एक ऐसा शहर, जहाँ कहानियाँ सिर्फ पढ़ी नहीं जातीं, बल्कि पहचान बन जाती हैं। जहाँ शब्दों से ज़्यादा असर... ख़ामोशी डालती है। एक ओर है सर्वज्ञ निगम, वो लेखक जिसकी शक्ल किसी ने नहीं देखी, लेकिन उसके लफ़्ज़... सीधे दिल चीरते हैं। दूसरी ओर है आरव शर्मा, जुनूनी, गुस्सैल, और उस नाम से चिढ़ा हुआ, जो बिना चेहरा दिखाए भी हर जुबान पर है। जब ये दो कलमकार टकराते हैं, तो ये सिर्फ कलम की लड़ाई नहीं होती, ये होता है दो ज़ख्मों का टकराव, दो अधूरी सच्चाइयों का युद्ध । ये मोहब्बत की कहानी नहीं है। ये कहानी है उस जलन, उस ख़ामोशी, और उन स्याही से बंधी ज़ंजीरों की, जो प्यार से नहीं, ईर्ष्या से बनी हैं।
LGBTQ Thriller
Hindi
Romance
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Chapter 1
Chapter 1 (Sarvagya Nigam, एक नाम, हजार सवाल!) -
Chapter 2
Chapter 2 (I'm ready for this punishment!) -
Chapter 3
Chapter 3 (God of dark romance, Aarav Sharma!) -
Chapter 4
Chapter 4 (हॉस्टल!) -
Chapter 5
Chapter 5 (Death Letter!) -
Chapter 6
Chapter 6 (टीजर!) -
Chapter 7
Chapter 7 (बी अवेयर जूनियर!) -
Chapter 8
Chapter 8 (यहाँ आने की हिम्मत है!) -
Chapter 9
Chapter 9 (तुम्हें तुम्हारे किये की सजा भुगतनी ही पड़ेगी!)