राधाकृष्णदास का 1890 में प्रकाशित सामाजिक और वियोगांत हिंदी उपन्यास। मित्रता, सांप्रदायिक तनाव, साहस और जनहित के संघर्ष की यह ऐतिहासिक कथा 1890 के द्वितीय संस्करण के पूर्ण scan से सभी 16 अध्यायों में सत्यापित की गई है।
Hindi
Romance
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Chapter 1
प्रथम परिच्छेद — मित्रों की बातचीत -
Chapter 2
द्वितीय परिच्छेद — सावजी की कोठरी -
Chapter 3
तृतीय परिच्छेद — भारत-हितैषिणी सभा -
Chapter 4
चतुर्थ परिच्छेद — छटे गुंडे -
Chapter 5
पंचम परिच्छेद — शत्रुता की जड़ -
Chapter 6
षष्ठ परिच्छेद — पत्र -
Chapter 7
सप्तम परिच्छेद — वर्षा की बहार -
Chapter 8
अष्टम परिच्छेद — प्रेम-संभाषण -
Chapter 9
नवम परिच्छेद — बीजारोप -
Chapter 10
दशम परिच्छेद — पुलिस की काररवाइयाँ -
Chapter 11
एकादश परिच्छेद — हुंडी -
Chapter 12
द्वादश परिच्छेद — गोहितकारिणी सभा -
Chapter 13
त्रयोदश परिच्छेद — पुस्तकालय -
Chapter 14
चतुर्दश परिच्छेद — वीर स्त्री -
Chapter 15
पंचदश परिच्छेद — षड्यंत्र -
Chapter 16
षोड़श परिच्छेद — शूरता