एक थी वोह Ch. 2

एक थी वोह - Chapter 2

Posted by Vishal Varshney • Apr 06, 2025 04:32 PM

जब धरिता कुएँ में डूब गई, तब राजा सुमल के दादा छत पर रक्त पी रहे थे।

जब सुबह हुई, रेवाला कुएँ के पास गई और देखा कि कुएँ का जलस्तर बढ़ा हुआ था। रेवाला बोली, "नई बहू ने परीक्षा सफल की।" जब राजा सुमल की सभी आठ रानियाँ वहाँ आईं—

(राजा सुमल की पत्नियों के नाम इस प्रकार हैं:-

पहली पत्नी - उरका देवी

दूसरी पत्नी - गुमान देवी

तीसरी पत्नी - मैना देवी

चौथी पत्नी - त्रिनैना देवी

पाँचवीं पत्नी - कांति देवी

छठी पत्नी - कनिषा देवी

सातवीं पत्नी - रूधारा देवी

आठवीं पत्नी - नेल्ला देवी

नौवीं पत्नी (नई बहू) - धरिता देवी)

तो उरका देवी बोली, "पहली परीक्षा किसने पूरी की है, वह तो रेवाला ही जाने...न जाने बहू कहीं कुंड के मगरमच्छों का शिकार न हो जाएँ।"

"तुम्हारे कहने का क्या अर्थ है?" रेवाला बोली।

उरका देवी हिचकिचाते हुए बोली, "कि...वोह...यहाँ नहीं तो कहाँ है?"

तभी रेवाला बोली, "कौन कहाँ है, वह मुझे पता है।" इतना कहकर रेवाला वहाँ से चली गई।

तभी राजा सुमल के पास नेल्ला देवी (आठवीं पत्नी) आई और बोली, "न जाने अब नई बहू का क्या होगा।"

"बातों के बतासे मत फोड़िए," राजा सुमल गुस्से में बोले, "जो कहना है, सीधे-सीधे कहो।"

इतने में रानी नेल्ला देवी गुस्से में बोली, "कुएँ के पास सर्प मरा पड़ा था और तो और रेवाला ने उसे देखा ही नहीं...रेवाला ने उसे मरवा दिया है।"

"किसको?" राजा सुमल बोले।

नेल्ला देवी बहुत धीमे स्वर में बोली, "नई बहू को।"

तभी राजा सुमल गुस्से में रानी नेल्ला देवी का हाथ पकड़कर बोले, "आज जो कहा, सो कहा। आगे से अपने दिमाग और जुबान दोनों को समझा लेना, वरना...जिस प्रकार नाखून बढ़ जाए तो उसे काटना ही पड़ता है...बाकी आप समझदार हैं।" इतना कहकर राजा सुमल वहाँ से चले गए और नेल्ला देवी राजा को गुस्से में देखती रही। और अपनी शक्ल आईने में देखकर बोली, "काल का पहरा न जाने कब किसको अपनी बाहों में जकड़ ले।"

इधर राजा की माँ, कुनरेवा देवी, अपनी सास माँ मनका देवी से बोली, "नई बहू की रसोई कब शुरू होगी?" दादी बोली, "जब रेवाला चाहे, समझी।"

इधर रेवाला बहू की दूसरी परीक्षा की तैयारी कर रही थी।

(पर कोई उस पर गिद्ध की तरह नज़र गड़ाए हुए था। आखिर कौन था वह...?)

इधर राजा सुमल अपने महल के पीछे विशालकाय बरगद के पेड़ के पीछे गए और वहाँ से अचानक गायब हो गए।

इधर राजा सुमल के पिता, सुखेर राठौड़, छत पर कबूतरों को दाना खिला रहे थे कि तभी उनका प्रिय तोता राभा वहाँ आया और सुखेर सिंह से कहने लगा, "सुमल खतरे में है, उसको जक..." इतने में ही तोते को किसी ने खंजर से काट डाला। यह सब देखकर राजा सुखेर को गुस्सा सातवें आसमान पर था और उन्होंने अपने सैनिकों से कहा, "राजा सुमल को जल्द से जल्द हमारे समक्ष लाया जाए।" और उन्होंने अपनी दूसरी पत्नी सुकांता देवी से कहा, "हमारा और तुम्हारा प्रिय तोता राभा नहीं रहा, उसे किसी ने खंजर से मार डाला।"

"होनी को कोई टाल न सके और काल को कोई काट ना सके," रानी सुकांता बोली।

राजा और रानी के चेहरे पर दुःख की झलक थी। कुछ देर बाद राजा बोले, "इस महल के पीछे बरगद के पेड़ के पास जो आम और अमरूद का पेड़ है, के मध्य जो स्थान है वहाँ इसे दफना देते हैं क्योंकि उसे आम और अमरूद दोनों काफी पसंद थे, और वोह...अच्छा छोड़ो यह सब बात..."

यह सुनकर रानी सुकांता थोड़ी हिचकिचाई और लड़खड़ाते शब्दों के साथ बोली, "कि...कि...राजा जी, हम...हमको...वोह...जगह ठीक नहीं लगती। हम इसे महल के अंदर अ...अनार के पेड़ के नीचे दफना देते हैं। आखिर उसे अनार भी काफी पसंद थे...मतलब थे।"

रानी सुकांता थोड़ी भयभीत थी, पर क्यों?

इधर जब राजा सुखेर ने रानी सुकांता से कहा, "तुम्हारा दिमाग क्या पानी में डुबकी लगाने गया है? इस महल में मरे इंसान का मांस को वोह नहीं छोड़ते और उसको थोड़ी भनक लग गई तो इस तोते की हड्डियाँ भी शेष नहीं रहेंगी।"

रानी सुकांता रोते हुए और क्रुद्ध शब्दों में बोली, "आखिर वोह है कौन? हमने तो नाम ही सुना है...कौन है वोह...और वोह कौन होगी जो इस महल को मुक्त करेगी...सुमल की नौ बहुओं में से कौन होगी वोह...क्या सुमल को और विवाह करने पड़ेंगे...?" रानी सुकांता ने गुस्से में अपने प्रिय तोते राभा को अग्नि में भस्म कर दिया और बोली, "कच्ची मिट्टी के बर्तन जब तक पकते नहीं तब तक काम नहीं आते।"

(आखिर रानी ने ऐसा क्यों कहा?)

इधर राजा के सैनिकों ने जंगल और नगर, सभी संभव जगहों पर खोजा पर राजा का कुछ पता नहीं चला।

इधर राजा सुखेर सिंह की तीसरी पत्नी, जता देवी, ने राजा सुमल की पाँचवीं पत्नी, कांति देवी से कहा, "तुम आजाद होने वाली हो, यह विषफल लो...जो तुम्हें करना है वो करो, किसको मारना है, किसको मरवाना है यह तुम जानो..." तभी रानी कांति देवी बोली, "हम आपको मारेंगे सबसे पहले, समझी..." (यह बात कोई सुन रहा था चुपके से, पर कौन...?)

इधर रेवाला सतर्कता से जंगल में गई और जंगल में एक गुप्त गुफा में प्रवेश की।

(आखिर क्या रहस्य है रेवाला का...?)

इधर रानी सुकांता मन ही मन सुकून की साँस लेते हुए मन ही मन में सोचती रही, "काश राजा पंजर राठौड़ मर जाएँ..."

(आखिर क्यों ऐसा चाहती थी रानी सुकांता...?)

इधर नई बहू की किसी को चिंता नहीं थी। आखिर क्यों कोई उसके बारे में बात भी नहीं कर रहा था? सब राजा सुमल के लिए दुःखी थे...इधर राजा सुमल का कोई पता नहीं था।

इधर जब रेवाला आई तो उसका रूप एक भयंकर चुड़ैल के समान लग रहा था। वह महल में प्रवेश की और चिल्लाती हुई और क्रुद्ध स्वर में बोली, "वोह आ गई...वोह आ गई..."

सभी रेवाला की आवाज सुनकर महल के मुख्य द्वार पर आए। सभी उसे देखकर हैरान हो गए।

(आखिर क्यों हैरान हो गए सब?)

आखिर क्या राज है महल का और नई बहू कहाँ है? अगर वह मर गई तो उसकी लाश कहाँ है? क्या वह जिंदा है या मुर्दा...?

आखिर रेवाला किसके बारे में कह रही थी कि वो आ गई?

रानी जता देवी ने रानी कांति देवी को विषफल क्यों दिया? क्या मकसद है कांति देवी का?

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