Rebirth in novel Ch. 2

Rebirth in novel - Chapter 2

Posted by siya Rawat • Feb 04, 2025 02:18 PM

फिर उसने चारों तरफ देखा। कमरे में अजीबो-गरीब सामान रखा हुआ था, जैसे यह किसी लड़की का नहीं, बल्कि किसी साइको का कमरा हो।

तभी वह औरत लड़की के पास आई और बोली,

"आप जल्दी मुझसे प्यार हो जाओ, फिर हम नीचे चलते हैं।"

लड़की बिना कुछ कहे बाथरूम में चली गई।

बाथरूम में जाकर उसने अपना चेहरा देखा। उसे अपना ही चेहरा डरावना लग रहा था। उसने पहले आईने में खुद को देखकर अपने चेहरे से मेकअप साफ किया। मेकअप के पीछे से बहुत ही खूबसूरत लड़की का चेहरा नज़र आया। फिर उसने अपने बालों को देखा, जो हरे रंग में रंगे हुए थे। उसने अपने बालों में हाथ डाला तो उसे अपने बालों में कुछ मिला। वह शावर के नीचे जाकर खड़ी हो गई और अपने बालों को अच्छे से शैंपू से धोकर साफ किया। अब उसके बाल बिल्कुल काले और शाइनी हो गए थे। उसने खुद को आईने में देखकर कहा,

"इस लड़की ने खुद का क्या हुलिया बना रखा है यार! कुछ समझ ही नहीं आ रहा। क्या यह साइको थी क्या?"

फिर उसने अपने चेहरे, बालों, हाथ-पैरों से टैटू साफ किए और अच्छे से खुद को आईने में देखा। अब जाकर वह अपने चेहरे से संतुष्ट हुई थी। वरना पहले वह उसे लड़की कम, जोकर ज़्यादा लग रही थी।

तभी उसकी नज़र अपने आइब्रोज़ पर गई, जो एक-दूसरे से मिली हुई थीं। फिर उसने उनको अच्छे से साफ किया। अब जाकर उसे थोड़ा रिलैक्स फील हो रहा था। फिर उसने बाथरूम के कपड़े पहनकर बाहर आई और अपने कपड़े पहनने लगी। लेकिन वह कपड़े उसे पसंद नहीं आए, तो वह अलमारी में जाकर कपड़े ढूंढने लगी। उसे कोई भी अच्छा कपड़ा दिखाई नहीं दिया। इसलिए उसने सारे कपड़ों को लाकर डस्टबिन में फेंक दिया।

तभी उसकी नज़र एक पिंक कलर की साड़ी पर गई। उसने वह साड़ी पहनकर तैयार हो गई और अपने कमरे से बाहर निकल गई। जब वह सीढ़ियों से नीचे आ रही थी, तब उसकी हील की टकटक से सब लोग उसकी तरफ देखने लगे। अपने घर में एक अनजान लड़की को देखकर सारे लोग हैरान हो गए। उसके नीचे आने पर सब लोग उसे तरह-तरह के सवाल करने लगे। तभी वह लड़की अचानक चीखी और बोली,

"चुप हो जाओ तुम लोग! क्या मेरे कान खा जा रहे हो इतनी देर से?"

जब सब लोगों ने लड़की की आवाज़ सुनी, तो सब लोग बहुत हैरान हो गए। क्योंकि यह उन्हीं की अपनी बेटी थी, जिसे वह पहचान नहीं पाए थे। तभी लड़की का भाई उसके पास आया और उसके चेहरे को छूकर कहा,

"यह तुम हो अनिका?"

अनिका इस नॉवेल की हीरोइन थी, और वह एक पागल लड़की थी। जिसे जो चीज पसंद आ जाए, वह उसे चाहिए ही चाहिए थी। और उसकी फैमिली इसी बात से सबसे ज़्यादा नाराज़ रहती थी। लेकिन आज अनिका का यह रूप देखकर सब लोग हैरान और परेशान दोनों थे।

अनिका किसी पर ध्यान दिए बिना घर से बाहर जाने लगी। तभी उसके पापा बोले,

"रुको! कहाँ जा रही हो बिना पूछे और बिना कुछ बताए?"

अनिका पलटकर उनकी तरफ देखी और बोली,

"क्या आप मुझसे बात कर रहे हैं?"

वह बोले,

"शायद तुमने सुना नहीं।"

अनिका उनके सामने खड़ी हो गई और अपने हाथों को बांधकर बोली,

"देखिए मिस्टर, आप जो कोई भी हैं, whatever, but मेरे रास्ते में आने की कोशिश मत करिए, क्योंकि मैं आपकी कॉल नहीं लगती।"

राजेंद्र जी घुरकर अनिका की तरफ देखे और बोले,

"तुम बदतमीज़ थी, यह मुझे पता था। लेकिन तुम इतनी बदतमीज़ हो कि अपने खुद के बाप से कैसे बात करनी है, यह तुम्हें नहीं आता।"

उसने भी घुरकर उनकी तरफ देखा और बोली,

"तो आपने कब कौन सा अपना फ़र्ज़ निभाया, जो मैं आपको अपना बाप मानूँ? इस घर में जो भी रहते हैं, जो भी लोग हैं, उन्होंने कभी मुझे अपना नहीं समझा। मैं कब बीमार होती हूँ, मैं कब घर आती हूँ, मैं कब खाना खाती हूँ, कब नहीं खाती हूँ या बिना खाए ही सो जाती हूँ, किसी को इस बात की फ़िक्र है? जो मैं किसी और की फ़िक्र करूँ..."

आज अनिका के तेवर देखकर सब लोग खामोश थे। और सब जानते थे कि अनिका जो कह रही है, वह सच था। राजेंद्र जी फिर भी अनिका की तरफ देखकर बोले,

"तो किसने कहा तुम्हें इस घर में रहने के लिए? मत रहो, चली जाओ यह घर छोड़कर! मैं भी देखता हूँ कि इस घर के, और इस घर के पैसों के बिना तुम दो दिन भी बाहर नहीं निकल सकती हो।"

अनिका भी अपने हाथ बांधकर राजेंद्र जी के सामने खड़ी हो गई और बोली,

"ठीक है, चली जाऊँगी इस घर से, आपसे, आपकी सो-कॉल्ड फैमिली से दूर। लेकिन मेरी भी एक शर्त है।"

सब लोग हैरानी से अनिका को देख रहे थे। क्योंकि अनिका ने कभी भी राजेंद्र जी से इस तरह बात नहीं की थी। वह तो मरती थी राजेंद्र जी की एक नज़र खुद पर देखने के लिए, राजेंद्र जी से बात करने के लिए। इसलिए वह हमेशा उटपटांग हरकतें करती थी।

उस घर के अंदर एक लड़का आया। देखने में बहुत स्मार्ट, ड्रेसिंग सेंस अच्छा, 5 फीट 6 इंच हाइट, कुल मिलाकर वह किसी मॉडल से कम नहीं था। तभी उस लड़के को देखकर एक लड़की उसके पास गई और गले लग गई और बोली,

"Rahul बेबी! तुम यहां क्यों आए? तुम्हें पता है ना, जब अनिका घर होती है, वह क्या-क्या ड्रामा करती है।"

वह अनिका को देखने लगा, लेकिन अनिका पर उसके इस तरह देखने से कोई फ़र्क नहीं पड़ा।

Rahul अनिका के सामने जाकर खड़ा हो गया और कहा,

"तुम कभी अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आओगी! लगता है तुम हमेशा दूसरों को सिर्फ़ परेशान करना जानती हो।"

अनिका उसकी तरफ देखकर बोली,

"तुम कौन हो? और मेरे और मेरे पिता के बीच बोलने वाले तुम कौन हो? मैं तुमसे नहीं, अपने पापा से बात कर रही हूँ। और इस घर में किसी को भी अधिकार नहीं है कि वह बेटी को अपने पिता से बात करने से रोके। इसलिए इसके लिए आए हो ना, उसी के पास जाकर खड़े हो जाओ, वरना किसी के सामने बोलने लायक नहीं रखूँगी तुम्हें।"

आज अनिका का ऐसा रूप देखकर Rahul हैरान हो गया। क्योंकि वह तो अनिका से मिलने, उससे बात करने के लिए मरता था। लेकिन आज की अनिका... आज की अनिका तो सबको झटका दे रही थी। अनिका की मम्मी अनिका के पास आई और बोली,

"यह क्या बदतमीज़ी अनिका? तुम अपने पापा से इस तरह से क्यों बात कर सकती हो?"

तभी उसने अपनी मम्मी की तरफ देखा और बोली,

"अरे! मैं तो भूल ही गई। माता श्री, आप तो आई हैं ना अपने पति की पैरवी करने। अरे यार! चलो कोई नहीं, आप भी सुन लो। जैसे मेरा इस घर से कोई रिश्ता नहीं है, ना घर के किसी भी मेंबर से कोई रिश्ता है। और अगर कभी कहीं किसी मोड़ पर मैं आप लोगों को मिल जाऊँगी, तो अजनबी समझकर भूल जाना। यह मेरी शादी थी। आज के बाद मेरा आपसे, आपकी फैमिली से, आपकी फैमिली के किसी भी मेंबर से कोई रिश्ता नहीं है। मैं आपको दिखाऊँगी कि अनिका क्या चीज़ है और कहाँ तक जा सकती है। वेट एंड वॉच!"

कहकर वह घर से बाहर निकल गई।

अनिका बाहर आकर गहरी साँस ली और बोली,

"अच्छा हुआ जो मैं जेल से बाहर आई, वरना वहाँ सब लोग मुझे जिस तरीके से देख रहे थे, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे अभी मेरा मर्डर कर देंगे सब लोग।"

आज अनिका का इस तरह इस घर को छोड़कर जाना पूरी फैमिली को परेशान कर गया था। क्योंकि सब लोग जानते थे कि अनिका ना तो पढ़ाई में अच्छी थी और ना ही उसका किसी के साथ सलूक अच्छा था। तो वह इस शहर में, क्या इस देश में भी सर्वाइव नहीं कर सकती थी। राजेंद्र जी अपनी पत्नी की तरफ देखकर बोले,

"अगर तुमने थोड़ा ध्यान इस लड़की के ऊपर दिया होता ना, तो यह बदतमीज़ नहीं होती।"

अनिका की मम्मी सर झुका ली और बोली,

"मैं क्या करती? पूजा भी तो छोटी थी ना, उसे पर भी तो ध्यान देना था। इसलिए मैं अनिका पर ध्यान नहीं दे पाई।"

अनिका की दादी खड़ी हुई और बोली,

"आज आजाद होगी वह इस घर के बंधनों से। और देखना, वह खुद को साबित करके दिखाएगी कि वह तुम लोगों के बिना भी एक अच्छी ज़िन्दगी जी सकती है। और देखना, उसकी ज़िन्दगी में एक ऐसा इंसान आएगा जो उसे अपनी सर आँखों पर बिठाकर रखेगा और तुम्हारी किसी की भी उसे कोई ज़रूरत नहीं होगी।"

अपनी माँ की बात सुनकर राजेंद्र जी की आँखों में नमी आ गई। लेकिन वह किसी के सामने इस बात को ज़ाहिर नहीं होने देते। क्योंकि राजेंद्र जी अगर किसी से सबसे ज़्यादा प्यार करते थे, तो सिर्फ़ अनिका से। लेकिन अनिका की हरकतों की वजह से वह नाराज़ रहते थे।

bye

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