राम प्रताप सिंह — नाम भर से लोगो की साँसें थम जाती हैं। पिता और दादा की परछाई लिए वो जब ऑडिटोरियम में दाखिल हुआ, हर नज़र उसी पर टिक गई। कद, रोब, आँखों का तेज़ — सब कुछ विरासत की गवाही देता था। पर उसकी चाल में एक अकड़ थी, जो पीढ़ियों से अलग थी, एक राज़ थी जो सिर्फ उसका अपना था। आँखों में एक ऐसी चमक जो सिर्फ जीत नहीं, कुछ और भी माँगती थी। *"तीन पीढ़ियों से यूपी की सियासत पर राज करने वाले ठाकुर परिवार का चिराग, ठाकुर राम सिंह अब से चुनावी मैदान में, भावी मुख्यमंत्री का सबसे बड़ा दावेदार।* *पर उसके सीने में दो जंग एक साथ चल रही हैं।* *एक जंग है सरहद की - देशभक्ति की, जहाँ उसका गुस्सा, उसका जुनून, देश के लिए जान देने को तैयार है। और दूसरी जंग है उसके दिल की - एक ऐसी मोहब्बत की, जिसने इस पत्थर दिल को भी मोम कर दिया।* *ऊपर से पिता का दिया हुआ अटूट वचन... अपने परम मित्र की बेटी उस के घर की बहु बनेगी । पिता का वचन और खानदानी दबदबे की लाज।* *तो क्या चुनेगा राम?* *अपनी मोहब्बत या अपनी मातृभूमि? वचन या अपना दिल?* *क्या वो सत्ता की इस जहरीली शतरंज में अपना दबदबा कायम रख कर मुख्यमंत्री बन पाएगा? या उसका गुस्सा, उसका अधूरा इश्क़, सब कुछ तबाह कर देगा? कहीं देश के प्रति उसका आधा प्रेम, उसके इश्क़ के बीच में ही न पड़ जाए...* *सस्पेंस, सियासत, देशभक्ति और एक खूनी इश्क़ की कहानी "*
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Chapter 1
THE ROYAL C.M - Chapter 1 -
Chapter 2
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Chapter 3
THE ROYAL C.M - Chapter 3 -
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Chapter 5
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THE ROYAL CM - Chapter 6 -
Chapter 7
THE ROYAL CM - Chapter 7 -
Chapter 8
THE ROYAL CM - Chapter 8