Tere Sang Tere Rang - Chapter 2
अब आगे...
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डालमिया कंपनी...
आरती (लिफ्ट में झुँझलाते हुए, हल्की घबराहट के साथ): पता नहीं कैसी कंपनी है, लिफ्ट भी कितनी छोटी सी है... मेरा तो मन ही घबरा गया।
पांचवें फ्लोर पर पहुंचते ही आरती इधर-उधर नजर दौड़ाती है। उसकी आंखों में हलकी सी हड़बड़ाहट और चेहरे पर एक तरह की जिज्ञासा झलकती है।
आरती (धीरे से बुदबुदाते हुए): अब ये इंटरव्यू कहां चल रहा है?
तभी एक सिक्योरिटी गार्ड उसकी ओर बढ़ता है।
सिक्योरिटी गार्ड (शालीनता से): मैम, आप इंटरव्यू के लिए आई हैं? तो उस केबिन में जाइए, आपको सर और बाकी कैंडिडेट्स वहीं मिलेंगे।
आरती (हल्की मुस्कान के साथ): ओके... थैंक्यू सर।
आरती के कदम अब तेज़ी से केबिन की ओर बढ़ते हैं। वह दरवाजा नॉक करती है। अंदर से एक आत्मविश्वास भरी आवाज़ आती है—"कम इन।"
अंदर का दृश्य बिल्कुल कॉर्पोरेट फिल्मों जैसा है—एक करीब 27 साल का लड़का, स्मार्ट, स्टाइलिश, बेहद आकर्षक। उसकी नीली आंखें जिनपर हल्का सा चश्मा था, गंभीरता और शरारत का अजीब सा मेल लिए हुए। एक हाथ में पेन जिसे वो घूमाता जा रहा था, और दूसरे हाथ में कॉफी का कप—जैसे वो किसी ऑफिस के बॉस नहीं, किसी ऐड का हीरो हो।
आरती (आवाज में उत्साह और प्रोफेशनलिज़्म): गुड मॉर्निंग एवरीवन।
कट टू—आदित्य डालमिया। डालमिया कंपनी का सीईओ।
आदित्य (हल्की मुस्कान के साथ, तंज कसते हुए): गुड मॉर्निंग मिस। आपके कॉन्फिडेंस के लिए आपको रिवॉर्ड मिलना चाहिए। लेट होकर भी आपके चेहरे पर कोई गिल्ट नहीं है।
आरती (तेज लहजे में): हेलो मिस्टर। शायद आप टाइम देकर भूल गए हैं। ज़रा आप लोगों ने जो मेल भेज रखी है कैंडिडेट्स को, उसे खोल कर देखिए कि कौन पहले है और कौन बाद में। स्मार्ट होना अच्छी बात है लेकिन ओवर स्मार्ट होना सेहत और कंपनी दोनों के लिए अच्छा नहीं है।
आदित्य (चौंकते हुए, फिर मुस्कराते हुए): इंटरव्यू इज़ ओवर। मिस, यू सलेक्टेड। कांग्रैचुलेशंस।
आरती ठिठक कर रह जाती है। उसकी आंखों में आश्चर्य और थोड़ी सी नाराज़गी भी झलकती है।
आरती (हैरानी से): कैसे? आप लोगों ने कुछ पूछा ही नहीं। मैं ऐसे ही अपनी रात काली करके आई?
आदित्य (गंभीरता से, लेकिन आंखों में चमक के साथ): हम समय से पहले थे, लेकिन किसी ने इस पर ऑब्जेक्शन नहीं उठाया। इसका मतलब है ये इंसान पैसे के लिए कोई भी हद पार कर जाएगा। PA ऐसा होना चाहिए जिस पर आंख बंद कर भरोसा किया जा सके। वो बात तुम्हारे अंदर है। मुझे अच्छा लगा जो तुमने गलत के लिए आवाज़ उठाई। तो तुम कल से जॉइन कर सकती हो।
(एक तरफ खड़ा रोहित शर्मा, जो आदित्य का असिस्टेंट है, ये पूरा सीन देख रहा है।)
रोहित के चेहरे पर असमंजस और हलकी चिढ़ दिखती है। वह मन ही मन सोच रहा होता है—
रोहित (मन में): ये सर को क्या हो गया है? इतने अनप्रोफेशनल तरीके से इंटरव्यू ले रहे हैं। और इस अजीब लड़की को सलेक्ट भी कर लिया? कोई पर्सनल दुश्मनी है क्या सर की इससे?
तभी आरती की आवाज़ रोहित के कानों में पड़ती है। उसकी आवाज़ में हल्का एटीट्यूड और गुस्से की चुभन होती है।
आरती (आंखों में ठंडा गुस्सा लिए): हेलो मिस्टर, इस "मिस" का नाम आरती है। सो प्लीज़ डोंट कॉल मी मिस।
आदित्य (हौले से मुस्कराते हुए, पेन घुमाते हुए): इस "मिस्टर" का नाम भी आदित्य है। सो डोंट कॉल मी मिस्टर। कॉल मी सर।
आरती (तेज़ी से): वो आप कल से हैं, आज से नहीं। सो प्लीज़ डोंट एक्ट बी स्मार्ट।
आरती की आंखों में चिंगारियां थी, और उसका एटीट्यूड आग की तरह कमरे में भर गया। वो रोहित के साथ बाहर निकल जाती है। आदित्य वहीं बैठा, अपने हाथ की मुठ्ठी बनाकर हल्की सी शैतानी मुस्कान के साथ बुदबुदाता है—
आदित्य (धीरे से): इंट्रेस्टिंग मिस आरती... साथ में काम करने में मज़ा आएगा।
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रोहित का केबिन:
रोहित (हैरानी से): आरती, क्या मैं जान सकता हूं तुम्हारी बॉस से क्या दुश्मनी है?
आरती (सिर हिलाते हुए, गहरी सांस लेकर): यार, दुश्मनी तो है...
(फ़्लैशबैक... दो दिन पहले...)
दिल्ली से मुंबई आते हुए की थकावट और नए शहर का उत्साह दोनों आरती और अनु के चेहरे पर साफ झलक रहा था।
आरती: ले अन्नु, आ गए तेरी सपनों की दुनिया में। अब दोनों जल्दी से जॉब ढूंढकर मस्त रहेंगे।
आरती उल्टे पांव चल रही थी, अनु से बातों में लगी हुई... और तभी वो एक शख्स से टकरा जाती है—जो फोन में डूबा हुआ आ रहा था।
आरती (झल्लाते हुए): आंख हैं या बटन? देख कर नहीं चल सकते क्या? और इस फोन के बाहर भी एक खूबसूरत दुनिया है, कम से कम उसकी रिस्पेक्ट कर, उसे ही निहार ले।
आदित्य (उलझते हुए): यू नो मिस, खुद तो तुम चुड़ैल की तरह उल्टे पांव चल रही थी और मुझे अब लेक्चर दे रही हो? माना पड़ेगा—एक तो चोरी, ऊपर से सीना जोरी।
आरती (गुस्से से भड़कती हुई): तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे चुड़ैल बोलने की? तुम शैतान कहीं के, तुम्हारा पूरा खानदान शैतान का।
आदित्य (तेज़ लहजे में): तुम कुछ ज़्यादा नहीं बोल रही हो? जानती भी हो मैं कौन हूं?
आरती: क्यों? तुम्हारी याददाश्त चली गई है क्या जो मुझसे पूछ रहे हो? और अगर गई है तो सुन लो, मैं तुम्हें जानती नहीं और जानना भी नहीं चाहती। पिशाच कहीं के। हटो यहां से।
(अनु, जो अब तक चुप थी, धीरे से कहती है:)
अनु: यार तुझे उससे ऐसे बात नहीं करनी चाहिए थी। बेचारा... कितना डांटा। और कितना हैंडसम था।
आरती: कहें तो शादी भी करवा दूं तेरी उस बदतमीज़ से? चल, डायन चाची इंतजार कर रही होंगी।
अनु उसकी बात पर हंसते-हंसते भाग जाती है, और आरती गुस्से में उसके पीछे दौड़ पड़ती है।
(फ़्लैशबैक एंड)
रोहित (हंसते हुए): अच्छा तो ये बात है। मतलब अब सर तुमसे काम के बहाने दुश्मनी निकालेंगे।
आरती (जोशीले अंदाज़ में): मैं भी देखती हूं कौन किससे बेहतर दुश्मनी निभाता है। उस पिशाच को उसकी नानी याद न दिला दी तो मैं भी आरती खन्ना नहीं।
रोहित (हँसकर): अब ठीक है यार, थोड़ा काम की बातें कर लें?
आरती (जवाब में मुस्कराते हुए): स्योर! काम ही तो करने आई हूं।
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आगे का नेक्स्ट पार्ट में
धन्यवाद 😊
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