बंजारन (एक पुनर्जन्म दास्तां) Complete Ch. 2

बंजारन (एक पुनर्जन्म दास्तां) - Chapter 2

Posted by Mamta Meena • Aug 21, 2026 04:52 PM

वीर और महेंद्र दोनों स्नानादि करके जैसे ही बाहर आए तो देखा कि सुबह का कलेवा यानी नाश्ता तैयार था, सभी लोग एक साथ नाश्ता करने के लिए बैठ गए थे,,,,,,

नाश्ता करते वक्त बीर ने देखा कि सभी घर वाले बहुत परेशान थे,,,,,

यह देखकर वीर बोला क्या हुआ मासा आप सब लोग परेशान लग रहे हो,,,,,,

यह सुनकर वीर कि मांसा ने हड बढ़ाते हुए बोली ना ना बेटा ऐसा कुछ ना है मैं दादीसा की तबीयत ठीक ना है ना उसी बात को लेकर थोड़े परेशान है,,,,,,

यह सुन कर बीर ने कहां यह बात तो है दादी सा की तबीयत ठीक नहीं है मुझे भी उसकी बहुत चिंता हो रही है, लेकिन देखना बह जल्दी ही ठीक हो जाएगी,,,,,

अब मैं आ गया हूं ना और आपको तो पता ही है कि दादीसा मुझसे कितना प्यार करती है मेरे साथ रहकर बह पूरी तरह ठीक हो जाएगी,,,,,

यह सुनकर सभी के चेहरे पर मुस्कान आ गई, तब वीर के काका सा बोले हां वीर बेटा थारे में तो जान बसे है मासा की,,,,,

नाश्ता करने के बाद वीर अपनी दादी सा के कमरे में गया लेकिन उसकी दादी सा गहरी नींद में सो रही थी,,,,,

तब वीर की मासा बोली बेटा थारी दादीसा दवाई के असर से अभी सो रही है तू भी थका है ऐसा कर पहले थोड़ा आराम कर ले, शाम को अपनी दादीसा से बात कर लेना,,,,,,,

यह सुनकर बीर बोला जी मासा और वह अपने दोस्त महेंद्र के साथ कमरे में आ गया, दोनों दोस्त बात करते-करते गहरी नींद में सो गए,,,,,

क्योंकि सारी रात वे ठीक से ट्रेन में सो ना सके थे, दोपहर के लगभग 12:00 बजे के आसपास एक नौकर दोनों को खाना खाने के लिए बुलाने आया, लेकिन गहरी नींद में जागने के बीर और महेंद्र का खाना खाने का मन नहीं था,,,,,,

इसलिए उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि सुबह नाश्ता करने के बाद अब उन्हें भूख नहीं है, फिर बे गहरी नींद में सो गई,,,,,,

शाम को लगभग 4:00 बजे के आसपास उन दोनों की नींद खुली, हाथ मुंह धो कर दोनों बाहर आए, चाय पीने के बाद वीर और महेंद्र अपनी दादी से मिलने के लिए कमरे में चले गए,,,,,

वीर ने देखा कि उसकी दादी सा अब थोड़ी ठीक लग रही थी, जैसे ही बीर ने उसका हाथ अपने हाथ में लिया तो वीर की दादी सा मुस्कुराते हुए बोली आ गया म्हारा लाल,,,,,

तब बीर बोला दादीसा आप कैसी हो आप,,,,,

तब वीर की दादी सा बोली थोड़ी ठीक हूं अब, तभी वीर की दादी सा की नजर बीर के दाएं हाथ के ऊपर बने उस निशान पर गई,,,,

यह देखकर बह घबरा गई और बोली यह निशान बेटा,,,,और बह हडबढ़ाते हुए बोली यह का पहन रखा है  थारे ने,,,,,,,

यह सुनकर बीर बोला कुछ ना दादी सा टीशर्ट ही तो है,,,,,,

तब बीर की दादीसा घबराते हुए बोली ना बेटा ऐसे कपड़े ना पहना कर,कुछ और पहन कर आ,,,,,,,

बीर के कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी दादी सा ऐसी बातें क्यों कर रही है, लेकिन अपनी दादी का मान रखने के लिए उठ कर चला गया और थोड़ी देर में फुल आस्तीन की एक शर्ट पहन कर उसके पास आ गया,,,,,

यह देखकर उसकी दादी सा बोली हां अब चौकी है बेटा जब तक तू यहां है और थारा राजतिलक ना हो जाता और थारा विवाह उसके बाद ही घराने का नया बारिश ना आ जाता, तब तक तू कभी भी ऐसा कोई कपड़ा ना पहना कि यह निशान उसे दिखें,,,,,,

यह सुनकर बीर को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी दादी सा ऐसी बहकी बहकी बातें क्यों कर रही है, लेकिन अब यह दादी सा का मन रखने के लिए बीर ने कहा कि जी दादीसा मैं आगे से ध्यान रखूंगा,,,,,,,

तब वीर की दादी सा बोली बेटा थारा शहर का कारोबार कैसा चल रहा है, यह वीर बोला दादी सा सब अच्छा चल रहा है,,,,,,

तब बीर की दादी सा बोली का करें तू वहां अकेला है जय विनय और प्रताप को तो गांव का काम संभालने से ही फुर्सत ना मिले हैं, यहां पर ही इतने सारे खेत बाग बगीचे है कि उनका काम ही घणा हो जावे है उनसे ही बिल्कुल भी समय ना मिले,,,,,,

यह सुनकर वीर बोला हां दादी सा, काका सा और जय और विनय को तो यहां पर ढेर सारा काम है और वैसे भी मैं कहा अकेला हूं महेंद्र है ना मेरे साथ मेरा भाई आप के बाद शहर में यही तो मेरा अपना है मेरा दोस्त मेरा भाई मेरा सब कुछ जिस पर मैं आंख बंद कर कर विश्वास कर सकता हूं,,,,,,

यह सुनकर महेंद्र बोला अरे दादी सा कोई किसी की नमक मिर्च लगाकर तारीफ सुनना तो इससे सीखें, यह कहकर बह जोर से हंस पड़ा और बोला दादीसा आप चिंता ना करो वीर मेरे साथ रहता है बह हमेशा ठीक रहेगा,,,,,,

यह सुनकर वीर की दादी सा कुछ परेशान होते हुए बोली लेकिन वीर बेटा थारा राजतिलक होने के बाद तो थारे को अधिकतर गांव में ही रहना पड़ेगा गाव की जिम्मेदारी भी तो थारे सर पर ही होगी,,,,,,

यह सुनकर वीर बोला अरे दादी सा काका सा है ना इस जिम्मेदारी को संभालने के लिए तो मुझे यहा रुकने की क्या जरूरत है और वैसे भी शहर में काफी सारा काम होता है तो उससे ही टाइम नहीं मिलता,,,,,

यह सुनकर वही सभी घरवालों के साथ खड़े वीर के काका बोले ना बेटा मैं तो हूं जिम्मेदारी संभालने के लिए संभालने के लिए, लेकिन पहले थारा राजतिलक हो जाए तो मैं अपने भार से मुक्त हो जाऊं भाईसा के जाने के बाद तुम ही इस घराने के बारिश हो,,,,,

तब वीर बोला लेकिन काका सा मैं नहीं मानता इस प्रथा को और आप मुझसे बड़े हो तो इस पर पहले आपका हक है,,,,,

यह सुनकर बीर के काका सा बोले ना बेटा ना हमारे कुल की परंपरा है की तू यहां का बारिश है, तू चिंता ना कर तू अपना शहर में काम संभालना यहा मैं संभाल लूंगा लेकिन परंपरा के अनुसार तो बारिश तो थारे को बनणा पडेगा,,,,,

यह सुनकर बीर बोला जैसी आपकी मर्जी यह कह कर बीर के चेहरे पर मुस्कान आ गई,,,,,

तब बीर की दादी सा बोली मैं कल ही कुल गुरु को बुलवाकर चौका सा मुहूर्त देखकर मारे वीर का राजतिलक करबा दूंगी, इससे पहले कि कोई अनहोनी हो,,,,,

यह कहते हुए वीर की दादी सा हर बढ़ाने लगी, तब वीर की मासा बोली मासा डॉक्टर ने मना किया है ना आपसे ज्यादा बोलने के लिए अब थे आराम करो,,,,,,

वैसे भी रात होने से पहले सब घर वाले भोजन जिम लो मासा का भोजन भी में अठे (यही) लेकर आबू हूं यह सुनकर महिंद्र बोला मासा इतनी जल्दी खाना,,,,,,

तब वीर की मासा बोली हां बेटा या गांव है यहां (अठे) पर सब लोग अंधेरे होने से पहले भोजन जीम लेवे है और सुबह अंधेरे से पहले ही जग आवे है,,,,,

यह सुनकर वीर और महेंद्र ने कहा ठीक है मासा तो चलो फिर हम भोजन करते हैं, फिर सब लोग ने एक साथ भोजन किया,,,,,,,,

सब के साथ भोजन करने के बाद वीर और महेंद्र अपने कमरे में चले गए और दोनों बातें करते करते गहरी नींद में सो गए,,,,,,

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