My Playboy CEO Boss - Chapter 2
अध्याय 2: मैं तुम्हें और चाहती हूँ, हनी
आदित्य और तृषा एक-दूसरे की बाहों में थे कि आदित्य का फ़ोन बज गया। वह तुरंत बिस्तर से उठा और अपने कपड़े पहनने लगा।
तृषा बेसुध बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसने आदित्य की तरफ़ देखा और ब्लश करने लगी, लेकिन आदित्य ने उसकी तरफ़ नहीं देखा। वह सीधे अपना मोबाइल फ़ोन लेकर बात करने लगा।
आदित्य को इस तरह फ़ोन पर बात करते देख तृषा को समझ आ गया कि वह कहीं जा रहा है। तृषा नहीं चाहती थी कि आदित्य उसे छोड़कर जाए। इसलिए वह बिस्तर से उठी और अपने बालों को ठीक करते हुए बोली, "कहीं जा रहे हो क्या, आदी..!”
आदित्य ने तृषा की बात सुनकर धीरे से सिर हिलाया और कहा, "एक इम्पॉर्टेंट मीटिंग आ गई है। ऑफिस जा रहा हूँ। तुम्हें अगर घर जाना हो तो चली जाना।”
तृषा ने आदित्य का हाथ पकड़ते हुए कहा, "शाम के पाँच बज रहे हैं। अब तुम ऑफिस क्यों जाओगे? जो भी मीटिंग है उसे कैंसिल कर दो और कल सुबह अटेंड कर लेना। अभी प्लीज़ मेरे साथ रहो, आई वांना बी विद यू..”
तृषा की बात सुनकर आदित्य ने उसके हाथ को पकड़ते हुए कहा, "तुम जानती हो ना, मैं इस मीटिंग को कैंसिल नहीं करना चाहता। मुझे मिस्टर राहुल से मिलना है। वह मेरे लिए एक नई सेक्रेटरी लेकर आए हैं और मुझे उसका इंटरव्यू लेना है। क्योंकि कल से हमारे इंदौर वाले होटल का काम शुरू हो रहा है और मैं चाहता हूँ कि आज ही मैं उस सेक्रेटरी का इंटरव्यू ले लूँ ताकि कल से हमारा काम शुरू हो सके।”
तृषा ने आदित्य की बात सुनी और उसकी गर्दन में अपने दोनों हाथ डालते हुए बोली, "ओह, प्लीज़! अगर तुम्हें सेक्रेटरी का इंटरव्यू लेना है तो तुम उसे यहीं घर पर बुला लेना सुबह और यहीं पर उसका इंटरव्यू ले लेना। उसके लिए तुम्हें ऑफिस जाने की क्या ज़रूरत है? और वैसे भी, अभी मेरा जरा भी मन नहीं भरा है। आई वांट यू मोर, हनी..!”
इतना बोलकर तृषा ने उसके दोनों गालों पर हाथ रखा और उसके होठों के क़रीब जाने लगी। जैसे ही आदित्य ने उसे इस तरह अपने होठों के पास आते देखा, उसने उसे रोकते हुए कहा, "आर यू श्योर?”
तृषा ने धीरे से सिर हिलाया और कहा, "येस, एब्सोल्यूटली! वैसे भी मेरा तुमसे कभी मन नहीं भरता।!”
इतना बोलकर उसने आदित्य की शर्ट उतार दी। आदित्य अपनी शर्ट के बटन लगा भी नहीं पाया था कि तृषा ने उसकी शर्ट फिर से उतार दी और उसे बिस्तर पर ढकेलकर उसकी पूरी बॉडी पर किस करने लगी।
आदित्य ने तृषा को अपनी बाहों में कसते हुए बिस्तर की ओर बढ़ाया। उसका चेहरा तृषा के इतने करीब था कि उसकी साँसों की गर्माहट तृषा को छू रही थी। उसने धीरे से कहा, "तुम्हारी आँखों में ये तड़प देखना मुझे बहुत पसंद है।”
तृषा ने उसकी बात का जवाब देने के बजाय हल्की मुस्कान के साथ उसकी आँखों में झाँका। वह जानती थी कि आदित्य का एटीट्यूड ही उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी था, और उसे आदित्य का इस तरह नज़दीक आना बेहद पसंद था।
आदित्य ने उसे बिस्तर पर गिराया और उसके ऊपर झुकते हुए कहा, "अब तुम्हारी ये शरारतें ज़्यादा नहीं चलेंगी। तुम जानती हो कि मैं क्या चाहता हूँ।”
तृषा ने उसके चेस्ट पर हल्के से हाथ रगड़ा और उसे थोड़ा पीछे करते हुए बोली, "और तुम भी मुझे बहुत अच्छी तरह से जानते हो, कि मैंने तुम्हें क्यों रोका है और मैं क्या चाहती हूँ?”
आदित्य के चेहरे पर वही शरारती मुस्कान आई। उसने उसके हाथ को अपने हाथ में लिया और कहा, "येस, ऑफ़ कोर्स बेबी, आई नो यू वेरी वेल, और मैं ये भी जानता हूँ तुम्हें क्या चाहिए।”
इतना बोलकर आदित्य ने उसे आँख मारी। उसने तृषा के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके होठों को चूमने लगा। तृषा ने उसकी पकड़ से निकलने की कोशिश की, लेकिन आदित्य ने उसकी कमर को थाम लिया। तृषा उसकी आँखों में आँखें डालकर बोली, "आदी, अब तुम चाहो भी तो मुझसे दूर नहीं जा सकते। मैं तुम्हें कहीं जाने नहीं दूंगी।”
आदित्य ने उसकी बात सुनकर उसे और करीब खींच लिया। उसकी उंगलियाँ तृषा की पीठ पर हल्के से फिसलीं, और तृषा ने उसकी गर्दन के पास अपने होठ रख दिए।
उन दोनों के बीच वो पल किसी तूफ़ान से कम नहीं था। तृषा के हर स्पर्श में आदित्य को अपने लिए चाहत, आकर्षण और बेसुमार प्यार नज़र आ रहा था। तृषा ने धीरे से अपने हाथ की शरारत को बढ़ाया और वह आदित्य के हर एक बॉडी पार्ट को महसूस करने लगी।
और तभी आदित्य तृषा की तरफ़ देखकर मुस्कुराते हुए बोला, "मैं बिलकुल भी नहीं सोचा था कि तुम इतनी..." तृषा ने उसके होठों पर अपनी उंगली रखते हुए कहा, "तुमने मेरे बारे में कभी कुछ सोचा ही नहीं, तो फिर अब ये बात क्यों बोल रहे हो? खैर, छोड़ो ये सब। मैं फालतू की बातों में टाइम वेस्ट नहीं करना चाहती। आई वांट सेकंड राउंड, अब मुझसे और वेट नहीं हो रहा।”
इतना बोलकर वह आदित्य के बिलकुल नज़दीक आकर बैठ गई। आदित्य ने उसे बिस्तर की तरफ़ धकेला और वह उसके साथ पैशनेटली किस करने लगा। वह दोनों धीरे-धीरे एक-दूसरे में उलझते चले गए और काफी समय बीत गया। उन्हें कब नींद आ गई, उन्हें पता ही नहीं चला।
अगले दिन सुबह रॉय मेंशन के बाहर एक टैक्सी आकर रुकी। उसमें से एक सिम्पल जीन्स और टॉप पहने हुए एक लड़की बाहर निकली। उसका फिगर बहुत ही आकर्षक था और वह काफी खूबसूरत लग रही थी। उसकी हेज़ल ग्रीन आँखें और उसके काले सीधे बाल उसे और भी आकर्षक बना रहे थे।
वह जैसे ही विला के बाहर उतरी, उसने विला की तरफ़ देखते हुए कहा, "हे भगवान! यह राहुल सर ने मुझे कहाँ भेज दिया है? आई होप मुझे यह जॉब मिल जाए ताकि मुझे बार-बार इस तरह दर-दर की ठोकरें ना खानी पड़ें। और वैसे भी, अगर यह जॉब लग गई तो फिर मेरी आधी से ज़्यादा प्रॉब्लम सॉर्ट आउट हो जाएगी।”
इतना बोलकर वह लड़की सीधे विला के अंदर पहुँची और उसने तुरंत अपना मोबाइल फ़ोन निकालकर किसी को कॉल किया। जैसे ही कॉल पिक अप हुआ, उसने धीमी आवाज़ में कहा, "राहुल सर, मैं विला के बाहर खड़ी हूँ। क्या आप विला के अंदर हैं?”
फ़ोन की दूसरी तरफ़ से आवाज़ आई, "हाँ, मिहिका, तुम अंदर आ जाओ। मैं अंदर ही हूँ!”
इतना बोलकर उन्होंने कॉल काट दिया। मिहिका जैसे ही विला के अंदर आई, उसने देखा कि विला काफी आकर्षक था।
वहाँ का इंटीरियर बहुत ही क्लासिक लग रहा था। मिहिका ने अपना सर ऊपर उठाया और विला के हॉल में लगे झूमर को देखा।
मिहिका की आँखें हैरानी से चौड़ी हो गईं। तभी एक आवाज़ सुनाई दी, "मिहिका, तुम तो बिलकुल टाइम पर आई हो। चलो, अच्छी बात है। वैसे भी आदित्य सर को पंक्चुअल लोग बहुत पसंद हैं। और मुझे तुमसे कुछ और इम्पॉर्टेंट बात भी करनी थी। बैठो, मैं तुम्हें तुम्हारा काम समझा देता हूँ। और एक बार अगर आदित्य को तुम्हारा काम समझ में आ गया तो तुम फिर उनकी परमानेंट असिस्टेंट बन जाओगी। और तुम्हारी जब कन्फर्म हो जाएगी..."
जैसे ही मिहिका ने बात सुनी, उसने धीरे से सिर हिलाते हुए कहा, "येस सर, मैं बहुत उम्मीद के साथ यहाँ आई हूँ। आई होप सर को मेरा काम पसंद आ जाए।”
जैसे ही मिहिका ने बात कही, राहुल ने उसकी बात बीच में ही काटते हुए कहा, "सबसे पहली बात, आदित्य को तुम बॉस बुलाना है। उसे सर कहना बिलकुल भी पसंद नहीं है। तो कभी भी उसे गलती से भी सर मत कहना।”
क्रमशः