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अल्हड़ तितली कजरी: रंगों और सपनों का सफर'

5.0 (6 ratings)
Shukla Gyan Sagar SG
Shukla Gyan Sagar Author
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27 Chapters
5 Comments

गाँव की दोपहरें अक्सर शांत और ऊंघती हुई होती थीं, लेकिन जब कजरी की अठखेलियों की आहट सुनाई देती, तो पूरा गाँव जाग उठता।          कजरी, अठारह साल की एक ऐसी शोखी जिसे उम्र की समझ से ज्यादा शरारत की भूख थी। वह शारीरिक रूप से तो अब युवती हो चली थी, लेकिन उसके मन के भीतर अभी भी वही नन्ही बच्ची पल रही थी, जिसे न किसी नियम की परवाह थी, न लोक-लज्जा की फिक्र।          उसका पहनावा ही उसकी फितरत का आईना था। वह अक्सर एक ऐसी चोली पहनती थी, जो उसके शरीर के लिए बहुत छोटी और तंग थी। उस चोली का आकार ऐसा था कि उसके उभार उसे पूरी तरह ढंक नहीं पाते थे। उसके **** इतने उभरे हुए थे कि चोली के घेरे से बाहर ही रहते थे। चोली की तंग सीमाओं का दबाव इतना कम था कि उसके दूध का एक बड़ा हिस्सा बाहर की ओर छलकता रहता था, और चोली की बेबसी के कारण उसके **** भी पूरी तरह बाहर ही रहते थे। उसे न कभी इन्हें ढंकने की ज़रूरत महसूस हुई, न ही किसी के ताकने का डर।          नीचे उसने एक लुंगी लपेट रखी होती थी, जो उसकी कमर पर ढीले ढंग से बंधी होती थी। वह लुंगी इतनी छोटी और असुरक्षित थी कि उसकी हर एक फुदकती हुई चाल के साथ वह सिमट जाती या एक तरफ से खिसक जाती थी। नतीजतन, उसकी जांघों का पूरी तरह नंगा हिस्सा हर किसी की आँखों के सामने रहता था। जब वह दौड़ती या पेड़ पर चढ़ती, तो लुंगी का पल्ला ऊपर उड़ जाता और उसकी जांघों का खुलापन गाँव के निवासियों के लिए अक्सर चर्चा का विषय बन जाता।          गाँव के चौपाल पर बैठे बुजुर्ग जब उसे दूर से आता देखते, तो उनके होक्का रुक जाते। कजरी के चलते समय उसके शरीर की हर एक हरकत—उसका लचकना, उसका उछलना और उस स्थिति में उसके अंगों का बेबाक प्रदर्शन—किसी को भी विचलित करने के लिए काफी था। लेकिन कजरी के चेहरे पर हमेशा एक शरारती मुस्कान रहती थी। उसे पता था कि लोग उसे देख रहे हैं, उसे पता था कि उसका शरीर अब उस अवस्था में है जहाँ सब कुछ खुला और स्पष्ट है, मगर उसके लिए यह सब बहुत सामान्य था।          उसके लिए चोली का तंग होना या लुंगी का खिसकना कोई शर्मिंदगी नहीं, बल्कि अपनी आजादी का एहसास था। वह बेखौफ होकर गाँव की धूल में दौड़ती, कभी तालाब के किनारे पानी में छपाका मारती, तो कभी किसी घर के आँगन में घुसकर शरारत कर आती। उसकी चोली से बाहर आते हुए उसके दूध और उसके **** हवा में झूमते रहते थे, और उसकी लुंगी के नीचे से दिखती **** जांघें उसके हर कदम की गवाह बनतीं।          गाँव की औरतें अपनी आँचल खींचकर उसे देखतीं, कुछ उसे टोकने की कोशिश करतीं, लेकिन कजरी उन्हें चिढ़ाकर आगे निकल जाती। उसके लिए यह शरीर सिर्फ एक खिलौना था, और यह जिंदगी एक उत्सव। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था कि उसके **** और जांघें लोगों के मन में क्या हलचल पैदा कर रही हैं। वह अपनी ही मस्ती में एक ऐसी मस्तमौला कजरी थी, जिसकी नटखटपन के सामने पूरी कायनात छोटी पड़ जाती थी।          गाँव का वो मैदान, जहाँ शाम ढलते ही क्रिकेट का शोर मच जाता था, कजरी की मौजूदगी के बिना अधूरा था। वह उम्र में अठारह की जरूर हो गई थी, लेकिन जब वह हाथ में बल्ला थामती, तो उसकी आँखों में वही बचपन की चमक दौड़ जाती। वह बच्चों की टोली में ऐसी घुल-मिल जाती कि कोई फर्क ही नहीं कर पाता था कि कौन खिलाड़ी है और कौन सिर्फ खेल का आनंद लेने आया है।

Erotic Romance Hindi Romance
  • Chapter 1

    दूध जैसी खूबसूरत
  • Chapter 2

    नग्न हो कर अपने लुंगी में आम इकठ्ठा
  • Chapter 3

    अहिर ने दुहे कजरी के दूध
  • Chapter 4

    अहिर ने निचोड़ दी कजरी के योनि की पंखुड़ी
  • Chapter 5

    कजरी के योनि से बह गए चिपचिपे पदार्थ
  • Chapter 6

    कजरी को नंगी नहाते देख उड़े मुनीम के होश
  • Chapter 7

    मुनीम के होश उड़ गए
  • Chapter 8

    लुंगी में कजरी लड़ी कुश्ती
  • Chapter 9

    कजरी नंगी लोटने लगी और नंगी डांस करती है
  • Chapter 10

    इंस्पेक्टर ने कजरी की गाड़ मारना शुरू किया
  • Chapter 11

    इंस्पेक्टर ने कजरी के चूतड़ों के गहराई में उतारा अपना लिंग
  • Chapter 12

    इंस्पेक्टर ने मार ली कजरी की गाड़
  • Chapter 13

    इंस्पेक्टर ने कजरी के योनि में अपना लिंग घुसेड़ दिया
  • Chapter 14

    इंस्पेक्टर ने तोड़ी कजरी की सील
  • Chapter 15

    इंस्पेक्टर ने कजरी का बलात्कार कर दिया
  • Chapter 16

    लुट गई कजरी की जवानी
  • Chapter 17

    कॉलेज कैंपस में पहला दिन और विक्रम ने मसल दिए उसके चूतड़
  • Chapter 18

    विक्रम ने किया कजरी का रेप
  • Chapter 19

    अर्जुन से हुई दोस्ती
  • Chapter 20

    बौने ने लूटी कजरी की इज्ज़त
  • Chapter 21

    अर्जुन और कजरी के बीच रोमांस की शुरुआत
  • Chapter 22

    गुंडों ने कजरी की गाड़ मार ली
  • Chapter 23

    मौसी के घर पर मस्ती
  • Chapter 24

    मौसा जी ने किया कजरी का बलात्कार
  • Chapter 25

    खेलते खेलते कजरी हुई सबके बीच नंगी
  • Chapter 26

    आदमी ने कजरी के दूध को रबड़ की तरह मसल दिया
  • Chapter 27

    पड़ोसी ने किया कजरी का बलात्कार