The 10th Avatar of God - Chapter 2
उसे कमरे में ज़्यादा भीड़ नहीं थी; गिनती के पाँच-छह औरतें थीं जो एक औरत के चारों तरफ़ खड़ी थीं। वह औरत बिस्तर पर लेटी हुई थी और एक बच्चे को जन्म देने वाली थी; इस वजह से उसे काफी दर्द हो रहा था और वह जोर-जोर से चिल्ला भी रही थी। उसकी ज़िंदगी में यह खुशी पूरे दस सालों के बाद आई थी, वह भी अचानक से, बिना किसी उम्मीद के। कौन जानता था कि इस औरत के घर पर भगवान मेहरबान होंगे और अपनी लीला दिखाएँगे?
समुद्र के बीचो-बीच बने एक टापू पर मौजूद गाँव में रहने वाली इस औरत को लेकर गाँव के सबसे बड़े बुज़ुर्ग व्यक्ति भी कह चुके थे कि यह कभी माँ नहीं बनेगी। उनकी बात पत्थर की लकीर होती थी, और एक बार अगर वे कुछ कह देते थे तो फिर कुछ भी उससे अलग हटकर नहीं होता था। औरत के लिए भी उन्होंने यही कहा था कि चाहे कोई कितना भी जोर क्यों न लगा ले, दुनिया में ऐसी कोई शक्ति नहीं है जो इसे माँ बना सके। लेकिन उस वृद्ध व्यक्ति को भी नहीं पता था कि भगवान के आगे कुछ भी नामुमकिन नहीं है; जब वे अपनी मर्ज़ी कर लेते हैं तो सब कुछ हो सकता है।
औरत भी अपनी उम्मीद हार चुकी थी और अपने माँ बनने के सपने को छोड़ चुकी थी। उसे किसी भी तरह की उम्मीद नहीं थी।
फिर पता नहीं अचानक कैसे चमत्कार हो गया और वह माँ बनने वाली हो गई। आज जाकर वह बच्चे को जन्म देने जा रही थी। जो आस-पास की औरतें थीं वे इसमें उसकी मदद कर रही थीं।
बाहर का मौसम काफी खराब था। तूफ़ान, तेज बारिश और बादलों की कड़कड़ाहट के बीच चमकती बिजली सब कुछ डरावना बना रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे प्रकृति में भयंकर उथल-पुथल मची हुई है, जो शायद सिर्फ़ भगवान के जन्म की वजह से था।
दुनिया में एक दिव्य शक्ति पैदा होने जा रही थी जो प्रकृति को शांत रहने ही नहीं दे सकती थी; प्रकृति में असंतुलन होना स्वाभाविक था।
गाँव के आस-पास काफी विशाल जंगल था और फिर पहाड़ी चोटियाँ थीं, और इस वक्त सभी जगह पर एक अलग ही प्रकार का कोहराम छाया हुआ था। तूफ़ानों की हवाओं की वजह से पेड़ झूल रहे थे, वह भी इस क़दर तक कि वे जमीन से लगने को हो रहे थे। बिजली इतनी ख़तरनाक थी कि वह पहाड़ियों पर बीच-बीच में गिर रही थी। हर एक बिजली के साथ भयंकर धमाके हो रहे थे और पत्थर उछलते हुए पहाड़ियों से नीचे गिर रहे थे।
गाँव के लोग घरों के अंदर बैठकर खिड़कियों से बाहर के इस ख़तरनाक नज़ारे को देख रहे थे और जो भी इसे देख रहा था वह बार-बार भगवान निर्माण को याद कर रहा था। सभी के मुँह से बस एक ही भगवान का नाम निकल रहा था और वह था भगवान निर्माण।
इस डर के माहौल में वे भगवान निर्माण से ही इस बात की प्रार्थना कर रहे थे कि इस ख़तरनाक मौसम को किसी तरह से यहाँ से निकाले। ऐसा ख़तरनाक मौसम गाँव में आज से पहले कभी नहीं आया था। भगवान इस गाँव को इस ख़तरनाक मौसम से बचा लें; मगर लोगों को क्या पता था कि जिस भगवान निर्माण का वे नाम ले रहे हैं, वह स्वयं धरती पर आने वाले हैं?
इस पूरे गाँव के चारों तरफ़ पत्थरों और लकड़ी की बनाई गई एक दीवार भी थी जहाँ पर सैनिकों जैसे कपड़े पहने गाँव वाले पहरा दे रहे थे। वे भी अपने हाथों को जोड़कर बीच-बीच में भगवान निर्माण की ही प्रार्थना कर रहे थे। यह पूरा गाँव ही भगवान निर्माण की पूजा करता था।
वहीं बिस्तर पर मौजूद औरत की पीड़ा बढ़ती गई। उसके पास खड़ी औरत ने उसके सर पर हाथ रखा और उससे कहा, “आहुदी, तुम्हें खुद पर नियंत्रण करना होगा, इस पीड़ा को सहना होगा ताकि हम तुम्हारे बच्चे को जन्म दिलवा सकें; चीज़ें थोड़ी मुश्किल हो रही हैं, लेकिन अगर तुम थोड़ा और साथ दोगी तो हम इसे कर लेंगे।”
वह इस गाँव की दाई थी और अब तक काफी औरतों के बच्चों को पैदा करवा चुकी थी, लेकिन आज उसे भी काफी सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। बच्चे का जन्म उसके लिए आसान नहीं हो पा रहा था। इसके पीछे की वजह यह थी कि बच्चा गर्भाशय में अटका हुआ था और लाख कोशिशों के बावजूद वह उसे वहाँ से निकाल नहीं पा रही थी।
ऐसा लग रहा था जैसे बच्चा खुद नहीं चाहता था कि वह इतनी जल्दी पैदा हो या फिर उसे पैदा होने के लिए किसी सही मौके का इंतज़ार है, इसलिए वह गर्भाशय में ही ज़बरदस्ती रुका हुआ है। तक़रीबन पन्द्रह मिनट तक और जद्दोजहद होती रही और आख़िरकार बच्चे ने जन्म ले लिया। आख़िरकार भगवान निर्माण ने जन्म ले लिया।
उसकी किलकारी से पूरा कमरा गूंज उठा। सभी औरतों के चेहरों पर कभी न ख़त्म होने वाली खुशी थी। गाँव की दाई ने बच्चे को ऊपर उठाकर देखा और फिर खुशी से आहुदी से कहा, “मुबारक हो, तुम्हें लड़का हुआ है...”
यह सुनकर आहुदी के चेहरे पर भी मुस्कान आ गई। दाई ने बच्चे को साफ़ करके उसकी गोद में दे दिया। वह अपने बच्चे की ओर देख रही थी। बाकी की औरतें भी उसके बच्चे की ओर देख रही थीं। वह बच्चा जन्म से ही अलग लग रहा था; उसके चेहरे का आकर्षण, उसका तेज, सबको हैरान कर रहा था। किसी ने भी आज से पहले इतना तेज किसी बच्चे के चेहरे पर नहीं देखा था।
सब लोग इस बात से अनजान थे कि उनके सामने जो बच्चा है वह कोई साधारण बच्चा नहीं, बल्कि वह भगवान निर्माण का दसवाँ अवतार है जो अपने दसवें अवतार में बुराई का विनाश करने के लिए पैदा हुआ है; वह बुराई जो इस दुनिया के किसी न किसी कोने पर मौजूद होगी, अपने किसी ऐसे वरदान के साथ जिसमें वह अमर तो नहीं होगा, लेकिन फिर भी उसे मारना लगभग नामुमकिन होगा; अपनी बाहें फैलाए, और इस अहंकार के साथ कि वह सर्वशक्तिशाली है और उसका अंत नहीं है। मगर उसे भी इस बात की जानकारी होगी कि भगवान निर्माण उसे ख़त्म करने के लिए अवतार लेंगे।
सभी जन्मों में सबसे पहले भविष्यवाणी होती थी और उसके बाद भगवान अपना अवतार लेते थे; तो इस बार भी भविष्यवाणी हुई होगी और भगवान के दुश्मन ने पहले से ही अपनी तैयारी पूरी कर रखी होगी।
उसे भगवान के जन्म के बारे में भी पता होगा और वह उसे रोकने के लिए अपनी कोशिश भी कर सकता है।
अपने नौ अवतारों में भगवान निर्माण ने कई दुश्मनों का अंत किया था और उनके पास जो वरदान थे वे ऐसे थे कि उन्हें मारना भी आसान नहीं था, मगर फिर भी भगवान निर्माण ने अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल किया और एक लंबी लड़ाई लड़ने के बाद अपने दुश्मनों को ख़त्म किया और वह इस बार भी ख़त्म करेंगे।
हालाँकि, इस बार का उनका यह जन्म काफी ख़ास था, जिसके पीछे का कारण यह था कि वे अपनी तमाम शक्तियों के साथ पैदा नहीं हुए थे और न ही अपनी उन शक्तियों के साथ जिनमें उन्हें पैदा होते ही पूरी दुनिया की जानकारी मिल जाती थी। दुनिया के कौन से कोने पर क्या है, उन्हें पता होता था; लेकिन इस बार वे सभी चीज़ों से अनजान हैं।
उन्हें अपनी कुछ ही शक्तियों के बारे में पता होगा और उनका वे इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि बाकी शक्तियों के लिए उन्हें समय पर निर्भर होना पड़ेगा और वक्त आने पर ही उनके पास सारी शक्तियाँ लौटेंगी। दुनिया की जानकारी के लिए उन्हें दुनिया में बाहर निकलना होगा और जैसे-जैसे वे दुनिया में आगे बढ़ेंगे, वैसे-वैसे उन्हें दुनिया की समझ होगी और दुनिया की जानकारी भी उन्हें मिलेगी।
अपने दुश्मन और उसकी ताकत के लिए उन्हें अपने दुश्मन तक पहुँचना होगा और फिर जाकर पता चलेगा कि उनके दुश्मन के पास क्या ताकत है और वह किस तरह के वरदान को हासिल किए हुए हैं; या फिर उसके पास एक नहीं, बल्कि कई सारे वरदान हैं, जैसा उनके पिछले अवतार में हुआ था जहाँ उनके दुश्मन के पास कुल तीन वरदान थे और इन तीनों ही वरदानों का संयोजन इतना ताकतवर था कि वह उसे किसी तरह से ख़त्म होने से रोक रहा था; जबकि इस बार भी कुछ ऐसा ही हो सकता है।
इस बार क्या है, क्या नहीं, यह तभी पता चलेगा जब वक्त के पन्ने खुलेंगे और वे अपने सफ़र पर निकलेंगे; ऐसे सफ़र पर जो इतिहास में लिखा जाएगा और फिर इस बात के लिए जाना जाएगा कि भगवान निर्माण ने अपने दसवें अवतार में क्या कुछ किया था।
फिलहाल के लिए सभी लोगों का ध्यान बच्चे की ओर था। कोई आखिर बचपन से ही इतना सुंदर कैसे हो सकता है कि उसे देखने के बाद उसे देखने का ही मन करता रहे, और यह बचपन से ही इतना स्वस्थ कैसे लग रहा है? वरना जब बच्चे पैदा होते हैं तो उनका शरीर इतना हष्ट-पुष्ट और स्वस्थ नहीं होता। आहुदी ने अपने बच्चे को पकड़कर हवा में ऊपर की ओर किया और बोली, “मेरा बच्चा, आहुदी का बच्चा... देवांश, तुम्हारा नाम देवांश होगा।”