चीज़ें ऊपर-नीचे हो भी गईं, तो क्या फर्क पड़ता है? हमारी अनाया जहाँ खड़ी हो जाती है, खुशियाँ अपने आप उस जगह का रंग बदल देती हैं।"

"आप तो बस अपनी बेटी की तरफदारी करते रहिए!" सुनीता जी ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहा, "वैसे... आपकी लाडली मैडम उठीं या अभी भी सपनों की दुनिया में हैं? सुबह के आठ बजने वाले हैं, ब्यूटीशियन की टीम किसी भी वक्त आती होगी।"

अरविन्द जी के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गई, "तुम्हें क्या लगता है? जो लड़की रविवार को भी दोपहर 12 बजे से पहले नहीं उठती, वो अपनी शादी के दिन सुबह सात बजे उठ जाएगी?"

इसी बीच, हवेली के सबसे बड़े और हवादार कमरे में, जहाँ सूरज की सुनहरी किरणें सीधे खिड़की से छनकर बड़े से किंग-साइज बेड पर पड़ रही थीं, अनाया धवन आराम से सो रही थी।

गुलाबी रंग के रेशमी कंबल में खुद को लपेटे, अपने बिखरे हुए घने बालों के बीच अनाया का मासूम सा चेहरा किसी छोटी बच्ची जैसा लग रहा था।

अचानक कमरे का दरवाज़ा तेज़ी से खुला। अरविन्द जी दबे पाँव अंदर आए। उनके हाथ में ठंडे पानी का एक छोटा सा गिलास था। वो सीधे बेड के पास गए और बिना कोई आहट किए खड़े हो गए।

"अगर तीन तक गिनती गिनने पर मेरी गुड़िया नहीं उठी... तो यह पानी सीधे उसके गालों पर जाएगा!" अरविन्द जी ने बड़े प्यार से, लेकिन सख्त आवाज़ का नाटक करते हुए कहा।

"एक..."

अनाया ने कंबल के अंदर से ही अपना मुँह थोड़ा सा बाहर निकाला, "पापा... प्लीज! आज मेरी शादी है, कम से कम आज तो मुझे चैन से सोने दो।" उसकी आवाज़ में सुबह-सुबह की वही मासूम कशिश थी।

"दो..."

"पापा! आप बहुत गंदे हो!" अनाया तुरंत झटके से उठकर बैठ गई। उसके चेहरे पर एक प्यारी सी झुंझलाहट थी।

उसके बिखरे हुए बाल, गालों पर पड़ी तकिए की क्रीज़ और मासूम सी बड़ी-बड़ी आँखें देखकर अरविन्द जी अपनी हँसी नहीं रोक पाए। उन्होंने पानी का गिलास साइड टेबल पर रखा और आगे बढ़कर अपनी बेटी के माथे को चूम लिया।

"गुड मॉर्निंग, मेरी शादीशुदा होने वाली बेटी!" अरविन्द जी ने चिढ़ाते हुए कहा।

अनाया ने तुरंत अपने पापा के गले में हाथ डाल दिया और अपना सिर उनकी छाती पर टिका दिया, "पापा... मुझे शादी नहीं करनी। मैं आपके और मम्मी के साथ ही रहूँगी। आप रोहन से कह दो कि वो अकेला ही चला जाए!"

अरविन्द जी की आँखें एक पल के लिए नम हो गईं, लेकिन उन्होंने तुरंत खुद को संभाला, "अच्छा? और जो पिछले छह महीने से 'रोहन... रोहन...' की माला जप रही थी, उसका क्या? अब जब रोहन तुम्हें लेने आ रहा है, तो पापा याद आ रहे हैं?"

"पापा! आप भी ना..." अनाया का चेहरा मारे शर्म के लाल हो गया। उसने अपने पापा के सीने पर एक हल्का सा घूंसा मारा।

कमरे के दरवाज़े पर खड़ी सुनीता जी यह सब देख रही थीं। उनकी आँखों में भी खुशी के आँसू आ गए। उन्होंने पास आकर अनाया के सिर पर हाथ फेरा, "बस-बस, अब ज्यादा लाड-प्यार मत करो दोनों। अनाया, जल्दी से फ्रेश हो जाओ। नाश्ता टेबल पर लग गया है और तुम्हारी मौसी भी पहुँचने ही वाली हैं।"

अनाया बेड से उतरी और बालकनी की तरफ भागी। जुहू बीच की ठंडी हवा उसके चेहरे से टकराई। नीचे बागीचे में लगे फूलों की महक और दूर शहनाई की धीमी आवाज़ सुनकर उसे पहली बार अहसास हुआ—आज सच में उसकी ज़िंदगी बदलने वाली है। आज वो रोहन कपूर की पत्नी बनने जा रही है।

दोपहर के 1:00 बज चुके थे। धवन विला में रिश्तेदारों की चहल-पहल बढ़ गई थी। हर तरफ हँसी-मज़ाक, कंगन की छनछन और ठहाके गूँज रहे थे।

अनाया अपने कमरे में बैठी अपनी सहेलियों के साथ फोटो खिंचवा रही थी। उसने एक बहुत ही सादा लेकिन बेहद खूबसूरत हल्का गुलाबी और गोटा-पट्टी के काम वाला लहंगा पहना हुआ था। बालों में ताज़ा मोगरे का गजरा लगा था। वो बिना भारी मेकअप के भी किसी परी जैसी लग रही थी। उसकी सादगी ही उसकी सबसे बड़ी खूबसूरती थी।

तभी नीचे से अरविन्द जी के फोन की रिंगटोन बजी।

वो अपने स्टडी रूम में खड़े होकर शादी के बाकी पेमेंट के चेक साइन कर रहे थे। उन्होंने जेब से फोन निकाला। स्क्रीन पर कोई नाम नहीं था, सिर्फ एक 'Unknown Private Number' चमक रहा था।

अरविन्द जी ने सोचा कि शायद कोई दूर का रिश्तेदार होगा जो रास्ते का पता पूछने के लिए फोन कर रहा है। उन्होंने फोन कान से लगाया, "हैलो? अरविन्द धवन हियर।"

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