"जबरदस्ती से बना एक रिश्ता"
अब आगे,
इनारा नीचे बैठी हुई धींमी आवाज में रो रही थी। वहां खड़ा हर एक शख्स उसे रोते हुए देख रहा था। कई लोगों को उस पर तरस आ रहा था। लेकिन यह दुनिया सिर्फ दिखावा करती है। सामने कुछ और ही होता है, पीठ पीछे बातें बनाना इनकी आदत होती है।
तभी वहां एक लड़की भागते हुए आई, उस लड़की की उम्र करीब 15 साल होगी। वह लड़की जल्दी से आकर इनारा के पास बैठकर उसे चुप करते हुए कहती है - भाभी आप रो मत भैया किसी इंपॉर्टेंट काम से बाहर गए हैं वह जल्दी वापस आएंगे।
उसकी बात सुनकर इनारा ने नजरे उठाकर उसकी तरफ देखा। वह लड़की बेहद मासूम थी।
तभी इनारा ने उसे नम आंखों से देखते हुए कहा," अंशी बच्चा यह तुम्हारी गलतफहमी है , तुम्हारे भैया किसी इंपॉर्टेंट काम से बाहर नहीं गए वह जानबूझकर मुझे छोड़ कर गए हैं उन्हें मुझसे शादी ही नहीं करनी थी।
"नहीं भाभी ऐसा नहीं है आप गलत समझ रही हैं भैया किसी काम से बाहर गए हैं वह बस आते ही होंगे! अंशी ने इनारा को समझाते हुए कहा।
अंशी रणवीर राणा की इकलौती पोती थी। और अनय राणा की छोटी बहन वह पूरे खानदान में सबकी लाडली थी। अंशी का नेचर बहुत अच्छा था। उसकी मन बहुत पवित्र था। अंशी को राणा परिवार ने हर तरीके के संस्कार दिए थे। कब कहां कैसे बिहेव करना है उसे अच्छे से आता था। जब सिचुएशन सीरियस होती थी उस वक्त अंशी एक बड़े की तरह बिहेव करती थी। और जब बात मजाक में होती थी वह 3 साल की बच्ची बन जाया करती थी।
वही इनारा की हालत देखकर उसे भी रोना आ रहा था। उसे अपने भाई पर गुस्सा भी आ रहा था कि क्यों वह उसे छोड़कर चला गया। वहां खड़े कुछ गेस्ट उन लोगों पर हंस रहे थे। तभी अचानक से मौसम खराब होने लगा , चारों तरफ ठंडी ठंडी हवाएं चलने लगी। कुछ वक्त पहले वहां धूप थी और अब मौसम अपना रूख़ बदल रहा था शायद कोई आने वाला था और वह इनारा की जिंदगी का रूख बदलने वाला था।
तभी मेंशन के बाहर एक कार आके रुकी। उस कार में से ड्राइवर निकला और उसने जाकर बैक सीट का डोर ओपन किया। तभी पीछे वाले डोर से अपने गॉगल्स को उतारते हुए एक दमदार पर्सनालिटी वाला शख्स बाहर निकला। वह शख्स तेज कदमों के साथ अंदर आने लगा। उस शख्स का aura कुछ ऐसा था कि उसके मेंशन के अंदर कदम रखते ही सभी की नज़रें उस पर चली गई। लेकिन उस शख्स ने मुड़कर भी किसी की तरफ नहीं देखा वह बिना किसी एक्सप्रेशन के चलते जा रहा था। वही उसकी दमदार पर्सनालिटी देख कुछ औरतें अपने आप बात करने लगी।
"अरे यह तो राणा खानदान का छोटा पोता है ना? हां देखने से तो वही लग रहा है आज काफी सालों बाद मैंने इसे देखा है। शायद अपने भाई की शादी को अटेंड करने के लिए आया होगा। लेकिन देखो इसका भाई शादी से भाग गया। वहां खड़ी एक औरत ने मुंह बनाते हुए दूसरी औरत से कहा।
तभी दूसरी औरत बोली," हां तुमने बिलकुल सही कहा। यह वही है , लेकिन चाहे कुछ भी कहो आज खूब मजा आएगा ,जब मैं इन सब की बेज्जती होता हुआ देखूंगी। आज मैं भी तो देखूं की कैसे राणा साहब अपनी इज्जत पूरे समाज में बचाते हैं।
इस पर पहली वाली औरत बोली,"लेकिन यार यह राणा अपनी जवान के पक्के हैं। इनकी इतनी पीढ़ियां आई लेकिन आज तक जिसने भी अपनी जवान दी उसे निभाया है। तो रणवीर राणा भी अपनी जवान जरूर रखेगा यह कुछ ना कुछ तो जरूर करेगा जो कि हमारे लिए देखना दिलचस्प होगा!"
ऐसी बातें सभी लोगों के बीच में हो रही थी।
वहीं दूसरी तरफ,
हवेली के कमरे में,
वह शख्स चलते हुए एक कमरे में गया। तो वहां पर रणवीर राणा के साथ शशांक राणा मौजूद थे। रणवीर राणा टेंशन में कुर्सी पर बैठे हुए किसी को लगातार फोन पर फोन कर रहे थे।
तभी उस शख्स को आए देख रणवीर राणा उठ गए और उसके सामने आकर बोले," विनाश अनय कहीं नहीं मिल रहा है। पता नहीं बिना बताए ये लड़का अचानक से कहां चला गया? और आज यह शादी होना बहुत जरूरी है। यहां आज एक से एक बड़ी हस्ती आई हुई है, अगर आज यह शादी नहीं हुई तो मेरी बहुत बदनामी होगी।
यह सुनकर वह शख्स जिसका नाम विनाश राणा था। 6 फीट 2 इंच हाइट, फेयर कलर, गहरी काली आंखें, जो बिल्कुल शांत थी। उस शख्स की बॉडी कुछ ऐसी थी जिसे देखकर लड़कियां पागल हो जाए, देखने में उसकी पर्सनालिटी बेहद दमदार थी। उस शख्स ने व्हाइट कलर की शर्ट पहनी हुई थी। जिसके ऊपर के तीन बटन खुले हुए थे, और उससे उसका कसा हुआ सीना बाहर झलक रहा था। वह अपने हाथों में ओवरकोट लिए रणवीर राणा के सामने खड़ा था। यह शख्स इस घर का छोटा पोता विनाश राणा था। जो आज कई सालों बाद इंडिया वापस लौटा था। दरअसल विनाश अपनी स्टडी के लिए इंडिया से बाहर गया था।
तभी विनाश ने बिना किसी भाव के कहा,"तो इसमें में क्या करूं?"
यह सुनकर शशांक राणा हल्के गुस्से में बोले,"विनाश तुम यह क्या कह रहे हो तुम तो ऐसे पल्ला झाड़ रहे हो जैसे तुम इस परिवार में एक्जिस्ट ही नहीं करते। भूलो मत तुम इस परिवार के छोटे पोते हो, और अगर आज हमारी बदनामी हुई तो तुम्हारी भी होगी। अनय तुम्हारा भाई था जो आज हमारे किए वादे के मुताबिक उस लड़की से शादी करने वाला था। लेकिन अनय शादी से गायब है , और अब यहां पर रिश्तेदार आ चुके हैं। और सिर्फ रिश्तेदार ही नहीं पॉलीटिशियन, बिजनेसमैन और भी कई जानी-मानी हस्तियां यहां मौजूद है। और अगर आज यह शादी नहीं हुई तो हमारी बहुत बेज्जती होगी।
"यह आपका मैटर है, वादा आपने किया था मैंने नहीं! तो अब खुद देखिए आप। विनाश ने सर्द आवाज में कहा। "
यह सुनकर रणवीर राणा परेशानी भरी आवाज में बोले,"विनाश तुम्हारी बात सही है बेटा, लेकिन हमने बरसों पहले जुवान दी थी और आज जब उसे पूरा करने का वक्त आया , तो अनय यहां से भाग गया। अब बताओ वह लड़की मंड़प पर बैठी हुई है। और अगर आज यह शादी नहीं हुई तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा। हमारी बरसों से बनाई हुई इज्जत आज मिट्टी में मिल जाएगी।
हमने अनय को हर जगह ढूंढ लिया, लेकिन अनय हमें कहीं नहीं मिला। हां यह बात सच है कि अनय यह शादी नहीं करना चाहता था उसने हमसे पहले ही कहा था कि वह यह शादी नहीं करेगा। लेकिन हमारी भी मजबूरी थी हमें अपने किए वादे को पूरा करना था।
यह सुनकर विनाश बोला," तो मैं क्या करूं?
इस पर शशांक राणा ने कहा,"इसमें तुम क्या ही करोगे!
उनकी बात सुनकर रणवीर राणा के दिमाग में अचानक से कुछ आया। तभी वह अचानक से बोले," अब इसमें जो कर सकता है वह सिर्फ विनाश ही कर सकता है। हां सिर्फ विनाश कर सकता है।
तभी वह विनाश के पास आकर बोले,"विनाश बेटा आज तक तुमने मेरी कही बात को कभी नहीं टाला। तो आज तुम्हारा यह दादा तुमसे एक बार फिर कुछ मांग रहा है.! प्लीज हमारी इज्जत को बचा लो और उस लड़की से शादी कर लो।
यह सुनकर विनाश उन्हें बिना किसी भाव के देखने लगा।
वहीं दूसरी तरफ,
मंडप में,
इनारा रोते-रोते थक चुकी थी। वही कैलाश को कैटरिंग वाले ने कुछ काम बता दिया था। कैलाश जाना नहीं चाहता था क्योंकि आज खुद उसकी बेटी की शादी थी। लेकिन वह काम जरूरी था और ज्यादा देर का भी नहीं था लेकिन ट्रैफिक के चलते उसे आने में देर हो गई।
लेकिन अब तक कैलाश वहां पहुंच चुका था। और उसने सब की बातों को सुन लिया था। और उसे जिस बात का डर था वही हुआ, उसे लगा ही था कि आखिर क्यों रणवीर राणा बरसों पहले किये वादे को पूरे करेंगे। आज के लोग तो कुछ घंटों का किया वादा भूल जाते हैं। और यहां तो बरसों पहले किये वादे की बात हो रही थी।
कैलाश की भी आंखें इस वक्त नम थी। लेकिन उसे तो हिम्मत करके अपनी बेटी को सम्हालना था न ।
तभी कैलाश इनारा के पास आकर उसे कंधे से पकड़कर उठाते हुए बोला,"बेटा जो हो गया उसे भूल जाओ। चलो अपने घर वापस चलते हैं। अब यहां अपना तमाशा बनाने से अच्छा सब कुछ भूलकर एक नई शुरुआत करना है।
यह सुनकर इनारा ने कहा,"लेकिन पापा मैंने तो आपसे पहले ही शादी के लिए मना किया था। कि मैं यह शादी नहीं करना चाहती , अभी मैं और पढ़ना चाहती थी , लेकिन आप ही कहते थे कि कर लो यह शादी, तो मैं आपके खातिर कर रही थी लेकिन..."कहते हुए इनारा रुक गई।
"मुझे माफ कर दे बेटा सब मेरी गलती है मुझे लगा था कि तेरा रिश्ता बड़े घर में हो जाएगा। तो सब कुछ ठीक हो जाएगा और तू हमेशा हमेशा के लिए खुश रहेगी। लेकिन मैं भी पागल न जाने क्या-क्या ख्वाब देख बैठा। जाने कैसे मैं अपनी औकात भूल गया।
चल वह सब कुछ छोड़ और चल मेरे साथ घर।
कहकर कैलाश ने इनारा का हाथ पकड़ा और उसे वहां से ले जाने लगा। लेकिन तभी पीछे से रणवीर राणा की सख्त आवाज आई।
"कैलाश तुम्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं है। इनारा की शादी आज ही होगी और वह मेरे पोते से होगी।
यह सुनकर कैलाश पलट कर उनकी तरफ देखने लगा। और उनकी बात सुनकर वहां खड़ा हर एक शख्स हैरान रह गया। क्योंकि उन्हें दूर-दूर तक कहीं भी अनय नहीं दिख रहा था तो किससे शादी की बात कर रहे थे रणवीर राणा??"
तभी कैलाश रणवीर राणा के पीछे देखते हुए बोला,"लेकिन आपका पोता कहां है?
यह सुनकर रणवीर राणा ने कहा,"मैंने तुमसे वादा किया था कि मैं तुम्हारी बेटी की शादी अपने पोते से कराऊंगा! और आज मैं अपना किया हुआ वादा निभाने जा रहा हूं। लेकिन हां यहां एक बात अलग है मेरा बड़ा पोता तुम्हारी बेटी से शादी नहीं करेगा। लेकिन मेरा छोटा पोता करेगा।
यह सुनते ही वहां खड़े सभी हैरान रह गए। और सबसे ज्यादा हैरान कैलाश और इनारा थे।
कैलाश ने हैरान होते हुए कहा,"लेकिन ऐसा क्यों ? आपने तो मुझसे वादा किया था कि अनेय बाबा करेगे मेरी बेटी से शादी। "
"बात यहां शादी की नहीं, मेरे किए हुए वादे की थी । मेरी दी हुई जुबान की थी। और तुम भी जानते हो और यहां खड़ा हर एक शख्स जानता है कि राणा खानदान अपनी दी हुई जुवान को मरकर भी पूरा करता है। तो मैं तुम्हारी बेटी की शादी अपने छोटे पोते से कराऊंगा। क्योंकि मेरा बड़ा पोता किसी अर्जेंट काम के चलते यहां से चला गया है। और शादी की डेट सिर्फ आज की है, और अगर आज ये शादी नहीं हुई तो पिछले 10 साल में ये शादी नहीं हो सकती।
यह सुनकर कैलाश अभी कुछ कहता कि तभी तेज कदमों से चलते हुए विनाश वहां आया और अभी कोई कुछ समझ भी पाता कि तभी विनाश ने इनारा का हाथ कसकर पकड़ा और उसे ले जाकर मंडप में बिठा दिया।
विनाश ने सर्द आवाज में पंडित को देखकर कहा,"तुम्हें यहां बैठने के लिए नही बुलाया गया है!"
यह सुनकर वह पंडित घबरा गया। विनाश की आवाज में उसे एक धमकी महसूस हुई।
पंडित जल्दी से बोला,"हां! हां साहब मेरा तो यही काम है अभी कराता हूं शादी।"
कहकर पंडित ने मंत्र पढ़ना स्टार्ट कर दिया। वही इनारा हैरानी से विनाश की तरफ देखे जा रही थी। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हुआ।
कुछ वक्त पहले उसकी शादी विनाश के बड़े भाई अनय राणा से हो रही थी। और अचानक उसकी शादी विनाश से हो रही है यह सब सोच कर उसका सर फट रहा था।
"मुझे नहीं करनी यह शादी!" कहते हुए इनारा मंडप से उठने लगी। वह अभी उठी ही थी की तभी उसे अपनी कलाई पर किसी की पकड़ महसूस हुई। पकड़ इतनी तेज थी की इनारा की चूड़ियां टूट कर उसकी कलाई में चुभ गई जिससे उसकी एक आह निकल गई।
इनारा ने नम आंखों से अपनी कलाई को पकड़े हुए शख्स को देखा। तो उसकी कलाई विनाश ने पकड़ी हुई थी। और वह गुस्से भरी नजरों से उसे देख रहा था।
तभी विनाश ने इनारा के हाथ पर अपनी पकड़ कसते हुए गुस्से से कहा,"चुपचाप मंडप में बैठी रहो, और मेरे साथ शादी करो। और अगर तुम यह शादी नहीं करना चाह रही, तो अपने बाप की बर्बादी के लिए तैयार हो जाओ।
इनारा ने अपनी आंखों में आंसू लिए विनाश की तरफ देखा और बोली,"आप यह सब क्यों कर रहे हैं ? मैं तो आपको जानती तक नहीं! "
"तो ठीक है जल्दी जान जाओगी। "
उसकी आवाज में एक धमकी थी जिसे सुनकर इनारा को कुछ भी कहने में डर लग रहा था। लेकिन तब भी इनारा ने वहां से उठने की कोशिश की लेकिन विनाश ने उसे पकड़कर वापस बिठा दिया। और कुछ ही वक्त में ऐसे ही करते-करते शादी हो गई।
शादी होते ही विनाश मंडप से उठा और वहां से बिना कुछ कहे मैंशन के अंदर चला गया।
उसका यह रिएक्शन देख वहां खड़ा हर एक शख्स बातें बनाने लगा। और यह देख रणवीर राणा कुछ परेशान से हुए । लेकिन उनके मन में तसल्ली थी कि आज उनकी इज्जत बच गई और आगे का उन्होंने सोच लिया था कि वह कैसे लोगों का मुंह बंद कराएंगे।
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विनाश वहां से हवेली के अंदर जा चुका था। लेकिन इनारा खामोशी से खड़ी सब कुछ देखे जा रही थी। वो एकदम खामोश खड़ी थी , जैसे की उसके शरीर में जान ही ना बची हो।
तभी रणवीर राणा सभी का ध्यान अपनी तरफ करते हुए बोले, “ आप लोग यहां आए उसके लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया, लेकिन अब ये शादी हो चुकी है।
और शादी भी मेरे पोते से हुई है, और आज जो कुछ भी हुआ, वो मै प्रेस कॉन्फ्रेंस मे एक्सप्लेन कर दूंगा।”
ये सुनकर सब ने एक दूसरे की तरफ देखा। उन लोगों को देखकर ही लग रहा था कि उन लोगों का अभी जाने का मन नहीं था।
उन्हें अभी और मसाला चाहिए था, लेकिन अब रणवीर राणा ने उनके मुंह पर ही बोल दिया था, तो उन्हें वहां से जाने पड़ेगा, इसलिए सभी वहां से निकल गए।
तभी रणवीर राणा का ध्यान इनारा की तरफ गया। जो खामोशी से खड़ी जमीन को देख रही थी। वही कैलाश भी कुछ दूर पर खड़ा था।
उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो खुश हो या रो, क्योंकि उनकी बेटी की शादी इतने बड़े खानदान में हो गई थी।
लेकिन वो भी उसकी बिना मर्जी के खिलाफ, और वो भी ऐसे शख्स से जिससे वो शुरू से डरती आई है , और वो भी जबरदस्ती की शादी है ।
क्या ये शादी विनाश ने अपनी मर्जी से की है? या कोई प्रेशर से की है। ये सारी बातें कैलाश के मन में चल रही थी।
तभी रणवीर राणा अपनी सख्त आवाज में बोले, "बहू का गृह प्रवेश कराओ!”
उनकी बात सुनकर अब जाकर इनारा ने अपनी नजर उठाई । नजरे उठते ही उसकी आंखों में जो आंसू थे, वो बहते हुए उसके गालों पर आ गये , और अब जाकर सबका ध्यान इनारा के चेहरे पर गया। इनारा की ऐसी हालत देखकर कैलाश खुद को टूटा हुआ महसूस कर रहे थे।
तभी कैलाश इनारा के पास आया और जमीन पर घुटनों के बल बैठकर, अपने हाथों में उसके हाथों को लेते हुए बोला, “ मुझे माफ कर दे बेटा, मुझसे बड़ी ग़लती हो गई।
तुझे सारे ऐशों आराम देने के चक्कर में मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी, एक ऐसे इंसान के साथ तुझे बांधना चाहा जो कभी तुझसे प्यार करता ही नहीं था।
उस इंसान ने तुझे मंडप में धोखा दिया , और अपनी इज्जत बचाने के लिए इन बड़े लोगों ने तेरी बलि चढ़ा दी। मुझे माफ कर दे बेटा ।”
ऐसा कह कर कैलाश उसके हाथों पर अपना सर रखकर रोने लगा।
ये देखकर इनारा भी घुटनों के बल जमीन पर बैठ गई, और उनके सर को उठाते हुए बोली, “ आपने कोई गलती नहीं कि पापा , और आप ये क्या कर रहे हैं? आपको मुझसे माफी मांगने की जरूरत नहीं है ।
शायद यही मेरी किस्मत थी , और जो हुआ उसे मैंने अपनी किस्मत मांग लिया। बाकि यहां पर मेरी शादी किसी और के साथ हो रही थी । लेकिन हुई तो किसी और के साथ ही ना, और शायद यही मेरी किस्मत थी।”
ये सुनकर कैलाश अभी कुछ कहता कि तभी रणवीर राणा उनके पास आकर बोले, “ कैलाश तुम ऐसे क्यों रो रहे हो? जैसे कि हमने तुम्हारे साथ बहुत गलत कर दिया हो ।
जो वादा हमने तुमसे किया था, उसे हमने निभाया है। भले ही तुम्हारी बेटी को हमने अपने घर की बड़ी बहू नहीं बना पाया।
लेकिन छोटी तो बनाया है, उसे अभी भी वही इज्जत मिलेगी जो उसे पहले मिलने वाली थी। तो किस लिए तुम रो रहे हो?”
रणवीर राणा ने ये बात गुस्से में कही थी, क्योंकि कैलाश की बातों को सुनकर कहीं ना कहीं उन्हें अपनी बेइज्जती महसूस हुई।
तभी कैलाश उठकर उनकी आंखों में आंखें डालते हुए बोला, “ माफ कीजिए राणा साहब आज तक ये नजरे आपके सामने झुकी रही है। लेकिन आज ये नजर उठ रही है , क्या करूं एक बेटी का बाप हूं और जब बात बेटी पर आती है ना तो अच्छे-अच्छे बाप की नजरें उठ जाती है।
ये तो रही उसकी माफी जो मै आज आपसे कहने जा रहा हूं। लेकिन आपने ये कह दिया कि आपने अपना वादा पूरा किया। वादा इसे नहीं कहते राणा साहब जो आपने मेरी बेटी के साथ किया ।
आपने सिर्फ अपनी इज्जत बचाई है, बात अगर यहां आपकी इज्जत की नहीं होती ना तो आप मेरी बेटी को यहां से निकाल देते। बात आपकी इज्जत पर आ चुकी थी ।
इसीलिए आपने अपने छोटे पोते से मेरी बेटी की शादी करवाई , क्या गारंटी है कि आपका छोटा-पोता मेरी बेटी को अपनी बीवी मानेगा ?
उसे एक बीवी होने के सारे हक देगा ! क्या उसे अपना पाएंगे या सिर्फ मेरी बेटी उसकी जबरदस्ती बीवी बनके रह जाएगी?
अगर कल को आपका बड़ा पोता आ गया तो क्या उनके रिश्ते ठीक रहेंग? बताइए राणा साहब?”
ये सुनकर रणवीर राणा कुछ पल के लिए खामोश हो गये । उन्होंने एक नजर इनारा की तरफ देखा, और गहरी सांस लेते हुए बोले, "आज तुमने खुद मेरी ज़बान देखी है।
मैंने बरसों पहले किया हुआ वादा निभाया है, और आगे मैं कोशिश करूंगा कि मैं सब कुछ ठीक कर सकूं। फिलहाल तुम्हारी इतनी औकात तो नहीं है कि तुम हमारे सामने बोल सकूं।
लेकिन अब तुम्हारे हमसे रिश्ते जुड़ गये हैं। इसलिए हम तुम्हारी बात सुन रहे हैं लेकिन ये मत सोचना की रिश्तेदार बनने के बाद तुम हमारी बराबरी कर पाओगे।
कैलाश अपनी औकात में रहना सीख लो, तुम कल भी हमारे नौकर थे और आज भी हमारे नौकर हो । तुम्हारी बेटी जरूर हमारे घर की बहू बन गई । लेकिन तुम्हारी हैसियत हमारी समधि की कभी नहीं होगी।”
ये सुनकर कैलाश की नजरें झुक गई। अब आखिर कहते ही क्या वो ।
तभी वहां एक लंबी कद काठी की औरत चलते हुए आई । उस औरत की उम्र लगभग रणवीर राणा से कुछ दो-तीन साल कम होगी।
तभी वो औरत अपनी सख्त आवाज में बोली, “ बहुत हो गया ये ड्रामा, अब हमें और ड्रामा नहीं चाहिए और कैलाश अब तुम्हारी बेटी हमारे घर की बहू बन चुकी है।
और इस चीज को तुम भी नहीं झुठला सकते हो तो अब अपना फालतू का ड्रामा बंद करो , और अपनी बेटी को विदा करो, हमें आगे की रस्में करनी है।”
ये सुनकर कैलाश जी इनारा की तरफ देखा । उन्हें पता था अब उन्हें इनारा की विदाई करनी पड़ेगी। आखिर उनकी बेटी पराया जो हो चुकी थी ।
तभी कैलाश ने अपना सर हां हिलाते हुए बोला, " जी रानी सा।”
ये औरत रणवीर राणा की बीवी रुक्मणी राणा थी। इस हवेली में रणवीर राणा से ज्यादा रुक्मणी राणा की चलती थी।
वहीं कुछ देर में कैलाश ने इनारा को सब कुछ समझा दिया , और उसे हिम्मत दी एक नए रिश्ते को निभाने की। अब इनारा की विदाई हो चुकी थी।
इनारा अपनी नजरों को नीचे झुका कर हवेली के दरवाजे पर खड़ी हुई थी। आज उसे हवेली काटने को दौड़ रही थी। उसे एक अलग सी बेचैनी हो रही थी।
वो कई बार इस हवेली में आई थी। लेकिन आज सब कुछ बदल चुका था , इस बार वो इस घर के नौकर की बेटी नहीं इस घर की छोटी बहु बनके आई थी।
तभी एक सर्वेंट ने उसके सामने एक कुमकुम से भरी थाल लाकर रखी , और चावल से भरा कलश, उसने कलश को अपने दाएं पैर से गिराया, और उस थाल में पैर को रखकर गृह प्रवेश किया।
तभी रुक्मणी अपनी सख्त आवाज में बोली, " जाओ कुछ देर जाकर आराम कर लो, क्योंकि इसके बाद रस्में शुरू हो जाएगी , और तुमने शादी रस्में कभी देखी नहीं होगी।
क्योंकि तुम्हें छोटे लोगों जो हो। लेकिन राणा खानदान में बहुत सारी रस्में होती है। इसीलिए तुम्हारे पास सिर्फ आज का दिन है । खुद को तैयार कर लो क्योंकि कल से तुमको पूरी तरीके से बदलना होगा।
अब से तुम इनारा व्यास नहीं रही , अब से तुम इनारा विनाश राणा बना चुकी हो। राणा खानदान का एक अलग ही रुतबा है पूरे समाज में। तो तुम्हें भी अब बहू की जिम्मेदारी लेनी होगी।
ये सुनकर वहां खड़ा हर एक शख्स खामोश रहा । उन्हें कोई हैरानी नहीं हुई, लेकिन वही इनारा हैरान थी , क्योंकि आज उसकी शादी हुई और आज ही रुक्मणी जी उसे जिम्मेदारियों की बात कर रही है।
वहां खड़े हर एक शख्स को पता था कि कुछ ऐसा ही होने वाला है। रुक्मणी जी का मिजाज ही कुछ ऐसा था। उनका कहना था जो उन्होंने शुरू से झेला है वो आगे आने वाली बहू भी झेलेगी।
तभी एक औरत आगे आई और रुक्मणी से बोली, “ माजी सा वो आज ही इस घर में आई है , कुछ वक्त लगेगा उसे सब कुछ संभालने में।”
" हमें तो नहीं लगा कुछ वक्त सब कुछ संभालने में। जिस दिन इस हवेली में कदम रखा, उसी दिन से इस हवेली के हो गए , और माना ये आज की लड़की है।
इसीलिए इसे वक्त दे रही हूं , और इतना वक्त इसके लिए काफी होगा, इसे जल्दी ही इस घर के तौर तरीके अपनाने होंगे।”
रुक्मणी ने तेज आवाज में कहा!
ये सुनकर वो औरत भी खामोश हो गई। वो औरत शशांक राणा की बीवी थी और अनेय और विनाश की मां थी। रुक्मणी जी के आगे तो उनकी भी नहीं चलती थी।
तभी रुक्मणी वहां से अपने कमरे की तरफ जाते हुए बोली, “ इसे विनाश के कमरे में पहुंचा दो।”
रुक्मणी की बात सुनकर मीनाक्षी राणा ने अपना सर हां हिला दिया।
तभी मीनाक्षी राणा चलकर इनारा के पास आई , और उसके सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए बोली, “ बेटा तुम फ़िक्र मत करो, धीमे-धीमे सब कुछ सीख जाओगी। फिलहाल तुम जाकर आराम कर लो बहुत थक गई होगी, इतना सब कुछ हो गया है।”
ये सुनकर इनारा ने नम आंखों से उनकी तरफ देखा। इनारा की आंखों में देख मीनाक्षी जी उसका दर्द समझ गई। लेकिन इस वक्त उनका कुछ कहना ठीक नहीं था।
तभी मीनाक्षी जी एक सर्वेंट से बोली, “ इसे विनाश के कमरे के बाहर छोड़ दो, लेकिन याद रहे कमरे के अंदर नहीं जाना है तुम्हें।”
ये सुनकर सर्वेंट ने हां में सिर हिलाया। लेकिन मीनाक्षी की बात सुनकर इनारा हैरानी से उनकी तरफ देखने लगी । मतलब उनके कहने का मतलब क्या था? वो सर्वेंट रूम के अंदर क्यों नहीं जा सकता?
तो क्या इनारा अकेली उस कमरे में जाएगी? उसे तो पहले से ही विनाश से इतना डर लग रहा था। कैसे रहेगी वो उस कमरे में अकेली? ये सारे ख्याल इनारा को और डरा रहे थे!
मीनाक्षी जी इतना कहते हुए वहां से चली गई। वो सर्वेंट इनारा को लेकर विनाश के फ्लोर पर आई, और नजर झुका कर बोली, " बहुरानी आप अंदर जाइए अब मैं जाती हूं!”
" नहीं! प्लीज रुक चाहिए आप क्यों जा रही हैं यहां से?”
इनारा ने उस सर्वेंट को रोकते हुए कहा , तो ये सुनकर वो सर्वेंट बोली, “ मैं यहां पर नहीं रुक सकती हूं । मैं आपके साथ यहां तक आई वहीं बड़ी बात है, क्योंकि छोटे साहब को ये बिल्कुल नहीं पसंद की कोई उनके फ्लोर पर भी आए।”
ये सुनकर इनारा डरते हुए बोली, “ तो मैं भी आपके साथ चलती हूं। जब उन्हें किसी का यहां आना पसंद नहीं है, तो मेरा कैसे आएगा?”
" ऐसा नहीं है आप उनकी बीवी हैं, उन्होंने आपसे शादी की है वो आपके मना नहीं करेंगे , आप प्लीज मुझसे ज्यादा सवाल मत कीजिए, और अंदर जाइए।”
इतना कह कर वो सर्वेंट जल्दी से वहां से चली गई।
वही इनारा की अभी हिम्मत नहीं ही पड़ रही थी, कि वो अंदर जाए। और सर्वेंट की बातो से वो और डर गई थी।
लेकिन उसकी मजबूरी थी उसे अंदर तो जाना ही था। तभी उसने चारों तरफ देखा, वो जब से यहां आई थी तब से उसे ऐसा लग रहा था, कि उसे कोई घूर रहा है।
लेकिन उसे वहां कोई नहीं देखा, हिम्मत करके इनारा ने रूम के गेट को नॉक करने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया। लेकिन गेट अपने आप ही ओपन हो गया।
इनारा धीमे कदमों के साथ अंदर गई , तो अंदर चारों तरफ अंधेरा ही था, उसे कुछ भी साफ नहीं दिख रहा था।
लेकिन हां रूम के अंदर जाता ही उसे ये एहसास हो चुका था, कि कमरा उसकी सोच से भी ज्यादा बड़ा है।
तभी उस कमरे में रेड लाइट ऑन हो गई । लाइट ऑन होती ही इनारा गेट से बिल्कुल सट कर खड़ी हो गई। अब इनारा को कमरा साफ दिख रहा था ।
कमरे के बीचों-बीच एक किंग साइज का बेड पड़ा हुआ था। बेड के ऊपर वाली बॉल पर एक शख्स की बड़ी सी फोटो लगी हुई थी। जिसमें केवल उस शख्स की बैक दिख रही थी।
और उसकी पीठ पर बना हुआ एक छोटी सी बच्ची का चेहरा, इस शख्स का चेहरा इनारा कभी नहीं भूल सकती थी, क्योंकि यही शख्स तो कुछ देर पहले उसका पति बना था।
लेकिन इनारा को उस बच्चे का चेहरा समझ नहीं आ रहा था , क्योंकि वो बच्ची मुश्किल से 3 साल की होगी। बेड के सामने एक लग्जरियस सोफा था।
सोफे के सामने कॉफी टेबल, बाकी उस रूम की हर एक चीज एक्सपेंसिव थी। रूम में बेहद शांति थी और वही शांति इनारा को डरा रही थी।
“ यहां कोई है क्या?”
इनारा ने डरते हुए पूछा!
पर उसके इस सवाल का उसे कोई जवाब नहीं मिला!
लेकिन तभी उसे बालकनी से कुछ आवाज सुनाई दी, आवाज सुनकर इनारा अपना लहंगा संभालते हुए बालकनी की तरफ गई। बालकनी के बारह का नजारा देखकर वह शौक रह गई । बालकनी बहुत बड़ी थी।
बालकनी के एक साइड स्विमिंग पूल था , और स्विमिंग पूल का नजारा कुछ ऐसा था, कि इस वक्त वहां दिन में रात हो रखी थी। पूल में कोई शख्स स्विमिंग कर रहा था। लाइट की वजह से उस शख्स की बॉडी बेहद अट्रैक्टिव लग रही थी।
उस शख्स को देखकर इनारा घबराह सी गई वह जल्दी से पलट कर दूसरी तरफ खड़ी हो गई। लेकिन तभी पूल से उसे कुछ आवाज सुनाई दी।
छप्पाक..........
आवाज सुनकर इनारा पीछे पलटी!
तभी एक शख्स ने उसे पकड़कर अपनी तरफ खींचा।
छपाक ......"
की आवाज के साथ इनारा उस शख्स की बाहों में कैद होकर पानी में जा गिरी।
गिरते ही उसके होंठ उस शख्स के सख्त होठों से टकरायें।
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कौन है ये शख्स??? क्या विनाश अपना लेगा इनारा को अपनी बीवी के रूप में??? यह सच में इनारा बन के रह जाएगी उसकी जबरदस्ती की बीवी???
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