बदचलन - Chapter 2
उर्वशी का जन्म एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में एक छोटे से गांव में हुआ था,,,,,,,
उर्वशी कुल 6 भाई बहन थे, सबसे बड़ा एक भाई दिनेश उस से छोटी एक बहन और उस से छोटी उर्वशी फिर उर्वशी से छोटी दो बहनें और एक भाई था,,,,
उर्वशी के पिता पंचायत समिति में एक सरकारी बाबू थे घर में थोड़ी बहुत खेती बाड़ी की जमीन भी थी जैसे तैसे करके परिवार का गुजारा ठीक-ठाक तरीके से हो जाता था,,,,,,,,
अपने नाम की तरह ही उर्वशी भी किसी अप्सरा से कम नहीं थी, बचपन से ही उर्वशी को सिखाया गया था कि वह मर्यादा में रहे उन लोगों के लिए उनकी इज्जत ही सब कुछ है,,,,,,
उर्वशी हमेशा से ही देखते आई थी कि उनके घर, गांव, परिवार,समाज सब जगह एक लड़के और लड़की में भेदभाव किया जाता है, लड़कों से ज्यादा लड़कियों से घर की मान मर्यादा इज्जत रखने की उम्मीद की जाती है,,,,,,,
एक बार उर्वशी को याद है जब बह दसवीं क्लास में पढ़ती थी, रोज अपने गांव से दूर कस्बे में पढ़ने जाया करती थी,,,,,,
स्कूल के अंदर प्रवेश करने से पहले स्कूल के गेट पर एक आवारा लड़का अपने कुछ दोस्तों के साथ खड़ा रहता,,,,,,
जब उर्वशी अपनी सहेलियों के साथ स्कूल के प्रांगण में प्रवेश करती तो उससे पहले बह गंदे गंदे ताने और फब्तियां उर्वशी और उसकी सहेलियों पर कसता,,,,,,,
यह सब देख कर उर्वशी को बहुत गुस्सा आता लेकिन उर्वशी ने पहले उसे कुछ नहीं कहा, क्योंकि उर्वशी उनके मुह लगना नहीं चाहती थी वह नहीं चाहती थी कि बेवजह बात ज्यादा बढ़े,,,,,,
एक दिन तो उस लड़के ने हद ही कर दी उसने सीधे ही सब को छोड़कर उर्वशी के बारे में कुछ ऐसा कहा कि उर्वशी का खून खोल उठा और उर्वशी ने गुस्से में उस लड़के को एक लताड़ लगाई,,,,,,,
तब वह लड़का गुस्से में उर्वशी के सामने आ गया और उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की,,,,,,
यह देखकर उर्वशी को बहुत गुस्सा आया और उसने एक जोरदार तमाचा उस लड़के के गाल पर रख दिया और वहां से सीधे ही स्कूल के प्रांगण में चली गई,,,,,,
उर्वशी ने जाकर यह सारी बात अपनी स्कूल टीचर को बता दी,,,,,,,,
स्कूल टीचर ने भी इस बात का तुरंत रिएक्शन लिया और उस लड़के के बारे में जानकारी प्राप्त करके तुरंत उसके घर वालों को सूचना दी कि अगर उन लड़कों ने फिर से उर्वशी या किसी भी लड़की को परेशान करने की कोशिश की तो वह कोई कानूनी रिएक्शन लेगी,,,,,,,
शायद स्कूल टीचर की बात उसके घरवालों से कहने पर उस पर उन लड़कों के घरवालों ने उन लड़कों को डांटा था समझाया था जिसकी वजह से वे लड़के उर्वशी को घर वापस लौटते समय वापस नहीं मिले,,,,,,,,
लेकिन जैसे ही उर्वशी घर पहुंची और उसकी बात उसके माता-पिता तक पहुंची तो उसके माता-पिता ने उसकी तारीफ करने की बजाय उसका साथ देने की बजाय उसे ही डराया धमकाया,,,,,,,
उसकी मां गुस्से में बोली तू वहां पर पढ़ने जाती है या यह सब करने,,,,,,
यह सुनकर उर्वशी बोली मां पहले मेरी बात तो सुनो,,,,,
तब उर्वशी की मां बोली चुप कर बहुत हुआ एक बात कान खोलकर सुन ले उर्वशी अगर पढ़ना है तो चुपचाप रास्ते जाया कर और रास्ते आया कर,,,,,,,,
अगर इस तरह की शिकायत दोबारा आई ना तो तुम्हारी टांग तोड़ कर इसी घर में बैठा लूंगी हमें यह बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं है कि तुम्हारी वजह से लोग हमारे ऊपर उंगली उठाए हमारी इज्जत पर कीचड़ उछाले,,,,,,,
यह सुनकर उर्वशी बोली मां जब मैंने कोई गलती की ही नहीं है तो फिर हमारी इज्जत पर आंच क्यों आएगी, गलती तो उस घटिया लड़के ने की थी तो इसमें भला मेरी क्या गलती है,,,,,,,
यह सुनकर उर्वशी की मां चीखते हुए बोली अरे गलती किसकी भी हो लेकिन लोग तो उंगली एक औरत पर ही उठाते हैं ना,,,,,,
लोग आज भी यही बातें बना रहे हैं इतनी लड़कियों में भला उस लड़के ने तुम्हारे साथ ही छेड़खानी करने की क्यों कोशिश की,,,,,,
गांव की औरतें तो यही बातें बना रही है कि जरूर तुम ही ने हीं उस लड़के को कुछ कहने के लिए उकसाया होगा,,,,,,,,
यह सुनकर उर्वशी ने कुछ नहीं कहा,बह वहां से गुस्से में उठकर दूसरे कमरे में आ गई, लेकिन बह सोचने के लिए मजबूर हो गई कि हर बार दोषी औरत को ही क्यों ठहराया जाता है,,,,,,,
और आखिर यह समाज किस इज्जत की बात करता है अरे जब औरत अपनी इज्जत के लिए अपनी आबरू के लिए अपने चरित्र पर उंगली उठाने बाले के खिलाफ कुछ बोल नहीं सकती उनके खिलाफ कुछ कर नहीं सकती,,,,,,
यह लोग औरतों के साथ ऐसा सब कुछ होते देखकर उसका साथ देने की वजह उसे ही दोषी ठहराते हैं तो फिर यह लोग किस इज्जत की बात करते हैं,,,,,,,,
क्या औरत को डरा धमका कर घर में घुट घुट कर जीने के लिए मजबूर करना, रास्ते आते जाते उसकी इज्जत पर कीचड़ उछालने वालों की चुपचाप सुन लेना क्या यही इज्जत है,,,,,,,,
हर बार सर्दियों सर्दियों से इस झूठी इज्जत के लिए औरत ही क्यों कुर्बान होती रही है आज भी अगर लड़ाई दो मर्दों के बीच हो तो गाली तो औरत को लेकर ही दी जाती है, भला वे लोग कैसे भूल जाते हैं कि उन्हें इस दुनिया में लाने वाली बड़ा करने वाली एक औरत ही है, एक औरत के बिना एक मर्द का कोई अस्तित्व नहीं है,,,,,,,
उर्वशी यह सब सोचकर मन ही मन घुटती रहती, लेकिन अपने माता-पिता की बात सुनने के बाद उसने चुप रहने में ही भलाई समझी, क्योंकि वह जैसे तैसे अपनी पढ़ाई पूरा करना चाहती थी,,,,,,,
उर्वशी कभी-कभी सोचती कि कितनी खुश किस्मत होती होगी,बह लड़कियां जिन्हें हर तरह की आजादी मिली होती है जिनका हर कदम पर उनके माता-पिता उनका सहयोग करते हैं बिना किसी की परवाह किए बिना,,,,,,,
जब भी उर्वशी टीवी में ऐसी लड़कियों को ऐसी औरतों को देखती तो उसका मन भी करता कि बह यहां से इन झूठी बेढियो को तोड़कर उड़कर दूर कहीं चली जाए,,,,,,
जहां पर बह खुलकर आजादी की सांस ले सके जहां पर अपने हर सपने को पूरा कर सके जहां पर इज्जत के नाम पर रोक-टोक करने वाला हर बात पर इज्जत के झूठे प्रवचन सुनाने वाला कोई ना हो,,,,,,,
जैसे-जैसे उर्वशी बड़ी होती जा रही थी वैसे वैसे हर लड़की की तरह अपने आने वाले जीवन को लेकर वह भी सपने सजोने लगी थी,,,,,,,
जब भी बह टीवी में कोई फिल्म या कोई टीवी सीरियल देखती तो अपने आने वाले जीवन को लेकर सपने सजोने में लग जाती,,,,,,,