नागमणी का रहस्य - Chapter 2
रात के सन्नाटे में जंगल पहले से कहीं अधिक डरावना लग रहा था।
आसमान पर बादल छाए थे और चाँद कभी बादलों के पीछे छिप जाता, तो कभी उसकी हल्की रोशनी घने पेड़ों के बीच से जमीन पर गिरती। हवा में अजीब-सी ठंडक थी। जंगल के बीच बने पुराने मंदिर के सामने खड़ी नायरा लगातार उस पत्थर की मूर्ति को देख रही थी, जिसकी आँखों में कुछ देर पहले नीली रोशनी चमकी थी।
उसके हाथ में वही रहस्यमयी ताबीज था।
ताबीज अब गर्म हो चुका था।
नायरा ने उसे हथेली में कसकर पकड़ लिया।
“ये मेरे पास आते ही इतना गर्म क्यों हो जाता है?” उसने धीमे से कहा।
तभी पीछे झाड़ियों में कुछ खड़का।
नायरा तुरंत पलटी।
“कौन है?”
कोई जवाब नहीं आया।
वह कुछ कदम आगे बढ़ी। झाड़ियों के पीछे सिर्फ अंधेरा था।
लेकिन जमीन पर उसे एक अजीब निशान दिखाई दिया।
वह निशान बिल्कुल साँप के फन जैसा था।
नायरा का दिल तेज़ धड़कने लगा।
उसने जैसे ही उस निशान को छुआ, उसके दिमाग में अचानक एक दृश्य चमका—
एक विशाल भूमिगत महल...
दीवारों पर सैकड़ों नागों की आकृतियाँ...
बीच में चमकता हुआ एक नीला रत्न...
और उस रत्न के सामने खड़ी एक स्त्री।
स्त्री के चेहरे पर घूँघट था।
उसने नायरा की ओर देखकर कहा—
“नागमणि को खोजने से पहले अपने अतीत को खोजो... क्योंकि जिस रहस्य से तुम भाग रही हो, वही तुम्हारी असली पहचान है।”
अचानक दृश्य समाप्त हो गया।
नायरा ने घबराकर अपना हाथ पीछे खींच लिया।
“ये... क्या था?”
उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं।
उसी समय मंदिर के अंदर से घंटी बजने की आवाज़ आई।
टन... टन... टन...
नायरा धीरे-धीरे मंदिर के भीतर जाने लगी।
मंदिर बहुत पुराना था। दीवारों पर धूल जमी थी, लेकिन बीच में रखी नाग देवता की मूर्ति बिल्कुल साफ थी।
उसने मूर्ति के पास जाकर देखा।
मूर्ति के नीचे एक छोटा-सा पत्थर था जिस पर वही निशान बना था जो उसे बाहर मिला था।
नायरा ने पत्थर को दबाया।
घर्ररर...
मंदिर का फर्श हल्का-सा हिल गया।
मूर्ति के पीछे की दीवार धीरे-धीरे खुलने लगी।
नायरा कुछ पल तक वहीं खड़ी रह गई।
दीवार के पीछे सीढ़ियाँ थीं, जो नीचे अंधेरे में जा रही थीं।
उसके मन में डर था, लेकिन उससे कहीं ज्यादा उसके भीतर अपने अतीत को जानने की इच्छा थी।
वह मशाल लेकर सीढ़ियों से नीचे उतरने लगी।
एक...
दो...
दस...
बीस...
सीढ़ियाँ खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थीं।
नीचे जाते-जाते हवा और ठंडी होती जा रही थी।
अचानक उसे किसी के फुसफुसाने की आवाज सुनाई दी।
“वापस चली जाओ...”
नायरा रुक गई।
“कौन है?”
फिर आवाज आई—
“जिस रहस्य को तुम खोज रही हो, वह तुम्हें भी खोज रहा है...”
नायरा ने चारों तरफ देखा।
कोई दिखाई नहीं दिया।
तभी उसकी मशाल अपने आप बुझ गई।
चारों तरफ घना अंधेरा छा गया।
कुछ सेकंड बाद ताबीज चमकने लगा।
उसकी नीली रोशनी से रास्ता दिखाई देने लगा।
नायरा ने आगे कदम बढ़ाया।
सामने एक विशाल कक्ष था।
कक्ष की दीवारों पर पुराने चित्र बने हुए थे।
पहले चित्र में एक नागराज दिखाई दे रहा था।
दूसरे में एक नागिन।
तीसरे चित्र में एक नवजात बच्ची को किसी साधु के हाथों में दिखाया गया था।
नायरा उस चित्र के सामने जाकर रुक गई।
उस बच्ची के गले में वही ताबीज था जो आज उसके पास था।
उसकी आँखें फैल गईं।
“ये... मैं हूँ?”
तभी पीछे से किसी की आवाज आई—
“हाँ।”
नायरा बिजली की तरह पलटी।
सामने एक वृद्ध साधु खड़ा था।
लंबी सफेद दाढ़ी, माथे पर भस्म और हाथ में लकड़ी का दंड।
“आप कौन हैं?”
साधु ने शांत स्वर में कहा—
“मैं वही हूँ जो तुम्हारे आने का वर्षों से इंतज़ार कर रहा था।”
“आप मुझे जानते हैं?”
“तुम्हें नहीं... तुम्हारे भीतर छिपे रहस्य को जानता हूँ।”
नायरा ने आगे बढ़कर पूछा—
“मेरी असली पहचान क्या है?”
साधु कुछ देर चुप रहा।
फिर उसने दीवार पर बने उस चित्र की ओर देखा।
“तुम्हें जन्म से इंसान की दुनिया में भेजा गया था। लेकिन तुम्हारा संबंध नागलोक से है।”
नायरा का चेहरा सफेद पड़ गया।
“नागलोक?”
“हाँ। और तुम्हारे पास जो ताबीज है, वह साधारण ताबीज नहीं है। यह नागमणि की रक्षा करने वाले राजवंश का चिह्न है।”
“लेकिन नागमणि है कहाँ?”
साधु ने उसकी आँखों में देखा।
“जहाँ तुम्हें सबसे कम उम्मीद है।”
“कहाँ?”
साधु ने उत्तर देने के बजाय अपने पीछे बने एक दरवाजे की ओर इशारा किया।
“उस दरवाजे के पार तुम्हें पहला उत्तर मिलेगा।”
नायरा दरवाजे के पास पहुँची।
दरवाजे पर लिखा था—
“जिसे तुम अपना शत्रु समझोगी, वही तुम्हारे भाग्य की चाबी होगा।”
नायरा ने दरवाजा खोला।
अंदर एक छोटा कमरा था।
कमरे के बीचोंबीच पत्थर की चौकी पर एक पुराना मुकुट रखा था।
मुकुट के बीचोंबीच नीला रत्न जड़ा था।
नायरा धीरे-धीरे उसके पास गई।
जैसे ही उसकी उंगलियाँ मुकुट से छुईं, पूरा कमरा नीली रोशनी से भर गया।
और फिर एक आवाज गूँजी—
“राजकुमारी...”
नायरा स्तब्ध रह गई।
“राजकुमारी?”
साधु ने आँखें बंद कर लीं।
“हाँ, नायरा। तुम नागलोक की खोई हुई राजकुमारी हो।”
नायरा के हाथ काँपने लगे।
“अगर मैं राजकुमारी हूँ... तो मेरे माता-पिता कहाँ हैं?”
साधु के चेहरे पर चिंता दिखाई दी।
“तुम्हारे पिता... अब इस दुनिया में नहीं हैं।”
नायरा की आँखों में आँसू आ गए।
“और मेरी माँ?”
साधु ने कोई जवाब नहीं दिया।
“मेरी माँ कहाँ है?”
इस बार नायरा की आवाज तेज़ थी।
साधु ने धीरे से कहा—
“तुम्हारी माँ जीवित है।”
नायरा की साँस रुक गई।
“कहाँ?”
“यही रहस्य तुम्हें नागमणि तक ले जाएगा।”
तभी अचानक मंदिर के बाहर जोरदार गर्जना हुई।
साधु ने तुरंत दरवाजा बंद कर दिया।
“वह आ गया।”
“कौन?”
“जिसे तुम्हें इस दुनिया में वापस नहीं आने देना था।”
बाहर से भारी कदमों की आवाज सुनाई देने लगी।
धड़ाम...
धड़ाम...
नायरा पीछे हट गई।
अचानक दरवाजा टूटकर गिर पड़ा।
धुएँ के बीच एक काले वस्त्रों में लिपटा व्यक्ति दिखाई दिया।
उसकी आँखें लाल चमक रही थीं।
उसने नायरा को देखते ही कहा—
“आखिरकार मैंने तुम्हें ढूँढ लिया, राजकुमारी।”
नायरा डरकर पीछे हट गई।
साधु उसके सामने आकर खड़ा हो गया।
“तुम इसे हाथ नहीं लगा सकते।”
वह रहस्यमयी व्यक्ति हँसा।
“अब इसे कोई नहीं बचा सकता।”
उसने हाथ उठाया।
अचानक जमीन पर काले धुएँ की लहर फैल गई।
नायरा का ताबीज तेज़ी से चमकने लगा।
नीली रोशनी और काला धुआँ आपस में टकराए।
पूरा मंदिर काँपने लगा।
साधु चिल्लाया—
“नायरा! अपनी आँखें बंद करो!”
नायरा ने आँखें बंद कर लीं।
और उसी क्षण उसके भीतर से एक अजीब शक्ति जाग उठी।
उसके चारों ओर नीली रोशनी का घेरा बन गया।
रहस्यमयी व्यक्ति पीछे जा गिरा।
“नहीं... यह संभव नहीं!”
नायरा ने अपनी आँखें खोलीं।
उसकी आँखों में अब हल्की नीली चमक थी।
साधु ने उसे देखकर धीमे से कहा—
“नागवंश की शक्ति जाग चुकी है।”
लेकिन नायरा खुद इस बदलाव से अनजान थी।
रहस्यमयी व्यक्ति उठ खड़ा हुआ।
उसने जाते-जाते कहा—
“आज नहीं, राजकुमारी... लेकिन अगली बार मैं अकेला नहीं आऊँगा।”
वह काले धुएँ में गायब हो गया।
मंदिर में फिर सन्नाटा छा गया।
नायरा ने साधु की ओर देखा।
“अब मुझे सब कुछ जानना है।”
साधु ने गंभीर स्वर में कहा—
“तो तैयार हो जाओ। क्योंकि तुम्हारी कहानी अब शुरू हुई है।”
उसी समय मंदिर की दीवार पर बनी नागिन की आकृति में दरार पड़ी।
दरार के भीतर से एक छोटा-सा नीला पत्थर बाहर गिरा।
नायरा ने उसे उठाया।
पत्थर पर सिर्फ तीन शब्द लिखे थे—
“माँ तुम्हें देख रही है।”
नायरा ने चारों ओर देखा।
उसे महसूस हुआ जैसे अंधेरे में कोई उसकी निगरानी कर रहा हो।
और दूर, जंगल की सीमा के पास, एक स्त्री खड़ी थी।
उसके चेहरे पर घूँघट था।
उसकी आँखों में वही नीली चमक थी...
जो कुछ देर पहले नायरा की आँखों में दिखाई दी थी।
स्त्री ने बहुत धीमे से कहा—
“मेरी बेटी... अब तुम्हें सच से कोई नहीं बचा सकता।”
और वह अंधेरे में गायब हो गई।
जारी रहेगा...