Tere Sang Tere Rang Ch. 3

Tere Sang Tere Rang - Chapter 3

Posted by Bhoomi . • Oct 09, 2026 12:12 AM

आरती (झल्लाते हुए): आंख हैं या बटन? देख कर नहीं चल सकते क्या? और इस फोन के बाहर भी एक खूबसूरत दुनिया है, कम से कम उसकी रिस्पेक्ट कर, उसे ही निहार ले।

आदित्य (उलझते हुए): यू नो मिस, खुद तो तुम चुड़ैल की तरह उल्टे पांव चल रही थी और मुझे अब लेक्चर दे रही हो? माना पड़ेगा—एक तो चोरी, ऊपर से सीना जोरी।

आरती (गुस्से से भड़कती हुई): तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे चुड़ैल बोलने की? तुम शैतान कहीं के, तुम्हारा पूरा खानदान शैतान का।

आदित्य (तेज़ लहजे में): तुम कुछ ज़्यादा नहीं बोल रही हो? जानती भी हो मैं कौन हूं?आरती: क्यों? तुम्हारी याददाश्त चली गई है क्या जो मुझसे पूछ रहे हो? और अगर गई है तो सुन लो, मैं तुम्हें जानती नहीं और जानना भी नहीं चाहती। पिशाच कहीं के। हटो यहां से।

(अनु, जो अब तक चुप थी, धीरे से कहती है:)

अनु: यार तुझे उससे ऐसे बात नहीं करनी चाहिए थी। बेचारा... कितना डांटा। और कितना हैंडसम था।

आरती: कहें तो शादी भी करवा दूं तेरी उस बदतमीज़ से? चल, डायन चाची इंतजार कर रही होंगी।

अनु उसकी बात पर हंसते-हंसते भाग जाती है, और आरती गुस्से में उसके पीछे दौड़ पड़ती है।

(फ़्लैशबैक एंड)

रोहित (हंसते हुए): अच्छा तो ये बात है। मतलब अब सर तुमसे काम के बहाने दुश्मनी निकालेंगे।

आरती (जोशीले अंदाज़ में): मैं भी देखती हूं कौन किससे बेहतर दुश्मनी निभाता है। उस पिशाच को उसकी नानी याद न दिला दी तो मैं भी आरती खन्ना नहीं।

रोहित (हँसकर): अब ठीक है यार, थोड़ा काम की बातें कर लें?

आरती (जवाब में मुस्कराते हुए): स्योर! काम ही तो करने आई हूं।

अब आगे...

अब दोनों का काम हो चुका था।

आरती अन्नु को फोन करती है और कहती है,

आरती (थोड़ी थकी लेकिन एक्साइटेड आवाज़ में): "होगया क्या यार तेरा?"

इधर से अन्नु कहती है,

अन्नु (हल्की सी हंसी के साथ): "हां हो गया है बस मैं पांच मिनट में पहुंच जाउंगी।"

आरती: "ठीक है आ जा।"

थोड़ी देर में दोनों नीचे मिलती हैं।

आरती (शरारती अंदाज़ में): "लग गई क्या तेरी जॉब?"

अन्नु (थोड़ा मायूस चेहरा बना कर): "यार जॉब के साथ मेरे भी लग गए।"

आरती (हैरानी से): "क्यूं क्या हुआ? तू तो ऐसे बोल रही है जैसे HR की जगह तू PA का इंटरव्यू दे आई हो!"

अन्नु (सिर पकड़ते हुए): "यार सच में मैं PA का इंटरव्यू दे आई..."

इतना कहकर वो आरती को सारी बातें बता देती है कि कैसे सार्थक की एक गलती से क्या से क्या हो गया।

आरती (हँसते हुए): "ओ बेटे की! इसका मतलब हम दोनों PA-PA हो गए! यार अब तो पैसा ही पैसा होगा!"

दोनों ठहाके लगाकर हँस पड़ती हैं। उस हँसी में नए शहर की थकान भी थी और नए सफर की मिठास भी।

अन्नु (थोड़ा सोचते हुए): "चुप कर यार... यहां एक प्रॉब्लम और भी है। मुझे कंपनी की तरफ से ही रूम दिया जाएगा। अब हम दोनों एक साथ कैसे रहेंगे?"

आरती (हौसला देते हुए): "यार चील कर, मुझे भी कंपनी के दिए रूम में रहना है। दोनों वीडियो कॉल करेंगे... जब मन करेगा मिल लेंगे। कम से कम अब उस चुड़ैल चाची के ताने तो नहीं सुनने पड़ेंगे। मैं तो खुश हूं!"

अन्नु (थोड़ा चिढ़ाते हुए): "अच्छा ठीक है... तेरा बॉस कैसा है? मेरे बॉस की तरह अकड़ू है क्या?"

आरती (आंखें तरेर कर): "अकड़ू नहीं है, वहीं एयरपोर्ट वाला पिशाच है।"

अन्नु (हक्का-बक्का होकर): "क्या बात कर रही है यार! काश मैं भी तेरी कंपनी जॉइन कर लेती, कितना मज़ा आता... तुम दोनों की भूतिया वर्ल्ड की लड़ाई देखकर मेरा तो फ्री में एंटरटेनमेंट हो जाता।"

आरती (मुस्कराते हुए): "अच्छा रुक! तुझे अभी भूतिया वर्ल्ड में पहुंचाती हूं वो भी फ्री में!"

दोनों हँसते-हँसते इधर-उधर भागती हैं। उन पलों में उनका बचपन भी उनके साथ भाग रहा था।

अन्नु: "चल अब तेरी चुड़ैल चाची के घर से अपना सामान भी लेकर आना है। आज ही शिफ्ट करना है।"

आरती (शरारत भरे अंदाज़ में): "वो सब ठीक है, पहले मस्त पाओ-भाजी खाएंगे चल।"

दोनों साथ में निकल जाती हैं — हंसी-मज़ाक करते हुए, जैसे ये शहर अब उनका अपना हो चला हो।

वे सामान शिफ्ट कर लेती हैं और डिनर के लिए बाहर का प्लान बनाती हैं।

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शाम का टाइम – राजा रानी ढाबा

दोनों दोस्त मस्ती से अपना खाना इंजॉय कर रही थीं। वहीं दूसरी तरफ एक इंसान उनकी फोटो खींचकर किसी को भेज रहा था।

अन्नु (खुश होकर): "यार ढाबे पर खाना खाने का अपना ही एक मज़ा है। जो स्वाद यहां मिलता है वो किसी रेस्टोरेंट में नहीं मिलता।"

आरती (सिर हिलाते हुए): "बिलकुल सही बोली तू... यहां खुला आसमान, खुली हवा इस खाने में चार चांद लगा देता है। अब हम अपना खाना रोज खुद बनाएंगे। मैं तुझे भी खाना बनाना सिखाऊंगी — बिना नखरे के सीख लेना, नहीं तो भूखी ही रह जाएगी।"

अन्नु (नाक चढ़ाते हुए): "नो वे! मुझे नहीं सीखना... मैं मेड रख लूंगी। कभी मेड नहीं आई तो ऑर्डर कर लूंगी। लेकिन खाना बनाना? नो चांस! और अब तू इस बारे में ज्यादा बकवास नहीं करेगी, वरना यहां हम दोनों में वारदात हो जाएगी।"

आरती (हँसते हुए): "चल ठीक है, नहीं कह रही कुछ। पर भूखी मत रहना!"

(थोड़ा भावुक होकर मन में सोचती है — "तेरी भूख भी मुझसे नहीं देखी जाती यार...")

आरती: "अब चल, काफी लेट हो गया है। सुबह ऑफिस भी जाना है, नहीं तो वो पिशाच फिर टाइम पर लेक्चर झाड़ेगा।"

अन्नु (हँसते हुए): "हां, मेरा अकड़ू भी ऐसा ही है। आई मीन... अकड़ू-सड़ा हुआ बॉस।"

दोनों ताली मारकर हँसती हैं और अपना खाना फिनिश कर अपने-अपने रूम के लिए निकल जाती हैं।

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अन्नु का रूम:

रूम बहुत ही सुंदर था। उसमें हर चीज़ में एक नई शुरुआत की झलक थी।

अनु अच्छे से अपने रुम को देख रही थी। वो हर चीज को छू कर महसूस कर रही थी। थोड़ी देर वो ऐसे ही अपने कमरे में चहल कदमी करती है।

फिर आरती के पास कोल करती है। दोनों सहेलियां आपस में बातें करने लगती है।

अनु आरती अपनी बातों में पूरी तरह से खोई हुई थी।

दोनों बहुत खुश थी। दोनों ही आने वाले तूफान से अंजान अपने आज को जी रही थी।

आगे का नेक्स्ट पार्ट में

धन्यवाद 😊 🙏🏻

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